रुद्राक्ष फल लाभ हानि उपाय विधि विशेषताएँ | 1 से 14 मुखी की जानकारी

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रुद्राक्ष की पहचान

रुद्राक्ष

Rudraksha -रुद्राक्ष वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक मूल्यवान रत्न के समान है। जिसे पहनकर जातक अपने जीवन में होने वाली परेशानियों को कम कर सकता है। रुद्राक्ष को भगवान शिव का रूप माना गया है। जिसके सकारात्मक प्रभावों से जातक अपने नकारात्मक प्रभावों को कम करके अच्छा जीवन जी सकता है। इस दुनियाँ में रुद्राक्ष कई प्रकार के पाए जाते हैं जिन्हे मुखी नाम से पहचाना जाता है। जैसे एक मुखी से लेकर 27 मुखी तक बताया गया है। पर एक मुखी से 14 चौदह मुखी तक ही ज़्यादातर प्रयोग में आता है।  

आज कल जातक को अपने जीवन में सबसे ज्यादा परेशानी तब आती है जब वह गलत और नकली धारण कर लेता है क्योंकि आज के समय में बाजार में बिकने वाले ज़्यादातर नकली और और अगर असली भी है तो वो पहना हुआ ( refurbished ) यानि दूसरे व्यक्तियों के द्वारा पहने हुए होते हैं जिसे साफ करके दुकानदार या ऑनलाइन sites वाले सस्ते दामो में बेच देते हैं।

ऐसे सिर्फ नकारात्मक प्रभाव ही दिखाते है। जिससे जातक के जीवन में समस्याएँ और ज्यादा बढ़ जाती हैं। इसकी पहचान कर पाना मुश्किल हो गया है क्योंकि बाजार में असली की तरह नकली भी बिक रहे हैं। इसी प्रकार जब इसके मुखी की बात आती है तो पैसे कमाने के चक्कर में लोग इस पर कई धारियाँ जैसे 14 या इक्कीस धारियाँ बना देते हैं जिससे जातक को लगे यह 14 या 21 मुखी है और वह आच्छे दामों में इसे खरीद ले।

यहीं अगर गौरी शंकर की बात की जाए तो लोग दो रुद्राक्षों को आपस में जोड़कर गौरीशंकर का रूप दे देते हैं जिससे वह महंगा बिकता है। कई बार होता है की जातक दिखावे के लिए इसकी की माला या त्रिशूल की आकृति में बने को धारण कर लेता है। जिसे धारान करने के बाद जातका को मुसीबतों का सामना करना पड़ता है क्योकि ऐसी आकृति का होना असंभव है। 

हमे DsK Astrology में कई सवाल रोज़ आते है कि जो जातक बाजार से खरीदे हुए को धारण करने के बाद पूछता है।  

सवाल – आचार्य जी मैंने इसे धारण किया है परंतु वह कोई लाभ नही दे रहा है परेशानियों के अलावा। मुझे इसको पहनने से कोई अच्छा बदलाव नहीं देखने को मिला। ऐसा क्यू हो रहा है ?

इसका कारण हम आपको बताते हैं रुद्राक्ष को जानने के लिए आपको कोई ऐसा ज्योतिषी चाहिए जो ज्योतिष के साथ साथ आयुर्वेद का भी ज्ञाता हो। क्योकि आयुर्वेद के बिना इसका उपाय अधूरा है और जातक कभी भी असली रिज़ल्ट नहीं ले सकता। यह आपके चक्र और नेगेटिव औरा (ऊर्जा ) को संचालित करता है और इसके बाद ही आपके दुख तकलीफ कम होने शुरू होते है। 

इसलिए अनुरोध है कि कभी भी खुद से इसे न पहने और न ही सस्ते के चक्कर में ऑनलाइन से कभी खरीदें। 

विशेष नोट – असली ज्योतिष और आयुर्वेद के ज्ञाता या हुमसे खरीदें । 


असली रुद्राक्ष की परख    

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हम आपको असली रुद्राक्ष की परख करना बताएँगे। जो नीचे दिय गए बिन्दुओं में बताए गए हैं। 

