हस्त नक्षत्र फल लाभ हानि विशेषताएँ। Hasta Nakshatra

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हस्त नक्षत्र – Hasta Nakshatra

हस्त नक्षत्र

हस्त नक्षत्र का राशि चक्र में 160 डिग्री 00 अंश से 173 डिग्री 20 अंश के फैले हुए क्षेत्रफल वाला होता है। हस्त नक्षत्र को अरब मंजिल में ” अल आवा ” [ भौकने वाला कुत्ता ], ग्रीक में ” कोरवी ” और चीन सियु में ” चीन ” के नाम से जाना जाता है। हस्त नक्षत्र का मूल अर्थ है हाथ। हस्त नक्षत्र के देवता सविता [ सूर्य ], स्वामी ग्रह चंद्रमा और राशि कन्या 10 डिग्री 00 अंश से 23 डिग्री 20 अंश तक होती है। हस्त नक्षत्र को आकाशीय पिंडों के आधार पर 13 वा लघु संज्ञक नक्षत्र माना गया है। हस्त नक्षत्र के पाँच तारे होते हैं। 

इस नक्षत्र के पाँच तारे आकाश में खुले हुए हाथ से आशीर्वाद देते हुए दिखाई देता है। हस्त नक्षत्र के देवता सविता जातकों का भरण-पोषण करने वाले, उत्पादन करने वाले और परिणाम देने वाले होते है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सविता का अर्थ उत्पन्न करना होता है। यह कल्याणकारी सत्त्वगुण संपन्न, लक्षमी दायक पुरुष नक्षत्र होता है। हस्त नक्षत्र की जाति वैश्य, योनि महिष, योनि वैर, अश्व, गण देव और नाड़ी आदि होती है। हस्त नक्षत्र को दक्षिण दिशा का स्वामित्व प्राप्त है। 



हस्त नक्षत्र की कथा पौराणिक कहानी । Hasta Nakshatra mythological story

हस्त नक्षत्र के देवता सूर्य देव हैं। पौराणिक कहानी के अनुसार सूर्य देव माता अदिति और ऋषि कश्यप के पुत्र हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देवता सूर्य सात घोड़ों के रथ पर अरुण देव के साथ सवार होकर चारो तरफ ध्यान पूर्वक देखते हुए घूमते हैं। देवता सूर्य और उनके साथी अरुण जिन साथ घड़ों के रथ पर सवार होते हैं वे साथ घोड़े कुछ इस प्रकार है- गायत्री, संवृहती, उष्णक, जगती, विस्तुभ, अनुष्टुभ, पंक्ति। 

सूर्य देव की पत्नी छाया और पुत्र यम, यमुना और शनि हैं। सूर्यवंश का प्रतिष्ठाता विवस्वान मनु भी सूर्य देव के पुत्र थे। ज्योतिष आचार्यों और पौराणिक कथा के अनुसार वर्षा करने का स्वामित्व प्राप्त इन्द्र देव ने स्वर्ग को प्रथवि से अलग करने का प्रयास किया था तब प्रथ्वी की नाभि से सूर्य देव उत्पन्न हुए और उन्होने तीनों लोकों को अलग-अलग विभाजित कर दिया। सूर्य ने प्रथ्वी, आकाश और स्वर्ग लोक को अपना-अपना स्थान दे दिया।


हस्त नक्षत्र की विशेषताएँ । Hasta Nakshatra Importance

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध ग्रह हस्त नक्षत्र में ही उच्च स्थान प्राप्त करता है। यह नक्षत्र उत्पादन, परिणाम देने वाला, मुक्ति देने वाला, प्रतिपादन करने की शक्ति वाला, विचार करने की शक्ति वाला, मसविदा और शिल्पकारी का घोतक होता है। इस नक्षत्र में जातक शैतान, कठिन परिश्रम करने वाला, वैश्यावृत्ति का नौकर, खुद को नियंत्रित रखने वाला और विनोदपूर्ण होता है। 


हस्त नक्षत्र के उपाय । Hasta Nakshatra Remedy

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य को सविता इसलिए कहा गया है क्योंकि सूर्य की जो फले किरण निकलती है उसे सविता कहा गया है और सविता हस्त नक्षत्र के देवता है। इसलिए जिस जातक की कुंडली में जन्म नक्षत्र हस्त है और वह पाप अथवा अशुभ प्रभाव में है तो जातक को सूर्य देव की पूजा पाठ करनी चाहिए इससे इस नक्षत्र के अशुभ प्रभाव कम होने लगेंगे और शुभ परिणाम प्राप्त होंगे। जातक को हस्त नक्षत्र के दोषों और अशुभता को दूर करने के लिए कौन से और किसके उपाjय करने चाहिए ये नीचे दीय गए बिन्दुओं में बताया गया है जो कुछ इस प्रकार हैं- 

