भरणी नक्षत्र – Bharani Nakshatra – Best Explanation

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वैदिक ज्योतिष के माध्यम से इस ब्रह्मांड में पाए जाने वाले एक भी पिंड किसी एक जगह पर स्थित नहीं हैं। ब्रह्मांड में पाए जाने वाले सभी पिंड एक दूसरे की ओर खिंचाव की स्थिति में टिके हुए हैं। प्राचीन आकाशीय पिंडों के अध्ययन के मतानुसार ये पिंड दो प्रकार के होते हैं। 

1. स्थिर तारे 

2. अस्थिर तारे 

इन दो पिंडो में अस्थिर तारों [ चारो ओर घूमने वाले ]  को गृह कहा जाता है। भारतीय ज्योतिषियों के मतानुसार स्थिर तारे के समूह को नक्षत्र कहा जाता है। 


भरणी नक्षत्र ( Bharani Nakshatra )

भरणी नक्षत्र bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र मेष मे 13 अंश 20 कला से 26 अंश 40 कला तक के क्षेत्रफल में होता है। भारतीय आकाशीय पिंडों के अध्ययन अनुसार यह दूसरा नक्षत्र होता है। इस नक्षत्र के तीन तारे होते हैं। यह नक्षत्र निर्दयी, हिंसक कार्य करने वाला, क्रियात्मक रूप में होने वाला, कुशलता पूर्वक कार्य करने वाला, कर्तृवाच्य नक्षत्र होता है। इस नक्षत्र में अन्य जातकों को नुकसान पहुंचाना, धोखा करना, अन्य जातकों के कार्यों में बाधा बनना, दूसरों की असफलता का कारण होता है। 

अश्विनी नक्षत्र के पूर्व में ठहरी हुई स्त्री जननेन्द्रिय बनावट में तीन तारों का समुदाय भरणी नक्षत्र का भाग होता है। चीनी मिट्टी के द्वारा बने कलश को भी भरणी कहा जाता है। परंतु मन में एक भय उत्पन्न होता है की यह – जैसे ग्रीक के मतानुसार 41 एरिटस तथा 41 तारों वाले कलश के जैसा होता है? भरणी नाशक रजोगुणी उत्पन्न स्त्री नक्षत्र है। इस नक्षत्र की जाति शूद्र, योनि गज, योनि वैर सिंह, गण मनुष्य, नाड़ी मध्य होती है। यह नक्षत्र पश्चिम दिशा का स्वामी होता है। 


भरणी नक्षत्र की कथा, पौराणिक कहानी | Bharani Nakshatra mythological Story

इस नक्षत्र के देवता यमराज होते हैं, और यमराज मृत्यु के भी देवता होते हैं। भरणी को सूर्य और संजना के द्वारा जन्म पुत्र माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यम का अर्थ जुड़वा होता है इसी कारण यम को यमुना [ नदी ] का जुड़वा भाई माना गया है। कई मान्यताओं के अनुसार यम का अर्थ चाल बंद करना [ रोकना ] भी होता है, इसी कारण यम को मानव जाति रोकने वाला कहा जाता है। यमराज को नरक का स्वामी भी माना जाता है। यम को सत्य और मृत आत्माओं का न्याय करता भी कहा जाता है। यम आत्माओं को उसके करमानुसार ही परिणाम देते हैं-  जैसे अच्छे कर्म करने वाले को स्वर्ग और बुरे कर्म करने वाले को नर्क मिलता है।  यमराज को योग की आठ शाखाओं में से पहली शाखा माना जाता है। 


भरणी नक्षत्र की विशेषताएँ | Bharani Nakshatra Importance

जातक अपने जीवन के उत्तरार्ध को अच्छी तरह देखा और परखा हुआ होता है। जातक अपनी बात को मजबूत बनाने वाला, अपने भरोसे को अटल रखने वाला होता है। जातक बुरे लोगों के जुल्म से स्वयं को बचाता है और अन्य जातकों को उनसे बचने की सलाह देता है। 


भरणी नक्षत्र फलादेश | Bharani Nakshatra Predictions

इस नक्षत्र में जातक रोग मुक्त, सच का साथ देने वाला, अच्छी सोच रखने वाला, वादे को पूरा करने वाला, सच बात बोलने वाला होता है। जातक अपनी सोच के कारण थोड़ा सनकी होता है, जिसकी वजह से वह अपने जीवन में कठिनाइयों से भी गुजरता है। जातक प्रेम को मानने वाला, विरोध का आभास करने वाला, जातक  खुद से मेल न खाने वाले व्यक्ति से प्रेम करने वाला, अपराध को सहने वाला, सुख प्राप्त करने वाला, अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने वाला होता है। 


 भरणी नक्षत्र का पुरुष जातक पर प्रभाव | Impact of Bharani Nakshatra on Male

इस नक्षत्र में पुरुष जातक न ज्यादा लंबा और न ज्यादा छोटा यानी बीच की लंबाई वाला, तुच्छ रोम वाला, तकदीर वाला, सुनहरी आंखों वाला, चमकीले दांत वाला, ऊंची गर्दन वाला और गोरे बदन वाला होता है। यदि जातक का जन्म दोपहर के समय हो तो जातक ऊंचे कद, चौड़ी कनपटी और सिर, पतली ढोड़ी , आँख के ऊपर भौं पर घने बाल वाला होता हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक सबको पसंद नही आता है, जबकि यह साफ दिल वाला होता है, न तो किसी जातक को बिना वजह परेशान करने वाला होता है। जातक स्पष्ट रूप से बात कहने वाला, जुल्म सहन करने वाला, अपने मनानुसार कार्य करने वाला, अपने कार्य को स्वयं करने वाला और इसी कारण यह सफल नहीं हो पाता है, किसी के द्वारा की गई गलती को आसानी से मानने और माफ कर देने वाला, जातक के अंदर घमंड बिल्कुल नहीं होता है। 

इस नक्षत्र में जन्मे जातक के जीवन में 33 वर्ष की उम्र में कुछ निश्चयी बदलाव होते हैं। जातक जाना माना डॉक्टर या जज हो सकता है। जातक की शादी 27 वर्ष से पहले संभव नही होती है। जातक की पत्नी घर के कार्यों को अच्छी तरह करने में निपुण होती है। यदि जातक का जन्म भरणी नक्षत्र के पहले या दूसरे चरण में हो तो जातक के पिता की मृत्यु का डर रहता है। जातक भोजन में अच्छे आहार खाना पसंद करने वाला होता है। जातक का विचार ” जीवित रहने के लिए भोजन और भोजन के लिए जीवित ” रहना होता है। 


