स्वाति नक्षत्र फल लाभ हानि उपाय विशेषताएँ। Swati Nakshatra

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स्वाति नक्षत्र | Swati Nakshatra

स्वाति नक्षत्र

स्वाति नक्षत्र का राशि चक्र में 186 डिग्री 40 अंश से 200 डिग्री 00 अंश तक विस्तार वाला क्षेत्रफल होता है। स्वाति नक्षत्र को अरब मंजिल में ” अल गफार “, ” ग्रीक में अर्कटूरूस ” और चीनी सियु मे ” कंग ” के नाम से जाना जाता है। स्वाति का मतलब तलवार से संबन्धित है। त्रेत्रीय बृहमाण्ड के मतानुसार स्वाति को त्याग देना अथवा फेक देना भी कहते हैं। स्वाति नक्षत्र के देवता वायु [ वरुण ], स्वामी ग्रह राहु और राशि तुला 06 डिग्री 40 अंश से 20 डिग्री 00 अंश तक होती है। 

स्वाति नक्षत्र को आकाशीय पिंडों के अनुसार 15 व चर संज्ञक नक्षत्र कहा जाता है। स्वाति नक्षत्र का एक तारा होता है। जो अंडे की आकृति अथवा मूंगा के समान दिखाई देता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार स्वाति नक्षत्र का अर्थ एक बूंद पानी की बनी मोती कहलाता है। स्वाति नक्षत्र स्वतन्त्रता की वह पहली बूंद है जिससे शुद्ध जल की वारिश की शुरुआत होती है। स्वाति शुभ तामसिक स्त्री नक्षत्र होता है। स्वाति नक्षत्र की जाति कृषक, योनि व्याघ्र, योनि वैर गौ, गण राक्षस और नाड़ी अंत होती है। स्वाति नक्षत्र को पश्चिम दिशा का स्वामित्व प्राप्त है।



स्वाति नक्षत्र की कथा पौराणिक कहानी । Swati Nakshatra mythological story 

स्वाति नक्षत्र के देवता वायु देव हैं। यह नक्षत्र हिन्दू धर्म में सबसे अधिक महत्वता रखने वाले तीनों देवताओं [ वायु, अग्नि, सूर्य ] के समक्ष आता है। स्वाति नक्षत्र ब्रह्माण्ड में जल, थल, वायु, आकाश और अग्नि इन पांचों तत्वों का गठन करता है। इन पांचों तत्वों में वायु सर्वशक्तिमान की सांस से उत्पन्न हुई है। वायु बहुत तेजी से आकाश और पृथ्वी में बहती रहती है और मनुष्यों को ताजगी का एहसास दिलाती है सुबह की ताजी वायु प्राप्त करने से सेहत अच्छी रहती है। वायु देव को गन्धर्वों का राजा माना गया है। 

पौराणिक कथाओं के अनुसार वायु देव ने मेरु पर्वत को अपने बल और शक्ति से समुद्र में फेक दिया था जहां पर श्रीलंका का निमार्ण हुआ है। श्री राम के भक्त हनुमान जी के पिता वायु देव उत्तर पश्चिम दिशा अर्थात व्यायव कोण के स्वामी भी है।


स्वाति नक्षत्र की विशेषताएँ । Swati Nakshatra Importance 

स्वाति नक्षत्र में चंद्रमा कला, संगीत, आंतरिक ज्ञान और बृह्म अथवा आत्मा का कारक माना जाता है। स्वाति नक्षत्र वायु का रूप हैं जो तीव्र शक्ति में चलने वाली वायु के सामने भी झुकना जानता है। इस नक्षत्र के अंदर प्रथ्वंस शक्ति पाई जाती है। स्वाति का चिन्ह प्रवाल सहज ज्ञान युक्त मानसिक गुण का प्रतीक है, धर्म शास्त्र या वेद शिक्षा का कारक है। माता सरस्वती को भी स्वाति नक्षत्र का प्रतीक माना जाता है। 

सूर्य देव की धर्म पत्नी का नाम भी स्वाति था। जातक शांत अथवा गुस्सैल दोनों स्वभावों का होता है विरामिहिर के मतानुसार स्वाति चंद्र के प्रभाव से खुद पर नियंत्रण करने और करुणा का कारक होता हैं। स्वाति नेल्सन राकफेलर वाणिज्य सरगना का जन्म नक्षत्र भी माना जाता है।


स्वाति नक्षत्र के नाम अक्षर । स्वाति नक्षत्र नामाक्षर

इस नक्षत्र के अनुसार जिस जातक का नाम आता है वह इस नक्षत्र के बताए गए गुण दोषों के समान होगा। स्वाति नक्षत्र के नामाक्षर कुछ इस प्रकार है – 

स्वाति नक्षत्र – प्रथम चरण – रु

स्वाति नक्षत्र – द्वितीय चरण  रे

स्वाति नक्षत्र – तृतीय चरण – रो

स्वाति नक्षत्र – चतुर्थ चरण – ता


स्वाति नक्षत्र के उपाय । Swati Nakshatra Remedy 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार स्वाति नक्षत्र के देवता वायु देव ( पवन देव ) को माना गया है। स्वाति नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु अपने प्रभाव से जातकों को अच्छे बुरे परिणाम दिखाता रहता है। ज्योतिषीय मतानुसार स्वाति नक्षत्र यदि आपका जन्म नक्षत्र है और अशुभ अथवा पीड़ित है तो यह आपको जीवन में नकारात्मक परिणाम दे सकता है, जातक इस नक्षत्र के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए माता सरस्वती की पूजा वंदना करें। 