  • सुबह उठकर प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें और सूर्य देव के 12 नामों का जाप करें।  
  • सूर्य देव के 108 नामों का जाप प्रतिदिन करने से इस नक्षत्र की अशुभता को दूर करके बल प्रदान किया जा सकता है। 
  • सुबह प्रतिदिन सूर्य देव को जल अर्पित करें और उनसे अपने जीवन में सुख-समृद्धि बनाए रखने की कामना करें।
  • यदि जातक सूर्य देव को ताबे के वर्तन में चावल, फूल और कुछ मीठा डालकर अर्पित करे तो इसके अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। 
  • सूर्य मंत्र “ ऊँ घृणि सूर्याय नम: ” का जाप करना चाहिए। 
  • सूर्य देव को प्रणाम करने के बाद और इस मंत्र के जाप करने के बाद उसी जगह पर चारो ओर घूम कर परिक्रमा कर लेनी चाहिए। 
  • यदि जातक अध्यात्म के क्षेत्र में सफलता प्राप्त नही कर पारा है तो जातक को भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करनी चाहिए। 
  • विष्णु भगवान की पूजा करने से जीवन में मधुरता और हस्त नक्षत्र के अशुभ प्रभाव जल्दी कम होते हैं। 
  • हरे, सफ़ेद,नीले और आसमानी रंग का उपयोग अथवा दान करने से इसके अशुभ प्रभाव कम होते हैं। 

मान्यताओं के अनुसार हस्त नक्षत्र के देवता सविता की मूर्ति सोने की धातु से बनवाकर लाल चंदन, धूप, घी, दिपक, लाल फूल, केसर, खुशबू, दूध की वर्फी आदि से प्रतिदिन सच्चे मन से पूजा करनी चाहिए इससे हस्त नक्षत्र को बल प्राप्त होता है और अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

कई लोगों का मानना है की यदि हस्त नक्षत्र के अशुभ प्रभाव किसी भी उपाय को करने से कम नही हो रहे हैं तो जातक को सूर्य के वैदिक मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए इससे हस्त नक्षत्र की अशुभता दूर होगी और बल प्राप्त होगा जिससे जातक अपने जीवन में बेहतर करने की ओर बढ़ पाएगा और सफलता को प्राप्त करेगा। 

हस्त नक्षत्र का वैदिक मंत्र 

ऊँ बिभ्राड्वृहत्पिबतु सौम्यं मध्वायुर्दधद्यज्ञपत्तावविहुतम् ।

वातजूतो यो अभिरक्षतित्मना प्रजा: पुपोषपुरूधा विराजति ऊँ सवित्रे नम: ।।


हस्त नक्षत्र में जन्मे जातक । People born in Hasta Nakshatra

विघ्नविनाशक श्री गणेश 

श्री राम जी के प्रिय भक्त हनुमान जी

स्वामी विवेकानंद 

अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिटन 


हस्त नक्षत्र फलादेश । हस्त नक्षत्र का फल । Hasta Nakshatra Prediction

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आशीर्वाद देते हुए हाथ का पंजा इस नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। हस्त नक्षत्र को सभी 27 नक्षत्रों में सबसे अच्छा और बेहतर नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र में जन्मे जातक हाथ देकर लोगों का भविष्य बताने वाले, दस्तकार, शिल्पकार, मुक्ति देने वाला होता है।

जातक तीव्र बुद्धि वाला, लोगों का मनोरंजन कराने वाला, ईश्वर से जुडने वाले रास्ते पर चलने वाला, उन्नतिशील और समाज में सत्य का साथ देने वाला होता है। यदि इनके संपर्क में कोई वस्तु आती है तो ये किसी भी कीमत पर खुद से दूर नही जाने देते हैं। ये अपने लक्ष्य पर चलने वाले, नियमों का पालन करने वाला और अपने प्रेमी के साथ पूरे जीवन रहने के सपने देखने वाला होता है।


हस्त नक्षत्र के पुरुष जातक | Impact of Hasta Nakshatra on Male

हस्त नक्षत्र के पुरुष जातक लंबे कद काठी वाले, मजबूत शरीर वाले, शरीर के मुक़ाबले जातक के हाथ छोटे होते हैं और ये अच्छे बुरे शब्दों का प्रयोग करने वाले होते हैं। सीधे हाथ में चोट अथवा घाव का निशान होता है। जातक शांत स्वभाव वाला, लोगों को अपनी ओर मोहित करने वाला, लोगों की मदद करने वाला, जातक धोखा धड़ी न करने वाला होता है।

यदि इनके संपर्क में कोई एक बार आ जाए तो इन्हे छोड़ पाना और इनसे दूर जाना बहुत मुश्किल हो जाता है। ये मेहनत करके आगे बढ़ना पसंद करते हैं और फालतू चीजों में अपना वक्त जाया नही करते हैं। जातक अपने जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करता है। जातक मानसिक रूप से भटका हुआ होता है क्योंकि यह एक समय मे उचाइयाँ छूने का सपना देखता है तो एक समय में नीचे गिर जाता है।

जातक को अगर कोई परेशानी देता है तो वह उससे अपना बदला लेने का सोचता है और कभी कभी यह सारा कुछ भगवान के भरोषे छोड़ देता है। जातक सभी क्षेत्रों का ज्ञान रखने वाला, नियमों का पालन करने वाला, व्यापार के मामले में यह उच्च पद पर होता है। जातक अपने कार्यक्षेत्र में अपने कार्यों को दूसरों को समझा बुझा कर करने की इच्छा रखता है।

