रोहिणी नक्षत्र फल लाभ हानि विशेषताएँ | Rohini Nakshatra

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रोहिणी नक्षत्र Rohini Nakshatra

रोहिणी नक्षत्र ( Rohini Nakshatra )

रोहिणी नक्षत्र का क्षेत्रफल 40 डिग्री 00 अंश  से 53 डिग्री 20 अंश का होता है। रोहिणी नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह रथ की स्थिति में 5 तारो को माना जाता है। रोहिणी नक्षत्र को सभी देशों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है, जैसे – ग्रीक में अल्डेबरन (Aldebaran ), अरब मंजिल में अल डबरन ( Al Dabaran ) और चीन में पई ( Pi ) के नाम से जाना जाता है। रोहिणी नक्षत्र के नाम को लेकर विद्वानों के अपने-अपने अलग-अलग मत हैं जैसे- बलराम की माता का नाम रोहिणी था आदि।

ज्योतिष शास्त्र के मतानुसार रोहिणी नक्षत्र को मौखिक रूप से लाल गाय, चंद्रमा की धर्मपत्नी, ऋषि कश्यप और सुरभी की बेटी, रक्त का संचालक और ऊर्जा से जाना जाता है। दक्षिणी भारत वासियों के मतानुसार रोहिणी नक्षत्र को वट वृक्ष की तरह दिखने वाला 42 तारों का समूह माना जाता है। रोहिणी नक्षत्र को सभी नक्षत्रों में सबसे प्रिय नक्षत्र माना गया है। कुकर्मी और पापियों से मुक्ति दिलाने वाले श्री कृष्ण का जन्म भी रहिणी नक्षत्र में हुआ था।

रोहिणी नक्षत्र को 27 नक्षत्रों में चौथा ध्रुव संज्ञक नक्षत्र माना गया है। इस नक्षत्र के 5 तारे होते हैं। रोहिणी नक्षत्र का मुख्य शब्द रोहण हैं जिसका अर्थ अस्तित्व में होना या प्रकट होना होता है। विद्वानों के मतानुसार रोहिणी नक्षत्र को दूसरे नाम सुगंधित या अलौकिक ( कामधेनु ) से भी जाना जाता है। रोहिणी नक्षत्र का आकार रथ के सामान दिखने वाला होता है।


रोहिणी नक्षत्र के उपाय | Rohini Nakshatra Remedy 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में जन्म नक्षत्र रोहिणी है और जातक को जीवन में संकटों का सामना करना पड़ रहा है तो जातक अपने जीवन में संकटों को कम करने और अशुभ प्रभावों को दूर भगाने के लिए रोहिणी नक्षत्र के उपाय और मंत्र कर सकता है, जिससे लाभ मिलेगा। रोहिणी नक्षत्र के उपाय और मंत्र कुछ इस प्रकार है- 

  • रोहिणी नक्षत्र के बीज मंत्र ” ऊँ ऋं ऊँ लृं ” का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए।  
  • गाय को चारा, पानी रोटी आदि खिलाकर उसकी सेवा करें।
  • किसी गरीब मूर्तिकार, कुम्हार, धोबी या फिर शिल्पकार जैसे मिस्त्री की मदद करें। 
  • आप सफेद, पीला या क्रीम कलर के वस्त्रों का अधिक उपयोग करें इससे आपकी सहनशक्ति बढ़ेगी। 
  • किसी अच्छे पंडित ( ब्राह्मण ) को घी, बर्तन, वस्त्र आदि दान में दें।
  • उपामार्ग की जड़ सुखकर गले में धारण करें इससे रोहिणी नक्षत्र के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। 

यदि किसी जातक को इन उपायों के बाद भी सकारात्मक बदलाव नही दिख रहे हैं तो वह रोहिणी नक्षत्र के वैदिक मंत्र को 108 बार उच्चारण करके हवन में आहुती दे सकता है इससे आपको ऊर्जा मिलेगी और जीवन में परेशानियाँ कम होंगी। जातक को वैदिक मंत्र का उच्चारण और हवन करने की विधि सही पता होनी चाहिए, अन्यथा इसका लाभ आपको नही मिल पाएगा। रोहिणी नक्षत्र का वैदिक मंत्र कुछ इस प्रकार है- 

ब्रह्मजज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्विसीमत: सुरुचोव्वेनआव: सबुघ्न्या उपमा

अस्य विष्ठा: सतश्चयोनिमसतश्चत्विव: ब्रह्मणे नम:।।


यह एक सामान्य विधि है परंतु अगर आप प्रबल और सटीक परिणाम चाहते हैं तो आपको अपनी कुंडली के आधार पर विधि और मंत्र लेना चाहिए।


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रोहणी नक्षत्र फल लाभ एवं विशेषताएँ | Rohini Nakshatra 

प्राचीन समय में नक्षत्र ज्ञान ( नक्षत्र विद्या ) की महत्वता और मान्यता की अवस्था उच्च थी और यह फलादेश का मुख्य आधार माना जाता था। इसी मान्यता को वर्तमान समय में वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज भी उतनी ही महत्वता दी जाती है। ज्योतिष शास्त्र में किसी भी कार्य को पूर्ण करने में नक्षत्र फलादेश ही मुख्य माना जाता है। नक्षत्रों से जातक के कर्मों के अनुसार उसके स्वभाव, वस्तुगत विशेषताएँ, नामकरण और दुखों आदी का वर्णन किया जाता है। 

यदि देखा जाए तो वेदों में सूर्य और चंद्र के अलावा किसी अन्य ग्रह या राशियों का बखान नही किया गया है। इसी कारण ज्योतिष शास्त्र में सभी नौ ग्रहों का फलादेश नक्षत्र चरण पद के अनुसार किया जाता है।