माता सरस्वती की पूजा प्रतिदिन सुबह स्नान करने के बाद साफ सुथरे कपड़े पहने और फिर माता सरस्वती से अपने जन्म नक्षत्र की अशुभता को दूर करने की प्रार्थना करें ऐसा करने से आपको संभवता अच्छे परिणाम मिलने शुरू हो जाएंगे।

  • माता सरस्वती का मंत्र ” ऊँ ऎं हृीं क्लीं सरस्वत्यै नम: ” का जाप प्रतिदिन 108 बार करने से स्वाति नक्षत्र के अनिष्टकारी अथवा अशुभ प्रभाव से छुटकारा मिलता है।
  • स्वाति नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों को हल्के पीले अथवा साधुओं के समान वस्त्र धारण करने चाहिए।
  • जातक सफेद वस्त्रों का उपयोग भी कर सकता है सफेद रंग के प्रभाव से जातक जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त करता है।
  • चैत्र महीने में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से पूर्णिमा तिथि तक माता सरस्वती की पूजा वंदना करने से जीवन में सुख और विशेष लाभ प्राप्त होता है।
  • सप्तमी तिथि में जब चंद्र स्वाति में गोचर कर रहा हो तब माता सरस्वती की आराधना करनी चाहिए।
  • भगवान शिव की आराधना करने से इस नक्षत्र के अशुभ परिणामों से बचा जा सकता है।
  • रामभक्त श्री हनुमान जी की पूजा करने से भी इसके अशुभ प्रभाव दूर किए जा सकते हैं।

मान्यताओं के अनुसार प्रतिवर्ष आने वाली वसंत पंचमी को सरस्वती माता की विधि विधान से पूजा करनी चाहिए अर्थात माघ महीने की शुक्ल पक्ष में आने वाली पंचमी को बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा सच्चे मन और विधि पूर्वक करने से जीवन में अशुभता दूर होती है और स्वाति नक्षत्र के दुष्प्रभाव कम होने लगते हैं। 

स्वाति नक्षत्र के देवता वायु की पूजा करके भी जातक इस नक्षत्र के अशुभ प्रभाव कम कर सकता है। स्वाति नक्षत्र की अशुभता को दूर करने और शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए पूजन विधि कुछ इस प्रकार है–  तिल, जौं और घी को मिला लें और फिर सीधे हाथ की हथेली पर रखकर होम करते हुए स्वाति नक्षत्र के वैदिक मंत्र का जाप काम से काम १०८ बार करना चाहिए। यदि स्वाति नक्षत्र के वैदिक मंत्र का जाप सच्चे मन और सच्चे हृदय से करलिया तो निश्चित ही आपके जीवन में कष्टों का नाश होगा और अच्छे परिणाम प्राप्त होने लगेंगे।


स्वाति नक्षत्र का वैदिक मंत्र 

ऊँ वायो ये सहस्त्रिणे रथा सस्ते चिरागहि नियुत्वाम सोम पीतये ऊँ वायवे नम: ।।


स्वाति नक्षत्र फलादेश । स्वाति नक्षत्र का फल । Swati Nakshatra Prediction  

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार स्वाति नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक जीवन में सुख और आनंद लेने वाले, अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की शक्ति रखने वाले, जीवन चक्र को मधुर बनाने वाले, उन्नतिशील, सच बोलने वाले, ईमानदार, महान अथवा उच्च कोटि का ज्ञानी होने के कारण पंडित अथवा ज्योतिषी भी होता है। इस नक्षत्र के जातक एक बार होने वाली गलती को दुबारा नहीं होने देते हैं और सभी कार्यों को सावधानी पूर्वक करना पसंद करते हैं। 

शिक्षा के क्षेत्र में तीव्र अथवा उन्नतिशील परंतु सफलता प्राप्त करने में बहुत संघर्ष करना पड़ता है। परंतु कठिन परिश्रम ओर संघर्ष के बाद सफलता इनके कदम चूमती है। इस दुनिया में जन्मे अधिकतर साधु संत प्रसिद्धि प्राप्त किए हुए हैं और उन्होने स्वाति नक्षत्र में ही जन्म लिया है और उनकी राशि तुला है। सबसे अधिक क्रूर अथवा खतरनाक ग्रह शनि स्वाति नक्षत्र में उच्च स्थिति में होते हुए अच्छे परिणाम देता है। 

अगर शनि लग्न में हो तो अधिक प्रभावकारी और शुभ फल देता है। इसके प्रभाव से जातक को कभी किसी से कुछ मांगने की जरूरत भी पड़ती है। उसके पास वह सब उपलब्ध होता है जो उसे अपने जीवन में चाहिए होता है। स्वाति नक्षत्र के जातक प्रेम पूर्ण जीवन जीने वाले, अपने प्यार में सफलता प्राप्त करने वाले, गठीले शरीर वाले, विपरीत लिंग की ओर आकर्षित होने वाले होते है। 

