पुष्य नक्षत्र फल लाभ हानि उपाय एवं विशेषताएँ | Pushya Nakshatra

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पुष्य नक्षत्र | Pushya Nakshatra

पुष्य नक्षत्र

पुष्य नक्षत्र का राशि चक्र में 93 अंश 20 कला से 106 अंश 40 कला क्षेत्रफल होता है। पुष्य नक्षत्र को अरब मंजिल में ” अल नत्राह ” ( शेर का नथुना ), ग्रीक में ” कनोपुस ” और चीन सियु में ” कई ” के नाम से जाना जाता है। टॉलेमी के मतानुसार यह नक्षत्र उन तारों में से एक है जिसकी चमक लगभग 1 से 2 सालों में घटी है।

सूर्य के सिद्धांतों के आधार पर देखा जाए तो पुष्य का अर्थ होता है पोषित करना या फिर शिखर तक ले जाना। पुष्य नक्षत्र को धीरे-धीरे हरा भरा करने अथवा मंगलकारी के रूप में भी जाना जाता है।पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति ( गुरु ), स्वामी ग्रह शनि और राशि कर्क है जो 03 अंश 20 कला से 16 अंश 40 कला क्षेत्रफल में होती है। आकाशीय पिंडों के अध्यन से यह आठवा लघु संज्ञक नक्षत्र होता है।

पुष्य नक्षत्र के तीन तारे होते हैं जो एक समान रेखा में होकर तीर को दर्शाते हैं। इसे कल्याणकारी अथवा देव नक्षत्र भी कहा जाता है। पुष्य नक्षत्र को सभी 27 नक्षत्रों में सबसे प्रिय नक्षत्र माना गया है क्योंकि यह सकारात्मक सत्त्वगुण संपन्न पुरुष नक्षत्र होता है। पुष्य नक्षत्र की जाति क्षत्रिय, योनि छाग, योनि वैर वानर गण देव और आदि नाड़ी है। पुष्य नक्षत्र पूर्व दिशा का स्वामी माना गया है।


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पुष्य नक्षत्र की कथा पौराणिक कहानी | Pushya Nakshatra mythological story

प्राचीन कथा के अनुसार इस नक्षत्र के स्वामी गुरु को माना गया है क्योंकि ये देवताओं के भी गुरु हैं। ऐसा माना जाता है की भगवान शिव की कृपा दृष्टि से इन्हे सभी ग्रहों में गुरु का स्थान प्राप्त हुआ है। जो इन्द्र देव के सलाहकार माने जाते हैं। शिव पुराण के अनुसार गुरु को अंगिरस और सरूपा का पुत्र बताया गया है। इनका विवाह तीन स्त्रियों के साथ हुआ था जिनका नाम तारा, ममता और शुभ है। इनका रंग और वस्त्र पीले होते हैं। ये लंबी उम्र, वंश में उत्पन्न और इंसाफ के दाता माने गए हैं। 

इन्हे ईश्वर दिशा यानि उत्तर-पूर्व कोण का स्वामित्व प्राप्त है। यह नक्षत्र शादी के लिए हमेशा परित्यक्त माना गया है। इसका कारण है की बृह्मा जी ने अपनी पुत्री शारदा का विवाह गुरु पुष्य के साथ करने का प्रण लिया था। परंतु बृह्मा जी अपनी पुत्री की सुंदरता को देख स्वंम मोहित हो गए जिसके कारण बृह्मा जी ने गुरु पुष्य को श्राप देकर विवाह से हमेशा के लिए परित्यक्त कर दिया। यही कारण है की गुरु पुष्य में विवाह सम्पन्न नही होते हैं।


पुष्य नक्षत्र की विशेषताएँ | Pushya Nakshatra Importance 

पुष्य नक्षत्र में गुरु और शनि दोनों ग्रहों का प्रभाव होता है जिसके कारण इस नक्षत्र में सभी तरह की पूजा, वंदना पूर्णतया सफल होती है। यह मन से संबंध रखने वाला, माँ के स्तन में बनने वाले दूध और शुभ अशुभ का कारक होता है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक गुस्सैल, जिद्दी, मतलबी और दुराग्रह करने वाला होता है। इस नक्षत्र के दौरान सोने के आभूषण खरीदना बेहद अच्छा माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार अगर रविवार और गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र हो तब चीजों को खरीदना बेचना बेहद लाभकारी माना गया है। भगवान श्री राम के भाई भरत का जन्म नक्षत्र भी पुष्य है।