रोहिणी नक्षत्र की कथा पौराणिक कहानी | Rohini Nakshatra mythological story

रोहिणी नक्षत्र के देवता ब्रम्हा देव है। प्राचीन कथाओं के अनुसार ब्रह्माण्ड की रचना करने वाले ब्रह्मा जी हैं। ब्रह्मा जी का जन्म भगवान विष्णु की तुंदी ( कस्तुरी ) से माना जाता है, ब्रह्मा जी की धर्मपत्नी जिनका नाम सरस्वती था। जातक के जीवन में सरस्वती और बृहमा जी का बास जातक के व्यक्तिगत व्यवहार को दर्शाता है। ब्रह्म पुराण के अनुसार बताया गया है की ब्रह्मा जी और सरस्वती के द्वारा एक पुत्र हुआ जिसका नाम मनु था जिससे मानव जाती की उत्पत्ति हुई।

ब्रह्म पुत्र मनु ने संसार की रचना के लिए 11 प्रजापति उत्पन्न किए। जिससे यह पता चलता है की रोहिणी दक्ष प्रजापति की पुत्री थी। प्रजापति दक्ष की 27 कन्याओं में रोहिणी का विवाह चंद्रमा से हुआ। प्राचीन कथाओं के अनुसार बताया गया है की चंद्रमा रोहिणी को सबसे ज्यादा स्नेह करता था। जिससे रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों के नयन बड़े ही नशीले, प्रभावी और आकर्षक होते हैं। 


रोहिणी नक्षत्र की विशेषताएँ | Rohini Nakshatra Importance

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बताया गया है की रोहिणी को आभूषण युक्त शृंगार करना बेहद पसंद है क्योंकि रोहिणी के पति चंद्रमा उसे बेहद प्यार करते है। जिसके कारण रोहिणी खुद को सजाना सवारना ज्यादा पसंद करती है। जैसे- सुंदर और साफ वस्त्र धारण करना, आभूषणों से अपने अंग की शोभा बढ़ाना आदि। ज्योतिषीय मतानुसार बताया गया है की रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक भाग्यवान और लालची स्वभाव का होता है, जिसके कारण समाज में ज़्यादातर लोग इनसे नफरत करते हैं। रोहिणी नक्षत्र स्त्री जातक के लिए बेहद लाभकारी और अच्छा माना जाता है। ब्रह्मांड में अधिकतर सुंदर और रूपवान स्त्रियॉं का जन्म रोहिणी नक्षत्र में ही हुआ है। 

रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों की सबसे खास बात है इनकी मुखाकृति गोल, नाजुक शरीर, नशीले नेत्र और संभोग की तीव्र इच्छा रखने वाले होते हैं। 


रोहिणी नक्षत्र के प्रचलित लोग | Rohini Nakshatra Famous Personality

1. योगिराज श्रीकृष्ण  

2. ओशो रजनीश 

3. महारानी विक्टोरिया प्रथम 


रोहिणी नक्षत्र फलादेश | रोहिणी नक्षत्र का फल | Rohini Nakshatra Prediction

रोहिणी नक्षत्र बेहद अच्छा और रजोगुणी स्त्री नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र को दक्षिण दिशा का मालिक ( स्वामी ) कहा जाता है। 

जाति –          शूद्र 

योनि –          सर्प

योनि वैर –     नकुल

गण –            मनुष्य अंत नाड़ी 

इस नक्षत्र के जातकों के नेत्र बेहद आकर्षक और मोहित करने वाले होते हैं। जातक स्त्री सौन्दर्य कला में निपुण, रूपवान, लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला, मधुरभाषी, समाज में अच्छे प्रवचन देने वाला, अंश से संबन्धित जलन करने वाला, ईश्वर प्रेमी, गंभीर मनन और विचार करने वाला होता है। ये शांत स्वभाव, प्रेम वासना में लिप्त, समाज में सम्मानित और मनोरंजन करने वाले होते हैं। 

गुणवत्ता-  रोहिणी की उत्पादन शक्ति अधिक, खेती-बाड़ी और सभ्यता की पहचान कराने वाला होता है। यह एक उत्पाक नक्षत्र है। जिसे प्रगतिशील परिवर्तन की नीव भी कहा गया है। यह नक्षत्र सोचने की क्षमता, मदद, कुछ अलग करना, कला प्रेमी, स्वंम पर निर्भर रहना, बेहतर कार्य, परिवार का रखवाला, मौके का फायदा उठाने वाला, नय कार्यों को लगन से करने का कारक कहा जाता है।


रोहिणी नक्षत्र के पुरुष जातक | Impact of Rohini Nakshatra on Male 

रोहिणी नक्षत्र के पुरुष जातक दिखने में कमजोर, चौड़े कंधे वाले, बड़ी-बड़ी आँखों वाले, कोमल शरीर परंतु अन्य ग्रहों के दुष्प्रभावों से ये भारी और मोटे शरीर वाले भी होते हैं। इस नक्षत्र के जातक छोटी सी बात पर भड़कने वाले, गुस्सा करने वाले परंतु इनका गुस्सा ज्यादा देर तक नही रहता बहुत जल्द शांत हो जाता है। ये अपने वादे के पक्के, अपने विचारों पर खरे उतरने वाले, अपने से छोटो लोगों में कमी देखने वाले, किसी भी बात को जल्द ही भूल जाने वाले, कमजोर लोगों को सताने वाला, सच का साथ देने वाले, हठी, दूसरों की बात पर जल्दी भरोषा न करने वाले होते हैं। 