इनका वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और ये अपने जीवनसाथी के प्रति ईमानदार और सच्चे होते हैं ये विवाह के बाद अपने जीवनसाथी से सबसे अधिक प्रेम करने वाले होते है। उम्र के साथ साथ इनका शरीर कमजोर होता है परंतु ईश्वर भक्ति की ओर ये लीन होते जाते हैं। स्वाति नक्षत्र में जन्मे जातक के लिए 25, 26, 27, 30, 36 और 42 वर्ष की उम्र तक बेहद शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।


स्वाति नक्षत्र के पुरुष जातक | Impact of Swati Nakshatra on Male

स्वाति नक्षत्र के पुरुष जातक सुंदर शरीर, सुंदर एड़ी वाले होते हैं। इनकी सुंदरता और कोमल शरीर स्त्रियॉं को अपनी ओर मनमोहित करने वाला होता है। जातक शांत स्वभाव वाला, जिद्दीबाज़, अपने नियमों अथवा अपने विचारों के अनुसार कार्य करने वाला होता है। यह अपनी मेहनत से पैसा कमाने वाले होते हैं। जातक अपना धन न तो किसी को उधार देता है और न किसी का धन उधार लेता है। 

यदि जातक के कार्यों की बड़ाई की जाए तो यह बेहद खुश होता है लेकिन निंदा करने वालों से यह दुबारा बात तक नही करते हैं। यदि इन्हे गुस्सा आ जाए तो इन्हे शांत करा पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। अपने अनुसार जीवन जीवन जीने वाला जिसके कारण मजबूर और असहाय लोगों की मदद करने के लिए आगे रहते हैं। जातक जरूरत पड़ने पर कोई व्यक्ति अच्छा मित्र होगा परंतु गुस्सा होने पर वही सबसे बड़ा कुमित्र बन जाता है। जातक को बाल्यावस्था में कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

जातक को अपने जीवन में 23 से 25 वर्ष की उम्र तक आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जातक मेहनत के अनुसार 3 वर्ष तक अपने व्यापार में पूर्ण सफलता प्राप्त नही कर पाता है परंतु 30 वर्ष के बाद लगभग 60 वर्ष की उम्र तक पूर्ण सफलता प्राप्त करके सोने के समान चमकने लगता है। वैवाहिक जीवन में आपसी तनाव के कारण अशांति बनी रहती है। 


स्वाति नक्षत्र के स्त्री जातक | Impact of Swati Nakshatra on Female

स्वाति नक्षत्र के स्त्री जातक पुरुष जातक के गुणदोषों से कुछ अलग होते हैं। जैसे स्त्री जातक बहुत धीरे-धीरे चलने वाली, इनकी बनबाट कुछ इस प्रकार होती है जिससे इन्हे आसानी से पहचाना जा सकता है। स्त्री जातक ईमानदार, दयावान, ईश्वर में विश्वास रखने वाली, धर्म को मानने वाली, अच्छे आचरण वाली, समाज में अच्छी छवि बनाने वाली, धार्मिक अथवा पारंपरिक नियमों का पालन करने वाली, सच बोलने वाली, अच्छे मित्रों की संगत करने वाली और शत्रुओं का नाश करने वाली होती है। 

स्वाति नक्षत्र के स्त्री जातक व्यपार के क्षेत्र में कम लगाव रखते हैं परंतु यदि ये व्यपार का प्रारम्भ करें तो ये अच्छे स्तर तक जा सकती हैं। ये नौकरी करना पसंद करती हैं लेकिन यात्राओं का शौक नही होता लेकिन मजबूरी में नौकरी के कारण यात्राएं करनी पड़ती हैं। पारिवारिक हालत खराब होने के कारण ये किसी भी कार्य को करने के लिए तैयार रहती हैं।


प्राचीन ऋषिमुनियों व आचार्यों के अनुसार स्वाति नक्षत्र | Swati Nakshatra

स्वाति नक्षत्र में जन्मे जातक व्यपार करने में माहिर होते हैं। ये उच्च स्तर का व्यापार करने की इच्छा रखने वाले  और क्रय-विक्रय में पूर्ण होते हैं। ये अपने कार्य के लिए बहुत अच्छा बोलते हैं लेकिन कार्य पूरा होते ही घमंडी स्वभाव दर्शाने लगते हैं। इन्हे प्यास अधिक लगती हैं जिसके कारण ये बार-बार पानी पीते रहते हैं। ये अपने मन में उत्पन्न लालच को बाहर नही आने देते हैं। ———-  नारद

स्वाति नक्षत्र के जातक-जातिका सरकार पक्ष से अच्छा लाभ अर्जित करते हैं। कार्यों को करने की लगन होती है। ये एक से अधिक विषयों का ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं। ये मधुरभाषी होते हैं जिसके कारण ये अपनी बातों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। संयम बरतने वाले होते हैं। ——- पराशर