भरणी नक्षत्र का स्त्री जातक पर प्रभाव | Impact of Bharani Nakshatra on Female

इस नक्षत्र में जन्मी स्त्री का रंग गोरा, सुंदर छवि, चमकीले दांतों वाली, पवित्र हृदय, चरित्रवान, लोगों के द्वारा प्रशंसा की जाने वाली [ प्रशंसनीय ],  अच्छे स्वभाव और घमंड रहित होती है। अपने घर परिवार में अपने से बड़ों का आदर-सम्मान करने वाली, अच्छे विचार और अपने हिसाब से कार्य करने वाली होती है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले स्त्री जातक ज्यादा दर सेल्स का काम करना पसंद करते हैं। इन स्त्री जातको का पति प्रेम, सम्मान और साथ देने वाला होता है, परंतु स्त्री जातक को ससुर की तरफ से परेशानियां मिलती है, अपने परिवार की मालकिन होती हैं, यह स्त्रियां किसी अच्छे मौके की तलाश में रहती है और मौका मिलते ही अपने मन की इच्छाओं को पूरा करने वाली होती है। स्त्री जातक की शादी 23 वर्ष की उम्र से पहले सम्पन्न नही होती है।  


प्राचीन ऋषि मुनियों एवं आचार्यों के अनुसार भरणी नक्षत्र ( Bharani Nakshatra)

भरणी नक्षत्र में उत्पन्न जातक बात का पक्का, समय से कार्य करने वाला, जातक को कार्यों में लगन, स्वास्थ्य के प्रति सतर्क, सत्य का साथ देने वाला, यदि किसी कार्य को करने का समय दे दे तो उस कार्य को समय से पहले पूरा करने की क्षमता रखने वाला होता है। – वरामिहिर 


जातक अपने बुरे व्यवहार के कारण लोगों के मन से उतरा हुआ, मन से विनोदपूर्ण भाव रखने वाला, जल्द से जल्द सफलता हासिल करने की इच्छा रखने वाला होता है। ऐसे जातक गहरे पानी से डरने वाले, सुंदरता से परहेज करने वाले होते हैं। यदि भरणी नक्षत्र का जातक के जीवन पर बुरा असर हो तो जातक झूठ बोलने वाला, साधन के योग्य होने के लिए नजर टिकाए रखने वाला, मन से अपवित्र, दूसरों को बर्बाद करके खुद का फायदा देखने वाला, बुरे स्वभाव वाला परंतु संतान रहित होता है। – पराशर


पराशर मतानुसार के अलावा ऐसे जातक कम भोजन का उपयोग करने वाले, स्त्री प्रेम में रहने वाले, लोगों से जलन के कारण बुरा बर्ताव करने वाले होते हैं।-  नारद 


  • चन्द्र- 

       अगर चंद्र भरणी नक्षत्र में है तो जातक विश्वास करने के योग्य, औद्योगिक कार्य करने वाला, रोगों से मुक्त, सफलता हासिल करने वाला, किसी भी कार्य का तनाव महसूस करने वाला, राजनीतिज्ञ, रहस्यमयी चीजों को खोजने वाला, लेखक व प्रकाशक होता है। चंद्र के भरणी नक्षत्र में होने के कारण जातक का जीवन संघर्षपूर्ण और कठिनाइयों भरा होता है। 

[ कार्ल मार्क्स का चंद्र भरणी नक्षत्र में ही था। जो जर्मन समाजवादी नेता एवं मार्क्सवाद के जनक थे। ] 


  • वराहमिहिर –

                   वराहमिहिर के अनुसार चंद्र का प्रभाव जातक को संपन्नता, प्रसन्नता, अच्छा स्वास्थ्य और ईमानदारी देने वाला होता है। 


  • सूर्य- 

    अगर सूर्य भरणी नक्षत्र में है तो जातक बुद्धिमान, उक्ति युक्ति में माहिर, प्रशंसनीय, रचना      करने वाला, हिंसक कार्य करने वाला, जिद्दी, अपने हिसाब से कार्य करने वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण होता है। सूर्य के भरणी नक्षत्र में होने से कई जातक क्रिया में लगा हुआ, सही मार्ग दिखाने वाला, शोधकर्ता होता है। 

[ सद्दाम हुसैन का सूर्य भरणी नक्षत्र में था जो इराक़ी तानाशाह राष्ट्रपति थे। ]


  • लगन  

         अगर लगन भरणी नक्षत्र में है तो जातक आगे चलने वाला, साहस वाला, विश्वास करने योग्य, अहंकारी, जिद्दी, दोस्त और अपने भाइयों की मदद करने वाला, तुच्छ औलाद वाला होता है।     

[ स्वमी नित्यानंद का लग्न भरणी नक्षत्र में था। जो नित्यानंद योगपीठ मठाधीश कर्नाटक थे। ]                              


भरणी नक्षत्र का चरण फल | Prediction on Bharani Nakshatra Charan Pada

प्रत्येक नक्षत्र में चार चरण होते है जिसमें एक चरण 3 अंश 20 कला का होता है। नवमांश की तरह होता है जिसका मतलब यह है कि इससे नौवें भाग का फलीभूत मिलता है। सभी चरणों में तीन ग्रहों का प्रभाव होता है जो इस प्रकार है–  राशि स्वामी, नक्षत्र स्वामी, चरण स्वामी। 

भरणी नक्षत्र का प्रथम चरण | Prediction on Bharani Nakshatra First Charan Pada

इस चरण का स्वामी सूर्य होता है। इस चरण में मंगल, शुक्र सूर्य का प्रभाव होता है। इस चरण में मेष 13 अंश 20 कला से 16 अंश 40 काला क्षेत्रफल में होता है। नवमांश- सिंह। उत्पत्ति, एक जगह स्थिर रहने वाला, दृढ़ निश्चय करने वाला, बुरी आदतों को छोड़ना इसका मत है। जातक की आंखे शेर के समान दिखने वाली, गोल और मोटे आकार की नाक, माथा छोटा, भौ पर घने और मोटे बाल, भालू के समान शरीर पर रोम, चौड़े शरीर वाला होता है। 

भरणी नक्षत्र के अच्छे बुरे प्रभाव | Bharani Nakshatra First Charan GOOD BAD Impacts

