ज्योतिष में ग्रह

ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रह होते हैं, जिन्हे नवग्रह के नाम से जाना जाता है। जिनके नाम क्रमशः सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु (9 कारक ग्रह) होते हैं जिसमें राहु केतु छाया ग्रह के रूप में जाने जाते हैं। यह अपने विभिन्न गुणों, प्रभावों और दशाओं के आधार पर जन्मकुंडली में व्यक्ति के जीवन और भाग्य पर प्रभाव डालते हैं, जैसे कि व्यक्ति के व्यक्तित्व, कर्मफल, स्वास्थ्य, विवाह, करियर और वित्तीय स्थिति आदि को प्रभावित करते हैं।
इसी प्रकार आइए जानते हैं ज्योतिष में ग्रहों का महत्व क्या होता है। ज्योतिष के सभी ग्रहों लिंक नीचे दिए गए हैं जो कुछ इस प्रकार हैं-
| ज्योतिष में ग्रह सूर्य | ज्योतिष में ग्रह चन्द्र | ज्योतिष में ग्रह मंगल |
| ज्योतिष में ग्रह बुध | ज्योतिष में ग्रह गुरु | ज्योतिष में ग्रह शुक्र |
| ज्योतिष में ग्रह शनि | ज्योतिष में ग्रह राहु | ज्योतिष में ग्रह केतु |
ज्योतिष में ग्रहों को शुभ (benefic), सम (neutral), और क्रूर (malefic) तीन वर्गों में विभाजित किया गया है, जो एक व्यक्ति के जीवन और भाग्य पर उनके प्रभाव की व्याख्या करते हैं।
शुभ ग्रह (Benefic Planets): शुभ ग्रहों को अनुकूल और सौभाग्यकारी माना जाता है, ये व्यक्ति के जीवन में प्रभावशाली माने जाते हैं। निम्नलिखित ग्रह शुभ ग्रह माने जाते हैं।
- चन्द्र (Moon) ( पक्ष बाली चन्द्र )
- बुध ( शुभ ग्रह से युक्त )
- बृहस्पति (Jupiter)
- शुक्र (Venus)
सम ग्रह (Neutral Planets): सम (तटस्थ ) ग्रहों को माध्यमिक और निर्णायक माना जाता है, ये न तो शुभ और न ही क्रूर होते हैं। निम्नलिखित ग्रह तटस्थ ग्रह माने जाते हैं।
- बुध (Mercury) ( पाप ग्रह से युक्त )
- चन्द्र ( Moon ) ( पक्ष में निर्बल )
क्रूर ग्रह (Malefic Planets): क्रूर ग्रहों को अनुकंपा-हीन और प्रभावशाली माना जाता है, ये व्यक्ति के जीवन में चुनौतियाँ और अवसाद लाते हैं। निम्नलिखित ग्रह क्रूर ग्रह माने जाते हैं।
- सूर्य (Sun)
- मंगल (Mars)
- शनि (Saturn)
- राहु (Rahu)
- केतु (Ketu)
यह वर्गीकरण ज्योतिष में ग्रहों के प्रभाव को समझने और उनकी दशाओं और स्थितियों के माध्यम से व्यक्ति के जीवन का मूल्यांकन करने में मदद करता है।
ज्योतिष में ग्रह क्या है?