जातक अपने जीवन मे 27 से 30 वर्ष की उम्र तक परेशानियों का सामना करता है लेकिन उसके बाद वह अच्छा जीवन यापन करता है। जातक 30 वर्ष से 45 वर्ष की उम्र तक पूर्ण रूप से सफल हो पाता है। वह अपने जीवन में सब कुछ प्राप्त कर लेता है। जातक 60 से 65 वर्ष की उम्र तक जीता है लेकिन इतनी उम्र में वह अच्छा खासा धन प्राप्त कर लेता है।

जातक का वैवाहिक जीवन में सुखी और शिष्ट होता है। जातक की पत्नी अच्छी और बुद्धिमान होती है। परंतु जातक की पत्नी युवावस्था में समलैंगिक यौनचारी हो सकती है।


हस्त नक्षत्र के स्त्री जातक | Impact of Hasta Nakshatra on Female

हस्त नक्षत्र के स्त्री जातक पुरुष जातक के समान गुणदोष वाले होते हैं। परंतु इस नक्षत्र में जन्म लेने वाली स्त्रियाँ अत्यंत सुंदर और आकर्षित करने वाली होती हैं। हस्त नक्षत्र की स्त्रियाँ और पुरुष समान गुणदोष के होते हैं जबकि अन्य सभी नक्षत्रों के स्त्री जातक और पुरुष जातक अलग-अलग गुणदोष वाले होते हैं।

हस्त नक्षत्र की स्त्रियों के कंधे चौड़े और कोमल शरीर होता है। स्त्री जातक अपने से बड़ों का सम्मान करने वाली, दूसरों के सामने अधिक बात न करने वाली, शर्मीले स्वभाव वाली, दूसरों के कार्यों को गुलामी समझ कर न करने वाली, अपने विचारों को सबके सामने प्रकट करने वाली और खरी बात कहने के कारण इनसे घृणा करने वाले अधिक होते है।

इस नक्षत्र की स्त्री जातक अपने पति के ऊपर निर्भर होती हैं, क्योंकि इनका मानना यह होता है की जब पति की तनख्वा अच्छी है तो मैं नौकरी क्यूँ करू। वहीं अगर इनके पति की आर्थिक स्थिति कमजोर हो तो स्त्री जातक अपने पति की मदद करने के लिए कृषि क्षेत्र में कार्य करने लगती है।

ये अपने पति से अधिक प्रेम करने वाली, वैवाहिक जीवन में सुख का अनुभव करने वाली और संतान सुख प्राप्त करने वाली होती हैं। इन्हे संतान के बड़े होने पर उनसे लाभ प्राप्त होता है।


प्राचीन ऋषिमुनियों व आचार्यों के अनुसार हस्त नक्षत्र | Hasta Nakshatra

आचार्यों के मतानुसार इस नक्षत्र के जातक साहस से परिपूर्ण जिसके कारण ये किसी भी कार्य को करने में पिच एना हटने वाले होते हैं। ये सदैव बड़ा सोचते हैं और बड़ा करने की क्षमता भी रखते हैं। 

इस नक्षत्र के जातक धनवान बनने की इच्छा रखने वाले होते हैं। जिसके कारण वे अपनी मेहनत, लगन और दिमाग से अच्छा खासा धन भी कमाते हैं। इन्हे सिर्फ धन से मतलब होता है जिसके कारण ये गलत रास्ते अपना कर भी धन कमाते हैं। ये कार्यों को अच्छी तरह करते हैं लेकिन ये सदैव किसी के नीचे कार्य करते हैं। ये पूर्ण साहस वाले होते हैं जिसके कारण ये किसी भी कार्य को अंजाम देने से पीछे नही हटते हैं। —– नारद  

इस नक्षत्र के पुरुष जातक स्त्रियों की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। ये अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए और अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए घर से बाहर रहते हैं। ये किसी भी कार्य को करके धन अर्जित करने की इच्छा रखने वाले होते हैं। ये अपनी बुद्धि और ताकत के प्रयोग से अच्छा धन अर्जित करते हैं। —– ढुण्ढिराज 

इस नक्षत्र के जातक गोल और चौड़ी हथेली वाले, मोती-मोती जांघों वाले, अधिक गुस्सा करने वाले, ये बचपन से कठिन परिश्रम करने वाले होते है। ये मेहनत और बुरे समय को देखते हुए आगे बढ़कर सफलता प्राप्त करने के कारण थोड़े कठोर होते है। — पराशर

हस्त नक्षत्र के जातक दया न करने वाले, कार्यों को करने के लिए उत्साहित रहने वाले, नशा करने के शौकीन, घमण्डी होते हैं। —– वरामिहिर

चन्द्र

हस्त नक्षत्र में चन्द्र हो तो जातक क्रियात्मक रूप से कार्य करने वाला, शैतान, पूर्ण, बेशर्म, दया न करने वाला, दूसरों के माल को हड़पने वाला, नशा करने वाला होता है। 

सूर्य 

हस्त नक्षत्र में सूर्य हो तो जातक विश्वास करने योग्य, दूसरों के द्वारा प्रशंसित, दूसरों पर भरोषा करने वाला, अपने भरोषे को कायम रखने वाला, समाज में सम्मानित, समाज में अच्छे स्तर पर अपना कदम जमाने वाला, सूर्य के समान तेज वाला होता है।

लग्न 

हस्त नक्षत्र लग्न हो तो जातक साहस वाला, राज्य स्तर पर कार्यरत, उघोग से जुड़ा व्यवसाय करने वाला, पत्रकार, नई-नई खोज करके स्टोरी लिखने वाला, राजा के समान नायक, समुद्री छायाकार और खासनामा होता है।