रोहिणी नक्षत्र के पुरुष जातकों की एक खास बात यह है की ये अपने कार्यों को बहुत ईमानदारी, धैर्य और मन लगाकर करते है। ये अपने विचारो के अनुसार काम करना पसंद करते हैं, जिसके कारण लोगों की नज़र में ये गिरे हुए भी साबित हो जाते हैं। इस नक्षत्र के जातको को 18 वर्ष की उम्र से लेकर 36 वर्ष की उम्र तक अपने आर्थिक जीवन, शिक्षा और सेहत के लिए परेशान होना पड़ता है। जिसे एक प्रकार की परीक्षा का समय कहा जाता है यानि इस उम्र में इनकी परीक्षा ली जाती है उसके बाद ये सुख का आनंद ले पाते हैं। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देखा गया है की इस नक्षत्र के पुरुष जातक 36 वर्ष की उम्र के बाद 67 वर्ष की उम्र तक अपने जीवन में सुख का आनंद ले पाने में सक्षम रहते हैं। ये लंबा जीवन यापन करने की इच्छा रखने वाले, मृत्यु से डरने वाले और अपनी सेहत के प्रति सतर्क रहने वाले होते हैं। इनका विचार सबसे अलग होता है जिसके कारण ये जल्दी किसी पर भरोषा नही करते हैं। ये अपनी आवश्यकता के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं जिसके कारण अक्सर इनका दांपत्य जीवन दुखदपूर्ण रहता है।


रोहिणी नक्षत्र के स्त्री जातक | Impact of Rohini Nakshatra on Female 

रोहिणी नक्षत्र के स्त्री जातक दिखने में सुंदर, कोमल शरीर वाले, गोरे रंग वाले, पतले और आकर्षक नयन वाले, लंबाई न कम होती है और न ज्यादा जिसके कारण इन्हे मध्य कद वाला कहा जाता है। ये रानी के समान सम्मानित, भगवान पर भरोषा करने वाले, सभी लोकों का ज्ञान रखने वाले, ज्ञानी, चतुराई से काम करने वाले, प्यार के प्रति आकर्षण बनाए रखने वाले, जीवन का आनंद लेने वाले, खुश रहने वाले, जल्दी घबराने वाले ( कमजोर हृदय वाले ) , बात-बात पर क्रोधित होने वाला, परेशानियों को बुलबा देने वाले, छुपारुशतम, लोगो से अच्छा व्यवहार रखने वाले, बुराई करने वाले लोगों के साथ रहने वाले होते हैं। 

इस नक्षत्र के जातक पढ़ने में ज्यादा तेज नही होते हैं, काम को दिमाग लगाकर करने वाले होते हैं। ज्योतिषीय मतानुसार रोहिणी नक्षत्र के स्त्री जातकों को अपने वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाए रखने के लिए अपनी जिद को त्यागकर रहना चाहिए। ये अपने जीवनसाथी [ पति ] पर शक न करें अन्यथा इनके बीच आपसी मतभेद होंगे जिसके कारण तलाक की स्थिति पैदा हो सकती है। ये स्त्रियाँ अपने परिवार में खुशियाँ बनाए रखने का प्रयास करती हैं जिसके कारण ये अपने बच्चों और पति को बहुत प्यार भी करती हैं।  


प्राचीन ऋषिमुनियों व आचार्यों के अनुसार रोहिणी नक्षत्र | Rohini Nakshatra

रोहिणी नक्षत्र के जातक सुंदर मन वाले, निर्मल, साफ सुथरे, पवित्र, विश्वसनीय, अच्छा बोलने वाले, चरित्रवान, स्वाभाविक होते हैं ———- ऋषि वराहमिहिर

इस नक्षत्र के जातक सुंदर रूप वाले, सच के साथ रहने वाले, अपने कार्यों को धैर्य के साथ करने वाले, अपने गुस्से को काबू में रखने वाले, शास्त्रों का ज्ञान रखने वाले, दान देने वाले, पशुओं का पालन पोषण करने वाले, कम बोलने वाले, सकारात्मक विचारों वाले, कम शब्दों में बड़ी बात कहने वाले, संभोग करने के लिए बहुत उतावले रहने वाले होते हैं —— ऋषि नारद

 अगर देखा जाए तो इसके अलावा भी इस नक्षत्र के जातक बोलने में माहिर, अपनी बातों से दूसरों का दिल जीतने वाले होते हैं। ये बातों बातों में ही दूसरों के मन को पढ़ लेते हैं। इनका चलने का अंदाज कुछ अलग ही होता है, जिसके कारण इन्हे लोग बेहद आकर्षक समझते हैं। ये अच्छे चरित्र वाले होते हैं ——– ऋषि पराशर 

इस नक्षत्र के जातकों को खेती-बाड़ी में बहुत ज्यादा रुचि होती है ये अच्छे कर्म करने वाले, धर्म को मानने वाले और ईश्वर पर विश्वास रखने वाले होते हैं। जातक भरण के मतानुसार सुंदर, अच्छा धन कमाना और आकर्षक व्यक्तित्व ही इनकी विशेषता होती है ——-  जातक भरण 

चंद्र – 

       चन्द्र  में अगर रोहिणी नक्षत्र हो तो जातक मनोहर, तेज दिमाग वाला, शक्तिशाली, डांस में रुचिवान, समाज का सेवक, राजनीतिज्ञ, खुश रहने वाला, मजबूत शरीर वाला और संगीतकार होता है। इस नक्षत्र में चन्द्र के प्रहाव से जातक कार्यों के प्रति चतुर, दूसरों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला, ईमानदार होता है। ये संतान प्रेमी, कलाकार, संगीतकार, सभा के आयोग्य, भौतिकवादी होते हैं।

