मृगशिरा नक्षत्र फल लाभ हानि उपाय एवं विशेषताएँ | Mrigashira Nakshatra

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मृगशिरा नक्षत्र | Mrigashira Nakshatra 

मृगशिरा नक्षत्र mrigashira nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र का क्षेत्रफल 53 डिग्री 20 अंश से 66 डिग्री 40 अंश का होता है। मृगशिरा नक्षत्र को अरब सागर में ” अल हक “, ग्रीक में ” ओरिओनिस ” और चीन में ” त्से ” नाम से जाना जाता है। इस नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह हिरण के सिर से माना गया है, इसीलिए इस नक्षत्र को मृगशिरा नक्षत्र भी कहते हैं। इसे नारियल की आँख के समान दिखने वाला भी कहा जाता है।

मृगशिरा नक्षत्र के देवता चंद्र, स्वामी ग्रह मंगल और राशि वृषभ 23 डिग्री 20 अंश से मिथुन 06 डिग्री 40 अंश का होता है। वृषभ राशि के स्वामी शुक्र और मिथुन राशि का स्वामी बुध है। भारतीय ज्योतिष में 5वां मृदु और मित्र संबंधी संज्ञा से युक्त नक्षत्र माना गया है। मृगशिरा नक्षत्र के तीन तारे होते हैं, जिससे हिरण की आकृति बनती है। यही कारण है वेदों में इस नक्षत्र को मृगशिरा कहा जाने का। मृगशिरा नक्षत्र को मृगशीर्ष के नाम से भी जाना जाता है। इसका चिन्ह मृग होता है। इसीलिए कहा जाता है की इस नक्षत्र का वर्णन सूर्य के समान मिलता झूलता है।

मृगशिरा नक्षत्र का नाम संस्कृत शब्द के मृग + शिर से पड़ा जिसका अर्थ है- मृग यानि जंगल, वन, खोज, नवनिर्माण, शिकारी, प्रदर्शक या स्वंम कार्य करके दूसरों को बताना आदि होता है। ज्योतिष में इस नक्षत्र को सर्वगुण सम्पन्न, शुभ और नपुंसक नक्षत्र बताया गया है। इस नक्षत्र की जाति – कृषक, योनि – सर्प, योनि वैर – नकुल, गण – देव होती है। इसे दक्षिण दिशा का स्वामी होता है। इस नक्षत्र के जातक को बचपन में बीमारियाँ सबसे ज्यादा होती है। स्त्रियॉं को गर्भ से संबंधित समस्या, मासिक धर्म समय से न होना या अधिकतर होना, सांस की समस्या होती है।


मृगशिरा नक्षत्र के उपाय | Mrigashira Nakshatra Remedy

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में जन्म नक्षत्र मृगशिरा है और अशुभ प्रभाव में होकर जातक को जीवन में संकटों का सामना करना पड़ रहा है, तो माँ पार्वती की पूजा अर्चना करनी चाहिए। क्योंकि माँ पार्वती की पूजा करने से जातक को परेशानियों से मुक्ति मिलती है। जिससे जातक के जीवन में सकारात्मक बदलाव होते हैं। जब मृगशिरा माह में मृगशिरा नक्षत्र में चन्द्र हो तो माँ पार्वती की पूजा अत्यधिक लाभकारी परिणाम दायक साबित होती है।

इस नक्षत्र में जन्में जातक अपने जीवन में परेशानियों को कम करने के लिए लाल, गुलाबी, सफ़ेद, हरा, और हल्के हरे रंग के कपड़े पहनकर इसके अशुभ प्रभावों को कम करके शुभ प्रभावों को बढ़ा सकते हैं। मृगशिरा नक्षत्र के देवता चन्द्र की पूजा आराधना करने से जातक के जीवन में मृगशिरा नक्षत्र के अशुभ प्रभावों के कारण होने वाली परेशानी कम होती है, और जीवन में मंगल कार्यों में बढ़ोत्तरी होती हैं।

नक्षत्र देवता चन्द्र की पूजा करने का सही तरीका यह है की चन्द्र देव की आराधना चन्दन, फूल, धूप, दीप, घी और स्वच्छ मन से करनी चाहिए। जिस दिन मृगशिरा नक्षत्र पड़े उस दिन दूध, दही और चावल की भेट गरीबों को दें। इससे बुरे प्रभावों को कम किया जा सकता हैं। ज्योतिषीय मतानुसार बताया गया है की अगर इस नक्षत्र के अशुभ प्रभाव कम न हो तो जयंती नामक औषधि को धो लें और फिर उसे सुखाकर गले में ताबीज की तरह पहन लें इससे मृगशिरा नक्षत्र के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

जातक के लिए सबसे आसाम और सरल उपाय यह है जो जातक के जीवन में होने वाली समस्याओं को खत्म करने में उसकी मदद करेगा। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि जातक सच्चे मन से मृगशिरा नक्षत्र के वैदिक मंत्र का जाप 108 बार करे तो वह अपने जीवन में परेशानियों को कम कर सकते हैं।

मृगशिरा नक्षत्र का वैदिक मंत्र कुछ इस प्रकार है-  

इमम्देवा असपत्न गूं सुबध्वं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठयाय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय ।

इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विषएषवोsमी राजासोमोस्माकं ब्राह्मणानागूं राजा चन्द्रमसे नम: ।।


यह एक सामान्य विधि है परंतु अगर प्रबल और सटीक परिणाम प्राप्ति के लिए आपको अपनी कुंडली के आधार पर विधि और मंत्र लेना चाहिए।