हस्त नक्षत्र का चरण फल | Prediction of Hasta Nakshatra Charan pada 

प्रित्येक नक्षत्र में चार चरण होते हैं जिसमें एक चरण 3 अंश 20 कला का होता है। नवमांश की तरह होता है जिसका मतलब यह है की इससे नौवे भाग का फलीभूत मिलता है सभी चरणों में तीन ग्रहों का प्रभाव होता है जो इस प्रकार है – देवता सविता [ सूर्य ] स्वामी ग्रह चंद्रमा और राशि कन्या। 


हस्त नक्षत्र का प्रथम चरण | Prediction of Hasta Nakshatra First Charan pad

हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल है। इस चरण में चन्द्र, बुध और मंगल का प्रभाव होता है। राशि कन्या 160 डिग्री 00 अंश से 163 डिग्री 20 अंश तक होती है। नवमांश मेष ! यह चरण शक्ति, ऊर्जा, अनैतिक व्यवहार, गणित, डॉक्टर और सेना का कारक होता है। इस चरण में जातक गोरे रंग वाला, कमजोर शरीर वाला, दो सिर वाला, मस्तक में गड्ढा होने के कारण दूर से पहचाना जाने वाला होता है। 

इस नक्षत्र के जातक तीव्र बुद्धि वाला, सच का साथ देने वाला, महान, वीरता पूर्ण कार्य करने वाला, शास्त्रों का ज्ञाता, हमला या प्रहार करने वाला और शस्त्र विध्या में लगाव रखने वाला होता है। इस नक्षत्र का पुरुष जातक शान स्वभाव वाला, सत्य के साथ रहने वाला, धर्म को मानने वाला, लेखाकार या पैसे से जुड़ा लेन देन करने वाला होता है। यह चरण सेहत और खुशहाल जीवन के लिए अशुभ माना जाता है।


हस्त नक्षत्र का द्वितीय चरण | Prediction of Hasta Nakshatra Second Charan pad

हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र है। इस चरण में चन्द्र, बुध और शुक्र का प्रभाव होता है। राशि कन्या 163 डिग्री 20 अंश से 166 डिग्री 40 अंश तक होती है। नवमांश वृषभ ! यह चरण व्यवहार, संसार, गुण-दोष, भौतिक संपदा, कला और चरित्र का कारक होता है। द्वितीय चरण का जातक मोटे होठ वाला, लंबे शरीर वाला, लंबी-लंबी भुजाओं वाला, मोटे और घने बालों वाला, चौड़ी छाती वाला, मोटी-मोटी जांघों वाला, बुद्धिमान परंतु दूसरों के भरोशे अपना जीवन यापन करने वाला होता है। 

इस चरण में जातक ललित कला प्रेमी लेकिन परिश्रमी होता है। जातक के जीवन में कई समस्याएँ आती है परंतु वह अपनी मेहनत और लगन से उन समस्याओं से बाहर निकलता हुआ अपना जीवन साधारण तरीके से जी पाने में सफल रहता है। जातक नशा करने वाला होता है। नशे के कारण जातक की सेहत ठीक नही रहती है। इस चरण में पुरुष जातक प्रथम चरण के समान गुणदोष वाले होते हैं। 


हस्त नक्षत्र का तृतीय चरण | Prediction of Hasta Nakshatra Third Charan pad

हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध है। इस चरण में चन्द्र, बुध और बुध का प्रभाव होता है। राशि कन्या 166 डिग्री 40 अंश से 170 डिग्री 00 अंश तक होती है। नवमांश मिथुन ! यह बिजनेस – व्यापार, चालाकी, ज्ञान, महानता, विशिष्ट जानकारी का कारक होता है। इस चरण में जातक तसल्ली करने वाला, गोरे रंग वाला, अच्छी वाणी बोलने वाला, लेखन का कार्य करने वाला और इधर-उधर दूसरे शहरों अथवा विदेशों में घूमने वाला होता है। 

इस चरण का जातक अच्छा बिजनेसमेन, सफल क्रय-विक्रय करने वाला, उच्च कोटी का शिक्षक, विद्वान, कार्यों को आगे बढ़ाने में चतुराई करने वाला, पढ़ाई-लिखाई से जुड़े कार्य करने वाला और उनसे जुड़ी बातों की खोज करने वाला होता है। जातक 25 से 28 वर्ष की उम्र तक प्रेम पांश और नशे की लत वाला होगा जिसके कारण जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और समाज में निंदा का पात्र होता है। इस चरण में पुरुष जातक अधिक गुस्सा करने वाला, लेखक या न्याय दिलाने वाला, सोने-चांदी आदि से बने गहनों अथवा आभूषणों का शौकीन, हवाई अथवा रेल यात्रा करने का शौकीन होता है। लेकिन जातक समुद्री यात्राओं से दूर भागता है।