इस नक्षत्र के जातक-जातिका बड़े परिवार में जन्म लेने वाले अथवा अपने दफ्तर में बहुत बड़े स्टाफ वाले होते  हैं। इस नक्षत्र के जातक अपने परिवार/खानदान में सबसे अधिक उन्नतिवान होते हैं। ये अपने संपर्क में आने वाली स्त्रियों को वस्त्रों अथवा आभूषणों से सबसे ज्यादा आकर्षित करते हैं। जातक अपने कार्यों में उत्साह भरने वाला, खान-पान का विशेष ध्यान रखने वाला होता है। जातक अपने जीवन में खुश रहने वाला होता है। धर्म का पालन करने में विमुख होता है। ——– अन्यत्र                   

चन्द्र       

यदि चन्द्र स्वाति में हो तो जातक गाने-बजाने का शौकीन, अंतरात्मा को समझने वाला और वहम उत्पन्न करने वाला होता है। ये व्यापार के क्षेत्र में अच्छे वाहक होते हैं। जातक दयावान, ईमानदार, चतुरता पूर्वक बाते करने वाला, जिद्दी स्वभाव वाला, गुस्सैल और स्वतंत्रता पूर्ण जीवन जीने वाला होता है। जातक 30 वर्ष के बाद अपने जीवन में सफलता प्राप्त करेगा। जातक के विवाह में रुकावटें पैदा होती है। 

सूर्य

जातक अपने रोजगार का जरिया स्वंम खोजने वाला, व्यापार के क्षेत्र में माहिर होता है। समाज में अच्छे स्तर पर राज करने वाला, जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए इधर-उधर भटकने वाला, पिता पक्ष से दुखी रहने वाला होता है। आर्थिक परेशानियों का सामना करने वाला होता है। 

लग्न 

जातक दयावान, महान, सुख-समृद्धि वाला, साधुओं के समान साधारण वस्त्र पहनने वाला, मनोविज्ञान में रुचि रखने वाला, राजनीति में अपना कदम जमाने वाला, जन्मभूमी से दूर रहने वाला होता है।


स्वाति नक्षत्र का चरण फल | Prediction of Swati Nakshatra Charan pada 

प्रित्येक नक्षत्र में चार चरण होते हैं जिसमें एक चरण 3 अंश 20 कला का होता है। नवमांश की तरह होता है जिसका मतलब यह है की इससे नौवे भाग का फलीभूत मिलता है सभी चरणों में तीन ग्रहों का प्रभाव होता है जो इस प्रकार है – स्वाति नक्षत्र के देवता वायु [वरुण], स्वामी ग्रह राहु और राशि तुला। 

स्वाति नक्षत्र का प्रथम चरण | Prediction of Swati Nakshatra First Charan pad

स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी गुरु है। इस चरण में शुक्र, राहु और गुरु का प्रभाव होता है। राशि तुला 186 डिग्री 40 अंश से 190 डिग्री 00 अंश तक होती है। नवमांश धनु ! यह बढ़ाने, स्वतंत्र विचार और लेखन का कारक होता है। प्रथम चरण में जातक घोड़े के समान मुखाकृति वाला, साफ-सुथरे दांतों वाला, बड़ी-बड़ी आँखों वाला, लंबे-लंबे हाथों वाला और महान होता है।  

जातक उन्नतिवान, वाद विवाद को उलझाने और सुलझाने वाला, सच्चाई को सिद्ध करने वाला, निर्दयी, छल करने वाला, अज्ञानता पूर्ण बाते करने वाला, उच्च स्तर का लेखक, प्रवक्ता, कलात्मक, पिता से संबंध अच्छे न रखने वाला,लंबी यात्राओं का प्रिय, विपरीत लिंग को आकर्षित करने वाला, संतान उत्पत्ति में रुकावटें पैदा परंतु वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है।


स्वाति नक्षत्र का द्वितीय चरण | Prediction of Swati Nakshatra Second Charan pad 

स्वाति नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शनि है। इस चरण में शुक्र राहु और शनि का प्रभाव होता है। राशि तुला 190 डिग्री 00 अंश से 193 डिग्री 20 अंश तक होती है नवमांश मकर ! यह आत्मा-परमात्मा से संबंध, कोमलता, स्थिरता और बढ़ोत्तरी का कारक होता है। द्वितीय चरण में जातक कमजोर शरीर वाले, टेड़े-मेड़े दाँतो वाला, मोर के समान आँखों वाला, छोटी-छोटी आँखों वाला, दुखी परंतु अच्छा व्यवहार करने वाला होता है। 

इस चरण में जातक अन्य सभी चरणों के मुक़ाबले आत्मा और परमात्मा में कम विश्वास करने वाला होता है। यह अपने जीवन में उन्नतिशील होता है परंतु स्थिरता के कारण विकासशील होने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जातक अपनी मेहनत और लगन के चलते जीवन में उन्नतिशील, विकासशील होता है जातक खुद को अंजान अथवा छल करने वाले लोगों से बचाता है अथवा दूर रहता है। जातक विवाह के बाद साधारण जीवन जीने वाला होता है। 


स्वाति नक्षत्र का तृतीय चरण | Prediction of Swati Nakshatra Third Charan pad

स्वाति नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शनि है। इस चरण मे शुक्र, राहू और शनि का प्रभाव होता है राशि तुला 193 डिग्री 20 अंश से 196 डिग्री 40 अंश तक होती है। नवमांश कुम्भ ! यह चरण बढ़ोत्तरी, मदद, बुद्धि, जीवनमार्ग का कारक होता है। इस चरण में जातक गभीरता युक्त नयन वाला, बीच में चपटी हुई नाक वाला, घने और लंबे बाल, स्थिरचित, दयालु और एक से अधिक मित्रों वाला होता है। 