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मृगशिरा नक्षत्र फल लाभ हानि उपाय एवं विशेषताएँ | Mrigashira Nakshatra

प्राचीन समय में नक्षत्र ज्ञान ( नक्षत्र विद्या ) की महत्वता और मान्यता की अवस्था उच्च थी और यह फलादेश का मुख्य आधार माना जाता था। इसी मान्यता को वर्तमान समय में वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज भी उतनी ही महत्वता दी जाती है। ज्योतिष शास्त्र में किसी भी कार्य को पूर्ण करने में नक्षत्र फलादेश ही मुख्य माना जाता है। नक्षत्रों से जातक के कर्मों के अनुसार उसके स्वभाव, वस्तुगत विशेषताएँ, नामकरण और दुखों आदी का वर्णन किया जाता है। 

यदि देखा जाए तो वेदों में सूर्य और चंद्र के अलावा किसी अन्य ग्रह या राशियों का बखान नही किया गया है। इसी कारण ज्योतिष शास्त्र में सभी नौ ग्रहों का फलादेश नक्षत्र चरण पद के अनुसार किया जाता है।

एक नक्षत्र 13 अंश 20 कला क्षेत्रफल का होता है, प्रत्येक नक्षत्र में चार चरण होते है जिसके हिसाब से 27 नक्षत्रों में 108 चरण होते हैं। यही कारण है की किसी भी उपाय के दौरान 108 का फेरा सबसे ज्यादा लाभकारी होता है।  


मृगशिरा नक्षत्र की कथा पौराणिक कहानी | Mrigashira Nakshatra mythological story

मृगशिरा नक्षत्र के देवता चंद्र देव हैं। प्राचीन कथाओं के अनुसार इस नक्षत्र का विवाह मृगशिरा से हुआ था। संस्कृत भाषा का शब्द मृग: जो चंद्रमा के ऊपर लगे कलंक को हरिण के रूप में दर्शाता है। पौराणिक कहानी के माध्यम से हमे यह पता चलता है की मृगशिरा ने अपनी शारीरिक उत्तेजना के चलते किसी नजदीकी के साथ संभोग कर लिया था, जो चंद्रमा के ऊपर लगे कलंक का अवयव है। इसीलिए इस नक्षत्र में चन्द्र से जुड़े सभी गुण तथा असर पाए जाते हैं। इसे खोजी तारा के नाम से भी जाना जाता है जिसे अंग्रेजी भाषा में स्टार ऑफ सर्चिंग कहते हैं।

इस तारे की मदद से विश्व में तमाम सारे नवनिर्माण हुए हैं। भारतीय ज्योतिष के अनुसार समुद्र मंथन भी मृगशिरा नक्षत्र में हुआ था जिसमें से 16 रत्नों की प्राप्ति हुई थी। मृगशिरा नक्षत्र के देवता चन्द्र को पुराणों में सोम भी कहा जाता है। प्राचीन कथाओं के अनुसार कहा जाता है की सोम ने गुरु ( बृहस्पति ) की धर्मपत्नी तारा का शीलभंग कर दिया था जिससे बुध का निर्माण हुआ।

जब बुध की उत्पत्ति हुई तो बृहस्पति ने उन्हे अपनी संतान मानने से मना कर दिया लेकिन कुछ समय बाद बुध के आकर्षण और स्वभाव को देख बृहस्पति उनकी ओर मोहित हो उठे जिससे उन्होने बुध को अपना लिया और उन्हे अपने पुत्र का दर्जा दे दिया। इसीलिए बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा से संभोग भी चन्द्र में कलंक का कारण माना जाता है। जिससे यह भी पता चलता है की चन्द्रमा के अंदर इतनी शक्ति है की वे मनुष्य के मन में अहंकार की भावना उत्पन्न कर सकते हैं।


मृगशिरा नक्षत्र की विशेषताएँ | Mrigashira Nakshatra Importance

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बताया गया है की इस नक्षत्र का आधा भाग वृषभ राशि में है और आधा भाव मिथुन राशि में है। इसीलिए इस नक्षत्र को रूपवान, सुंदर और चमकीले चहरे को खोजने, कुंवारी कन्या से संबंध बनाने या शादी का प्रस्ताव रखने का कारक माना गया है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक मजबूत शरीर वाला, अन्वेषक, स्वंम खोज करने वाला, चीजों को खरीदने का शौकीन, नीति विरुद्ध संबंध रखने वाला, यात्राओं का शौकीन, अच्छी सेहत और संतान सुख की प्राप्ति करने वाला होता है।


मृगशिरा नक्षत्र के प्रचलित लोग | Mrigashira Nakshatra Famous Personality

इस नक्षत्र के देवता चन्द्र और स्वामी शुक्र दोनों स्त्री ग्रह है परंतु इनके प्रभाव अलग-अलग होते हैं।

चन्द्र – माँ का पद देने वाला, मन का झुकाव, स्त्री गरिमा का प्रभु होता है। 

शुक्र – स्त्री के सुंदर रूप की रचना करने वाला, शारीरिक कोमलता को निखारने वाला, स्त्री आकर्षण को बढ़ाने वाला, सुंदरता का प्रभु होता है।

देवी पार्वती का इनका जन्म भी मृगशिरा नक्षत्र में हुआ था। जो रूपवान और सुंदरता की देवी भी कही जाति हैं।