सूर्य- 

        सूर्य में अगर रोहिणी नक्षत्र है तो वह जातक रूपवान, कार्यों को अच्छे ढंग से करने वाला, मनमोहक, सकारात्मक विचार वाला, अधिक लोगों से मित्रता रखने वाला, समाज में लोगों के द्वारा अधिक पसंद किया जाने वाला होता है।

लग्न –

        लग्न अगर रोहिणी नक्षत्र में हो तो जातक सुंदर दिखने वाला, मनमोहक, अपनी ओर आकर्षित करने वाले नेत्र, पैसे वाला, चमत्कार जैसे कार्य करने वाला, लोगों के द्वारा पसंद किया जाने वाला, ताकतबर, राजनीति में रुचि रखने वाला, रोमांटिक, स्त्री प्रेमी होता है, संभोग करने का लती होता है। 


रोहिणी नक्षत्र का चरण फल | Prediction of Rohini Nakshatra Charan pada

प्रत्येक नक्षत्र में चार चरण होते हैं जिसमें एक चरण 3 अंश 20 कला का होता है। नवमांश की तरह होता है जिसका मतलब यह है की इससे नौवे भाग का फलीभूत मिलता है सभी चरणों में तीन ग्रहों का प्रभाव होता है जो इस प्रकार है – राशि वृषभ, नक्षत्र स्वामी चंद्र, देवता ब्रह्मा। 

रोहिणी नक्षत्र का प्रथम चरण | Prediction of Rohini Nakshatra First Charan pada

इस चरण का स्वामी मंगल है। इस नक्षत्र में शुक्र, चंद्र, और मंगल का प्रभाव होता है। राशि वृषभ 40 अंश 00 कला से 43 अंश 20 कला क्षेत्रफल है। नवमांश मेष ! यह जातक के शारीरिक सुख, आत्मा संबंधी या आत्मा परमात्मा के संबंध में चिन्तन-मनन, भोग का कारक होता है। जातक छोटे पेट वाला, नुकीली आँखों वाला, गुस्सा करने वाला, दूसरों को दुख देने वाला तथा दूसरों की संपत्ति को अपना बनाने वाला होता है। ये जातक लालची, कड़वे शब्द बोलने वाले, सुंदर रूप वाले परंतु नखरीली नजर और छाला वाले होते हैं।

रोहिणी नक्षत्र का द्वितीय चरण | Prediction of Rohini Nakshatra Second Charan pada 

इस चरण का स्वामी शुक्र है। इस नक्षत्र में शुक्र, चंद्र और शुक्र का प्रभाव होता है। राशि वृषभ 43 अंश 20 कला से 46 अंश 40 कला क्षेत्रफल है। नवमांश वृषभ। यह एक विषम स्थिति, यथार्थवाद और पूर्ण परिवर्तन का कारक होता है। इस चरण के जातक बड़ी-बड़ी आँखों वाले, पशुओं की तरह मुख वाले, लंबी और ऊंची नाक वाले, काले और घने बाल वाले, चौड़े कंधे वाले, चौड़ी कमर वाले, गोरे रंग वाले, बुरी आदतों वाले, सोच समझकर बोलने वाले, बीमारियों से ग्रसित परंतु उनका सामना करने वाले होते हैं।

रोहिणी नक्षत्र का तृतीय चरण | Prediction of Rohini Nakshatra Third Charan pada 

इस चरण का स्वामी बुध है। इस नक्षत्र में शुक्र, चंद्र और बुध का प्रभाव होता है। राशि वृषभ 46 अंश 40 कला से 50 अंश 00 कला तक क्षेत्रफल है। नवमांश मिथुन ! यह व्यापार, तैयार करना, लचक, टेड़े होने की क्रिया, कठोरता, धन दौलत का कारक होता है। इस नक्षत्र के जातक स्थिर, अच्छे नयन वाला, मुलायम शरीर, दूसरों को मोहित करने वाला, मधुरभाषी, हसी मज़ाक वाला, गुणवान, अधिक बोलने वाला, सच्चा भक्त, दान करने वाला, गणित में ज्ञानी, समाज में प्रशंसा योग्य, धर्म को मानने वाला और खुशहाल होता है। 

रोहिणी नक्षत्र का चतुर्थ चरण | Prediction of Rohini Nakshatra Fourth Charan pada

इसका स्वामी चंद्र हैं। इस नक्षत्र में शुक्र चंद्र और चंद्र का प्रभाव होता है। राशि वृषभ 50 अंश 00 कला से 53 अंश 20 कला क्षेत्रफल तक है। नवमांश कर्क ! यह एक भौतिक सुरक्षा, माता पक्ष, स्वामित्व का कारक होता है। जातक माता-पुत्र वाला, स्त्री प्रेमी, पतली और लंबी नाक वाला, बड़े बड़े नेत्रों वाले, लंबे हाथ पैर वाले, अपने बड़ों का चहीता होता है। इस चरण में जन्मे जातक पैसे वाले, दूसरों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले, दूसरों के मन को पढ़ने वाले, भविष्यवाणी करने वाला, ज्ञानी, खुशहाल जीवन यापन करने वाले होते हैं। 


रोहिणी नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष आचार्यों ने सूत्र रूप में बताया है लेकिन यह फलित में बहुत ज्यादा बदलाव हुआ है। 

यवनाचार्य- 

              जातक इस नक्षत्र के प्रथम चरण में भाग्यवान, द्वितीय चरण में दुखदाई, तृतीय चरण में डरा हुआ और चतुर्थ चरण में सच के साथ रहने वाला होता है।