जातक शिक्षित होता है, यह लोगों को अच्छा मार्ग दिखने वाला, न्याय का साथ देने वाला, आत्मा और परमात्मा से संबंध रखने वाला, नर्सरी अध्यापक भी हो सकता है। जातक घमंडी, निर्दयी, अपने परिवार के दुश्मनों का साथ देने वाला, हिंसक कार्य करने वाला, बुरे कार्यों [ चोरी व डकैती ] में रुचि रखने वाला होता है। 


भरणी नक्षत्र का द्वितीय चरण | Prediction on Bharani Nakshatra Second Charan Pada

इस चरण का स्वामी बुध होता है। इसमें मंगल, शुक्र, बुध का प्रभाव होता है। इसमें मेष 16 अंश 40 कला क्षेत्रफल से 20 अंश 00 क्षेत्रफल का होता है। नवमांश- कन्या। इस चरण में जातक के समाज सेवा करने वाला, बिखरी हुई शक्तियों को एकत्रित करने वाला, स्थिरता रखने वाला, बिना स्वार्थ के लोगों की मदद करने वाला, दूसरों के हित में कार्य करना इसकी मुख्य वस्तुगत विशेषताएं होती हैं। 

भरणी नक्षत्र के अच्छे बुरे प्रभाव | Bharani Nakshatra Second Charan GOOD BAD Impacts

जातक सत्य वचन बोलने वाला, हिरन के जैसे नेत्र, बीच के आकार की कमर [ न मोटी और न पतली ], मजबूत टांगों वाला, पैर का पंजा बाहर की ओर फैला हुआ, मोटे पेट वाला, चौड़े कंधों वाला, गठीले शरीर वाला, जरा सा धमकाने पर डरने वाला, फालतू की बात करने वाला, नृत्य में रुचि रखने वाला, नृत्यकार अध्यापक भी हो सकता है। जातक खुद से अलग दिखने वाले से स्नेह करने वाला, चालाकी दिखाने वाला, सुंदर मूर्तियां बनाने वाला, धार्मिक कार्यों को मानने वाला होता है। 


भरणी नक्षत्र का तृतीय चरण | Prediction on Bharani Nakshatra Third Charan Pada

इस चरण का स्वामी शुक्र होता है। इसमें मंगल, शुक्र, शुक्र का प्रभाव होता है। इस चरण में मेष 20 अंश 00 कला क्षेत्रफल से 23 अंश 20 कला क्षेत्रफल तक होता है। नवमांश- तुला। इस चरण में जातक समय का पालन करना, एक ही समय में अनेक कार्यों को सम्पन्न करना, अंतिम क्षण तक स्नेह करना, स्वयं से मेल न रखने वाले की ओर आकर्षित होना, अपने मन की चाह को पूरा करना इसके मुख्य विशेषताएं हैं।  

भरणी नक्षत्र के अच्छे बुरे प्रभाव | Bharani Nakshatra Third Charan GOOD BAD Impacts

जातक नरम रोम वाला, चतुराई से काम करने वाला, निर्मल आँख वाला, अनेक पुरुषों से संबंध बनाने वाली स्त्री का पति, निर्दयी, किसी बात की खुंदक के कारण हत्या करने वाला, लंबे और चौड़े शरीर का होता है। जातक अहंकारी, पूजा पाठ के कार्य करने वाला, माध्यम स्वभाव का [ न ज्यादा अच्छा और न ज्यादा बुरा ], किसी की नौकरी न करने वाला, स्वयं का व्यापार करना पसंद करता है, अधिक कार्य करने वाला [ कामुक ], ज्यादा बातचीत करने वाला होता है। 

मतान्तर-

इस चरण में मंगल, शुक्र, शुक्र के प्रभाव से जातक का मन स्त्री के साथ संभोग करने की ओर, उत्तेजना, यौन संसर्ग, बाजारू स्त्री के साथ संबंध बनाना, तृप्ति, किसी अनजान स्त्री के साथ संभोग करने की ओर ज्यादा मोहित होते हैं। 


भरणी नक्षत्र का चतुर्थ चरण | Prediction on Bharani Nakshatra Fourth Charan Pada

इस चरण का स्वामी मंगल होता है और इसमें मंगल, शुक्र, मंगल का प्रभाव होता है। इस चरण में मेष राशि 23 अंश 20 कला क्षेत्रफल से 26 अंश 40 कला क्षेत्रफल तक का होता है। नवमांश- वृश्चिक। जातक इस चरण में ऊर्जावान और अबरोधक पैदा करना इसकी मुख्य विशेषताएं होती हैं। 

भरणी नक्षत्र के अच्छे बुरे प्रभाव | Bharani Nakshatra Fourth Charan GOOD BAD Impacts

जातक का मुंह बाहर की ओर उभरा हुआ, हल्के भूरे बाल, छुपा हुआ रोगी, हिंसक कार्य करने वाला, सत्य को न मानने वाला, मित्रता को अच्छी तरह समझने वाला, अपने मित्र के साथ अच्छा व्यवहार करने वाला होता है। जातक ताकतवर होता है और अपनी ताकत का सही जगह इस्तेमाल करने वाला होता है। जातक अपने शिक्षित होने का फायदा खुद के साथ साथ दूसरों को भी देता है, जातक स्त्री के गुप्त रोगों का इलाज करने वाला, लैब में कार्य करने वाला परंतु इधर की बात उधर करने वाला जासूस होता है। 

जातक बुरे लोगों की संगत पसंद करने वाला, दुष्ट, घमंडी, झूड़ बोलने वाला, अपनी इच्छा अनुसार कार्य करने वाला, अधिक बातचीत करने वाला परंतु सही समय पर अपनी अच्छी आदतों का उपयोग करने वाला भी होता है।   


भरणी नक्षत्र का वैदिक ज्योतिष आचार्यों ने सूत्र रूप में बताया है लेकिन इसका फलित में बहुत ज्यादा बदलाव हुआ है। 

मानसागराचार्य-

                      मानसागराचार्य के मतानुसार भरणी नक्षत्र के पहले चरण में जातक छिपकर काम करने वाला, द्वितीय चरण में अश्लील शब्दो का उपयोग करने वाला, तृतीय चरण में योगीन्द्र, चतुर्थ चरण में धन हीन होता है। 

यवनाचार्य- 

                यवनाचार्य के मतानुसार भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में जातक सब कुछ त्याग देने वाला, द्वितीय चरण में जातक धनवान और सुख संपन्न होता है, तृतीय चरण में जातक बुरे कार्य करने वाला, चतुर्थ चरण में जातक निर्धन होता है।