मृगशिरा नक्षत्र फलादेश | मृगशिरा नक्षत्र का फल | Mrigashira Nakshatra Prediction

मृगशिरा नक्षत्र खोज करने वाला या शोधकर्ता नक्षत्र कहा जाता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक नवनिर्माण करने वाला या फिर स्त्री को घूरने वाला होता है। ये दुखी, यात्रा प्रेमी और संकलनकर्ता होते है। ये काम पूरा करने के तुरंत बाद दूसरे काम में व्यस्त हो जाते हैं। इनका नवनिर्माण या क्रय विक्रय कभी रुकता नही है। ये हिरण की तरह शांत स्वभाव, तेज निगाह वाले और तेज तर्रार होते हैं।

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक चालक, धैर्य से कार्य करने वाला, दिखावटी और असली-नकली को मिलाकर वस्तु का निर्माण करने वाला, अपने मतलब के लिए जीने वाला, घमंडी, तेज दिमाग वाला, घबराया हुआ, शिल्पकला का प्रेमी, माता का प्रिय और मधुर बोलने वाला होता है। जातक का दांपत्य जीवन सुखमय और अच्छा नही रह पाता है, उसके बाद भी जातक को सुंदर स्त्री को अपनी ओर आकर्षित करने में किसी भी तरह की परेशानी नही होती है। 


मृगशिरा नक्षत्र के पुरुष जातक | Impact of Mrigashira Nakshatra on Male

मृगशिरा नक्षत्र के पुरुष जातक उत्तम यश प्राप्ति व्यक्तित्व वाले, मनमोहक, आकर्षक स्वभाव वाले, लंबे चौड़े शरीर वाले, सावले रंग वाले होते है। लंबे होने के कारण इनके हाथ पैर पतले होते हैं, जिससे मृगशीर्ष व्यक्ति की पहचान होती है। इस नक्षत्र के जातक सामान्य ( साधारण )  होते हैं। ये कार्यों को मन लगाकर करने वाले होते हैं। ये दिमाग का उपयोग करके अपना जीवनयापन करने वाले होते हैं। जब इस नक्षत्र के जातक को देखा जाता है तो लगता है ये बहुत साहसी होगा परंतु ये अंत में डरपोक निकलते हैं।

जातक वित्तीय सलाहकार होता है लेकिन परेशानियों के बाद भी वह खुले हाथों दान देने वाला होता है लेकिन आर्थिक समस्या के कारण दुखी होता है। जातक परेशान होने के कारण एक रास्ते पर नही चल पाता है। जातक को बचपन में कई रोगों का सामना करना पड़ता है। जातक अपने घर-परिवार में लोगों से प्रेम करने वाला होता है लेकिन परिवार वालों से मतभेद के चलते या गलतफहमी के कारण प्यार नही मिल पाता है। इसी कारण जातक के परिवार में समस्याएँ होती हैं।

आश्चर्य की बात तो यह है की किसी की गलती न होने के बाद भी परिवार में परेशानियाँ रहती है। जातक का विवाह दो स्त्रियों से होता है जिसके कारण वह दो पत्नी वाला भी कहा जाता है। जातक को अपने वैवाहिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दोनों पत्नियों के विचार अलग होने के कारण घर में सुख चयन नही रहता है।

जातक 32 वर्ष की उम्र तक स्थिर नही हो पाता है जिसके कारण उसे दुख और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन 33 वर्ष की उम्र से लेकर 55 वर्ष की उम्र तक जातक अच्छी उन्नति करता है जिससे वह अच्छा धन कमाता है परंतु किसी न किसी कारण से वह फिर उसी कगार पे आ जाता है जैसे वह 32 वर्ष की उम्र तक रहता है।


मृगशिरा नक्षत्र के स्त्री जातक | Impact of Mrigashira Nakshatra on Female

मृगशिरा नक्षत्र के स्त्री जातकों में वही गुण दोष पाए जाते हैं जो की पुरुष जातक में पाय जाते हैं। बस फर्क इतना होता है की इस नक्षत्र की स्त्री जातक दिखने में दुबली-पतली, आकर्षक, मनमोहक, कार्यों को समय से पूरा करने वाली, बुद्धिमान, स्वार्थी, अधिक बोलने वाली, खरी बात कहने वाली, बात-बात पर झगड़ा करने वाली, शिक्षा में उच्च, ललित कला प्रेमी, पैसे की लालची, स्वादिष्ट भोजन खाने वाली, सुंदर वस्त्र पहनने वाली, आभूषण युक्त जिससे भाग्यशाली होती है।

स्त्री जातक को मशीनों के बारे में अच्छी जानकारी होती है। इसी कारण ये प्रसंशक होती है क्योंकि पुरुषों से ज्यादा तेज होती है। ये शादी के बाद भी अन्य कार्यों में व्यस्त रहती हैं। अपने पति को अपने अनुसार कार्य कराने वाली होती है। ये अपने पति के अलावा भी किसी के प्रेम पांश में रहती है। कभी-कभी ये शादी से पहले एक से अधिक लड़कों को अपने प्रेमपांश में रखती है जिसके कारण इनके विवाह में दिक्कतें आती हैं यदि इनका विवाह हो भी जाता है तो ये अपने पति के इतने करीब रहती है की उसे कभी पता नही चलने देती हैं की शादी से पहले उसने क्या-क्या किया है।


प्राचीन ऋषिमुनियों व आचार्यों के अनुसार मृगशिरा नक्षत्र | Mrigashira Nakshatra

मृगशिरा नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक प्रहार करने वाला, बरदास्त न करने वाला, लड़ाई-झगड़ों में तेज, डरा हुआ, शैतान, चतुर, मनोरंजन, मेहनत के कार्यों में व्यस्त रहने वाल होता है। जातक यदि सेना में अधिकारी है तो वह युद्ध पोत में सबसे आगे होता है और अगर खिलाड़ी है तो वह अच्छा प्रदर्शनकारी होता है। जातक पैसे कमाने में आगे, संपत्तिवान, शांत स्वभाव वाले, सामना करने वाले होते हैं।——– वरामिहिर 