  • इस सबसे पहले उबलते हुए पानी में कुछ देर के लिए रखें यदि इसका रंग निकलता है तो वह नकली होगा। और अगर वैसा ही रहता है तो वह असली होगा। 
  • रुद्राक्ष को किसी नोकदार वस्तु से खुदोएँ यदि इसमें से रेशा निकले तो समझों असली है। 
  • असली रुद्राक्ष की सबसे सरल पहचान है की यह कभी एक समान पठार ( ऊपरी सतह ) वाले नही होते हैं लेकिन नकली रुद्राक्षों में ऐसा होता है। 
  • यदि इसे पानी में डाला जाए और यह दुबे तो समझो यह असली है और अगर न दुबे तो समझो नकली है। पर आज कल नकली रुद्राक्ष क अंदर स्टील की बॉल दाल दी जाती है जिसकी वजह से वो डूब जाता है और आपको लगता है कि यह असली है।
  • रुद्राक्ष को दो नाखूनों के बीच रहें और देखें इधर उधर खिसकता है या नही अगर खिसकता है तो असली होगा। 
  • रुद्राक्ष को तेज धूप में रखने पर यदि उसमें कोई दरार या टूटे न तो समझों असली है। 

नोट- इसे खरीदने से पहले उसे अच्छी तरह देखें की वह पूर्णतया गोल तो नही है या फिर वह कहीं से टूटा तो नही है उसमें किसी प्रकार का कीड़ा तो नही लगा है, कभी-कभी ऐसा होता है की इसमें छेद करते समय वह चटक जाता है जिससे वह खंडित हो जाता है इसलिए यह सब बहुत ध्यान से देखें खरीदते समय, ज्योतिषियों के अनुसार इसकी पहचान करना बहुत कठिन है इसलिए जब भी खरीदे तो यह जरूर पता करलें की वह फस्ट हैंड ( First Hand ) है या नही? 


रुद्राक्ष कितने प्रकार के होते हैं 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये एक मुखी से लेकर 14 मुखी तक होते हैं। हर मुखी आपने आप में आलौकिक होता है। लेकिन 2 रुद्राक्ष कुछ ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाते हैं जो है गणेश और गौरी शंकर। यह मुखी अगर आपकी कुंडली के हिसाब से बन जाते हैं तो आपके लिए विशेष अच्छा होता है ।

जब भी किसी रुद्राक्ष को धारण करे तो वह अपने किसी अनुभवी ज्योतिष जिन्हे ज्योतिष ज्ञान के साथ-साथ आयुर्वेद का भी ज्ञान हो क्योंकि इसका मुखी निकाल पाना सभी ज्योतिषियों के बस की बात नही है। इसलिए ज्योतिष + आयुर्वेद का ज्ञान रखने वाले आचार्य से ही संपर्क करें अन्यथा आपको गलत मुखी की सलाह मिल सकती है। जो आपके लिए हानिकारक साबित होगा। 

एक मुखी रुद्राक्षदो मुखी रुद्राक्ष    तीन मुखी रुद्राक्षचार मुखी रुद्राक्ष
पाँच मुखी रुद्राक्षछः मुखी रुद्राक्षसात मुखी रुद्राक्षआठ मुखी रुद्राक्ष
नौ मुखी रुद्राक्षदस मुखी रुद्राक्षग्यारह मुखी रुद्राक्षबारह मुखी रुद्राक्ष
तेरह मुखी रुद्राक्षचौदह मुखी रुद्राक्षगणेश रुद्राक्ष   गौरी शंकर रुद्राक्ष

मुखी के अनुसार रुद्राक्ष के फायदे

इस लेख में आपको एक मुखी से लेकर 14 मुखी के सामान्य लाभ, ग्रह और देवता के बारे में बताया गया है, जिसकी मदद से आपको सभी के देवता, लाभ और ग्रह के बारे में आसानी से पता चलेगा। 

एक 1 मुखी रुद्राक्ष के फायदे | 1 Mukhi Rudraksh benefits   

एक मुखी को भगवान शिव का रूप माना गया है। एक मुखी का ग्रह सूर्य है। जो नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करता है, जातक को धन की प्राप्ति खुद ही कराता है। इससे जातक को भगवान शिव के साथ-साथ सूर्य देव की भी मदद मिलती है।

एक मुखी रुद्राक्ष का मंत्र 

ऊं ह्रीं नम:


दो 2 मुखी रुद्राक्ष के फायदे | 2 Mukhi Rudraksh benefits 

दो मुखी को हर गौरी ( जिसका अर्थ सृष्टि के निर्माण के लिए, शिव ने अपनी शक्ति को स्वयं से अलग किया ) का स्वरूप माना गया है। दो मुखी का ग्रह चंद्रमा है। इसके पहनने से जातक के जीवन में सभी कष्टों का नाश होता है। इसके प्रभाव से जातक के जीवन में शांति आती है। जातक को वश में लाने की शक्ति प्राप्त होती है। इसके प्रभाव से स्त्री रोग, नेत्र रोग, किडनी रोग दूर होता है।

दो मुखी रुद्राक्ष का मंत्र 

ऊं नम:


तीन 3 मुखी रुद्राक्ष के फायदे | 3 Mukhi Rudraksh benefits

तीन मुखी को ब्रह्मा का स्वरूप माना गया है। इस के देवता मंगल हैं। तीन मुखी को पहनने से घर में वास्तुदोष खत्म होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है, बुद्धि में वृद्धि होती है। छूने से फैलने वाला रोग, स्त्री रोग से छुटकारा मिलता है।

तीन मुखी रुद्राक्ष का मंत्र

ऊं क्‍लीं नम:


चार 4 मुखी रुद्राक्ष के फायदे | 4 Mukhi Rudraksh benefits  

चार मुखी के देवता ब्रह्मा और ग्रह बुध माना गया है। इसे पहनने से मुग्ध शक्ति में बढ़ोत्तरी होती है। नाक, कान, गले, कोढ़ जैसे रोगों से छुटकारा मिलता है।

चार मुखी रुद्राक्ष का मंत्र 

ऊं ह्रीं नम:


पाँच 5 मुखी रुद्राक्ष के फायदे | 5 Mukhi Rudraksh benefits 

पाँच मुखी के देवता रुद्र और गृह गुरु है। इसे पहनने से जातक को प्रीतिष्ठा, यश, ऐशोआराम में बढ़ोत्तरी होती है। जातक को किडनी, शुगर, चर्बी बढ़ना और पीलिया जैसे रोगों से मुक्ति मिलती है।

पाँच मुखी रुद्राक्ष का मंत्र

ऊं ह्रीं नम:


छः 6 मुखी रुद्राक्ष के फायदे | 6 Mukhi Rudraksh benefits 

छह मुखी के देवता कार्तिकेय और गणेश को माना गया है। इसका ग्रह शुक है। जातक को कोढ़, पथरी, किडनी जैसे रोगों से मुक्ति मिलती है।

छह मुखी रुद्राक्ष का मंत्र 

ऊं ह्रीं हूं नम:


सात 7 मुखी रुद्राक्ष के फायदे | 7 Mukhi Rudraksh benefits

सात मुखी के देवता अनंग और सप्त ऋषि को माना गया है। इसका ग्रह शनि है। जातक को कमजोरी, लकवा, मानसिक तनाव, कैंसर और श्वसन रोग से छुटकारा पाने के लिए करना चाहिए।

सात मुखी रुद्राक्ष का मंत्र 

ऊं हूं नम:


आठ 8 मुखी रुद्राक्ष के फायदे | 8 Mukhi Rudraksh benefits

आठ मुखी के देवता गणेश कार्तिकेय हैं क्योंकि इसमें मातृकाओं की आठ संख्याओं का वास होता है। इसका ग्रह राहु है। साँप के डसने का डर, खुजली, गुप्त रोग जैसे रोगों से छुटकारा मिल सकता है।

आठ मुखी रुद्राक्ष का मंत्र 

ऊं हूं नम:


नौ 9 मुखी रुद्राक्ष के फायदे | 9 Mukhi Rudraksh benefits

नौ मुखी के देवता नवदुर्गा और भैरव को माना गया हैं। इसका ग्रह केतु है। जातक को लीवर, बुखार, आँखों में कमी, कान का रोग, संतान, दुख, छूने से फैलने वाले रोगों से मुक्ति मिलती है। 

नौ मुखी रुद्राक्ष का मंत्र  

ऊं ह्रीं हूं नम:


दस 10 मुखी रुद्राक्ष के फायदे | 10 Mukhi Rudraksh benefits

दस मुखी के देवता विष्णु भगवान की दस दिक्पाल तथा दस महाविधाओं को माना गया है। जातक को इसके प्रभाव से खाँसी, हृदय और फेफड़ों से जुड़े रोगों से मुक्ति मिलती है।

दस मुखी रुद्राक्ष का मंत्र 

ऊं ह्रीं नम:


ग्यारह 11 मुखी रुद्राक्ष के फायदे | 11 Mukhi Rudraksha benefits  

ग्यारह मुखी के ग्यारह रुद्र को देवता माना गया है। इस को धारण करने से जातक की कुंडली में नवग्रह खुश होते हैं। इससे स्त्री रोग, दर्द, वीर्य संबंधी समस्या से छुटकारा मिलता है।

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष का मंत्र 

ऊं ह्रीं हूं नम:


बारह 12 मुखी रुद्राक्ष के फायदे | 12 Mukhi Rudraksha benefits 

बारह मुखी के देवता और ग्रह सूर्य को माना गया है। इसके पहनने से जातक एश्वर्यवान और तेज वाला बनता है। इसके प्रभाव से बदन दर्द, सिर दर्द, आँखों की समस्या, हृदय रोग, मूत्र रोग आदि से छुटकारा मिलता है।

बारह मुखी रुद्राक्ष का मंत्र 

ऊं रों शों नम: ऊं नम:


तेरह 13 मुखी रुद्राक्ष के फायदे | 13 Mukhi Rudraksha benefits

तेरह मुखी के देवता कामदेव को माना गया है तथा इसका ग्रह नवग्रहों को माना गया है। इसके धारण करने से जातक को धन-समृद्धि आदि में बढ़ोत्तरी मिलती है। जातक को नपुंसकता, गर्भपात, यकृत और किडनी जैसे रोगों से मुक्ति मिलती है।

तेरह मुखी रुद्राक्ष का मंत्र 

ऊं ह्रीं नम:


चौदह 14 मुखी रुद्राक्ष के फायदे | 14 Mukhi Rudraksha benefits

चौदह मुखी के देवता श्रीकण्ठ और हनुमान जी को माना गया है। इसे धारण करने से जादू-टोना, भूत-आत्मा आदि से रक्षा करता है। इसके प्रभाव से जातक को डर, कैंसर, तनाव आदि से छुटकारा मिलता है।

चौदह मुखी रुद्राक्ष का मंत्र

ऊं नम:


गणेश रुद्राक्ष के फायदे | Ganesha Rudraksha benefits

गणेश रुद्राक्ष को बुद्धि, विवेक और एकाग्रता में बढ़ोत्तरी करने का कारक माना गया है।  जब जातक इस को धारण करता है तो इसके सकारात्मक प्रभावों से जातक अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। 

गणेश रुद्राक्ष का मंत्र

ॐ श्री गणेशाय नमः


गौरी शंकर रुद्राक्ष के फायदे | Gauri Shankar Rudraksha benefits

गौरी शंकर को मानसिक सुख और पारिवारिक सुख का कारक माना जाता है। इसके प्रभाव से पारिवारिक कलह दूर होता है। स्त्री जातक को गर्भ से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं। ऐसे जातक जिन्हे शादी में रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है उनके लिए यह सबसे ज्यादा लाभकारी साबित होता है। 

गौरी शंकर रुद्राक्ष का मंत्र 

ॐ गौरी शंकराय नमः 


रुद्राक्ष की उपज [ उत्पत्ति ] 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कहा जाता है की भगवान शिव जब लंबे समय की तपस्या करने के लिए पर्वत पर गए तो उस समय उनके सामने कुछ ऐसे कारण उत्पन्न हुए जिसकी बजह से जब उन्होने अपनी आंखे खोली तो उनकी आँखों से आसू निकालने लगे। कहा जाता है की जिस जगह पर भगवान शिव के आंसू गिरे उसी जगह पर इसके पेड़ की उपज होई। जो आज के समय में हमारे जीवन में आने वाले संकटों को कम करने के लिये इसकी मदद ली जाती है यही कारण है यह भगवान शिव का रूप कहा जाता है।  