भरणी नक्षत्र का चरण ग्रह फल | Bharani Nakshatra Prediction based on Planets

भारतीय ज्योतिषियों के मतानुसार सूर्य, बुध और शुक्र इन ग्रहों की आपस में एक दूसरे के साथ पूर्ण दृष्टि या पाद दृष्टि नही होती है क्योंकि सूर्य से बुध 28 अंश दूर और शुक्र 48 अंश से भी अधिक दूर नहीं हो सकता है।  इसलिए उनकी आपस में दृष्टि नही होती है।

भरणी नक्षत्र में सूर्य | SUN in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र में सूर्य SUN in Bharani Nakshatra
  • यदि चंद्र की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक दयावान, परोपकार करने वाला, लोगों का सम्मान करने वाला, जिससे लोग उसके सेवक बनना पसंद करने लगते हैं। 
  • यदि मंगल की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक हिंसक कार्य करने वाला, लड़ाई-झगड़ों में आगे रहने वाला, ललाई आँखों वाला होता है। 
  • यदि गुरु की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक बहुत अधिक धन संपत्ति वाला, गरीबों में दान करने वाला, जनता में प्रचलित नेता, शासन में उच्च पद का अधिकारी होता है।
  • यदि शनि की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक कट्टर, स्वास्थ्य परेशानियों से घिरा हुआ होता है। 

भरणी नक्षत्र के चरण पर सूर्य का प्रभाव- 

भरणी नक्षत्र प्रथम चरण | Sun-Surya in Bharani Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक का अच्छा स्वास्थ्य, लोगों की ओर आकर्षित, धन-दौलत बढ़ाने के लिए भाग्यवान, शिक्षित, ज्योतिष के बारे में जानने वाला, आंखो से जुड़ी कोई परेशानी या चोट का निशान, लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करने वाला होता है। ऐसे में जातक चिकित्सक या वैद्य, न्यायाधीश, या तो फिर कृषि पशुपालन के क्षेत्र में अच्छा खासा जानने वाला होता है। 

भरणी नक्षत्र द्वितीय चरण | Sun-Surya in Bharani Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक सुख-सुविधा का आनंद लेने वाला, परिवार के साथ अच्छा व्यवहार करने से सुखी जीवन व्यतीत करने वाला, निर्दयी, शिक्षित, लोगों को सही रास्ता दिखाने वाला, अंडकोष, गर्भाशय और गलसुओं जैसे रोगों से ग्रस्त, अपने बुरे स्वभाव के कारण लोग इससे दूरी बनाना पसंद करते हैं, शत्रु बना के रखने वाला, बादे का पक्का होता है। पानी का व्यवसाय करने वाला, केमिकल से जुड़े उध्योग से अपनी आजीविका चलाने वाला होता है। ऐसे जातक का प्रेम विवाह, कम धन से अधिक लाभ प्राप्त, पिता की संपत्ति का मालिक बन सकता है या तो फिर किसी और तरीके का छिपा हुआ या चोरी का धन प्राप्त होने का मौका रहता है। 

भरणी नक्षत्र तृतीय चरण | Sun-Surya in Bharani Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक अपने घर परिवार में सबसे बड़ा और घर का मालिक, देश का मुखिया भी हो सकता है, साहस वाला, विवेक वाला, खुद के भरोसे काम का बीड़ा उठाने वाला, किर्तिमान, विजय प्राप्त करने वाला, सच्चे मन से स्नेह करने वाला, दारू-मांश का सेवन करने वाला, कई रोगों से ग्रसित होता है। ऐसे समय में कई जातको के अंदर रोगों से लड़ने की क्षमता प्रबल होती है।

मतान्तर-

इस चरण में जातक के लिए सूर्य का होना अच्छा नहीं माना जाता है क्योंकि इस चरण में सूर्य का होना मतलब जातक को नुकसान होना जैसे- ऐसे में जातक के पास धन-दौलत सब होगा परंतु सूर्य के प्रभाव से वह अपनी सारी संपत्ति गबा देगा। जातक लोगों को न्याय दिलाने वाला [ वकील ], अच्छे भाषण देने वाला, चिकित्सक या वैद्य होगा परंतु वह किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं कर पाएगा। क्योंकि ऐसी स्थिति में जातक गुस्सैल, कार्यों में जल्दबाज़ी और छोटी-छोटी बात पे झगड़ा करने वाला होता है। 

भरणी नक्षत्र चतुर्थ चरण | Sun-Surya in Bharani Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक को किसी न किसी कारणवश बचपन से ही कई जिम्मेदारियों का बोझ उठाना पड़ेगा, क्योंकि ऐसी स्थिति में जातक के पिता की मृत्यु भी हो सकती है। जिस कारण जातक कंगाल, दयनीय दशा वाला, अप्रसन्न, पीछे हटने वाला, कई चीजों की चाह रखने वाला और समाज में अपमान सहने वाला होता है। ऐसे में अगर शुभ ग्रह अच्छे स्थान पर न हो या तो फिर उनकी दृष्टि सूर्य पर न हो तो जातक भीख मांगने वाली स्थिति में आ सकता है, लेकिन यदि किसी एक ग्रह की स्थिति भी कथित स्थिति को प्रभावित कर रही है तो जातक भीख मांगने वाला न होकर दान करने वाला होता है। 


भरणी नक्षत्र में चन्द्र | Moon in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र में चन्द्र Moon in Bharani Nakshatra
  • सूर्य की दृष्टि यदि चंद्र पर हो तो जातक निर्दयी परंतु जरूरतमंदों की सहायता करने वाला, किसी अपराध के कारण कानूनी सजा काटने वाला हो सकता है।
  • मंगल की दृष्टि यदि चंद्र पर हो तो जातक आग के समान, हलाहल, पक्षाघात से डरा हुआ, दूसरों के भरोसे रहने वाला होता है।  
  • बुध की दृष्टि यदि चंद्र पर हो तो जातक सब कुछ जानने वाला, यशस्वी और धन-दौलत से परिपूर्ण होता है। 
  • गुरु की दृष्टि यदि चंद्र पर हो तो जातक नियुक्त करने वाला, किसी बिभाग का अधिकारी, धन, रोगों से मुक्त होता है।
  • शुक्र की दृष्टि यदि सूर्य पर हो तो जातक आज्ञाकारी पत्नी और अपनी संतान के साथ सुखमय जीवन व्यतीत करने वाला होता है। 
  • शनि की दृष्टि यदि चंद्र पर हो तो जातक रोगों से ग्रसित, बुरे कर्म करने वाला, सत्य का साथ न देने वाला होता है।   