इस नक्षत्र के जातक कार्यों के प्रति उत्साहित, डरपोक, दिखावा करने वाले, धनवान होते हैं। ये बुद्धिमान होने के कारण शास्त्रों, नीति, कानून और गणित का अच्छा ज्ञान रखते हैं। इसी कारण ये समाज में अपनी छवि बनाते हैं और विद्वान कहलाते हैं।———– नारद 

इसके अलावा भी जातक को अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान लेना, मार्शल आर्ट और जूडो कराटे में अच्छी रुचि बनाते हैं। ये दूसरों को आगे बढ़ता देख खुद को भी आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं। ये धनवान लोगों के करीब रहते हैं। जातक वृषभ राशि में होने पर युद्ध में अपना आकर्षण बढ़ाता है, युद्ध का ज्ञान लेता है। मिथुन राशि में होने पर कल्याण की भावना रखने वाला, वेदांगत्व, शांत स्वभाव का होता है। —— पाराशर    

चन्द्र- 

       इस नक्षत्र में चन्द्र हो तो जातक मेघावी, लेखक, धन कमाने वाला, राजनीति में निपुण, कार्यों को करने वाला, डरा हुआ होता है। जातक यदि अपने व्यापार में साझेदारी करता है तो उसके व्यवसाय में परेशानियाँ उत्पन्न होती हैं। मृगशिरा नक्षत्र में चंद्रमा अशांति, दुख, गलत नज़र का शोधकर्ता होता है। जातक कमजोर, झुका हुआ, कार्यों को लगन से करने वाला, प्रणायप्रेमी, भविष्यवादी, माता के समान होता है। जातक यात्रा प्रेमी, शोधकर्ता, जिज्ञासा रखने वाला, आगे बढ्ने वाला ( संचारवाहक )  होता है। 

सूर्य- 

       मृगशिरा नक्षत्र में सूर्य हो तो जातक साहस से पूर्ण, युद्ध में निपुण, वक्ता, अच्छा राजनेता, रचनात्मक लिखने वाला लेखक, व्यवसाय में पूर्ण रूप से निपुण परंतु आलसी होता है।

लग्न- 

       इस नक्षत्र में लग्न हो तो जातक मनमोहक, गलत संगत में रहने वाला, मोह उत्पन्न करने वाला, सच के पीछे भागने वाला, रहस्यमयी चीजों को खोजने वाला, हिरण के सामन मुख वाला, उत्साहित, अधिक बोलने वाला, निडर और एक से अधिक विचार करने वाला होता है।


मृगशिरा नक्षत्र का चरण फल | Prediction of Mrigashira Nakshatra Charan pada

प्रत्येक नक्षत्र में चार चरण होते हैं जिसमें एक चरण 3 अंश 20 कला का होता है। नवमांश की तरह होता है जिसका मतलब यह है की इससे नौवे भाग का फलीभूत मिलता है सभी चरणों में तीन ग्रहों का प्रभाव होता है जो इस प्रकार है – राशि- वृषभ, देवता चन्द्र  और स्वामी मंगल । 

मृगशिरा नक्षत्र का प्रथम चरण | Prediction of Mrigashira Nakshatra First Charan pad

मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य है। इसमें शुक्र, मंगल और मंगल का प्रभाव होता है। राशि वृषभ 53 अंश 20 कला से 56 अंश 40 कला क्षेत्रफल है। नवमांश सिंह ! यह स्थायी रूप से नियुक्त करने, स्वंम योजना बनाने और नवनिर्माण करने का कारक होता है। इस चरण में जातक पतले नयन वाला, साफ-सुथरे दांतों वाला, चौड़ी नाक वाला, काले भूरे बाल वाला, मजबूत नाखून वाला, घमंडी, कर्म न करके फल की इच्छा रखने वाला और अधिक बोलने वाला होता है।

जातक शिक्षा में आगे, अच्छा प्रदर्शंकारी, बुद्धिमान, शोधकर्ता, जोशीला, बड़ों के समान व्यवहार करने वाला होता है। जातक को पुत्र संतान प्राप्ति में परेशानियों का सामना करना पड़ता है, परंतु पुत्री की प्राप्ति होती है। जातक का वैवाहिक जीवन में सामान्य रहता है।


मृगशिरा नक्षत्र का द्वितीय चरण | Prediction of Mrigashira Nakshatra Second Charan pad

इस नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध होता है। इसमे शुक्र, मंगल और बुध का प्रभाव होता है। राशि वृषभ 56 अंश 40 कला से 60 अंश 00 कला क्षेत्रफल है। नवमांश कन्या ! यह विचार करने, उंच-नीच में फर्क करने, कठिन हिसाब लगाने और गुणार्थ का कारक होता है। जातक समाज में सम्मानित, तुच्छ साहसी, डरा हुआ, कमजोर शरीर वाला, गलत संगत में पड़ा हुआ, बीमारी से जुड़ी तमाम सारी परेशानियों से घिरा हुआ और धन कठिनाइयों से कमाने वाला होता है।