पुष्य नक्षत्र के उपाय | Pushya Nakshatra Remedy

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि पुष्य नक्षत्र जन्म नक्षत्र है और हानिकारक स्थिति में हो या कमजोर स्थिति में तो जातक को इस नक्षत्र के उपाय करने चाहिए जो कुछ इस प्रकार है- 

  • गाय की सेवा करने से पुष्य नक्षत्र के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। 
  • प्रतिदिन सुबह गाय को रोटी या चारा खिलाना चाहिए। 
  • गरीबों की मदद करनी चाहिए। 
  • ऊँ बृहस्पतये नम: मंत्र का जाप करके इस नक्षत्र के अशुभ प्रभाव कम किए जा सकते हैं। 
  • जातक पीले, सफ़ेद और नारंगी वस्त्र धारण करके भी इस नक्षत्र के अशुभ प्रभाव कम कर सकता है। 
  • पुष्य नक्षत्र के शुभ प्रभाव की प्राप्ति के लिए देवी अदिति की पूजा वंदना करनी चाहिए। 
  • इसके अशुभ प्रभाव कम करने के लिए गुरु देव अथवा भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए। उसके लिए पूरी विधि विधान से करने की आवश्यकता होती है। 

भगवान विष्णु की आराधना करने के लिए धूप, घी, वंदन, महक, फूल और दीपक जलाकर विष्णु भगवान से आराधना करते हुए मिठाई अर्पित करनी चाहिए। यदि जातक पुष्य नक्षत्र के वैदिक मंत्र का जाप करके इसके शुभ प्रभाव कम करना चाहता है तो वह इसके लिए गाय के दूध से बनी खीर और घी लेकर होम करते हुए इस नक्षत्र के वैदिक मंत्र का जाप करना चाहिए इससे आपके जीवन में समस्याएँ कम होती हैं। परंतु प्रतिदिन पुष्य नक्षत्र के वैदिक मंत्र का जाप करने से इसके अशुभ प्रभाव जल्दी कम होते हैं। इसके जाप की संख्या कम से कम 108 बार होनी चाहिए। जो इस प्रकार है- 

पुष्य नक्षत्र का वैदिक मंत्र     

ऊँ बृहस्पते अतियदर्यो अर्हाद्द्युमद्विमाति क्रतु मज्जनेषु ।

यद्दीदयच्छ वसऋत प्रजाततदस्मासु द्रविणंधेहिचित्रम् ।।


पुष्य नक्षत्र फलादेश | पुष्य नक्षत्र का फल | Pushya Nakshatra Prediction 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पुष्य नक्षत्र का फलादेश कुछ इस प्रकार है की इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक उन्नतिवान, माधुर वाणी बोलने वाला, आत्मा-परमात्मा से संबंध रखने वाला, संतुष्ट, स्वंम के भरोषे आगे बढ्ने वाला, बुद्धिमता को ग्रहण किय हुए, बिना स्वार्थ के मदद करने वाला, अनाथों का सहायक, मतलबी लोगों से दूर रहने वाला, समाज के हित में कार्य करने वाला होता है। पुष्य नक्षत्र का जातक ईश्वर में विश्वास रखने वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण, पुत्र सुख से सम्पन्न, रूपवान, शांत स्वभाव वाला, खुशहाल जीवन जीने वाला होता है।

ये लोगों को खुश रखने और समाज में खुशहाल माहौल बनाने की इच्छा रखते हैं लेकिन इनका अपने घर-परिवार को सामाजिक कार्यों से जोड़ने के कारण आपस में तनाव की स्थिति बनी रहती है। माँ की गोद के समान पुष्य का पोषण होता है। पुनर्वसु के बाद और विपरीत भौतिक स्तर पर सुखदायक होता है पुष्य का पोषण। पुष्य में ब्रम्हवर्चस शक्ति का वास होता है, जो जातक को आशीर्वाद के योग्य बनाता है।