हस्त नक्षत्र का चतुर्थ चरण | Prediction of Hasta Nakshatra Fourth Charan pad

हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी चन्द्र है। इस चरण में चन्द्र, बुध और चन्द्र का प्रभाव होता है। राशि कन्या 170 डिग्री 00 अंश से 173 डिग्री 20 अंश तक होती है। नवमांश कर्क ! यह चरण परिवार, समाज में सम्मान अथवा भले बुरे का ज्ञान, भौतिक सुरक्षा, दूसरे देशों से आई वस्तुओं से डर का कारक होता है। इस चरण में यदि गुरु अच्छी स्थिति में हो तो जातक संततिवान होता है। जातक छोटे मुंह वाला, नाजुक हाथ अथवा हथेली, ऊंचे और चौड़े कंधे वाला, अच्छी पाचन शक्ति वाला, लंबे-लंबे हाथ-पैरों वाला और पानी से डरने वाला होता है। 

चतुर्थ चरण में जातक मानसिक परेशानी वाला, साधारण दिमाग वाला, कम पढ़ा-लिखा, पारिवारिक मतभेदों अथवा मामलों में रुचि रखने वाला होता है। इस चरण के स्त्री अथवा पुरुष जातक धूम्रपान, शराब आदि के आसानी से लती हो जाते हैं। जातक पानी से दूर रहता है और यदि पानी में जाय तो डर-डर के जाएगा। यह बहते हुए पानी के करीब जाने में बहुत अधिक डरने वाला होता है। जातक लेखन का कार्य करने वाला,  रसायन अथवा जलीय पढ़ार्थों का विक्रेता होता है।


हस्त नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष आचार्यों ने सूत्र रूप में बताया है लेकिन यह फलित में बहुत ज्यादा बदलाव हुआ है। 

यावनाचार्य

                हस्त नक्षत्र का पहले चरण में बहादुर, दूसरे चरण में बीमार, तीसरे चरण में धन-दौलत से परिपूर्ण, चौथे चरण में समाज में सम्मानित होता है। 

मानसागराचार्य    

                   हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में जातक धन-दौलत से परिपूर्ण, द्वितीय चरण में भोग प्राप्त करने वाला, तृतीय चरण में पुत्र संतति वाला और चतुर्थ चरण में राजा के समान होता है।


हस्त नक्षत्र का चरण ग्रह फल | Hasta Nakshatra Prediction based on planets   

भारतीय ज्योतिष आचार्यों के मतानुसार सूर्य, बुध और शुक्र इन ग्रहों की पूरी तरह अवलोकन या चरण दृष्टि होती है, क्योंकि सूर्य ग्रह से बुध ग्रह 28 अंश और शुक्र 48 अंश से दूर नही जा सकता है। 


सूर्य – Sun [ हस्त नक्षत्र में सूर्य ] 

  • चन्द्र की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक दूसरे शहर अथवा देश में रहने वाला, परिवार के लोगों से दुखी, धन कमाने में समस्याओं का सामना करने वाला होता है। 
  • मंगल की दृष्टि सूर्य पर हो तो पुरुष जातक आलसी और दुश्मनों से चोटिल होता है। 
  •  गुरु की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक गुप्त शिक्षा ग्रहण करने का शौकीन, पत्नी और संतान को त्यागने वाला या फिर पत्नी और संतान से मुक्त होता है।
  • शनि की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक एक से अधिक स्त्रियों के साथ संभोग करने वाला होता है। 

हस्त नक्षत्र में सूर्य | Sun in Hasta Nakshatra – Prediction

सूर्य का हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक समूह का ठेकेदार, अपने नीचे कार्य करने वाले लोगों को सलाह देने वाला, अनैतिक कार्यों से धन अर्जित करने वाला, दूसरों पर भरोषा न करने वाला परंतु ऐसी इच्छा रखने वाला की उसके ऊपर सब भरोषा करे और अपने कार्य उसे करने का अवसर दें। जातक शराब, बीड़ी, सिगरेट आदि का शौकीन होता है। जातक तेजवाल और सबका केंद्र बिन्दु होता है। 

सूर्य का हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक अच्छा खासा धन कमाने वाला, चोरी आदि करने वाला, हाथ की सफाई से चलते फिरते पैसे कमाने वाला होता है। यदि इस चरण में शुक्र का मिलन हो तो जातक पत्नी के कारण नाड़ी तंत्र की समस्या से ग्रसित होता है। 

सूर्य का हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक खुशहाल जीवन जीने वाला, बल, बुद्धि और विध्या से धन अर्जित करने वाला, शराब आदि से जुड़े नशे का शौकीन, वाट रोग से ग्रसित होता है। द्वितीय चरण के समान यदि शुक्र का मिलन इस चरण में हो तो स्त्री जातक की शादी 34 से 35 वर्ष की उम्र से पहले नही होती है। 

सूर्य का हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक समाज में विश्वास करने योग्य, अपने कार्यों को दूसरों के भरोशे छोड़ने वाला, जातक अपने कार्य दूसरों पर छोड़ देता है इसके कारण वह ऐसी इच्छा रखता है की दूसरे भी अपने कार्य इसके भरोशे छोड़ दें। समाज में मान्यता प्राप्त करने वाला होता है।


चन्द्र – Moon [ हस्त नक्षत्र में चन्द्र ]

  • सूर्य की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक अच्छा व्यवहार करने वाला, उच्च कोटी का विद्वान परंतु धन हीन होगा। 
  • मंगल की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक अच्छी शिक्षा ग्रहण करने वाला विद्वान, शिक्षित और धन-दौलत से परिपूर्ण होगा।
  • बुध की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक सरकार की तरफ से मदद प्रात करने वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा ज्ञान प्राप्त करने वाला और समाज में शिक्षा के बलबूते अपनी छवि बनाने वाला होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक चिकत्सा के क्षेत्र से जुड़े बिजनेस करने वाला होगा।
  • शनि की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक समस्याओं के कारण अपने जीवन में दुखी रहेगा। 