इस चरण में जन्म लेने वाला जातक दार्शनिक, समाज के हित में विचार करने वाला, गणित का ज्ञाता, आनंदमय, संगीतकार, गाने-बजाने का शौकीन होता है। यदि यह चरण अशुभ प्रभाव में हो तो जातक खोट करने वाला होता है। यह अपने परिवार में गलतफहमियों के कारण छोटे-मोटे लड़ाई-झगड़े करने वाला होता है। जातक के साथ धोखा होने का डर ज्यादा रहता है।


मृगशिरा नक्षत्र का तृतीय चरण | Prediction of Mrigashira Nakshatra Third Charan pad 

इस नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र है। इस चरण में बुध, मंगल और शुक्र का प्रभाव होता है। राशि मिथुन 60 अंश 00 कला से 63 अंश 00 कला क्षेत्रफल है। नवमांश तुला ! यह चरण मानसिक शक्ति, समाज में अच्छे व्यवहार का कारक होता है। जातक लंबे, घने और मोटे बालों वाला, लंबी चौड़ी भुजाओं वाला, लंबी नाक वाला, मोर के जैसी आँखें, पतले हाथों वाला, अच्छा बोलने वाला और अहंकारी होता है। जातक अधिक विचार करने वाला, समाज में अपनी छवि बनाने वाला, रोमांश से भरा हुआ, समाज की सेवा करने वाला, राजनेता होता है। इस चरण के जातकों का स्नेह एक से अधिक स्त्रियों के साथ होता है।


मृगशिरा नक्षत्र का चतुर्थ चरण | Prediction of Mrigashira Nakshatra Fourth Charan pad

इस नख्स्त्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल है। इस चरण में बुध, मंगल और मंगल का प्रभाव होता है। राशि मिथुन 63 अंश 20 कला se 66 अंश 40 कला क्षेत्रफल में है। यह चरण अभद्र भाषा, फालतू की बहस, शक करने, मन से संबंध रखने वाली वस्तुओं की उन्नति करने का कारक होता है। जातक घड़े के समान सिर वाला, नाक के आस-पास चोट लगना, धर्म को मानने वाला, अधिक बोलने वाला, कार्य करने की इच्छा रखने वाला, हिंसक कार्य करने वाला, सेनापति होता है।

जातक एक अच्छा शोधकर्ता, शक करने वाला, जोशीला होता है। ऐसे जातकों को अच्छे समझदार और विद्वान व्यक्ति से सलाह लेने की जरूरत होती है। अगर इस चरण में जन्मे जातक अपनी ऊर्जा और ज्ञान का सही उपयोग करें तो ज्योतिषी, अच्छे लेखक, धार्मिक कृत्य करने वाले हो सकते हैं।


मृगशिरा नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष आचार्यों ने सूत्र रूप में बताया है लेकिन यह फलित में बहुत ज्यादा बदलाव हुआ है।

यवनाचार्य – 

                 मृगशिरा नक्षत्र के पहले चरण में राजा, दूसरे चरण में चोर, तीसरे चरण में ग्रहस्त और चौथे चरण में धन-संपत्ति से परिपूर्ण होता है। 

मानसागराचार्य – 

                 मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण में धनोपार्जन, द्वितीय चरण में व्यभचारी या हम कह सकते हैं दूसरे की पत्नी के साथ संभोग बनान, तृतीय चरण में भाग्यशाली और चतुर्थ चरण में धन हीन होता है।

आचार्यों के मतानुसार पहला और दूसरा चरण वृषभ राशि में आते हैं जिससे जातक को सुंदर और गुणवान संतान की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार तीसरा और चौथा चरण मिथुन राशि में आते हैं जिससे जातक लेखक, सामाजिक कार्य करने वाला, नवनिर्माण करने वाले होते है। परंतु स्त्री जातक गलत बोलने और गलत विचारों को प्रकट करने में सोच विचार नही करती है जिसके कारण मित्र भी शत्रु बन जाता है। 


मृगशिरा नक्षत्र का चरण ग्रह फल | Mrigashira Nakshatra Prediction based on planets

भारतीय ज्योतिष आचार्यों के मतानुसार सूर्य, बुध और शुक्र इन ग्रहों की पूरी तरह अवलोकन या चरण दृष्टि होती है, क्योंकि सूर्य ग्रह से बुध ग्रह 28 अंश और शुक्र 48 अंश से दूर नही जा सकता है। 


सूर्य – Sun [ मृगशिरा नक्षत्र में सूर्य ]

  • जब चन्द्र की दृष्टि सूर्य पर होती है तो जातक एक से अधिक स्त्रियों को सहारा देगा, जल से संबंधित श्रम से बिजनेस करेगा।
  • मंगल की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक बहादुर, कानूनी किसी विभाग का अधिकारी, सरकार की तरफ से धन अर्जित करेगा।
  • गुरु की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक शासन से मिलकर गठबंधन करेगा और अधिक धनोपार्जन करेगा। 
  • शनि की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक बुरी संगत में होगा और अपनी उम्र से ज्यादा उम्र की स्त्रियों से शादी करेगा। लेकिन अगर शनि वक्री हो तो जातक अपने से कम उम्र की कूवारी कन्या से शादी करेगा।

मृगशिरा नक्षत्र में सूर्य | When sun is in Mrigashira Nakshatra – Prediction

सूर्य का मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक खुशबूदार फूलों का शौकीन, शिक्षित, मनमोहक और भाग्यशाली होता है। जातक की होने वाली संतान को आँख, गले और चहरे से जुड़ी कोई न कोई परेशानी हो सकती है।

सूर्य का मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक सुख सम्पन्न, अच्छे कपड़ों का शौकीन, संगीतकार, रचनात्मक लेखक और गहरे जल से डरने वाला होता है। ऐसे जातक की शादी 25 वर्ष से 27 वर्ष के मध्य समय में होती है। 