भरणी नक्षत्र के चरण पर चंद्र का प्रभाव- 

भरणी नक्षत्र प्रथम चरण | Moon-Chandra in Bharani Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक धन दौलत से परिपूर्ण, नौकर चाकर युक्त और अधिक वाहनों वाला, अपने घर परिवार में पुजयनीय और सम्मानित होता है। परंतु जातक अपनी जल्दबाज़ी के कारण अपनी संपत्ति या धन की हानि कर सकता है। जातक आगे की न सोचकर आज को देखता है और मजे करने वाला होता है।

भरणी नक्षत्र द्वितीय चरण | Moon-Chandra in Bharani Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक सुखी, सुंदर मुखाकृति वाला, दोस्तों के साथ अच्छा व्यवहार करने वाला, अपने गुरुओं का आदर-सम्मान करने वाला, प्रेम से जुड़ी बातें लिखने वाला, रहस्यमय चीजों को खोजने वाला, दिखानने वाला, अच्छे विचार करने वाला, अपने बिजनेस के क्षेत्र में उन्नति करने वाला, नौकरी में अच्छी पोस्ट प्राप्त करने वाला, धर्म को मानने वाला, पैसों का लालची होता है। 

भरणी नक्षत्र तृतीय चरण | Moon-Chandra in Bharani Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक सुंदर दिखने वाला, लोगों को अपनी ओर मोहित करने वाला, धन दौलत से परिपूर्ण, अच्छा भोजन करने वाला, दिखावा करने वाला, पत्नी के सौन्दर्य से स्नेह करने वाला,  दो विवाह होने का योग, पुत्रवान, मांस-मदिरा का सेवन करने वाला होता है। 

भरणी नक्षत्र चतुर्थ चरण | Moon-Chandra in Bharani Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक कमजोर, कुशलता पूर्वक कार्य करने वाला, पत्नी के वश में, प्रेम जीवन में समस्याओं से घिरा हुआ, सूरा-सुंदरी प्रसंग में, दुर्भाग्य वाला, रोगों से पीड़ित होता है। अगर चंद्र द्वितीयेश या सप्तमेश हो तो जातक की अकाल मृत्यु [ अचानक मृत्यु ] हो सकती है। 


भरणी नक्षत्र में मंगल | MARS in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र में मंगल MARS in Bharani Nakshatra
  • सूर्य की दृष्टि यदि मंगल में हो तो जातक शिक्षित, माता-पिता की आज्ञा का पालन करने वाला, पैसे वाले जातकों से ज्यादा सम्मानित होता है। 
  • चंद्र की दृष्टि यदि मंगल पर हो तो जातक निर्दयी, बुरे काम करने वाला, स्त्री की जान लेने वाला, परंतु पुलिस की नौकरी करने वाला होता है। 
  • बुध की दृष्टि यदि मंगल पर हो तो जातक दिखावा करने वाला, स्त्रियों के साथ गलत करने वाला, जाना माना चोर या तो फिर स्मगलर होता है।
  • गुरु की दृष्टि यदि मंगल पर हो तो जातक अपने घर परिवार में सबसे ज्यादा सम्मानित, धन दौलत से परिपूर्ण परंतु गुस्से पर काबू न करने वाला होता है। 
  • शुक्र की दृष्टि यदि मंगल पर हो तो जातक पौष्टिक आहार खाने वाला, चरित्र से गिरा हुआ, परंतु समाज की सेवा करने वाला होता है। 
  • शनि की दृष्टि यदि मंगल में हो तो जातक दुबला-पतला, परदेश में रहने वाला, माता के प्रेम को पाने का इच्छुक होता है। 

भरणी नक्षत्र के चरण पर मंगल का प्रभाव- 

भरणी नक्षत्र प्रथम चरण | Mars-Mangal in Bharani Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक लड़कियों के साथ रहना पसंद करने वाला, स्नेह में सबसे आगे, बुरे लोगो का साथ देने से खुद को मुसीबत में डालने वाला, विश्वास के योग्य न होने वाला, तुच्छ आहार लेने वाला, दूसरों के पैसे से खुद की जरूरते पूरी करने वाला, झूठ का दिखावा करने वाला होता है। 

मतान्तर-

ऐसे जातक की बहुत ज्यादा 50 साल ही होती है। जातक की परदेश में  तुच्छ बीमारी के कारण मृत्यु के योग। ऐसे में जातक को परदेश में रहकर धारदार हथियारों और तेजी से वाहन चलाने से बचना चाहिए । 

भरणी नक्षत्र द्वितीय चरण | Mars-Mangal in Bharani Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक ताकतवर, चौड़े शरीर वाला, धन दौलत से परिपूर्ण, बुद्धिमान, गुरुओं का आदर-सम्मान करने वाला, बेहतर स्वभाव रखने वाला, भाग्य का बड़ा तेज, मन का विनोदी, प्राचीन पुस्तकों का निर्माता होता है। 

मतान्तर-

दुबले-पतले शरीर वाला, चहरे अथवा शरीर पर सफ़ेद दाग या तो चकट्टे, स्त्री-पुरुष की जननेंद्रिय से संबंधित रोग से ग्रसित होता है। आभूषणों से जुड़ा व्यापार करके अपना जीवन यापन करने वाला होता है। 

भरणी नक्षत्र तृतीय चरण | Mars-Mangal in Bharani Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक स्नेह करने में सबसे आगे, स्त्रियों से प्रेम करने वाला, यौन संबंध बनाने का इच्छुक रहने वाला, अपने बड़े बुजुर्गों का आदर सम्मान करने वाला, मधुर वाणी बोलने वाला, धर्म को मानने वाला, समाज की सेवा करने वाला, गरीबो की सहायता करने वाला, कुशलता पूर्वक कार्य करने वाला होता है।

मतान्तर-

इस चरण में जातक लगभग 50 वर्ष की उम्र में भिक्षुक बनने का योग बनता है। जातक 84 वर्ष तक की उम्र में अच्छा और सुखी जीवन जीने वाला होता है। जातक इतनी ही उम्र में समाज में अपनी अच्छी छवि बना लेता है। 

भरणी नक्षत्र चतुर्थ चरण | Mars-Mangal in Bharani Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक रोग मुक्त, साहस वाला, वादे का पक्का, समय के अनुसार चलने वाला, किसी से न डरने वाला, हथियारों के बारे में अच्छा ज्ञान रखने वाला, हथियार चलाने में निपुण, मन में हलचल, सुख सम्पन्न, धन दौलत से परिपूर्ण होता है। 