हस्त नक्षत्र में चन्द्र | Moon in Hasta Nakshatra – Prediction

चन्द्र का हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक रोगों से ग्रसित, निर्लज्ज, दया न करने वाला, स्त्रियों को मोहित करने वाला, प्रेम में सफलता प्राप्त न कर पाने वाले, नशा करने वाला, हाथ की सफाई से धन अर्जित करने वाला होता है। अगर रेवती नक्षत्र लग्न में हो तो स्त्री जातक वस्त्रों और आभूषणों से पूर्ण, माता लक्ष्मी का स्वरूप मानी जाएगी। स्त्री जातक का जन्म जिस घर में होगा उस घर में धन-दौलत के भंडार भरे रहेंगे और जब विवाह हो जाएगा तब वह दोनों घरों में उतना ही धन बना रहेगा जितना उसके जन्मे घर में था।

चन्द्र का हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक रूपवान, स्त्रियों के प्रति अस्थिर, सुंदर स्त्रियों को अपनी ओर मोहित करने और उनके साथ संबंध बनाने की इच्छा रखने वाला, भाग्यवान, दूसरों के नीचे कार्य करने वाला होता है। यदि रेवती नक्षत्र लग्न में हो और सूर्य, मंगल, शनि  और राहु का मिलन हो तो स्त्री जातक तलाक़शुदा या फिर विधवा और पुरुष जातक नशे की लत वाला होगा।

चन्द्र का हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक चाणक्य नीति को अपना कर धन कमाने वाला, निर्लज्ज, अपनी बात को साफ-साफ कहने वाला होता है जिसके कारण इनसे अधिक लोग घृणा करने लगते हैं। यदि मंगल का मिलन इस चरण से हो तो जातक जल सेना अथवा मौसम विभाग का अधिकारी होता है।

चन्द्र का हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक सबसे अलग और गठीले शरीर वाला, उघोगपति, सुख-सुविधाओं से सम्पन्न, बड़ा बनने की इच्छा रखने वाला, लेखक अथवा प्रकाशक होता है।


मंगल – Mars [ हस्त नक्षत्र में मंगल ]

  • सूर्य की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक साहस वाला, धनवान और यात्रा प्रेमी होता है। 
  • चन्द्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक अच्छी और चरित्रवान स्त्रियों की संगत करने वाला होगा। 
  • बुध की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक गणित विषय का ज्ञाता और जरूरत पड़ने पर सफेद झूठ बोलने वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक दूसरे देश में रहने वाला, 35 से 40 वर्ष की उम्र के बाद हालातों में सकारात्मक बदलाव होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों से दोस्ती करना पसंद करेगा। 
  • शनि की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक झूठ बोलने वाला और लापरवाह होगा।  

हस्त नक्षत्र में मंगल | Mars in Hasta Nakshatra – Prediction

मंगल का हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक साहस वाला, मेहनत और लगन से धन कमाने का शौकीन, बड़ा बनने की इच्छा रखने वाला, किसी से न डरने वाला, दूसरों को दुखी करने वाला, मजबूत, ताकतबर और गठीले शरीर वाला, शासक के कार्यों में लग्न होता है। 

मंगल का हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक स्त्री जातक को अपनी ओर मोहित करने वाला, एक से अधिक तरीकों से आनंद लेने वाला, प्यार पाने में असमर्थ, शराब आदि का लती, नौसेना या फिर नौपरिवार में कार्यरत होता है। इस चरण में स्त्री जातक चिकित्सक हो सकती है।

मंगल का हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक रूपवान, सुंदर, एक से अधिक श्रोतों से धन अर्जित करने वाला, सफल व्यापार करने वाला, जीवन में सर्व सुख प्राप्त करने की इच्छा रखने वाला होता है। 

मंगल का हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक सुंदर, जीवन में सर्व सुख भोगने वाला, समाज में सम्मानित, सुंदर और रूपवान पत्नी वाला, परिवार में खुश रहने वाला, परिजनों के द्वारा सम्मान प्राप्त करने वाला, महमानों का आदर करने वाला और शान स्वभाव वाला होता है। 


बुध – Mercury [ हस्त नक्षत्र में बुध ] 

  • चन्द्र की दृष्टि बुध पर हो तो जातक मधुर भाषा बोलने वाला परंतु अधिक बोलने वाला, लोगों को कार्यों के प्रति उत्सुक करने वाला और सरकारी नौकर होगा। 
  • मंगल की दृष्टि बुध पर हो तो जातक एक से अधिक कलाओं का ज्ञाता और मनमोहक स्वभाव वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि बुध पर हो तो जातक साहस वाला, किसी पार्टी का मंत्री अथवा मंत्री के नीचे कार्य करने वाला होगा। 
  • शनि की दृष्टि बुध पर हो तो जातक मेहनत और कठिन परिश्रम करने के कारण जीवन में सफलता ग्रहण करने वाला होगा। 