स्वाति नक्षत्र का तृतीय चरण सबसे अच्छा और सबसे अधिक प्रभावकारी होता है। इसमें जातक आर्थिक अथवा आध्यात्मिक दोनों प्रकार से बढ़ोत्तरी करता है। जातक से एक से अधिक विषयों का ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा रखने वाला, इसके कारण जातक अनेक विषयों का ज्ञाता और महान अथवा उच्च कोटी का विद्वान होता है। जातक 35 से 40 वर्ष की उम्र के बाद अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है। जातक अपने प्रेम जीवन में मधुर अथवा वैवाहिक जीवन सुखमय व्यतीत करने वाला होता है।


स्वाति नक्षत्र का चतुर्थ चरण | Prediction of Swati Nakshatra Fourth Charan pad

स्वाति नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी गुरु है। इस चरण में शुक्र, राहु और गुरु का प्रभाव होता है। राशि तुला 196 डिग्री 40 अंश से 200 डिग्री 00 अंश तक होती है। नवमांश मीन ! यह लचीलापन, परिस्थिति अनुसार बदलाव, नियंत्रण, निरंतरता का कारक होता है। जातक गौरव वर्णी बड़े नेत्र, सुन्दर नाक, कोमल चिकने नाखून, वंशी नीतिज्ञ, एक से अधिक विषयो का ज्ञाता, शास्त्रों का ज्ञाता होता है। 

जातक बुद्धिमान लेकिन भावुक, कर्ज के कारण दुखी, अन्य चरणों की अपेक्षा इस चरण मे जातक अधिक मेहनती होता है। इस चरण में उत्पन्न जातकों की ओर विपरीत लिंग वाले जातक बहुत जल्दी आकर्षित होते है परतु उनमे विरोधभास होता है।


स्वाति नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष आचार्यों ने सूत्र रूप में बताया है लेकिन यह फलित में बहुत ज्यादा बदलाव हुआ है।

यावनाचार्य

स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण में तस्कर, द्वितीय चरण में कम उम्र जीने वाला, तृतीय चरण में धर्म को मानने वाला, चतुर्थ चरण में राजा के समान होता है। 

मानसागराचार्य 

स्वाति नक्षत्र के पहले चरण में गरीब या निर्धन, दूसरे चरण में बोल न पाने वाला, तृतीय चरण में कर्मों के अनुसार फल की इच्छा रखने वाला, चौथे चरण में पराई स्त्रियों का साथ पाने वाला होता है। 


स्वाति नक्षत्र का चरण ग्रह फल | Swati Nakshatra Prediction based on planets

भारतीय ज्योतिष आचार्यों के मतानुसार सूर्य, बुध और शुक्र इन ग्रहों की पूरी तरह अवलोकन या चरण दृष्टि होती है, क्योंकि सूर्य ग्रह से बुध ग्रह 28 अंश और शुक्र 48 अंश से दूर नही जा सकता है।  

सूर्य – Sun [ स्वाति नक्षत्र में सूर्य ] 

  • चन्द्र की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक स्त्रियों की सेवा करने वाला होता है। 
  • मंगल की दृष्टि सूर्य पर हो तो पुरुष जातक युद्ध कला प्रेमी, धनवान और महान होता है।
  •  गुरु की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक परिवार अथवा समाज में अच्छी छवि और अच्छा नाम कमाने वाला होगा। 
  • शनि की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक धन के लिए परेशान, बीमार और पत्नी का विरोध करने वाला होता है।  

स्वाति नक्षत्र में सूर्य | When sun is in Swati Nakshatra – Prediction

सूर्य का स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक समाज के द्वारा बनाय गय नियमों का पालन करने वाला, प्रशासनिक कार्यों में कार्यरत, दूसरों की मदद करने वाला अथवा दूसरों की रक्षा में स्वंम को छती पाहुचाने वाला होता है। जातक मधुरभाषी परंतु घमंडी होता है। 

सूर्य का स्वाति नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक पौराणिक परम्पराओं के विमुख रहने वाला, सोने-चांदी का व्यापार करने वाला, जातक अच्छे कार्यों को करने के लिए लोगों को प्रेरित करने वाला होता है।

सूर्य का स्वाति नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक हिंसक कार्य करने वाला, चतुराई से अपना कार्य करने वाला अथवा लोगों को अपने कार्य के लिए प्रेरित करने वाला होता है। जातक दयाहीन और चतुर होता है। 

सूर्य का स्वाति नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक महान योद्धा, दूसरों के लिए कष्ट सहने वाला, जातक इस चरण में नशीले पढ़ार्थों का विक्रेता होता है। यदि इस चरण में अश्वनी लग्न हो तो जातक पत्नी को गलत समझने के कारण उसका त्याग करने वाला होता है।


चन्द्र – Moon [ स्वाति नक्षत्र में चन्द्र ]