मानसागराचार्य – 

                     जातक नक्षत्र के प्रथम चरण में अच्छे प्रभावों वाला, द्वितीय चरण में ज्ञानी, तृतीय चरण में अच्छे भाग्य वाला और चतुर्थ चरण में परिवार का आभूषण होता है। 


 रोहिणी नक्षत्र का चरण ग्रह फल | Rohini Nakshatra Prediction based on planets 

भारतीय ज्योतिष आचार्यों के मतानुसार सूर्य, बुध और शुक्र इन ग्रहों की पूरी तरह अवलोकन या चरण दृष्टि होती है, क्योंकि सूर्य ग्रह से बुध ग्रह 28 अंश और शुक्र 48 अंश से दूर नही जा सकता है।


सूर्य – Sun [ रोहिणी नक्षत्र में सूर्य ] 

रोहिणी नक्षत्र
  • यदि चन्द्र की दृष्टि सूर्य पर हो तो वह जातक स्त्री वर्ग में आने वाले सभी लोगों की मदद करता है, उनके लिए जरूरी कार्यों का निर्माण करेगा।  
  • जब मंगल की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक युद्ध काला में माहिर, धनवान, कीर्तिमान होगा। 
  • जब गुरु की दृष्टि सूर्य पर हो तो वह जातक समाज सेवक, राजनीति में लगाव रखने वाला, आदर-सम्मान करने वाला, प्रसिद्ध होगा। 
  • शनि की दृष्टि सूर्य पर हो तो वह जातक सेहत से जुड़ी परेशानियों से घिरा हुआ, आर्थिक तंगी के कारण निर्धन की तरह जीवन यापन करने वाला और अपने जीवनसाथी के विपक्ष में रहने वाला होता है।

रोहिणी नक्षत्र में सूर्य | When sun is in Rohini Nakshatra – Prediction

सूर्य का रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक अच्छे कपड़े पहनने वाला, सौक रखने वाला, बेचने- खरीदने के साथ-साथ लोगों को नौकरी देने वाला होता है। जातक को दिमाग या नशों से संबन्धित बीमारी अथवा ऐसे रोग से ग्रसित होता है जो छूने से फैलता है। 

सूर्य का रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में सूर्य के प्रभाव से जातक खुश रहने वाला, लोगों को अपनी ओर प्रभावित करने वाला रहता है। जातक अपना जीवन यापन तरल पदार्थों से करने वाला होता है। जातक छोटी मोटी स्वास्थ्य परेशानियाँ जैसे सिर दर्द, पेट की समस्या आदि से पीड़ित रहता है। जातक पानी से डरने वाला, गहरे पानी में न नहाने वाला होता है। अगर इस चरण में सूर्य मंगल के साथ मिलन करता है तो जातक कानूनी किसी विभाग में उच्च पद का अधिकारी होता है। 

सूर्य का रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में सूर्य के प्रभाव से जातक सामाजिक कार्य करने वाला, ईमानदार और दयालु होता है। ये जातक हिचकी जैसे रोग से ग्रसित रह सकते हैं। इस चरण में स्त्री जातक को मासिक धर्म जैसे रोग से ग्रसित रहती हैं। इन्हे पानी से दर लगता है सबसे ज्यादा इन्हे डूबने का दर लगता है। 

सूर्य का रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में सूर्य के प्रभाव से जातक सरकारी नौकर हो सकता है, जिसके कारण जातक को अपनी इच्छा से ज्यादा यात्राएं करनी पड़ती हैं। जातक अपनी पत्नी की बात मानने वाला होता है, परंतु अन्य स्त्रियॉं को परूषों से नीचा और कमजोर मानता है।     


चन्द्र – Moon [ रोहिणी नक्षत्र में चन्द्र ] 

रोहिणी नक्षत्र
  • यदि सूर्य की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक सुखमय जीवन यापन करने वाला, वाहन सुख का आनंद लेने वाला, जमीदार, किसान, काला-जादू, तंत्र-मंत्र आदि से अपना जीवन यापन करेगा। 
  • यदि मंगल की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक स्त्रियों की ओर आकर्षित होने वाला, अपने घर-परिवार में सबका लाडला, अच्छे विचारों के साथ जीवन यापन करने वाला होगा। 
  • यदि बुध की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक ज्ञानी, अनेक विधाएँ जानने वाला, मंजिल को पाने की इच्छा रखने वाला होगा। 
  • यदि गुरु की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक अपने पूर्वजों का सम्मान करने वाला, कर्म के अनुसार फल की चिंता करने वाला, धर्म को मानने वाला ( धार्मिक ) होगा। 
  • यदि शुक्र की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक सर्व सुख सम्पन्न ( घर, वाहन, नौकर-चाकर, वस्त्राभूषण आदि ) होगा। 
  • यदि शनि की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक माता पक्ष से दुखी ( जैसे माता का कम उम्र में ही देहांत हो जाना आदि ), पिता पक्ष से भी दुखी ( जैसे पिता का सहयोग न मिलना ) होगा। 

रोहिणी नक्षत्र में चन्द्र | When Moon is in Rohini Nakshatra – Prediction

चन्द्र का रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक चन्द्र के प्रभाव से खुशहाल, मधुरभाषी, अपने बच्चों से प्रेम करने वाला, खेती, पशुओं से संबन्धित किसी कार्य से अपना जीवन यापन करेगा। 4 से अधिक भाई-बहनों वाला, कान में दर्द जैसी पीड़ा से ग्रसित होगा। 

चन्द्र का रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक अशिक्षित या फिर अधूरे ज्ञान वाला रहता है। कलाओं में निपुण होता है। घर की समस्या के कारण एक स्थान पर नही रह पाता है। इस चरण की स्त्रियाँ चरित्र को बेचने वाली, नीति विरुद्ध होती हैं, जिसका बुरा परिणाम इन्हे झेलना पड़ता है। 