पुष्य नक्षत्र के पुरुष जातक | Impact of Pushya Nakshatra on Male 

पुष्य नक्षत्र के पुरुष जातक समाज में सम्मान के योग्य, बहादुर, महान, मनमोहक, विद्वान, ताकतवर, तीव्र इच्छाशक्ति वाला होता है। इनका शरीर सामान्य होता है उसमें किसी प्रकार का कोई विशेष होने का भाव नही होता है क्योंकि सबकी शारीरिक बनबाट अलग-अलग ही होती है। लेकिन इनके शरीर पर किसी प्रकार का घाव, तिल, दाग या मसा होता है जो साफ दिखाई देता है। जातक कमजोर शरीर वाला, प्रहार करने योग्य, मिश्रित प्रभावों वाला, चुनौतीपूर्ण फैसले करने में असफल, केंद्र बिन्दु के समान, धर्म को मानने वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण, पुत्र संतति युक्त, शांत स्वभाव वाला होता है। 

जातक पवित्र हृदय वाला, चरित्रवान, बाहरी दुनियाँ के असर को रोकने में असफल रहता है। जातक की मदद होती है लेकिन अगर न हो तो जातक धड़ाम से नीचे गिरता है। जातक कर्म करने वाला परंतु व्यवहार अच्छा नही होता है। स्थिर चित्त न होने के कारण इधर-उधर भटकने वाला, निरादर करने वाले लोगों से साथ उनके जैसा व्यवहार करने वाला होता है। पुष्यमी को 15 से 16 वर्ष की आयु तक कठिनाइयों और बीमारियों सामना करना पड़ता है। उसके बाद 30 से 32 वर्ष की उम्र तक जीवन में संघर्ष करना पड़ता है लेकिन उसके बाद जीवन सुधारने लगता है और उन्नति करता है। 

जिससे जीवन स्थिर हो जाता है। जातक अपने बचपन में ही घर-परिवार की समस्याओं से घिरा रहता है। जातक के परिवार की आर्थिक स्थिति शुरुआत से कमजोर होती है। वैवाहिक जीवन में भी तनाव रहता है क्योंकि कार्यों के चलते अपनी पत्नी और बच्चों से दूर रहना पड़ता है। ये अपनी पत्नी के दूर रहने की वजह से भरोषा नही करता है जिसके कारण उसे अपनी मर्जी के अनुसार कार्य करने को कहता रहता है। पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातक को किसी अनुभवी ज्योतिष आचार्य की सलाह से ही विवाह करना चाहिए।


पुष्य नक्षत्र के स्त्री जातक | Impact of Pushya Nakshatra on Female 

पुष्य नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ श्रेष्ठ, सम्मानित, दयालु होती हैं जिसके कारण इनका स्वभाव और व्यक्तित्व प्रभावशाली हो जाता है। स्त्री जातक की लंबाई कम, गेहुआ रंग ( सावला ), आगे की ओर निकला हुआ चहरा, मानसिक स्थिरता अच्छी होती है। जिसके कारण ये लोगो को अपनी ओर आकर्षित करती है। स्त्री जातक पवित्र हृदय वाली, धोखा न देने वाली, विश्वास के योग्य, ईमानदार, दयालु, सही मार्ग पर चलने वाली, समस्याओं में साथ रहने वाली, व्यावहारिक न होना, शांत स्वभाव वाली, छोटी-छोटी पर गुस्सा करने वाली, ज्ञान न होने के कारण अन्य व्यक्तियों के द्वारा काम लिया जाता है। 

स्त्री जातक को भी पुरुष जातकों की तरह 15 से 16 वर्ष की उम्र तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बाल्यावस्था में परेशानियाँ और रुकावटों से जूझना पड़ता है। विवाह के बाद भी इन्हे सुख नही मिल पाता है क्योंकि इनका वैवाहिक जीवन भी परेशानियों से भरा होता है। जिसके कराण इनका व्यवहार किसी को अच्छा नही लगता है। ये विवाह के बाद अपने पति के प्रति सच्चा मन और ईमानदार रहती है लेकिन उसके बाद भी इनका पति इन्हे गलत समझता है।


प्राचीन ऋषिमुनियों व आचार्यों के अनुसार पुष्य नक्षत्र | Pushya Nakshatra 

पुष्य नक्षत्र के जातक रूपवान, सुंदर, बहादुर, प्रचलित, धर्म को मानने वाले, धन-दौलत से परिपूर्ण, ईमानदार और साहसी होते हैं। ये सच का साथ देने वाले होते हैं फिर चाहे इन्हे कोई गलत समझे या सही ये सच के साथ खड़े रहते हैं। ये अपने कार्यों में व्यस्त रहने वाले, गलत कार्यों से दूर रहने वाले, विविध कलाओं का ज्ञान रखने वाले, समाज में प्रशंसा के योग्य, आसानी से परखा जाने वाले होते हैं। ये रुष्ट और दुखी न रहकर हस्ते-मुस्कुराते रहने वाले होते है। ———- पराशर  