रुद्राक्ष के फायदे जीवन के भिन्न हिस्सों में

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जीवन के विभिन्न  क्षेत्रों में इसके क्या-क्या फायदे होते हैं। जब जातक इसे धारण करता है तब उसे इससे क्या-क्या लाभ मिल सकते हैं। यह नीचे बताया गया है। 

करियर  
  • आपके बेहतर करियर के लिए कोन सा व्यापार ठीक है?
  • करियर के क्षेत्र में यदि आप काफी समय से मेहनत कर रहे हैं और सफलता नही मिल रही? 
  • आपको अपने ही कार्यों में नुकसान हो रहा है? 
  • आप अपनी कंपनी में लोगों से काम लेते हैं तो उसके परिणाम गलत आते हैं?  
  • अगर आप अपने व्यापार को बढ़ाना चाहते हैं और रुकावटें पैदा हो रही है? 
  • आप अपने करियर को बेहतर बनाने के लिए विदेश जाते-जाते रह जाते हैं?
  • यदि आप विदेश में व्यापार करते हैं और सफलता नही मिल रही? 
  • आप अपने करियर के प्रति न सोचते हुए गलत रास्तों में रहते हैं? 
  • आप कार्य करते हैं लेकिन उसके परिणाम चिंतापूर्ण आते हैं?

आर्थिक जीवन 
  • आप अपने आर्थिक जीवन को लेकर चिंता में रहते हैं?
  • आपको आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ रहा है?
  • आप मेहनत करते हैं पैसे कमाने के लिए लेकिन कोई लाभ नही मिलता है?
  • आप समय से कार्य करते हैं उसके बाद भी व्यापार में आर्थिक समस्या रहती है?
  • बिजनेस में धन कमाने के लिए आप धन खर्च करते हैं लेकिन कोई आर्थिक लाभ नही होता? 
  • पैसों को लेकर आपसी मतभेद होते रहते हैं?
  • बीमारियों के कारण आर्थिक समस्याएँ तनाव दे रही है?
  • परिवार में आर्थिक समस्या के कारण कलह मचा रहता है?
  • आप पैसों को लेकर तनाव महसूस करते हैं जिसके कारण सेहत में गड़बड़ी रहती है?

वैवाहिक जीवन 
  • वैवाहिक जीवन में आपसी तनाव रहता है?
  • विवाह होने में कई तरह की रुकावटें आ रही हैं?
  • वैवाहिक जीवन में किसी अंजान व्यक्ति के कारण मतभेद होना?
  • आप अपने जीवनसाथी के कारण मानसिक तनाव का शिकार होते हैं? 
  • वैवाहिक जीवन में सुख नही मिल रहा है?
  • आपका जीवनसाथी आपको सम्मान नही देता है?
  • आपको अपनी शादी टूटने का डर रहता है?
  • विवाह के तुरंत बाद तलाक की स्थिति बनती है?
  • विवाह होने के बाद संतान सुख की प्राप्ति नही हो रही है? 

प्रेम जीवन
  • आपको अपने साथी के कारण शारीरिक समस्या होती है?
  • आप अपने प्रेम जीवन को मजबूत बनाना चाहते हैं लेकिन आपका साथी कमजोर कर रहा है?
  • प्रेम जीवन में तनाव पैदा हो रहा है?
  • आपका साथी गलतफहमियों की वजह से लड़ता रहता है?
  • आप अपने साथी के साथ संबंध बनाने का प्रयास करते हैं लेकिन ऐसा नही होता?
  • आपके प्रेम जीवन में किसी तीसरे की वजह से दरार आ रही है?
  • प्रेम जीवन में प्रेम की जगह लड़ाई-झगड़े ज्यादा हो रहे हैं?
  • आपका प्रेमी आपको छोडने की बात करता है?
  • आप अपने प्रेमी से प्रेम विवाह करने की बात करते हैं तो वह ब्रेकअप करने की बात करता है?