चन्द्र का रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक खुश रहने वाला, किसी भी काम को करने की शक्ति रखने वाला, स्वाभाविक, विश्वास के योग्य, विलक्षण बौद्धिक शक्ति का धनी होता है। स्त्री जातक से संबन्धित बिजनेस ( वस्त्र, आभूषण आदि )  करके अपना जीवन यापन करने वाला होता है। 

चन्द्र का रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक  सोने-चाँदी, रत्नों से संबन्धित बिजनेस करने वाला, भाग-दौड़ करने वाली जॉब, घर संबंधी चीजों का विक्रय करके अपना जीवन यापन करेगा। चन्द्र के प्रभाव से स्त्रियों के पास वस्त्र आभूषण, नौकर-चाकर, वाहन आदि होते हैं। इसे मासिक धर्म ( पीरियड ) और हाथ पैरों, कमर दर्द से जूझना पड़ता है।  


मंगल – Mars [ रोहिणी नक्षत्र में मंगल ] 

रोहिणी नक्षत्र
  • सूर्य की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक पहाड़ी इलाके में रहकर अपना जीवन यापन करेगा, जिसके कारण परिवार और जीवनसाथी को खुशी नही दे पाएगा। 
  • चन्द्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक माता-पिता के कहे अनुसार न चलकर अपनी मर्जी से कार्य करेगा, सुंदर स्त्रियॉं के सानिध्य में रहेगा।
  • बुध की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक धर्म को मानने वाला, ज्ञानी, शक्तिशाली, प्रभावशाली परंतु स्वभाव बहुत बूटा होता है। 
  • गुरु की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक अपने परिवार के हित में सोचता हुआ उनके साथ रहेगा और उनकी मदद के लिए सदैव तैयार रहेगा। 
  • शुक्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक प्रचलित राजनीति का ज्ञाता होगा। 
  • शनि की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक बुद्धिमान, सकारात्मक विचारों वाला, समाज सेवक होगा। 

रोहिणी नक्षत्र में मंगल | When Mars is in Rohini Nakshatra – Prediction

मंगल का रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक वाघ यंत्र प्रेमी, गायक होता है। जातक संगीतकार, गलतियों के रोग से ग्रसित होता है।

मंगल का रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल  

इस चरण में अगर मंगल और सूर्य का मिलन हो तो ऐसे में जातक फौजी या फौज में उच्च पद का अधिकारी होता है। ये पने जीवन में कभी-कभी कभी-कभी बहुत गलत फैसले ले लेते हैं। जिसका कारण बुध और राहु का मिलन होता है। 

मंगल का रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक अकेले रहना पसंद करने वाला, चतुर, समाज में सम्मानित, विद्वान, संतान या पूर्वजों की मृत्यु से निराश, स्त्री जातक की तरफ से दुखी रहने वाला होता है। 

मंगल का रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में मंगल के प्रभाव से जातक खुश सम्पन्न होने के बाद भी बुरी संगत करके शराब, जुआ और स्त्रियॉं के चक्कर में अपना नुकसान करता है। जातक अगर शासकीय अधिकारी होता है तो वह अवैध तरीके से धन कमाने वाला होगा। जातक प्रदेशों की सीमा पर चुंगी आदि दिए बिना चोरी से माल ले आनेवाला होता है। 


बुध – Mercury [ रोहिणी नक्षत्र में बुध ] 

रोहिणी नक्षत्र
  • यदि चंद्र की दृष्टि बुध पर हो तो वह जातक मेहनत से कार्य करने वाला, धन दौलत से सम्पन्न होता है। सरकार की तरफ से अच्छी आम्दानी करेगा। 
  • यदि मंगल की दृष्टि बुध पर हो तो वह जातक पैसे वाले लोगों से अच्छा धन लाभ करेगा, परंतु शनि की दशा के कारण जातक अंतर्दशा में के ठीक उल्टे परिणाम पाएगा। 
  • यदि गूरु की दृष्टि बुध पर हो तो वह जातक सामाजिक स्वभाव, ज्ञानी, लोगों का नेता और प्रचलित होगा। 
  • यदि शनि की दृष्टि बुध पर हो तो वह जातक मनोविज्ञान का ज्ञाता होने के कारण पारिवारिक समस्या से घिरा और दूसरों के द्वारा निरादर किया जाता है। 

 रोहिणी नक्षत्र में बुध | When Mercury is in Rohini Nakshatra – Prediction

बुध का रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक चतुर-चालाक, होनहार, मधुरभाषी, लिखने का कार्य करने वाला, पत्रकारिता से अपना जीवन यापन करने वाला होता है। जातक की पत्नी होनहार विद्वान होती है। ये जातक जल्दी जल्दी बोलने पर हकलाने लगते हैं। 

बुध का रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक विवरणकार, व्याख्याकार, राजनीतिज्ञ, समाज में नेता के समान प्रसिद्ध, भाई-बहनों के लिए दुखी होता है। जातक के प्रजनन अंगों में कमी के कारण नपुंसकता का भी शिकार होते हैं। 

बुध का रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक जरूरत से ज्यादा सोचने वाला, अच्छे स्वभाव वाला, धनवान, भौतिकवादी, स्त्री प्रेम में रत, संभोग करने की तीव्र इच्छा रखने वाला होता है जिसके कारण जातक चरित्रहीन कहा जाता है।

बुध का रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक को अपने रिशतेदारों से लाभ होता है, शत्रुओं को पराजित करने वाला, बहन पक्ष से परेशान होने वाला होता है। अगर बुध शनि से दृष्ट हो तो वह जातक बीमार, दातों में समस्या, मानसिक तनाव, कमजोर हृदय वाला होता है।  