  • सूर्य की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक स्त्री प्रेम में रत लेकिन इच्छाशक्ति कमजोर होगी।
  • मंगल की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक संभोग करने का इच्छुक परंतु संतुष्ट न होने वाला होगा।
  • बुध की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक राजा के समान राजपाट भोगने वाला होगा।
  • गुरु की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक प्रॉपर्टी अथवा किसी समुदाय का मुखिया होगा।
  • शुक्र की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक सभी प्रकार के व्यपार में निपुण होगा।
  • शनि की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक नपुंसक अथवा संभोग करने की शक्ति कमजोर होगी।

स्वाति नक्षत्र में चन्द्र | When Moon is in Swati Nakshatra – Prediction

चन्द्र का स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक सबसे अलग शरीर वाला, अधिक लोगों के बीच आसानी से पहचाना जाने वाला, ईश्वर पर पूर्ण विश्वास करने वाला, माता को सबसे अधिक प्यार करने वाला जिसके कारण माता पक्ष से लाभ प्राप्त होता है। जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद एक सफल ज्योतिषी या फिर सफल वक्ता बनता है।

चन्द्र का स्वाति नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक सामान्य शरीर वाला, समाज में अपनी छवि सबसे अलग बनाकर रहने वाला होता है। जातक समाज में खुद को सबसे अलग निखारने के सपने देखने वाला होता है। सभोग क्रिया में लिप्त, आश्चयजनक कार्य करने वाला, जीवन में सबसे अधिक महत्व शिक्षा को देते हैं। 

चन्द्र का स्वाति नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक अधिक बोलने वाला, समूह या किसी समुदाय का मुखिया होता है। जातक अपने घर के सदस्यों के द्वारा सबसे अधिक सम्मान प्राप्त करने वाला, परंतु सदस्यों के कारण जीवन में बर्बाद होने वाला होता है।

चन्द्र का स्वाति नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक कार्य करने में नीपूर्ण, अधिक शिक्षा ग्रहण करने वाला, ज्ञान पाने का इच्छुक होता है। जातक समाज में नेता के समान पुजा जाने वाला परंतु साँप के काटने से मृत्यु हो जाती है। यदि यह चरण लग्न में हो तो जातक राजा के समान राज करने वाला होता है।  


मंगल – Mars [ स्वाति नक्षत्र में मंगल ]

  • सूर्य की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक पहाड़ी  इलाकों में निवास करने वाला होगा। 
  • चन्द्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक माता की इच्छा अनुसार कार्य न करने वाला होगा।
  • बुध की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक धर्म को मानने वाला, नौजवान, फुर्ती से कार्य करने वाला होगा।
  • गुरु की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक ईमानदार और परिवार में खुशी से रहने वाला होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक समाज में राजनेता के समान पूजने वाला होगा।
  • शनि की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक  स्वच्छ हृदय वाला या फिर नगर का अध्यक्ष होगा।

स्वाति नक्षत्र में मंगल | When Mars is in Swati Nakshatra – Prediction

मंगल का स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक मधुर बोलने वाला, अपनी मधुर-मधुर बातों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला, जिद्दी, अधिक मित्रों वाला और तुच्छ दुश्मनों वाला, स्त्री सुख पाने का इच्छुक होता है। 

मंगल का स्वाति नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक समाज में सम्मानित और दूसरों की तारीफ करने वाला, चालाक, लालची परंतु लालच को प्रकट न होने देने वाला होता है। जातक मौका मिलने पर उसका पूरा लाभ उठाने वाला होता है। 

मंगल का स्वाति नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक खाने-पाने का शौकीन, किसी के आगे न झुकने वाला, निर्दयी, अस्थिर, निडर, आवारा लोगों की तरह इधर-उधर घूमने वाले होते हैं। मौके का फायदा न उठा पाने वाला होता है।

मंगल का स्वाति नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक लालच के कारण दूसरों से अपना कार्य निकलवाले वाला होता है। जातक अपना कार्य निकलवाने के लिए मधुरता दिखाने वाला होता है। जातक कार्य के प्रति निष्ठावान नही होने से दण्डित होता है। 


बुध – Mercury [ स्वाति नक्षत्र में बुध ] 

  • चन्द्र की दृष्टि बुध पर हो तो जातक कठिन परिश्रम करने वाला, शासन के निकट कार्य करने वाला होगा।
  • मंगल की दृष्टि बुध पर हो तो जातक शासन कार्यों से अच्छा लाभ प्राप्त करेगा।
  • गुरु की दृष्टि बुध पर हो तो जातक समाज में नेता के समान पूज्यनिय, तेज बुद्धि वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण होगा।
  • शनि की दृष्टि बुध पर हो तो जातक लोगों के साथ गलत व्यवहार करने वाला होगा।

स्वाति नक्षत्र में बुध | When Mercury is in Swati Nakshatra – Prediction

बुध का स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक सभ्यतादार, चीजों को बेचने और खरीदने में माहिर होता है। जातक व्यापार वर्ग से अधिक लाभ प्राप्त करने वाला होता है। स्त्रियों के साथ प्रेम-पांश में रहने वाला, अच्छा बोलने और सुनने वाला होता है। स्वाति नक्षत्र में विवाह हो तो जातक खुश रहता है।  