पुष्य नक्षत्र के जातकों को काम की कमजोरी नही रहती है, ये कभी खाली समय बरवाद नही करते, सेहत अच्छी रहती, ये अपनी नजर अच्छी जगह डालते हैं न की बुरी जगह यही इनका सबसे अच्छा गुण है। जातक शांत रहने वाले होते हैं। ———— वराहमिहिर

चन्द्र –

     पुष्य नक्षत्र में अगर चन्द्र हो तो जातक ईश्वर में विश्वास रखने वाला, महान, परम्पराओं को मानने वाला, जरूरतमन्द की सहायता करने वाला, मतलबी, रक्षा करने वाला, मन से संबंध रखने वाला, स्वंम के भरोषे रहने वाला, धन एकत्रित करने वाला, समाजसेवी होता है। यदि यह किसी से कोई कार्य की कहता है और वह नही मनता है तो यह उसे खुद से दूर कर देता है जिससे वह अपना घमंड प्रदर्शित करता है। 

जातक बुद्धिमान, शांत स्वभाव वाला, धर्म की राह पर चलने वाला, समाज में लोगों की मदद करने वाला, राजनीति में अपना कदम जमाने वाला, पारिवारिक परेशानियाँ बनी रहती है। इन्हे 30 से 32 वर्ष की उम्र तक कठिन परिश्रम करना पड़ता है लेकिन उसके बाद सफलता को प्राप्त करते हैं। माता पक्ष से दुख मिलता है।

सूर्य –

     पुष्य नक्षत्र में सूर्य हो तो जातक मधुर वाणी बोलने वाला, उच्च पदाधिकारी, धन-दौलत से परिपूर्ण, कम खर्च करने वाला होता है। 

लग्न –

       पुष्य नक्षत्र में लग्न हो तो जातक इंसानियत पूर्ण, अच्छे विचारों वाला, पढ़ा-लिखा, शिक्षित लोगों की तरह बातचीत करने वाला, धर्म को मानने वाला, अपने अनुसार जीने वाला, गायक, रचनात्मक कार्य करने वाला, अपने कार्यों के लिए पुरुषकरिता प्राप्त करता है।


पुष्य नक्षत्र का चरण फल | Prediction of Pushya Nakshatra Charan pada 

प्र

प्रित्येक नक्षत्र में चार चरण होते हैं जिसमें एक चरण 3 अंश 20 कला का होता है। नवमांश की तरह होता है जिसका मतलब यह है की इससे नौवे भाग का फलीभूत मिलता है सभी चरणों में तीन ग्रहों का प्रभाव होता है जो इस प्रकार है – राशि कर्क, देवता गुरु ( बृहस्पति ) और स्वामी ग्रह शनि ।


पुष्य नक्षत्र का प्रथम चरण | Prediction of Pushya Nakshatra First Charan pad

पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी ग्रह सूर्य होता है। इस चरण में चन्द्र, शनि और सूर्य का प्रभाव होता है। राशि कर्क 93 अंश 20 कला से 96 अंश 40 कला क्षेत्रफल तक होती है। नवमांश सिंह ! प्रथम चरण रोशनी, तेज प्रकाश, उपलब्ध होने की अवस्था, धन-दौलत, शुभ और पिता के अहंभाव का कारक होता है। 

जातक बिल्ली के समान सुखाकृति वाला, लंबी भुजाओं वाला, लंबे पैरों वाला, शादी की इच्छा रखने के कारण दूसरे देश में रहने वाला, कलात्मक होता है। जातक गलत कहने बालों को जबाब देने वाला, बिजनेस व्यापार में गंभीरता से कार्य करने वाला, घर-परिवार के बारे में अधिक विचार करने वाला, शादी में रुकावटों का सामना करने वाला, वैवाहिक जीवन में तनाव रहने के कारण परेशानियाँ रहती है। इस नक्षत्र के प्रथम चरण के कई जातक मजदूरी करने वाले होते हैं।