गुरु – Jupiter [ रोहिणी नक्षत्र में गुरु ] 

रोहिणी नक्षत्र
  • यदि सूर्य की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक नौसेना में उच्च पद का अधिकारी होता है। जातक युद्ध के दौरान जख्मी हो सकता है। 
  • यदि चन्द्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक सच बोलने वाला, भाग्यवान, समाज में सम्मान के योग्य, गरीबों की मदद करने वाला होता है। 
  • मंगल की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक के बच्चे शैतान और गुणवान, पत्नी रूपवती होती है। 
  • बुध की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक राजनीति में प्रचलित, मनमोहक, खुशहाल, कलात्मक और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर करने की इच्छा रखने वाला होता है। 
  • शुक्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक भाग्यवान, गरीबों का दानदाता, धन-दौलत से परिपूर्ण होता है। 
  • शनि की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक पूर्वजों की संपत्ति का मालिक बनेगा। किसी संगठन का मुखिया हो सकता है। 

रोहिणी नक्षत्र में गुरु | When Jupiter is in Rohini Nakshatra – Prediction

गुरु का रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक प्राचीनकाल की बातों को मानने वाला, सच का साथ देने वाला, धनवान, स्त्री प्रेम में रत, स्वाभाविक, संतान सुख का धनी होता है। ये जातक रक्त संबंधी बीमारियों से ग्रसित रहते हैं। 

गुरु का रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक धर्म को मानने वाला, पिता का सम्मान करने वाला, ईमानदार, लोगों के बारे में अच्छे विचार रखने वाला, व्यवहारिक, स्वाभाविक, चरित्रवान, जातक खुद के बनाए नियमों पर चलने वाला, पत्नी या बहु का प्रिय होता है।

गुरु का रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक चालाक, पापी, समाज में बुरा बताया जाने वाला, परिवार से दूर रहने वाला, भौतिकवादी, पैसे की तरफ भागने वाला होता है। यह जातक ज्यादा लंबी उम्र ( 50 से 60 वर्ष  से अधिक ) नही जी पाता है, क्योंकि संक्रामक रोग का शिकार होते हैं। 

गुरु का रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक अपने जीवन यापन के लिए अधिक यात्रा करने वाला होता है। 30 से 32 वर्ष तक की उम्र में मेहनत करनी पड़ती है परंतु उसके बाद जीवन का सुख मिलने लगता है। अगर देखा जाए तो लगभग 40 वर्ष तक की उम्र तक छोटी मोटी परेशानियाँ होती रहती हैं। 


शुक्र – Venus [ रोहिणी नक्षत्र में शुक्र ]

रोहिणी नक्षत्र
  • यदि चन्द्र की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक स्त्री जातक से जुड़े ( जैसे – आभूषण, रत्न ) बिजनेस से अपना जीवन यापन करने वाला होता है। जातक काम करने वाला, सुख की ओर भागने वाला, परिवार का भरण पोषण करने वाला होता है। 
  • यदि मंगल की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक गुस्से वाला, गलत कार्यों से धन कमाने वाला, दुखी होता है। 
  • यदि गुरु की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक खुशहाल दांपत्य जीवन वाला, सुंदर और होनहार संतान वाला, ग्रह एवं वाहन सुख का आनंद लेने वाला होता है। 
  • यदि शनि की दृष्टि शुक्र पर हो तो वह जातक धनहीन, सेहत से जुड़ी परेशानियों से घिरा हुआ, समाज में सम्मान के योग्य नही होता है। 

रोहिणी नक्षत्र में शुक्र | When Venus is in Rohini Nakshatra – Prediction

शुक्र का रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक मनमोहक, आनंदमय, धन-दौलत से परिपूर्ण, माता पक्ष से सुखी, परिवार की स्थिति 30 से 35 वर्ष तक की उम्र तक खराब रहती है, उसके बाद पत्नी से तलाक होने जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। 

शुक्र का रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक लेखन का कार्य करने वाला, गायक, कलात्मक, खुशहाल दांपत्य जीवन, संतान सुख प्राप्त होता है। इस चरण में स्त्री जातक को संतान उत्पत्ति या गर्वधारण करने में समस्या होती है। 

शुक्र का रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक सांसारिक सुख प्राप्त करने की इच्छा रखने वाला होता है। ऐसे में जातक का चरित्र गंदा या नीच स्तर का होने के कारण इसे दुखद समय से गुजरना पड़ता है। जातक लोगों के साथ धोखा करने वाला होता है जिसके कारण उसे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। अगर जातक 30 से 35 वर्ष की उम्र तक अपने स्वभाव ( चरित्र ) को नही बदलता है तो उसे प्राइवेट रोगों से गुजरना पड़ता है।

शुक्र का रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक छोटे कद का और कूबड़ा होता है। ऐसे जातकों को गले से जुड़ी दिक्कत होती है, जैसे गलसुआ या चहरे पर सूजन होती है। जातक का विवाह ऐसी स्त्री से होता है जो दिखने में बहुत सुंदर, गौरवशील, भाग्यवान और संपत्तिवान होती है। इस चरण की स्त्रियों का विवाह अनुभावशील पुरुष जातक से होता है। 


शनि – Saturn [ रोहिणी नक्षत्र में शनि ]