बुध का स्वाति नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक परम्पराओं को मानने वाला, गलत तांत्रियों विचारों वाला, तंत्र विध्या में माहिर, स्त्रियों के सुंदर रंग-रूप से उनकी ओर प्रभावित होने वाला होता है। जातक दूसरों के धन और दूसरों की स्त्रियो पर अपनी नियत खराब करने वाला होता है। 

बुध का स्वाति नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक ढान-पुण्य करने वाला, अपने से बड़ो का सम्मान करने वाला, पुत्र संतति वाला होता है। जातक यदि किसी व्यापार में अपना कदम बढ़ाता है तो वह सफलता प्राप्त किए बिना पीछे नही हट्टा है।

बुध का स्वाति नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक एक से अधिक विषयों मे कुशल, श्रृंगार प्रिय और श्रृंगार मे सचेष्ट, स्त्रियों के समान व्यवहार करने वाला, स्पष्ट बात कहने वाला होता है। चतुर्थ चरण में शुक्र का मिलन हो तो जातक इंजीनियर या उच्च कोटी का अध्यापक होगा।


गुरु – Jupiter [ स्वाति नक्षत्र में गुरु ]

  • सूर्य की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक सेना के कार्यों में कार्यरत या फिर युद्ध में माहिर होगा। 
  • चन्द्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक समाज में सम्मानित, सच बोलने वाला और भाग्यवान होगा।
  • मंगल की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक विवाह के बाद पत्नी अथवा संतान सुख भोगने वाला होगा। 
  • बुध की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक राजनीति में अच्छा कदम जमाने वाला और ससकृति में अच्छा कदम जमाने वाला होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक धन-दौलत से परिपूर्ण और जरूरतमन्द लोगों की सहायता करने वाला होता है। 
  • शनि की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक धनवान, राजनीति में नेता या उच्च पद का मंत्री होगा।

स्वाति नक्षत्र में गुरु | When Jupiter is in Swati Nakshatra – Prediction 

गुरु का स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक सेहत के प्रति सावधान रहने वाला, व्यापार में अच्छा कदम जमाने वाला होता है। सरकार की तरफ से अच्छा लाभ प्राप्त करने वाला होता है। ये अपने परिवार में बड़े होने के कारण कई बार समस्याओं में घिरे रहते हैं। 

गुरु का स्वाति नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक अधिक बोलने वाला, चालाक और निर्दयी होता है। जातक दूसरों की परेशानियाँ न समझने वाला, सुंदर स्त्रियों को देखकर मोहित होने वाला होता है। स्त्रियों को अपनी ओर आकर्षित करने का हुनर रखने वाला होता है। 

गुरु का स्वाति नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक अच्छे स्वभाव वाला, एक से अधिक विषयों का ज्ञान रखने वाला, ईश्वर भक्ति में लीन, पारंपरिक धर्म के नियमों में बदलाव करने की इच्छा रखने वाला होता है। यदि इस चरण में शुक्र का मिलन हो तो जातक उच्च कोटी का चिकित्सक होता है। 

गुरु का स्वाति नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक धर्म के कार्यों में व्यस्त रहने वाला और सभी कार्यों को करने में उत्साहित रहने वाला होता है। इस चरण में कुछ जातक साधारण विचार वाले होते हैं।


शुक्र – Venus [ स्वाति नक्षत्र में शुक्र ]

  • चन्द्र की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक कार्यों में व्यस्त और मधुर भाषा बोलने वाला होता है।  
  • मंगल की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक सुखहीन अथवा अनैतिक कार्यों से धन कमाएगा।
  • गुरु की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक वाहन, पत्नी और संतान सुख भोगने वाला होगा। 
  • शनि की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक धनहीन और बीमार होगा। 

स्वाति नक्षत्र में शुक्र | When Venus is in Swati – Prediction

शुक्र का स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक के भरोशे कई लोग अपना जीवन यापन करने वाले होंगे। जातक अपनी पत्नी अथवा उसकी सखी-सहलियों के श्रंगार को देखकर उनकी ओर आकर्षित होने वाला होगा। 

शुक्र का स्वाति नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक अधिक श्रंगार पसंद नही करता है। जातक अपनी पत्नी को साधारण बेश-भूषा में रहने को कहते रहने वाला होता है। जातक जीवन में अच्छा खाना और अच्छा पहनने पर विश्वास करता है।

शुक्र का स्वाति नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक सच बोलने वाला, स्पष्ट बात को कहने वाला फिर चाहे किसी को बुरी लगे या फिर अच्छी उसे इस बात से कोई फर्क नही पड़ता है। जातक मन की बात कहने वाला किसी भी बात को मन में न रखने वाला होता है। 

शुक्र का स्वाति नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक अपने परिवार की जनसंख्या बढ़ाने के वारे में विचार करने वाला जिसके कारण लोगों के मन में इसके प्रति बुरे विचार उत्पन्न होते हैं। परंतु ये अपने कार्यों को समय से करते हैं फिर चाहे कुछ भी हो। 


शनि – Saturn [ स्वाति नक्षत्र में शनि ]