पुष्य नक्षत्र का द्वितीय चरण | Prediction of Pushya Nakshatra Second Charan pad

पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी ग्रह बुध होता है। इस चरण में चन्द्र, शनि और बुध का प्रभाव रहता है। राशि कर्क 96 अंश 00 कला से 100 अंश 00 कला क्षेत्रफल तक होती है। नवमांश कन्या ! पुष्य नक्षत्र का द्वितीय चरण संयम और शुक्र को छोड़कर अन्य सभी ग्रहों के शुभ कार्यों का कारक होता है। 

जातक सुंदर और बड़ी-बड़ी आँखों वाला, नाजुक शरीर वाला, गौरव वर्णी, मधुरभाषी, शिक्षित, अच्छा बोलने वाला, स्त्री के समान सुंदर व मोटा-ताजा और बलबान परंतु लापरवाह होता है। जातक नौकर की तरह कार्य करने वाला, इस चरण में स्त्री या पुरुष जातक अपने स्वंम के नौकर होते है। सेहत में उतार-चढ़ाव लगा रहते हैं जिसके कारण स्वास्थ्य अच्छा नही रहता है।


पुष्य नक्षत्र का तृतीय चरण | Prediction of Pushya Nakshatra Third Charan pad

पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी ग्रह शुक्र होता है। इस चरण में चन्द्र, शनि और शुक्र का प्रभाव होता है। राशि कर्क 100 अंश 00 कला से 103 अंश 20 कला क्षेत्रफल तक होती है। नवमांश तुला ! पुष्य नक्षत्र का तृतीय चरण सुख-सुविधा, समाज में सम्मानित, अनुकूल होने की अवस्था, सतह संबंधी प्रगाड़ता का कारक होता है। 

इस चरण में जातक मधुरभाषी, मोटे-ताजे शरीर वाला, धनुष के आकार में भौ, गोल व सुंदर नाक वाला, पतली और आकर्षित आँखों वाला, सुख भोग प्राप्त करने वाला, क्षीण होने की अवस्था ( क्षीणभाग्य ), जाति के लोगों की मदद करने वाले होते हैं। जातक समाज के साथ चलने वाला, स्त्रियों के साथ यौन संबंध बनाने की इच्छा रखने वाला, परिवार के मुक़ाबले व्यापार को ज्यादा महत्वता देने वाला, अपने कार्यों को गंभीरता से करने वाला होता है। जातक अपने जीवन में सुख-सुविधा का भरपूर्ण आनंद लेने वाला होता है।


पुष्य नक्षत्र का चतुर्थ चरण | Prediction of Pushya Nakshatra Fourth Charan pad

पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी ग्रह मंगल होता है। इस चरण में चन्द्र, शनि और मंगल का प्रभाव होता है। राशि कर्क 103 अंश 20 कला से 106 अंश 40 कला क्षेत्रफल तक होती है। नवमांश वृश्चिक ! पुष्य नक्षत्र का चतुर्थ चरण ज्ञान, पाप, बुरे कर्मों और निर्भर होने की अवस्था का कारक होता है। 

इस चरण में जातक घंटे के समान भारी सिर वाला, लंबी और तिरछी भौ वाला, लंबे हाथों वाला, सेवक, तुच्छ ज्ञान वाला, बुरे कर्म करने वाला, सहनशील नही होता है। जातक मिश्रित गुणो वाला परंतु इस चरण में पुष्य नक्षत्र के सभी अशुभ गुण पाय जाते हैं। जातक की पढ़ाई में सेहत बिगड़ने के कारण रुकावटें पैदा होती है। जातक को कम उम्र में ही प्रेम पांश में पड़ने के कारण भी पढ़ाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जातक को 30 से 35 वर्ष की उम्र के बाद अपने जीवन में रुकावटों से छुटकारा मिलता है।


पुष्य नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष आचार्यों ने सूत्र रूप में बताया है लेकिन यह फलित में बहुत ज्यादा बदलाव हुआ है। 

यावनाचार्य- 

                पुष्य नक्षर के प्रथम चरण में जातक लंबी उम्र जीने वाला, द्वितीय चरण में चोर, तृतीय चरण में महात्मा और चतुर्थ चरण में विद्वान होता है। 

मानसागराचार्य – 

                      पुष्य नक्षत्र के पहले चरण में राजकुमार, दूसरे चरण में साधु, तीसरे चरण में बुद्धिमान और चौथे चरण में धर्म को मानने वाला होता है।