शिक्षा 
  • शिक्षा के क्षेत्र में कठिन परिश्रम करने में रुकावटें पैदा हो रही हैं?
  • शिक्षा के दौरान किसी कार्य को करते हैं तो वह विफल हो जाता है?
  • आप शिक्षा के क्षेत्र में जल्दबाज़ी के कारण असफलता की ओर जा रहे हैं?
  • आप अपने मित्रों की संगत में आकार शिक्षा से दूर भागते हैं?
  • माता-पिता की बात न मानकर गलत संगत में पड़ रहे हैं?
  • पढ़ाई में मन नही लग रहा है?
  • आपको प्रतियोगी परीक्षाओं में परिणाम पढ़ाई के अनुसार नही मिलते हैं? 
  • जिस प्रकार से आप मेहनत करते हैं उस हिसाब से आपको परिणाम नही मिलते हैं?
  • आप कार्यों के साथ-साथ पढ़ाई पर फोकस करते हैं तो एक चीज में नुकसान होता है?

स्वास्थ्य 
  • आप बीमारी के कारण समस्याओं में रहते हैं?
  • आपको पुराने रोगों से छुटकारा नही मिल रहा है?
  • आपको मानसिक तनाव के कारण डिप्रेशन का शिकार होना पड़ता है?
  • आप बाहर का खाना खाते हैं तो पेट में दर्द जैसी समस्या आती है?
  • आपकी सेहत में उतार-चढ़ाव रहता है?
  • खराब सेहत के कारण कमजोरी ज्यादा रहती है?
  • किसी गलती के कारण खतरनाक रोग से जूझना पड़ रहा है?
  • आप नशे को छोड़ना चाहते हैं लेकिन छोड़ नही पाते?
  • डॉक्टर से दवाई लेने के बाद भी बीमारी ठीक नही हो रही है?

बिजनेस 
  • बिजनेस के क्षेत्र में हानि हो रही है?
  • बिजनेस में साझेदार के साथ बात नही बनती है?
  • आप कुछ अच्छा करना चाहते हैं लेकिन बुरा हो जाता है?
  • बिजनेस को बढ़ाने के लिए आप मेहनत करते हैं लेकिन सफलता नही मिलती है?
  • आप पूरा-पूरा दिन बाहर रहते हैं लेकिन कार्यस्थल पर आते समय निराश रहना पड़ता है?
  • बिजनेस में कम पैसे लगाकर ज्यादा कमाने के विचार करते हैं लेकिन होता नही है?
  • आप गाँव में रहकर बिजनेस करना चाहते हैं?
  • इंडिया लेवल तक आप अपने बिजनेस को बढ़ाना चाहते हैं लेकिन सफलता नही मिल रही है?
  • कौन से बिजनेस में अच्छी कमाई होगी?

संतान 
  • आप विवाह के बाद लंबे समय से संतान प्राप्ति के लिए परेशान हैं?
  • संतान प्राति के लिए आप पूजा पाठ करते हैं लेकिन संतान प्राप्त नही होती है?
  • आप पुत्र प्राप्ति इच्छा रखते हैं लेकिन पुत्री की प्राप्ति होती है?
  • संतान के लिए आप दूर-दूर यात्राओं पर जाते हैं उसके बाद भी निराश रहना पड़ता है?
  • आपकी शादी होने के बाद संतान मिलती है परंतु किसी समस्या के चलते उसकी मृत्यु हो जाती है?
  • आप बच्चो के सुख से वंचित हैं?
  • आप संतान सुख प्राप्त करने के लिए आश्रम से बच्चा लाते हैं लेकिन आपका मन संतुष्ट नही होता?
  • गर्भपात की समस्या के कारण संतान होते-होते रह जाती है?
  • नपुनशकता के कारण आपको संतान सुख नही मिल रहा है?

काला जादू
  • आपके घर में किसी ने काला जादू कर दिया है?
  • भूत-प्रेत का शिकार हो रहे हैं?
  • आप जादू-टोने के कारण कमजोरी महसूस कर रहे हैं?
  • काला-जादू से कोई आपका बुरा कर रहा है?
  • आपके घर में काली शक्तियों का बास है?
  • आपके ऊपर किसी ने टोटका कर दिया है?
  • आपको चिड़चिड़ापन रहता है?
  • आप घर पर किसी की बात नही मानते और बाहर लोगों की सारी बात मानते हैं?
  • आपके अंदर भय का भूत रहता है?