रोहिणी नक्षत्र
  • यदि सूर्य की दृष्टि शनि पर हो तो जातक धनहीन और दूसरों के भरोषे जीवन यापन करने वाला होता है।
  • यदि चन्द्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक अच्छे स्वास्थ्य वाला, बिजनेस के क्षेत्र में बड़े व्यापारियों के नीचे कार्य करने वाला होता है। 
  • यदि मंगल की दृष्टि शनि पर हो तो जातक अधिक बोलने वाला, बात-बात पर हसने वाला होता है। 
  • यदि बुध की दृष्टि शनि पर हो तो जातक बुरे स्वभाव वाला, बुरे लोगों की संगत रखने वाला होता है। 
  • यदि गुरु की दृष्टि शनि पर हो तो जातक ईमानदार, बीमार लोगों की मदद करने वाला, सरकारी या प्राइवेट क्षेत्र में उच्च पद का अधिकारी होता है। 
  • शुक्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सोने-चाँदी से जुड़े आभूषण का व्यापार करे वाला, मेहनत के कार्य करने वाला, नशे का सेवन करने वाला होता है।

रोहिणी नक्षत्र में शनि | When Saturn is in Rohini Nakshatra – Prediction

शनि का रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक धर्म को मानने वाला, गलत संगत में रहने वाला, कम उम्र में ही पैसे अधिक खर्च करने वाला लेकिन 40 से 45 वर्ष तक परेशान रहने वाला, शांत स्वभाव वाला, व्यर्थ या अनुचित व्यय करने वाला होता है। जातक को दातों में और क्षय रोग से ग्रसित होता है। 

शनि का रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक विद्वान, आकर्षक, मधुर भाषा बोलने वाला, कम बालों वाला होता है। पेट का चिकित्सक हो सकता है। पशुओं के माध्यम से धनोपार्जन करने वाला होता है। 

शनि का रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक बचपन में बड़ों के समान ज्ञान रखने वाला, धन दौलत से परिपूर्ण, नई-नई चीजों को खोजने के कारण समाज में पुजयनीय, अच्छे विचारों वाला, दांतों की समस्या रहती है। 

शनि का रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक शौकीन, पशुओं के माध्यम से पैसे कमाने वाला, समाज में नेता नगरी करने वाला, राजनीति में उच्च पद का नेता होता है। जातक 45 से 50 वर्ष की उम्र तक अच्छा मंत्री बन जाता है। 60 वर्ष के बाद जातक जीवन में बीमारियों से ग्रसित रहता है, जिसके कारण बचा हुआ जीवन परेशानियों में काटना पड़ता है।


राहु – Rahu [ रोहिणी नक्षत्र में राहु ] 

रोहिणी नक्षत्र में राहु | When Rahu is in Rohini Nakshatra – Prediction

राहु का रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक बहादुर, अधिक खाना खाने के बाद भी कमजोर दिखने वाला होता है। जातक लंबे समय से बदहजमी की समस्या से ग्रसित, आँखों में समस्या होने के कारण कम दिखता है, परंतु लंबी उम्र जीता है। यदि लग्न भी इसी चरण में हो तो राहु जताक की रक्षा करता है। 

राहु का रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक मेहनत करने वाला, मजबूत इच्छाशक्ति वाला, बिजनेस के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है, आत्मविश्वासी होता है। जातक को अधिक खाना खाने की वजह से पेट में समस्या होती है। आँखों में सस्य रहती है। 

राहु का रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक अज्ञानी, कम बुद्धि वाला, दूसरों के भरोषे जीवन यापन करने वाला होता है। जातक 60 से 65 वर्ष की उम्र तक की जीवित रह पाता है क्योंकि इसे मधुमेह रोग या दुर्घटना का शिकार होना पड़ता है। 

राहु का रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक साहित्य प्रेमी या लेखन का कार्य करने वाला होता है। शिक्षा के क्षेत्र में ज्यादा ज्ञानी न होने के बावजूद भी उसी से अपना जीवन यापन करेगा, लेकिन इसी से वह अच्छा विद्वान बन जाता है। 35 से 40 वर्ष तक की उम्र तक ही जातक सफल हो पाता है।  


केतु – Ketu [ रोहिणी नक्षत्र में केतु ]

रोहिणी नक्षत्र में केतु | When Ketu is in Rohini Nakshatra – Prediction

केतु का रोहिणी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक अपने जन्म स्थान से बहुत दूर जाकर अपना जीवन यापन करता है। जातक लंबे समय तक किसी दूसरे के ऊपर निर्भर रहता है और वहीं से भोजन की आशा रखता है। जातक ज्यादा से ज्यादा 60 से 65 वर्ष की उम्र तक ही जीवित रहता है। इस चरण में जन्मे कई जातक गूंगे और अंधे होते हैं। 

केतु का रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक का जीवन तुच्छ होता है। यदि इस चरण में मीन के गुरु या चन्द्र की दृष्टि हो तो जातक 20 से 25 वर्ष तक ही जीवित रहता है। जातक का शरीर कमजोर और आँखों की समस्या पैदाइसी होती है। कई जातक लूले – लिंगड़े होते हैं। 

केतु का रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक साधू संत या सन्यासी होता है। जातक अपने परिवार में सबसे बड़ा होने के कारण 30 वर्ष तक ही सुखमय जीवन जी पाता है उसके बाद बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ता है। जातक की शादी में रुकावटें पैदा होती हैं। 

केतु का रोहिणी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक वैज्ञानिक या विज्ञान क्षेत्र का मार्गदर्शन करने वाला, वेद और शास्त्र का ज्ञान रखने वाला, तंत्र विध्या का ज्ञाता, काला जादू, औषिधियों का जानकार होता है। जातक बोलने में गूंगा या फिर हकलाता है कभी-कभी जातक अंधा भी होता है।   


             * जातक * = ज्योतिषीय विचारों से जिस प्राणी का वर्णन किया जाय उसे जातक कहते हैं।


रोहिणी नक्षत्र
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