पुष्य नक्षत्र का चरण ग्रह फल | Pushya Nakshatra Prediction based on planets   

भारतीय ज्योतिष आचार्यों के मतानुसार सूर्य, बुध और शुक्र इन ग्रहों की पूरी तरह अवलोकन या चरण दृष्टि होती है, क्योंकि सूर्य ग्रह से बुध ग्रह 28 अंश और शुक्र 48 अंश से दूर नही जा सकता है। 


सूर्य – Sun [ पुष्य नक्षत्र में सूर्य ] 

  • चन्द्र की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक कारखाने का मालिक, औघोगिक क्षेत्र में या सरकारी किसी विभाग में उच्च पद का अधिकारी होगा। ये जलीय व्यवसाय भी कर सकते हैं। 
  • मंगल की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक धन-दौलत से परिपूर्ण, पारिवारिक कष्टों वाला, जख्मी, एक से अधिक रोगों से ग्रसित होगा। 
  • गुरु की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक रक्षा विभाग का अधिकारी या कार्यरत होगा।
  • शनि की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक कपट करने वाला, पेट से जुड़ी समस्या जैसे गैस, दमा आदि से परेशान होगा। जातक की पत्नी लंबी उम्र तक जीवित रहने वाली होती है।  

पुष्य नक्षत्र में सूर्य | When sun is in Pushya Nakshatra – Prediction 

सूर्य का पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक उच्च पद का अधिकारी, बहादुर, सच बोलने वाला, धनवान, मजबूत इच्छाशक्ति वाला, कार्य करने में निपुण, मुह फेरने वाला, कम खर्च करने वाला, कलात्मक होता है। जातक गलत संगत वाला, यकृत में बनने वाले तरल पढ़ार्थ से परेशान होगा। अगर लग्न मघा नक्षत्र में हो तो जातक सामान्य या निर्धन परिवार में पैदा होगा लेकिन पिता के द्वारा सुधारे गए हालतों में सुखदायक होता है।

सूर्य का पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक सच बोलने वाला और सच कहने वाला, भिन्न-भिन्न कलाओं का ज्ञान रखने वाला, धर्म को मानने वाला, मज़ाकिया, समाज सेवक, अच्छे मित्रों वाला, जमीन और घर का मालिक होगा। 

सूर्य का पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक लंबे कद वाला, घर-परिवार का वीणा संभालने वाला, विवेकवान, धार्मिक, शत्रुओं के कारण नुकसान झेलने वाला, अपने अच्छे गुणों के कारण समाज में प्रसिद्ध होता है। अगर इस चरण में लग्न हो तो जातक को आँखों में कोई समस्या होती है। 

सूर्य का पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक न ज्यादा मोटा और न ज्यादा पतला, विवाह के बाद कार्यों में पत्नी की वजह से रुकावटें और ज्यादा बढ़ जाती हैं। बुरे कार्य करने वाला, दूसरे शहर या गाँव का नेता होगा। कार्यों को लगन से करने वाला और गलत लोगों से संबंध बनाने में दूरी रखने वाला होगा। 


चन्द्र – Moon [ पुष्य नक्षत्र में चन्द्र ] 

  • सूर्य की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक बहादुर, शासन की रक्षा करने वाला, कानूनी विभाग में कार्यरत होगा। 
  • मंगल की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक एक से अधिक कार्यों का जानकार, माता को दुख देने वाला, इसके प्रभाव से कई जातको का शरीर का ऊपरी भाग खराब होता है।
  • बुध की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक राजनेता, धनवान और समाज में सम्मानित होगा। 
  • गुरु की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक बुद्धिमान, अध्यापक और माता पक्ष से दुखी होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक मौज-मस्ती में चूर, धनवान होगा लेकिन गलत चीजों में धन खर्च करने वाला और यौन से संबन्धित रोगों से ग्रसित होगा।
  • शनि की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक धनहीन, फेफड़ों के रोगों से ग्रसित होगा।   

पुष्य नक्षत्र में चन्द्र | When Moon is in Pushya Nakshatra – Prediction 

चन्द्र का पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक रूपवान, मनमोहक, साधु, एक से अधिक विषयों का ज्ञान रखने वाला, सौम्यवृत्ति, आनंदमय जीवन यापन करने वाला, सोच-विचार के कहने वाला, अच्छा कार्य करने वाला, धर्म को मानने वाला परंतु हसी मज़ाक करने वाला, ईश्वर में विश्वास रखने वाला, स्त्री प्रेम में रत रहता है।