रुद्राक्ष पहनने की विधि

जब जातक किसी रुद्राक्ष को धारण करता है, तो वह अपने नकारात्मक विचारों और नकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित करते हैं जिसके कारण उन्हे कुछ समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है, परंतु अगर जातक ने रुद्राक्ष को सच्चे मन और विधि के अनुसार कर लिया तो वह धीरे-धीरे नकारात्मक ऊर्जाओं को नष्ट्र करता है। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है यह आपको लाभ ताबी पहुंचाएगा जब वह आपकी कुंडली के अनुसार निर्धारित किया गया हो और सही विधि दी जाए।

जो ऐसा आज कल के नकली पंडित और नकली ज्योतिषी नही कर पाते हैं इसलिए आप जब भी इसे धारण करने का विचार करे तो उससे पहले अपनी कुंडली ज्योतिष + आयुर्वेद का ज्ञान रखने वाले ज्योतिषी को अवश्य दिखा लें जो सही विधि और सही मुखी का रुद्राक्ष बताएँगे। तो आइये जानते है क्या है रुद्राक्षा पहनने की सही विधि –  

  •  सबसे पहले सही दिन और सही मुहूर्त में (यह आपको वही ज्योतिष दे सकता है जिसने इसको निर्धारित किया है) इसको साफ करके चौकी पर रखें।
  • जिस भगवान की मूर्ति आपके ज्योतिष आचार्य ने बताई है उस मूर्ति को पूर्व दिशा की ओर मुख करके चौकी पर रख लें। 
  • ताम्र के लोटे में जल भरें और घी डाल के एक दीपक भी धूप वाती के साथ तैयार कर लें।
  • एक चांदी की कटोरी में दूध, शहद, मिश्री, गंगाजल और दही को मिलकर चरणामृत बना लें। 
  • अब सही मुखी वाले रुद्राक्ष ( जो ज्योतिष + आयुर्वेद के आधार पर ज्योतिषी आचार्य ने बताया हो ) उसे उस हाथ में न रखें जिस हाथ को आप सौंच ( वशरूम ) में उपयोग करते हैं।
  • इसके ऊपर एक चम्मच से चरणामृत डालें और दूसरे हाथ से इसे ढ़क ( बंद ) लें।
  • अब 108 बार उस मंत्र का जाप करें जो आपके ज्योतिष आचार्य ने बताया हो। याद रहे सही ज्योतिषी आपको कभी भी बीज मंत्र का उपाय नही बताएगा अगर बताया तो समझ लेना कुछ गड़बड़ है। 
  • मंत्र सम्पन्न करने के बाद इस को धारण कर लें। 
  • चरणामृत और लोटे के पानी को स्वंम पी लें याद रहे वह जल और चरणामृत किसी और न दें।  

यह है असली और सटीक विधि जो आपको DsK Astrology के माध्यम से बताई गई है। 


जरूरी सूचना- इसे पहन के आप कुछ कर सकते हैं बस आपको शमशान या मृतु स्थान पर नही जाना चाहिए। यदि आप जाते हैं तो आपका यह खंडित हो जाएगा और फिर आपको इसका का लाभ नही मिलेगा। जिसके कारण आपको दुबारा नया लेना पड़ेगा। यदि हो सके तो आप मांस मदिरे का सेवन न करें और यदि आप सेवन करना बंद नही कर सकते हैं तो आप विशेषकर मंगलवार और शनिवार के दिन जरूर छोड़ दें। महिलाएं मासिक धर्म के समय इसको धारण करके रख सकती है उसके लिए कोई रुकावट नही है।  


रुद्राक्ष के नुकसान

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसको को पहनना भगवान शिव को अपने जीवन में प्रवेश कराने के समान है। जिससे जातक को शारीरक और जीवन के सभी क्षेत्रों में लाभ मिलता है परंतु जातक अगर इसे ऐसी जगह पर ले जाता है जहां नही जाना चाहिए तो यह यंत्र खंडित हो जाता है जिससे इनके नुकसान जातक को झेलने पड़ते हैं। इसीलिए इसे को धारण करने के नियम और विधि बनाई गई है जिसका पालन करने से ही लाभ होता है अन्यथा हानि का शिकार होना पड़ता है। 

  • रुद्राक्ष पहनने के बाद किसी की मृत्यु हो जाए तो वहाँ नही जाना चाहिए। 
  • शमशान घाट पर रुद्राक्ष पहनकर न जाएँ।

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