ज्योतिष में, ग्रहों को नौ प्रमुख आकाशीय शरीर माना जाता है जिनमें सौरमंडल में स्थित नौ आकारिक शरीर शामिल होते हैं। ज्योतिष में इन नौ ग्रहों का महत्वपूर्ण योगदान होता है और इनके आपसी संयोग, युतियाँ और दशाएं व्यक्ति के जीवन में विभिन्न पहलुओं पर प्रभाव डालते हैं। ज्योतिषी इन ग्रहों के स्थानों, युतियों और दशाओं की व्याख्या करके व्यक्ति के भाग्य और प्रभाव का मूल्यांकन करते हैं। इस प्रकार, ग्रहों आकाशीय शरीर होते हैं जो नियमित गतिशीलता के साथ अपने निर्धारित मार्गों पर चक्रवात करते हैं और व्यक्ति के जीवन में अपना प्रभाव डालते हैं।
ज्योतिष में ग्रहों का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का बहुत महत्व है, क्योंकि वे व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालते हैं और उसके भाग्य को निर्धारित करते हैं। ग्रहों की चाल, स्थान, और युति के आधार पर ज्योतिषी व्यक्ति के भावित जीवन की विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन करते हैं। यहां ग्रहों का महत्व तथा प्रभाव कुछ मुख्य बिन्दुओं के माध्यम से समझाया गया है जो कुछ इस प्रकार है-
व्यक्तित्व और स्वभाव: ग्रहों के स्थान और युति के आधार पर ज्योतिषी व्यक्ति के व्यक्तित्व, स्वभाव, और गुणों का मूल्यांकन करते हैं। व्यक्ति के चरित्र, स्वाभाव, और गुण उनके जन्मकुंडली में प्रतिष्ठित ग्रहों के आधार पर व्यक्त होते हैं।
स्वास्थ्य: ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती है। कुछ प्लानेट शुभ होते हैं और व्यक्ति के स्वास्थ्य को बनाए रखते हैं, जबकि कुछ प्लानेट क्रूर होते हैं और व्यक्ति को स्वास्थ्य सम्बंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
करियर और व्यवसाय: ग्रहों की स्थिति और युति व्यक्ति के करियर और व्यवसाय को प्रभावित करती हैं। ये प्लानेट व्यक्ति के व्यापार, नौकरी, प्रोफेशनल विकास और स्थायित्व पर प्रभाव डालते हैं।
विवाह और पारिवारिक जीवन: ग्रहों की स्थिति और युति व्यक्ति के विवाह, संबंध और पारिवारिक जीवन पर प्रभाव डालती हैं। इनके आधार पर ज्योतिषी विवाह संबंधित योग, पारिवारिक सुख, और संतान की संभावनाओं का मूल्यांकन करते हैं।
धन और वित्तीय स्थिति: ग्रहों की स्थिति व्यक्ति की धनवानता, आय, और वित्तीय स्थिति पर प्रभाव डालती है। कुछ प्लानेट धन और संपति प्रदान करते हैं, जबकि कुछ प्लानेट वित्तीय चुनौतियों और आर्थिक बाधाओं का प्रतिष्ठान करते हैं।
इस तरह, ग्रहों का महत्व ज्योतिष में इसलिए होता है क्योंकि वे व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रभाव डालते हैं। ज्योतिषी इन ग्रहों की व्याख्या करते हुए व्यक्ति की जन्मकुंडली और ग्रहों की दशाओं के माध्यम से उनके भाग्य, संतान, स्वास्थ्य, करियर, विवाह, वित्त, और पारिवारिक जीवन का मूल्यांकन करते हैं। इसके आधार पर उन्हें संबंधित उपाय और निर्देश दिए जाते हैं जो उन्हें संतुष्ट, समृद्ध, और समृद्ध जीवन की ओर ले जाने में मदद कर सकते हैं।
ज्योतिष में ग्रह का राशि स्वामित्व और उच्च तथा नीच राशि स्थान
| ग्रह | ग्रह स्वामित्व राशि | ग्रह उच्च राशि | ग्रह नीच राशि |