चन्द्र का पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक महान, परम्पराओं को मानने वाला, बहस न करने वाला होता है। जातक धनवान, खुश रहने वाला, गरीबों की मदद करने वाला, प्रतापी, प्रवाहशील और सभी कार्यों में निपुण होता है। जातक अपनी बात न मानने वाले व्यक्ति को कार्य से खारीज़ कर देता है जिसके कारण यह अहंकारी बताया जाता है। 

चन्द्र का पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक प्रसन्न, अच्छे आचरण वाला, कार्यों को मन लगाकर करने वाला, एक पत्नी वाला, वैभवशाली, नदी अथवा नहर के आस-पास रहने की इच्छा रखने वाला, धर्म को मानने वाला, रूढ़ियों में विश्वास न करने वाला, विदेश में कार्य करने वाला, पारिवारिक परेशानियों से घिरा रहता है। इस चरण में स्त्री जातक को गर्भ धारण करने में रुकावट पैदा होती है। 

चन्द्र का पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक चालाक, अपना काम दूसरों से निकलवाने वाला दूसरों की संपत्ति पर नज़र रखने वाला, माता पक्ष से परेशान, घर-परिवार से निकाला हुआ, बुरे कर्म करने वाला परंतु अपनी जन्म भूमि से दूर किसी शहर या गाँव का नेता होता है।


मंगल – Mars [ पुष्य नक्षत्र में मंगल ] 

  • सूर्य की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक कानूनी विभाग में कार्यरत, जलनखोर होगा। 
  • चन्द्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक अपनी माता से दूर और दूसरे के द्वारा पाला-पोषा गया होगा।
  • बुध की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक बुरे काम करने वाला, परिवार के सुख से दुखी, माता पक्ष के लिए दुखदायक होगा। 
  • गुरु की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक बुद्धिमान, समाज सेवक या राजनेता होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक स्त्री वर्ग से दुखी लेकिन स्त्रियों का धन खर्च करने वाला होगा। 
  • शनि की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक सरकारी विभाग का उच्च पदीय अधिकारी होगा।  

पुष्य नक्षत्र में मंगल | When Mars is in Pushya Nakshatra – Prediction 

मंगल का पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक वाहन चालक या यात्रा करके पैसे कमाने वाला, अपनी बात से दूसरों को नीचा दिखाने वाला, तीव्र इच्छाशक्ति वाला, जीवन में सबकुछ करने की इच्छा रखने वाला होगा। राजा के वंश में जन्म लेने वाला होगा। अगर लग्न इस चरण में हो तो जातक को कैंसर जैसे रोग का ज्यादा डर रहता है।

मंगल का पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चारण में जातक मेहनत का कार्य करने वाला लेकिन कम पैसे कमाने वाला, पिता के द्वारा बनाई गई संपत्ति को उड़ा देने वाला, सट्टेबाजी में पैसा बर्वाद करने वाला, कम सुनाई देने वाला, विवाह में रुकावटें आएंगी जिससे काफी उम्र के बाद विवाह सम्पन्न होगा। अगर मंगल लग्न में हो तो स्त्री जातक उस व्यक्ति के साथ संभोग करेगी जिसकी पत्नी नही होगी या मर गई होगी।

मंगल का पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक अध्यात्मज्ञान को सीखने वाला, शासन की सेवा में लगा रहने वाला, सफलता को प्राप्त करने वाला होता है। यात्राओं का शौकीन और विदेश में रहने की इच्छा होती है। 

मंगल का पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक अपनी माँ के इलाज में पैसा खर्च करने वाला, पढ़ाई में रुकावटों के कारण अशिक्षित होगा। 23 से 24 वर्ष की उम्र में किसी के प्रेम पांश में होगा परंतु धोखा मिलेगा लेकिन 25 से 26 वर्ष के बाद प्रेम विवाह हो सकता है।


बुध – Mercury [ पुष्य नक्षत्र में बुध ] 

  • चन्द्र की दृष्टि बुध पर हो तो जातक कमाई से ज्यादा खर्चे करने वाला, गरीब और रोगों से पीड़ित होगा। 
  • मंगल की दृष्टि बुध पर हो तो जातक शिक्षित होने के बाद भी गलत कार्यों के कारण अपराधी होगा। 
  • गुरु की दृष्टि बुध पर हो तो जातक उच्च कोटी का विद्वान, शासन के हित में अच्छा कार्य करने वाला और धनवान होगा। 
  • शनि की दृष्टि बुध पर हो तो जातक अच्छी चीजों से दूर बुरी चीजों के करीब रहने वाला, भाई-बहनों से कभी न बनने वाला, जीवनसाथी से तक्त्य होगा।