हस्त नक्षत्र में बुध | Mercury in Hasta Nakshatra – Prediction

बुध का हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक अवैध कार्यों को अपनाकर धन कमाने वाला, किसी के संकक्ष कार्य करने वाला, दूसरों को आगे बढ़ता देख उन्हे नीचा दिखाने का विचार करने वाला, मध्यम वर्ग का धनवान होता है।

बुध का हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक कम मेहनत में अधिक सफलता ग्रहण करने वाला, यार-दोस्त, मेहमान और गुरुओं का सम्मान करने वाला, पेय पदार्थों का शौकीन, स्त्रियॉं के साथ शारीरिक संबंध बनाने का शौकीन और अपने परिवार अथवा घर से दूर रहने वाला होता है।

बुध का हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक रूपवान, खुशहाल जीवन यापन करने वाला, बुद्धि का प्रयोग करके अच्छा धन कमाने वाला, भाग्यवान, खुश रहने वाला, दयालु, सफल व्यापारी, धार्मिक कार्यों में दान-पुण्य करने वाला, वित्तीय अधिकारी या लेखाकार होता है। इस चरण में यदि बुध, सूर्य का मिलन हो तो जातक उच्चा कोटी का ज्योतिषी होगा। 

बुध का हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक अच्छी सेहत वाला, सुंदर रन-रूप वाला, मनमोहक, खुद के बलबूते पैसे कमाने वाला, दुश्मनों को हराने वाला परंतु खाने-पीने में आलसी होने के कारण आंत्रशोध से ग्रसित होगा है। 


गुरु – Jupiter [ हस्त नक्षत्र में गुरु ]

  • सूर्य की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक सर्वगुण सम्पन्न और अपने परिजनों द्वारा सम्मान प्राप्त करने वाला होगा। 
  • चन्द्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक अच्छे चरित्र वाला, समाज में सम्मानित, विख्यात होगा। 
  • मंगल की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक कानूनी किसी विभाग में कार्यरत होगा। 
  • बुध की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक का पारिवारिक जीवन में सुखमय होगा क्योंकि यह मधुर वाणी बोलने वाला होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक धनहीन और स्त्रियों के कारण जीवन में परेशानियों का सामना करने वाला होगा। 
  • शनि की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक लाभ प्राप्त करने वाला, राजनीति में किसी पद का नेता होगा। 

हस्त नक्षत्र में गुरु | Jupiter in Hasta Nakshatra – Prediction 

गुरु का हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक स्त्री प्रेम में लिप्त, नशा करने वाला, शराब आदि का शौकीन, स्त्रियों के प्रति चंचल स्वभाव वाला, एक से अधिक रोगों से ग्रसित होता है। जातक अवैध कार्यों से अपना जीवन यापन करने वाला होता है।

गुरु का हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल  

इस चरण में जातक तेज वाला, महान, कठिन परिश्रम करके धन कमाने वाला, दयावान, जरूरतमंदों की मदद करने वाला, सबका भला करने वाला होता है।

गुरु का हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक रूपवान, दयालु, सभी क्षेत्रों में सफलता ग्रहण करने की इच्छा रखने वाला होता है। जातक इच्छा अनुसार मेहनत करने के कारण सफलता प्राप्त करता है। 

गुरु का हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक सुंदर, भाग्यवान, अच्छे भाग्य के चलते सभी जगह लाभ प्राप्त करने वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण, स्त्री प्रेम में रत, स्त्रियों के साथ संभोग करने का शौकीन, पुत्र संतति वाला और सबका भला करने वाला होता है। 


शुक्र – Venus [ हस्त नक्षत्र में शुक्र ]

  • चन्द्र की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक सावले अथवा काले रंग रूप वाला, मोटे और घने बालों वाला, खाने-पीने और अच्छे वस्त्र पहनने का शौकीन होगा। 
  • मंगल की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाला, सेवा करने वाला लेकिन पारिवारिक जीवन में दुखमय होगा। 
  • शनि की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक समाज में लोगों के द्वारा परेशान किया जाने वाला होगा। 

हस्त नक्षत्र में शुक्र | Venus in Hasta Nakshatra – Prediction

शुक्र का हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक दूसरों की सफलता पर जलने वाला, गुस्सैल, लोगों से घृणा करने वाला, स्त्री प्रेम में डूबा हुआ, स्त्रियों को अपनी बातों में बहलाकर अपनी ओर मोहित करने वाला, ब्लड संबंधी रोग से पीड़ित, जीवन में कई तरह की बाधाओं का सामना करने वाला, अधिक मीठा खाने के कारण मधुमेय रोग से ग्रसित होता है।

शुक्र का हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक मनमोहक, धर्म को मानने वाला, ईश्वर में विश्वास रखने वाला, एक से अधिक स्त्रियों से संबंध बनाने की इच्छा रखने वाला, पारिवारिक बंधन में बंधा हुआ, धनवान, जीवन में सर्व सुख भोगने वाला, भाग्यवान होता है। यदि इस चरण का शनि से मिलन हो या दृष्टि हो तो जातक शादी के बाद तलाक़शुदा अथवा पहली पत्नी की मृत्यु के कारण दूसरा विवाह करेगा। 