सूर्य का मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक परिवार का मालिक, सहनशील, वित्त संबंधी सलाहकार, समाज के हित में कार्य करने वाला, कलात्मक और जातक की संतानों में एक बेटा विज्ञान के खोज से कीर्तिमान होता है। ऐसे में कई जातक ऐसे होते हैं जिनमें रोगों से लड़ने की क्षमता कम होती है। जातक को नाक या काम में कोई परेशानी हो सकती है। 

सूर्य का मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक को समाज के हित में कार्य करने वाला होता है। अगर बुध और चन्द्र का मिलन इस चरण में होता है तो जातक विद्वान, मधुरभाषी, ज्योतिष का ज्ञाता होता है। 


चन्द्र – Moon [ मृगशिरा नक्षत्र में चन्द्र ]

  • सूर्य की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक गाँव में रहने वाला, धन- दौलत से परिपूर्ण और बड़ा व्यापारी होगा। 
  • मंगल की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक पहली स्त्री से ज्यादा किसी अन्य स्त्री से लगाव लगाएगा जिसके कारण पहली स्त्री से दूर होना पड़ता है। माता से गलत व्यवहार करने वाला होता है। 
  • बुध की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक अपनी किसी पुरानी रिश्तेदारी में शादी करेगा, धनवान और संतान सुख के साथ-साथ सबका प्यार मिलेगा। 
  • गुरु की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक सर्वसुख सम्पन्न, समाज में प्रचलित होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक को माता की तरफ से पुरानी जायदात मिलेगी। 
  • शनि की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक धन हीन और अपनी माता के लिए परेशानी का कारण होगा।  

मृगशिरा नक्षत्र में चन्द्र | When Moon is in Mrigashira Nakshatra – Prediction

चन्द्र का मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

चन्द्र के प्रथम चरण में जातक समाज में प्रसिद्ध, बुद्धिमान और पुत्री संतान का सुखी होगा। जातक की पत्नी सम्मान करने वाली परंतु समाज के कार्यों में व्यस्त होकर आर्थिक रूप से सहायता करने वाली होगी। जातक जोड़ों में वायु रोग से ग्रसित होता है। 

चन्द्र का मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

चन्द्र के द्वितीय चरण में जातक तीव्र बुद्धि वाला, उच्चकोटी का लेखक, धनवान, मेहनत का कार्य करने वाला, भावुक और घमंडी होता है। अगर लग्न इसी चरण में हो तो जातक धनवान और ऊंचे परिवार में जन्म लेता है। 

चन्द्र का मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

चन्द्र के तृतीय चरण में  जातक प्रसिद्ध होगा और समाज में अपनी अच्छी छवि बनाता है। ऐसे जातक बाल्यावस्था में ही परेशानियों का शिकार होते हैं जिसके कारण इन्हे माता का प्यार नही मिल पाता है। मेहनत का कार्य करने के बाद भी कमाई कम होती है। नशे का सेवन करने के कारण जातक को कैंसर जैसा रोग होता है। 

चन्द्र का मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक ताकतबर शरीर वाला, कामेच्छा से गुथा हुआ, कॉस्मेटिक का व्यापार करने वाला और बीमारियों से ग्रस्त होता है। 


मंगल – Mars [ मृगशिरा नक्षत्र में मंगल ]  

  • सूर्य की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक जंगल में रहने वाला, लोगों को परेशान करने वाला, स्त्रियों से नफरत करने वाला होता है।
  • चन्द्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक माता की सेवा करने वाला, बाजारू स्त्रियों के करीब रहने वाला, जीवन में रुकावटों और समस्याओं का सामना करने वाला होता है।
  • बुध की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक नाचने वाला, गायक, दोस्तों से प्यार करने वाला होता है। 
  • गुरु की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक पुत्र संतति वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण होता है। 
  • शुक्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक राजनीति में अपनी अच्छी छवि बनाएगा, कानूनी किसी विभाग में उच्च पद का अधिकारी होगा। 
  • शनि की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक हिंसक कार्य करने वाला, बदमाश या चोर होगा।

 मृगशिरा नक्षत्र में मंगल | When Mars is in Mrigashira Nakshatra – Prediction

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक दूसरों की चीजों पर अपनी नियत खराब करने वाला, सुंदर स्त्रियों के साथ संबंध बनाने वाला, बुरे लोगों से मित्रता करने वाला होता है। जातक ज्ञान, बुद्धि और संतान का चहिता होता है। जातक अधिक खाने वाला, युद्ध विद्या, मार्शल आर्ट में रुचिवान होता है। जातक कड़वा बोलने वाला, सच के साथ रहने वाला, घर परिवार का भरण पोषण करने वाला, जातक की पत्नी और जातक की अल्पायु होगी। यही अगर जातक विशाखा नक्षत्र में हो तो जातक संतान हीन रहता है।

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक धैर्यवान, लड़ाई झगड़े करने वाला, चालक, परिवार के विपक्ष में रहने वाला, परिवार की खिल्ली उड़ाने वाला होता है। यदि इस चरण में शनि की युति हो तो जातक अपराध के कारण कानूनी विवाद में फसा होता है। 

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक दुखी रहने वाला, धन हीन होता है परंतु अच्छा धन कमाने वाला होता है। अगर लग्न भी इसी चरण में हो तो जातक चेचक रोग से ग्रसित हो सकता है। 