मतान्तर-

इस चरण में जातक सर्वोच्च पद का अधिकारी होगा। इस चरण में जातक को वाहन चलाते समय अतः यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है क्योंकि इस चरण में जातक की मृत्यु का योग बन रहा है। जातक स्त्री-पुरुष की जननेंद्रिय से संबंधित रोगों का एक सफल चिकित्सक होता है।  


भरणी नक्षत्र में बुध | MERCURY in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र में बुध | MERCURY in Bharani Nakshatra
  • चंद्र की दृष्टि यदि बुध पर हो तो जातक गाने बजाने में रुचि रखने वाला, लाल नेत्रों वाला, आंगिक चेष्टाओं का कलात्मक प्रदर्शन करने वाला, अपने अच्छे व्यवहार से समाज में अपनी अच्छी छवि बनाने वाला होता है। जातक सौंदर्य पूर्ण स्त्रियों के साथ संबंध बनाने वाला तथा उन्हें अपना सेवक बना के रखने वाला होता है। इस चरण में जातक वाहन, सेवक, धन आदि सबसे परिपूर्ण होता है। 
  • मंगल की दृष्टि यदि बुध पर हो तो जातक शासन का उच्च अधिकारी बनने योग्य होगा। जातक इस चरण में अपने जीवन में धन संपत्ति इकट्ठी करेगा परंतु वह थोड़ा मज़ाकिया स्वभाव का होता है। 
  • गुरु की दृष्टि बुध पर होने से जातक आज्ञाकारी धर्मपत्नी एवं संतान के साथ सुखमय जीवन व्यतीत  करने वाला होता है। 
  • शनि की दृष्टि यदि बुध पर है तो जातक निर्दयी, बुराई का साथ देने वाला और घर परिवार में कलेश मचाने वाला होता है। 

भरणी नक्षत्र के चरण पर बुध का प्रभाव- 

भरणी नक्षत्र प्रथम चरण | Mercury-Budh in Bharani Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक तुच्छ, नृत्यकार, अस्थिर स्वभाव वाला, लोगो के कहने पर झूठ को सच मानने वाला, बुरे कर्म करने वाला, चरित्रहीन, हिंसक कार्य करने वाला, चोरी, जुआरी, स्त्रियों के स्नेह को पाने के लिए विचलित , मनोरंजन आने वाले कार्यों को करने में रुचि रखने वाला, गंदी-गंदी बातें लिखने वाला, आनंदित रहता है। 

मतान्तर-

इस चरण में जातक लंबी उम्र जीने वाला होता है। जातक के बचपन में कुछ गलत कार्यों के कारण मृत्यु होना संभव हो सकता है। अगर जातक की उम्र लंबी है तो जातक लेखन कार्य में संलग्न हो सकता है। जातक भवन से जुड़े कार्य जैसे ठेकेदार या मैकेनिक हो सकता है। 

भरणी नक्षत्र द्वितीय चरण | Mercury-Budh in Bharani Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक सुखी, रूपवान, ऐश्वर्यवान, सबका भला करने वाला, दयावान, मेहमानों का सम्मान करने वाला, लेखन कार्य करने वाला, भाषण देने वाला, मधुर वाणी बोलने वाला, परोपकार करने वाला होता है। 

भरणी नक्षत्र तृतीय चरण | Mercury-Budh in Bharani Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक लंबी उम्र जीने वाला, तकदीर वाला, धन दौलत से परिपूर्ण , ईमानदार, मित्रों की संगत करने वाला, साहित्यिक कार्यों से धन लाभ अर्जित करने वाला, शिक्षित, किसी भी विभाग का ठेकेदार होता है। जातक की पत्नी अच्छे चरित्र वाली, आज्ञाकारी और धैर्यवान होती है। 

भरणी नक्षत्र चतुर्थ चरण | Mercury-Budh in Bharani Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक फालतू की बातचीत करने वाला, चालबाज, मित्रों का बुरा चाहने वाला, असत्य का साथ देने की वजह से न्यायालय द्वारा दंडित,  रक्त का विकार करने वाला, अच्छे आहार का उपयोग करने वाला, संतान वाला होता है। ऐसे में कई जातक न्याय का साथ देने वाले, धनवान, भाषण देने वाला तथा इंजीनियर होता है। 

मतान्तर-

इस चरण में जातक अपनी 45 वर्ष तक की उम्र में अच्छा जीवन व्यतीत करने वाला लेकिन उसके बाद सामान्य जीवन जीने वाला, सरकारी नौकर, जातक के शरीर पर चोट का निशान, मिर्गी एवं लकवा होने का डर रहता है।


भरणी नक्षत्र में गुरु | JUPITER in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र में गुरु JUPITER in Bharani Nakshatra
  • सूर्य की दृष्टि यदि गुरु पर हो तो जातक सत्य का साथ देने वाला, सामाजिक कार्यों में लोगों की मदद करने वाला होता है। 
  • चंद्र की दृष्टि यदि गुरु पर हो तो जातक बड़े-बुजुर्गों का आदर सम्मान करने वाला, बुजुर्गों का कहना मानने वाला, शांत रहने वाला, अपने अच्छे कार्यों से समाज में अपनी अच्छी छवि बनाने वाला होता है।
  • मंगल की दृष्टि यदि गुरु पर हो तो जातक निर्दयी, ऐयाशी करने वाला, मनचाहे तरीके से पैसा उढ़ाने वाला, अहंकारी का अहंकार दुरुस्त करने वाला, शासन के अनुसार चलने वाला, शासन के कारमचारियों पर अपना हुक्म चलाने वाला होता है। 
  • बुध की दृष्टि यदि गुरु पर हो तो जातक सत्य के खिलाफ रहने वाला, भाषण देने वाला, लड़ाई-झगड़ों में सबसे आगे, बाजारू स्त्रियों के साथ संबंध बना के रखने वाला, अडंबर करने वाला होता है। 
  • शुक्र की दृष्टि यदि गुरु पर हो तो जातक सुखमय जीवन यापन करने वाला, वस्त्र, आभूषणों और वाहनों का शौकीन होता है। 
  • शनि की दृष्टि यदि गुरु पर हो तो जातक घर परिवार में कलेश मचाने वाला, गलत रास्ते पर चलने की सलाह देने वाला होता है। 