| सूर्य | सिंह | मेष | तुला |
| चंद्रमा | कर्क | वृषभ | वृश्चिक |
| मंगल | मेष, वृश्चिक | मकर | कर्क |
| बुध | मिथुन, कन्या | कन्या | मीन |
| गुरु | धनु, मीन | कर्क | मकर |
| शुक्र | वृषभ, तुला | मीन | कन्या |
| शनि | मकर, कुंभ | तुला | मेष |
| राहु | — | मिथुन | धनु |
| केतु | — | धनु | मिथुन |
ज्योतिष के 9 ग्रहों के नाम और स्वभाव
ज्योतिष में, नवग्रह सिद्धांत के अनुसार, सौरमंडल में कुल 9 ग्रह माने जाते हैं। यहां नीचे उन सभी ग्रहों के नाम और स्वभाव नीचे संक्षेप में दिए गए हैं।
सूर्य (Sun): स्वभावित रूप से शक्तिशाली, साहसी, प्रभावशाली, स्वतंत्र, उद्दीपक, और स्वावलंबी।
चंद्रमा (Moon): भावनात्मक, संवेदनशील, करुणामय, सुदृढ़, आपातकालीन, और सम्प्रेक्ष्यशील।
मंगल (Mars): साहसी, सक्रिय, प्रतिभाशाली, अग्रसन्धानी, क्रांतिकारी, और संघर्षशील।
बुध (Mercury): बुद्धिमान, वाक्चातुर्य, संचारप्रिय, बुद्धिशाली, विचारशील, और उद्योगी।
गुरु (Jupiter): ज्ञानवान, दानी, आदर्शवान, नैतिक, प्रामाणिक, और विश्वासयोग्य।
शुक्र (Venus): सुंदर, कलात्मक, कामुक, आकर्षक, सामाजिक, और क्रियाशील।
शनि (Saturn): धैर्यशील, अवलम्बी, कर्मठ, नियमित, व्यवस्थाप्रिय, और संयमी।
राहु (Rahu): अद्यतन, अव्यवस्थित, आकांक्षी, उत्पाटशील, विचित्र, और अनियंत्रित।
केतु (Ketu): विचारशून्य, निरंकुश, विचित्र, अलौकिक, आत्मसात, और निष्पक्ष।
ज्योतिष के 9 ग्रहों का कारकत्व ( 9 कारक ग्रह )
ज्योतिष के सभी 9 ग्रहों का कारकत्व नीचे दिया गया है।
सूर्य (Sun): प्रशासनिक कारक, आत्मा, पिता, शक्ति, राष्ट्रीयता का कारक होता है।
चंद्रमा (Moon): मनस्थिति, भावनाएं, माता, शरीर, संयम का कारक होता है।
मंगल (Mars): ऊर्जा, अधिकार, क्रोध, रक्त, प्रभाव का कारक होता है।
बुध (Mercury): बुद्धि, बातचीत, वाणी, विद्या, व्यापार का कारक होता है।
बृहस्पति (Jupiter): शिक्षा, गुरुत्व, धर्म, संप्रदाय, सौभाग्य का कारक होता है।
शुक्र (Venus): सौंदर्य, सुख, प्रेम, विवाह, कला का कारक होता है।
शनि (Saturn): कर्म, संघर्ष, न्याय, निष्ठा, अनुभव का कारक होता है।
राहु (Rahu): माया, विचित्रता, उपाय, चालाकी, अधर्म का कारक होता है।
केतु (Ketu): वैराग्य, अन्तर्मन, तप, साधना, निर्मलता का कारक होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सबसे अधिक गर्म ग्रह कौन है? — शुक्र
सबसे ठंडा ग्रह कौन है? — वरुण
आकाशगंगा की आकृति कैसी है ?– सर्पिल
बुध का एक दिन पृथ्वी के कितने दिन के बराबर होते हैं?— 90 दिन
सौंदर्य का देव किस ग्रह को कहते हैं ?– शुक्र को
सबसे चमकीला ग्रह कौन है —शुक्र
सूर्य के सबसे नजदीक का ग्रह कौन है? —बुध
आकार में पांचवा सबसे बड़ा ग्रह कौन है ?– पृथ्वी
सबसे तेज घूमने वाला ग्रह कौन है? —बृहस्पति
सबसे कम गति से घूमने वाला ग्रह का नाम क्या है?– शुक्र
बुध को सूर्य की एक परिक्रमा करने में कितना समय लगता है? — 88 दिन
सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह कौन है? — बुध
वृहस्पति ग्रह का रंग कैसा होता है?— पीला
आकार की दृष्टि से सबसे छोटा ग्रह कौन है? — बुध