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक अच्छे स्थान को ;प्राप्त करने वाला, उच्च पद के अधिकारियों से संबंध रखने वाल और अपनापन बनाए रखने वाला होता है। जातक के पिता को मृत्यु के समान परेशानियाँ, जातक का दांपत्य जीवन में परेशानियों से भरा हुआ और पत्नी रोगों से ग्रसित रहेगी। अगर मंगल इस चरण में पापयुक्त हो तो जातक के लिए बहुत परेशानियों से भरा साबित होगा। 


बुध – Mercury [ मृगशिरा नक्षत्र में बुध ]

  • चन्द्र की दृष्टि बुध पर हो तो जातक अच्छी सेहत वाला, दान-पुण्य करने वाला, परिवार का भरण-पोषण करने वाला और स्थापित होता है। 
  • मंगल की दृष्टि अगर बुध पर हो टी जातक गुस्सेबाज़ और चीजों को तोड़ने-फोड़ने वाला होता है। 
  • गुरु की दृष्टि बुध पर हो तो जातक बात वाला, कार्यों के प्रति खुद को समर्पित करने वाला, विश्वास पात्र और ज्ञानी होता है। 
  • शनि की दृष्टि बुध पर हो तो जातक बुरे कर्म करने वाला, मित्रता के कारण संकट में रहने वाला और दिक्कतों में फसा रहने वाला होता है। 

मृगशिरा नक्षत्र में बुध | When Mercury is in Mrigashira Nakshatra – Prediction

बुध का मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक चरित्रवान, बुद्धिमान, धनवान और बुढ़ापे में मान का संतुलन खोने के कारण चीजों को भूलने वाला होता है। 

बुध का मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक महत्वहीन कार्यों से धन कमाने वाला, दूसरों के पैसों पर शौक करने वाला और धन-दौलत को देखकर नियत खराब करने वाला होता है। 

बुध का मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक किश्मत वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण, शांत स्वभाव वाला, एक से अधिक सुंदर स्त्रियों के साथ संभोग करने वाला परंतु विवाह के बाद अपनी पत्नी से अधिक प्रेम करने वाला होता है। 

बुध का मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक धैर्य के साथ कार्य करने वाला, बुद्धिमान, अच्छे परिणाम में विश्वास रखने वाला, स्त्री प्रेम में रत, एक से अधिक स्त्रियों विवाह करने वाला होया है। जातक तुतलाहट या हकलाहट और टीबी जैसे रोग से ग्रसित होता है। 


गुरु – Jupiter [ मृगशिरा नक्षत्र में गुरु ]

  • सूर्य की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक शासक वर्ग में रहने वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण, स्थापित और समाज में प्रचलित होता है। 
  • चन्द्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक धन-दौलत से परिपूर्ण होता है लेकिन स्त्रियों के साथ अवैध संबंध बनाने के कारण समाज में चरित्रहीन और बदनाम होता है। 
  • मंगल की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक भाग्यवान, धैर्य के साथ कार्य करने वाला, बुद्धिमान और दांपत्य जीवन परेशानियों से भरा होता है। 
  • बुध की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाला, धन-यश और वैभव से परिपूर्ण, धर्म को मानने वाला होता है।
  • शुक्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक अच्छे व्यक्तित्व वाला, रूपवान स्त्रियों के करीब रहने वाला, स्त्रियों से संबन्धित व्यापार करने वाला होता है।
  • शनि की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक एक से अधिक भाषाएँ बोलने वाला, अपना काम खुद मेहनत से करने वाले लेकिन पत्नी का व्यवहार गलत होता है।

मृगशिरा नक्षत्र में गुरु | When Jupiter is in Mrigashira Nakshatra – Prediction

गुरु का मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक मजबूत शरीर वाला, अस्थिर मन वाला, पढ़ने-लिखने में रुचि रखने वाला, धनवान लेकिन सुख के लिए चिंतित रहने वाला होता है। अगर गुरु लग्न में हो और लग्न मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम या द्वितीय चरण में हो तो जातक गायक होता है। 

गुरु का मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक रूपवान, साफ-सुथरे कपड़े पहनने वाला, शासन और राजनीति में अच्छी छवि बनाने वाला, शास्त्रों का ज्ञान रखने वाला होता है। 

गुरु का मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक कम खर्च करने वाला, विवाह होने के बाद भी पत्नी और संतान सुख के लिए चिंतित रहने वाला, अपने मतलब के लिए कार्य करने वाला होता है। यहाँ तक की वह अपने बच्चों या संतान को भी एक पैसा नही देता है इतना कंजूस होता है। जातक को रक्त विकार या हृदय रोग होता है। 

गुरु का मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक धनवान, प्रॉपर्टी का व्यापार करके धन अर्जित करने वाला, सरकार की तरफ से सम्मानित और दूसरों के मन को समझने वाला होता है। 


शुक्र – Venus [ मृगशिरा नक्षत्र में शुक्र ]

  • चन्द्र की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक माता का  समाज में उच्च स्थान होने के कारण प्रसिद्ध होता है। 
  • मंगल की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक स्त्रियों के साथ संबंध बनाने और उनके लिए अपना धन गवाने वाला, वैवाहिक जीवन में परेशानियाँ रहती हैं।      
  • गुरु की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक अपनी पत्नी से प्रेम करने वाला, संतान, धनवान होता है। 
  • शनि की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक पैसों की कमी, पत्नी से परेशान, ससुराल पक्ष से ताने सुनने वाला होता है।  