भरणी नक्षत्र के चरण पर गुरु का प्रभाव- 

भरणी नक्षत्र प्रथम चरण | Jupiter-Guru in Bharani Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक सत्य का साथ देने वाला, अच्छे भाषण देने वाला, पिता से स्नेह करने वाला होता है। इसी कारण अन्य जातक इसका भगवान के समान आदर सम्मान करने वाले होते हैं। जातक के 2 या 3 विवाह संभव हो सकते हैं। जातक किसी बैंक या किसी कंपनी का मेनेजर हो सकता है। ऐसे में जातक को मानसिक तनाव हो सकता है परंतु अपनी दिमागी हालत ठीक रखने के लिए थोड़ा साबधान रहना होगा। इस चरण में कुछ ऐसे भी जातक होते हैं जो ईश्वर में विश्वास रखने वाले, समझदार और योग्य होता है। जातक के अच्छा कर्मों के कारण महापुरुषों के दर्शन भी संभव होते हैं। 

भरणी नक्षत्र द्वितीय चरण | Jupiter-Guru in Bharani Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक रूपवान, साफ-सुथरे वस्त्र धारण करने वाला, साहित्यिक लड़ाई-झगड़ों में माहिर, ईमानदार, बादे का पक्का, भरी सभा में चतुराई दिखाने वाला पंडित होता है। ऐसे में कई जातक दंड निर्माण के विषय का विशेष ज्ञान रखने वाला होता है। 

भरणी नक्षत्र तृतीय चरण | Jupiter-Guru in Bharani Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक सुंदर मुखाकृति वाला, अच्छा स्वास्थ्य, ताकतवर, तेज वाला, सम्मान प्राप्त, धार्मिक आस्था रखने वाला, नीति को मानने वाला होता है। जातक लंबी-लंबी यात्राएं करना पसंद करता है। जातक अचानक हुई दुर्घटना से सुरक्षित बचेगा। जातक अपने जीवन में 32 वर्ष पूर्ण करने के पश्चात सुखी एवं अच्छा जीवन व्यतीत करेगा। 

भरणी नक्षत्र चतुर्थ चरण | Jupiter-Guru in Bharani Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक को मुह में किसी तरह की परेशानी, जिसका कुछ पता नहीं उस भय से डरा हुआ, समाज में बदनाम, बुरे काम करने वाला, तंत्र-मंत्र की विद्या में निपुण, अपनी शक्ति से दूसरों को नुकसान पहुँचाकर खुद का लाभ करने वाला होता है। 


भरणी नक्षत्र में शुक्र | VENUS in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र में शुक्र VENUS in Bharani Nakshatra
  • चंद्र की दृष्टि यदि शुक्र पर हो तो जातक समाज में सम्मानित और अच्छा दर्जा प्राप्त करने वाला,परंतु जातक के स्त्रियों के साथ विधि-विरुद्ध संबंध बनाने के कारण समाज में अपना सम्मान खो देता है। 
  • मंगल की दृष्टि यदि शुक्र पर हो तो जातक का धन-दौलत और गौरव सब नष्ट हो जाता है। 
  • गुरु की दृष्टि यदि शुक्र पर हो तो जातक लोगों को अपनी ओर मोहित करने वाला, आज्ञाकारी संतान और पत्नी के साथ सुखी जीवन यापन करने वाला होता है। 
  • शनि की दृष्टि यदि शुक्र पर हो तो जातक अवैध संपत्ति का मालिक, शांत स्वभाव का और दूसरों की मदद करने में सबसे आगे रहता है। 

भरणी नक्षत्र के चरण पर शुक्र का प्रभाव-

भरणी नक्षत्र प्रथम चरण | Venus-Shukra in Bharani Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक अच्छा संगीतकार, संगीत से जुड़ी चीजों का व्यापार करने वाला, उच्चकोटी के भाषण देने वाला, सबके द्वारा पसंद किया जाने वाला, पत्नी आज्ञाकारी एवं चरित्रवान, खुशहाल जीवन यापन करने वाला, समय के अनुसार भोजन करने वाला, नशा [ धूम्रपान ] करने वाला या चैन स्मोकर होता है। 

भरणी नक्षत्र द्वितीय चरण | Venus-Shukra in Bharani Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक उच्चकोटी का विद्वान, धर्म को मानने वाला, स्त्रियों के जैसे रहने वाला, यात्रा प्रेमी, होता है। ऐसे जातक धार्मिक स्थलों पर सहयोग करने वाले होते हैं। जातक छिपे हुए रोगों से ग्रसित, प्रेम रति का प्रिय होता है। ऐसे में कहीं न कहीं स्त्री जातक स्त्री रोग चिकित्सक हो सकती है। 

भरणी नक्षत्र तृतीय चरण | Venus-Shukra in Bharani Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक छोटे कद वाला, सुंदर-सुंदर वस्त्र और आभूषणों का शौकीन, स्त्रियों को चाहने वाला, जीवन के अंतिम क्षण तक सुंदर और सुशील पत्नी के साथ रहने वाला, शत्रुओं के द्वारा होने वाली हानी से डरा हुआ होता है। यदि शुक्र जातक के बारहवें भाव में हो तो जातक को अचानक किसी अनजान जगह से धन प्राप्ति अथवा कल्याण होता है। 

भरणी नक्षत्र चतुर्थ चरण | Venus-Shukra in Bharani Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक परदेश में रहने वाला, धार्मिक ग्रंथों का ममन अध्ययन करने वाला, मंदिर का पुजारी  , मंदिर में आय चढ़ावे से अपने जीवन को जीने वाला होता है। दक्षिण भारतीय प्रथा के अनुसार जातक पंडितों को भोजन कराने वाला होता है। 


भरणी नक्षत्र में शनि | SATURN in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र में शनि SATURN in Bharani Nakshatra
  • सूर्य की दृष्टि यदि शनि में हो तो जातक पशुओं का पालन करने वाला और कृषि क्षेत्र में रहकर अपना जीवन यापन करने वाला होता है। 
  • चंद्र की दृष्टि यदि शनि पर हो तो जातक निर्दयी, बुरे कर्म करने वाला, गंदे लोगों के साथ रहने वाला होता है। 
  • मंगल की दृष्टि यदि शनि पर हो तो जातक दूसरों के हित में अच्छा कार्य करने वाले का बुरा करने वाला, दिक्कतों का डटकर मुक़ाबला करने वाला, नीति के अनुरूप तुच्छ होता है। 
  • बुध की दृष्टि यदि शनि पर हो तो जातक अच्छे चरित्र वाला, आज्ञाकारी पत्नी वाला, झूठ का साथ देने वाला, स्त्रियों के प्रेम को तरसते रहने वाला होता है। 
  • गुरु की दृष्टि यदि शनि पर हो तो जातक राजनीति में उच्च पद का नेता, धन दौलत, गाड़ी-घोडा आदि के साथ अपना जीवन सुखमय व्यतीत करने वाला होता है। 
  • शुक्र की दृष्टि यदि शनि पर हो तो जातक कृष्ण के समान वाणी बोलने वाला, लोगों की ओर जल्दी आकर्षित न होने वाला होता है। जातक अपने कार्य के चक्कर में विदेश यात्रा भी कर सकता है। अपनी इच्छा को शांत करने के लिए निसंतान स्त्री के साथ संभोग करना पसंद करेगा। 