  • सूर्य की दृष्टि शनि पर हो तो जातक गरीब, धनहीन, दूसरों के भरोशे अपना जीवन जीने वाला होगा।
  • चन्द्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सरकार की तरफ से सम्मानित तथा लाभ प्राप्तक होगा।
  • मंगल की दृष्टि शनि पर हो तो जातक  अधिक बोलने वाला और हमेशा खुश रहने वाला होता है। 
  • बुध की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सर्व कार्य करने में माहिर परंतु गलत लोगों से मित्रता करने वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि शनि पर हो तो जातक दूसरों की मदद करने वाला होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सोने-चाँदी से बने आभूषणों का व्यापारी होगा। 

स्वाति नक्षत्र में शनि | When Saturn is in Swati – Prediction

शनि का स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक कठिन परिश्रम करने के कारण अपने व्यापार में सफल और अच्छा धन प्राप्त करने वाला होता है। अधिक मित्रमंडली के कारण कम शत्रुओं वाला होता है। जातक समाज में जात-पात का भेद न करने वाला बल्कि सबको एक समान सम्मान देने वाला होता है। 

शनि का स्वाति नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक अच्छा और सफल व्यापारी, समान बेचने और खरीदने का अच्छा हुनर होता है। जातक कभी भी किसी के सामने अपने आपको कमजोर साबित नही होने देता है। इसीलिए जातक को समाज और मार्केट में व्यापार का राजा माना जाता है। 

शनि का स्वाति नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक भाग्यवान, अपनी मेहनत से दुनिया में सब पाने की इच्छाशक्ति रखने वाला, परिवार में बड़ा होने के कारण सभी कार्यों को संभालने वाला होता है। जातक परम्पराओं को मानने वाला होता है। सुंदर और सभ्यतादार पत्नी वाला होता है।

शनि का स्वाति नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक दयावान, धर्म को मानने वाला, धार्मिक स्थलों पर नियमों का पालन करने वाला, अपने कार्यों के प्रति उत्साहित रहने वाले और पूरा करने की हिम्मत रखने वाले होते हैं। जातक कभी-कभी अपनी छोटी-छोटी गलतियों के कारण बड़ी बीमारी का शिकार हो जाता है।


स्वाति नक्षत्र में राहु | When Rahu is in Swati – Prediction

राहु का स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक निर्दयी, लोगों के साथ गलत करने के कारण समाज में गलत बताया जाने वाला, अपनी सहनभूति के आगे दूसरों को पागल समझने वाला, अनेक प्रकार की समस्याओं में उलझा हुआ जिसके कारण जीवन में परेशानियों का सामना करने वाला होता है। 

राहु का स्वाति नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक अपनी गलतियों के कारण अपना धन बरवाद करने वाला जिसके कारण गरीब और निर्धन होता है जातक अच्छे कार्यों से दूर बुरे कार्यों में ज्यादा लगाव रखता है लेकिन कभी-कभी अगर इनका मूड हो तो ये किसी भी अच्छे या बुरे कार्य में अपना लगाव नही रखते हैं।

राहु का स्वाति नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक गठीले शरीर वाला जिसके कारण भीड़ में आसानी से पहचाना जाने वाला, खाने-पीने और अच्छे -अच्छे कपड़े पहनने का शौकीन होता है। जातक वात रोग से पीड़ित होने के कारण कई परेशानियों का सामना करने वाला होता है। 

राहु का स्वाति नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक दूध, दही और मिष्ठान से जुड़े व्यापार करने वाला होगा। जातक अपने व्यापार को छोटे स्तर से शुरू करके बड़े स्तर तक पहुंचाने वाला होगा। जातक जरूरतमंदों की सहायता करने वाला होता है। जातक अच्छे स्वभाव वाला होता है जातक को बचपन में हुई किसी समस्या के कारण हाथ या पैर में परेशानी रहती है।


स्वाति नक्षत्र में केतु | When Ketu is in Swati – Prediction

केतु का स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक लंबी उम्र जीने वाला, वीर-योद्धा, अलग-अलग प्रकार के शस्त्रों का ज्ञाता होता है। जातक नाचने गाने का शौकीन और नृत्य कला में महरथ प्राप्त करने की इच्छा रखने वाला होता है। 

केतु का स्वाति नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक समाज में लोगों के बीच अच्छा व्यवहार करने वाला, धन-दौलत के लिए इधर-उधर भटकने वाला, स्त्री प्रेम पाने के लिए दुखी परंतु जब किसी स्त्री के संपर्क में आता है तो उसे सारा सुख प्राप्त हो जाता है। जातक न ज्यादा धनवान और न ज्यादा गरीब यानि मध्यम स्तर का होता है। 

केतु का स्वाति नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक चाहे कितना भी धनवान हो जाय लेकिन वह मित्रता मध्यम अथवा निम्न स्तर के लोगों के साथ ही करता है। जातक जरूरतमन्द लोगो की मदद करने में पीछे नही हट्टा है। 

केतु का स्वाति नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक विभिन्न शक्तियों को प्राप्त करने वाला, सरकार की तरफ से अनेक प्रकार के अधिकार प्राप्त करने वाला परंतु जातक अपना घर चलाने भर का ही पैसा कमा पाता है लेकिन वह कोशिश करता है की ऊपरी कमाई हो जाय परंतु असफल रहता है लेकिन उसके बाद भी वह खुशहाल जीवन यापन करता है। 

स्वाति नक्षत्र
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