मृगशिरा नक्षत्र में शुक्र | When Jupiter is in Mrigashira Nakshatra – Prediction

शुक्र का मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक संगीतकार, डांस करने वाला, ललित कला में अत्यधिक ज्ञान ग्रहण करने वाला, समाज में सम्मानित, अभिनेता के रूप में अच्छा धन कमाने वाला, कार्यों से घिरा हुआ, कला के लिए सम्मानित होता है। 

शुक्र का मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक राजा के समान, एक से अधिक विषयों का ज्ञान रखने वाला, स्त्रियों के करीब रहने वाला, गरीबों की मदद करने वाला होता है। गुर्दे या मूत्ररोग से परेशान होता है। 

शुक्र का मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक धर्म का ज्ञाता, शास्त्रों का ज्ञान रखने वाला, विज्ञान का ज्ञाता, दुश्मनों के वार से डरने वाला, संगीत और डांस से धन कमाने वाला होता है। अगर शुक्र अशुभ गृह से पीड़ित हो तो जातक का दूसरा विवाह होता है। शुक्र की महादशा हो तो जातक को 13 वर्ष की उम्र तक लाभदायक फल प्राप्त होते हैं, उसके बाद मिश्रित परिणाम मिलते हैं।

शुक्र का मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक छोटे कद वाला, मजबूत शरीर वाला, अच्छे चरित्र वाला, लेखक या कवि होता है। लग्न अगर पुष्य नक्षत्र में हो तो जातक एक से अधिक विवाह करने वाला, पत्नी के होने के बाद भी अन्य स्त्रियों के साथ अवैध संबंध बनाने वाला होता है।    


शनि – Saturn [ मृगशिरा नक्षत्र में शनि ]

  • सूर्य की दृष्टि शनि पर हो तो जातक वेद,पुराण और अन्य शास्त्रों का ज्ञान रखने वाला होता है, परंतु अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाला होता है। 
  • चन्द्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक राजनीति में अच्छा पद प्राप्त करता है और किसी संस्था का अध्यक्ष होता है।
  • मंगल की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सुरक्षाकर्मी, आरक्षी विभाग में उच्च अधिकारी, पारिवारिक जीवन सुखमय रहता है। 
  • बुध की दृष्टि शनि पर हो तो जातक स्त्रियों के साथ कार्य करेगा जिसके कारण उसकी समाज में विवेचना होगी। 
  • गुरु की दृष्टि शनि पर हो तो जातक दूसरों के सुख-दुख में साथ खड़ा रहने वाला, जरूरतमंदों की मदद करने वाला होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक जमीदार या शासकीय अधिकारी होगा, सुंदर स्त्रियों में रत रहने वाला परंतु कई जातक ज्योतिष होगे।  

मृगशिरा नक्षत्र में शनि | When Saturn is in Mrigashira Nakshatra – Prediction

शनि का मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक लंबे कद वाला, संयुक्त सीने वाला, घने बालों वाला, काले रंग वाला होता है। जातक आर्थिक रूप से कमजोर होगा। गुरु या शुक्र की दृष्टि हो तो जातक की पत्नी अशुद्ध होगी। 

शनि का मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक जरूरत से ज्यादा धन खर्च करने वाला, बुरे स्वाभाविक मित्रों वाला, बिजनेस में व्यस्त रहने वाला लेकिन धन लाभ से वंचित। जातक के जीवन में जिस प्रकार बढ़ोत्तरी होगी ठीक उसी प्रकार हानि होगी। जातक स्त्रियों के साथ संबंध बनाने और उनके ऊपर धन खर्च करने वाला होगा। 

शनि का मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में लग्न यदि उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में हो तो स्त्री जातक शादी से पहले गर्भधारण करेगी। जातक जेलर या आरक्षी विभाग का अधिकारी होगा। 

शनि का मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक को बचपन में पैर की समस्या होगी परंतु बाद में वह लंगड़ा होगा, जातक अपनी जन्मभूमि से दूर बुरे कर्म करने वाला होगा। जातक फेफड़ों या अस्थमा जैसे रोगों से पीड़ित होगा।  


मृगशिरा नक्षत्र में राहु | When Rahu is in Mrigashira Nakshatra – Prediction

राहु का मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक अर्थ से परिपूर्ण, बुरे कार्यों से दूर रहने वाला, महान, मिर्गी या आंत रोग से पीड़ित होगा। 

राहु का मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक मूर्खता पूर्ण कार्य करने वाला, धैर्य खोने वाला, अचानक धन लाभ होगा। 

राहु का मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक चालाक, लालची, बुरे कार्यों में समय खराब करने वाला, बुरे कार्यों से दूसरों को दुख देने वाला होगा। 

राहु का मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक खोज करने वाला, बुद्धिमान और आज्ञाकारी बच्चों वाला, सुंदर चरित्र वाला, पत्नी को प्यार और आज्ञाकारी होगा।  


मृगशिरा नक्षत्र में केतु | When Ketu is in Mrigashira Nakshatra – Prediction

केतु का मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक जीवन में कठिनाइयों का सामना करने वाला, मेहनत करने के बाद अच्छा धन अर्जित करने वाला, अधिक बच्चे होने के करन बुढ़ावे में सुख मिलेगा। 

केतु का मृगशिरा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक पैर से विकलांक परंतु बुद्धिमान होगा, विकलांगों की सहायता करने वाला होता है।

केतु का मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक दूसरों का बुरा सोचने वाला, गुस्सेबाज़ होगा। 

केतु का मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक हिंसक कार्य करने वाला, गंदे चरित्र वाला, कई रोगों का शिकार, अपने कार्यों में व्यस्त रहने के कारण ऋण चुकाने में असमर्थ होगा। 


मृगशिरा नक्षत्र
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