भरणी नक्षत्र के चरण पर शनि का प्रभाव- 

भरणी नक्षत्र प्रथम चरण | Saturn-Shani in Bharani Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक धार्मिक ग्रंथों के बारे में जानने का इच्छुक, शिक्षित, अपने हिसाब से धन इकट्ठा करने वाला, बुद्धिमान लोगों से द्वारा सम्मानित किया गया होता है। जातक के सर पर चोट लाग्ने का योग होगा। 

भरणी नक्षत्र द्वितीय चरण | Saturn-Shani in Bharani Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक रूपवान, विद्वान, एक जगह स्थिर न रहने वाला, शासकीय सलाहकार, जीवन में तरक्की करने वाला, धर्म परायण होता है। ऐसी स्थिति में कई जातक कवि, भाषण देने वाले भी होते हैं। अगर स्त्री जातक को देखा जाए तो नियमित रूप से मासिक धर्म न होना और जल्दी गर्भधारण नहीं होता है यदि होता भी है तो गर्भपात हो जाता है। 

भरणी नक्षत्र तृतीय चरण | Saturn-Shani in Bharani Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक बुद्धिमान, प्रसन्नचित्त, विस्तृत भू–भाग में किया जाने वाला भ्रमण पसंद करने वाला, कार्य करने वाला होता है। 

मतान्तर-

इस चरण में जातक दूसरों के भरोसे रहने वाला, दूसरों के द्वारा पाला-पोसा गया, सौतेली माता या पिता का योग या जातक के माता-पिता इसे दूसरों के हाथों समर्पित कर देते हैं। 

भरणी नक्षत्र चतुर्थ चरण | Saturn-Shani in Bharani Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक अपने जीवन में 35 साल तक की उम्र तक दूसरों के भरोसे रहने वाला, ऐसी स्थिति में यह भी संभव है की जातक के माता-पिता का बचपन में ही स्वर्गवास हो जाए जिस कारण जातक दूसरों के द्वारा लालन-पालन किया हुआ होता है। जातक मेहनती होने के कारण सरकारी नौकरी जैसे सेना या पुलिस में भर्ती हो सकता है। यदि इस चरण में मंगल की दृष्टि शनि पर हो तो जातक हिंसक कार्य करने वाला, स्मगलर,  चोरी करने वाला होता है। 


भरणी नक्षत्र में राहु | RAHU in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र प्रथम चरण | Rahu in Bharani Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक प्रकाशवान, बलशाली, बहुत अधिक समय से किसी संपत्ति का मालिक परंतु आखिर में कोर्ट कचहरी के चक्कर में पागल हो सकता है। इस चरण में जातक को जहरीले जानवर या किसी पागल कुत्ते के काटने का डर रहेगा। 

भरणी नक्षत्र द्वितीय चरण | Rahu in Bharani Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक समाज में सम्मानित एवं प्रकाशित, मेहनत से कमाया गया पैसा खोने का भय रहता है। जातक अपनी धन संपत्ति में वाहन आदि का उद्योग करके भी बढ़ोतरी करेगा। जातक के चहरे पे सफेद दाग या फिर कुष्ठ रोग से ग्रसित होता है।

भरणी नक्षत्र तृतीय चरण | Rahu in Bharani Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक कवि, अच्छे और लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले भाषण देने वाला, शिक्षा के क्षेत्र में ज्ञान प्राप्त करने का इच्छुक होता है। इस चरण में जातक कानूनी विभाग का अधिकारी बनने के योग्य होता हैं।

भरणी नक्षत्र चतुर्थ चरण | Rahu in Bharani Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक यदि शुभ ग्रह से दृष्ट हो या फिर शुभ स्थान में हो तो पशुपालन या दुग्ध उत्पादन का व्यवसाय करने वाला होता है। ऐसी स्थिति में जातक की संपत्ति में बढ़ोत्तरी, विदेश जाने का अवसर, नौकरी में उच्च पद की प्राप्ति हो सकती है। यदि जीवन साथ थोड़ा गुस्सैल होता है तो मतभेद संभव हैं।


भरणी नक्षत्र में केतु | KETU in Bharani Nakshatra

भरणी नक्षत्र प्रथम चरण | Ketu in Bharani Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक शारीरिक कष्टों से जूझने वाला, मन से अप्रसन्न, घर परिवार में लड़ाई झगड़ा करने वाला, भ्रमित चेतना के कारण अयथार्थ वस्तु आदि देखना होता है। जातक अपनी परंपरा अनुसार कमल के पत्ते या केले के पत्ते पर भोजन करने वाला होता है। जातक सात वर्ष तक अपनी जीवन याचिका चलाने वाला होता है। अगर केतु शुभ दृष्टि में है तो जातक की उम्र 20 वर्ष तक होती है। 

भरणी नक्षत्र द्वितीय चरण | Ketu in Bharani Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक तुच्छ लाभ प्राप्त करने वाला, शारीरिक दिक्कतों का सामना करने वाला, जल संबंधी रोगों के कारण मृत्यु का शिकार, कानूनी विभाग में उच्च पद का अधिकारी हो सकता है।

भरणी नक्षत्र तृतीय चरण | Ketu in Bharani Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक साधु स्वभाव का, रोगों से लड़ने की शक्ति रखने वाला, जड़ी बूटियों के बारे में जानकार, वैद्य गिरी से अपना जीवन यापन करने वाला होता है। अगर गुरु अश्लेषा नक्षत्र में हो तो जातक समाज में ईश्वर के समान पूजनीय होता है।

भरणी नक्षत्र चतुर्थ चरण | Ketu in Bharani Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक को भूमि लाभ के योग, चीजों को बनाने वाला, राज्य का मुखिया, संगीतकार और ललित कला में माहिर होता है। ऐसे में जातक का शरीर चितकबरा या दुबला पतला हो सकता है। 


*जातक* = ज्योतिषीय विचारों से जिस प्राणी का वर्णन किया जाए उसे जातक कहते हैं।