शुक्र का हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक उच्चा कोटी का विद्वान, रूपवान, सबका भला सोचने वाला जिसके कारण सबको अपने साथ लेकर चलने वाला, किसी भी कार्य को करने के लिए तैयारर रहने वाला, पैसों के लिए कुछ भी करने को तैयार रहने वाला, पैसे कमाने के चक्कर में घर परिवार से दूर रहने वाला, सच बोलने वाला और मीठा खाने का शौकीन होता है।

शुक्र का हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक सभी प्रकार की संपत्ति अर्जित करने की इच्छा रखने वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण, मांस-मदिरा का सेवन करने वाला, अधिक संभोग करने के कारण यौन रोगों से पीड़ित, कार्यों को पूरा करने की क्षमता रखने वाला होता है। जातक की पत्नी सुंदर सुशील, अच्छी ग्रहणी और पुत्र संतति वाली होती है।


शनि – Saturn [ हस्त नक्षत्र में शनि ]

  • सूर्य की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सुख से वंचित और बुरी संगति करने वाला होगा।
  • चन्द्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक अच्छे व्यक्तित्व वाला, सरकार की तरफ से लाभ प्राप्त करने वाला होगा।
  • मंगल की दृष्टि शनि पर हो तो जातक विद्वान, पौराणिक कहानी अथवा पौराणिक ज्ञान ग्रहण करने का शौकीन होगा।  
  • बुध की दृष्टि शनि पर हो तो जातक बुद्धिमान और अस्त्र शास्त्रों का ज्ञाता होगा। 
  • गुरु की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सरकार के भरोषे रहने वाला होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सुनार या आभूषणों का विक्रेता होगा। 

हस्त नक्षत्र में शनि | Saturn in Hasta Nakshatra – Prediction

शनि का हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक अवैध कार्यों से धन अर्जित करने वाला, स्त्रियों के बारे में बुरा सोचने वाला, चंचल स्वभाव वाला, दूसरों की सफलता पर स्वंम बुरा महसूस करने वाला, जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करने वाला, पनडुब्बी या रेल से जुड़े साधनों का निर्माता या विक्रेता होता है। 

शनि का हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक बुद्धिमान, परिवार का भरण-पोषण करने के लिए विदेश या दूसरे शहर में रहने वाला, स्त्रियों से दूरी बनाकर रखने वाला, कठिन परिश्रम करके धन कमाने वाला होता है। 

शनि का हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक अनेक तरीकों से धन कमाने वाला, लेखन का कार्य करने वाला या फिर प्रकाशक होता है। जातक चमड़े से जुड़ा व्यापार करने वाला, कृमि रोग से पीड़ित होता है।

शनि का हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक धोखेबाज़ी से धन अर्जित करने वाला, लोगों को धोखा देने वाला, दूसरों का धन हड़पने वाला चोर, लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे पैसे लेने वाला, नशा आदि करने वाला होता है। जातक गणित विषय का ज्ञाता होता है लेकिन उसका वह दुर्पयोग करता है।


हस्त नक्षत्र में राहु | Rahu in Hasta Nakshatra – Prediction

राहु का हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक तकनीकी विज्ञान के क्षेत्र में पैर पसारने वाला, मेहनत के बाबजूद वह सही समय पर सफलता प्राप्त नही कर पाएगा। यदि शनि से राहु युत हो तो जातक 50 से 55 वर्ष की उम्र तक सफल व्यापारी बन सकता है। 

राहु का हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक यातायात से जुड़े व्यापार करने वाला या फिर सरकारी किसी विभाग में ले देकर पद नियुक्त होगा। घुस से अच्छा खासा धन प्राप्त करेगा। 

राहु का हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक चमड़े से जुड़ा व्यापार करने वाला होगा। यदि लग्न शतभीषा नक्षत्र में हो तो स्त्री जातक अधिक संभोग करने वाली या फिर मैथुन क्रिया करने वाली होगी और पुरुष जातक यौन संबंध अधिक बनाने के कारण परिवार की समाज में बदनामी कराने वाला होगा। 

राहु का हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक अहंकारी, दूसरों का बुरा करने वाला, झूठ बोलने वाला, चोरी करने वाला होता है। ऐसे जातक गलत और नीच कार्य करने वाले होते हैं जिसके कारण ये रोगों से पीड़ित रहते हैं।


हस्त नक्षत्र में केतु | Ketu in Hasta Nakshatra – Prediction

केतु का हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक क्लर्क, लेखक, कम्यूटर ऑपरेटर या टाइपिस्ट होता है। भोजन की अधिकता के कारण पीड़ित होगा। अगर शुक्र की युति हो तो जातक धनहीन, अज्ञानी और किसी के समक्ष कार्य करने वाला होगा।

केतु का हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक कम दिमाग वाला, चीजों को जल्दी भूलने वाला होता है। पेट से जुड़े रोगों से पीड़ित होता है। 

केतु का हस्त नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाला, सरकारी किसी संस्था में कार्यरत, जातक शुरुआत में नीचे कार्य करने वाला परंतु कुछ समय के बाद वह अच्छे स्तर पर पहुच जाएगा। यदि मंगल की युति हो तो जातक उच्च पद पर होगा। 

केतु का हस्त नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

 इस चरण में जातक अच्छे स्तर का लेखक, सरकारी किसी विभाग में लेखा अधिकारी होगा। यदि गुरु की युति हो तो जातक बेहद शुभ माना जाता है।