पुष्य नक्षत्र में बुध | When Mercury is in Pushya Nakshatra – Prediction

बुध का पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक बुरे कर्म करने वाला, उत्साह नष्ट, कलेश मचाने वाला, पत्नी के साथ तनावपूर्ण व्यवहार करने वाला, बाल्यावस्था में सुंदर और रूपवान होफ़ा परंतु 30 वर्ष की उम्र के बाद मोटा, चालक, ज्ञानी और पेट से जुड़ी समस्याओं का शिकारी होगा। अगर बुध अकेला हो तो इसके प्रभाव से स्त्री जातक एक से अधिक बार गर्भ धारण कर पाने में असमर्थ रहती है या गर्भपात होता है। अगर लग्न स्वाती नक्षत्र में हो तो जातक धन-दौलत से परिपूर्ण, बड़े-बड़े वाहनों अथवा घरों का मालिक होगा।

बुध का पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक समझदार, अपने गुरुओं का सम्मान करने वाला, महमानों का आदर करने वाला, अच्छा पंडित या नेता, बातों को अच्छी तरह से समझाने वाला और अलग-अलग विषयों का ज्ञान रखने वाला होता है। अगर शनि से बुध का मिलन हो तो जातक जल विभाग का अधिकारी होगा। 

बुध का पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक भाग्यवान, धनवान, ईमानदार, दोस्तों और गुरुओं को सम्मान देने वाला, सुख भोगने वाला, नाच-गाने का शौकीन, आनंद लेने में लीन, शासक, अच्छा वक्ता होता है। इस चरण में स्त्री जातक नाच-गाने की शौकीन, अच्छा कार्य करेगी लेकिन उसका चरित्र संदेह युक्त होगा। 

बुध का पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक शिक्षित परंतु माध्यमिक शिक्षा ग्रहण किए हुए होता है। जातक स्त्री सुख का आनंद लेने वाला, महान, अच्छे कार्य करने वाला, जरूरतमन्द की सहायता करने वाला, अपने जीवन में कुछ बेहतर करने की इच्छा रखने वाला होता है। कई जातक अपने कार्यों में व्यस्त और कई अपने कार्यों की चिंता करने वाले होते हैं।


गुरु – Jupiter [ पुष्य नक्षत्र में गुरु ] 

  • सूर्य की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक महान, बुद्धिमान, अध्यापक या किसी विभाग का अधिकारी होगा। अगर गुरु कमजोर स्थिति में हो तो जातक पहली पत्नी की मौत होने के कारण दूसरा विवाह करने वाला होगा। 
  • चन्द्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक अत्यधिक पैसे वाला, स्त्री सुख, संतान सुख और भूमि सुख भोगने वाला होगा। खुशहाल जीवन जीने वाला होगा। 
  • मंगल की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक बुद्धिमान और पैसे वाला होगा। विवाह कम उम्र में ही हो जाता है। 
  • बुध की दृष्टि अगर गुरु पर हो तो जातक परिवार के लोगों के स्वरा सम्मानित, अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाला होगा। जातक राजनेता या समाज की सेवा करने वाला हो सकता है।
  • शुक्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक मनचाहा पैसा कमाएगा, एक से अधिक पत्नी वाला, अनेक स्त्रियों के साथ यौन संबंध बनाने वाला होगा। जातक कमजोर हृदय वाला होगा। 
  • शनि की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक शहर या गाव का रखवाला ( अध्यक्ष ) होगा।

पुष्य नक्षत्र में गुरु | When Jupiter is in Pushya Nakshatra – Prediction

गुरु का पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक को गुरु के प्रभाव से नकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। जातक गुस्सैल, बुरे कर्म करने वाला, पापी, तुच्छबुद्धि, कमजोर, गरीब, धनहीन, गंदे चरित्र वाला, गलत लोगों को मित्र बनाना पसंद करेगा। मांस-मदिरा का सेवन करने वाला, कुष्ट रोग से ग्रसित होगा। 

गुरु का पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक रूपवान, ईमानदार, साफ-सुथरे कपड़े पहनने वाला, गुणवान, माता-पिता की सेवा करने वाला, उच्च पद की नौकरी करने वाला अथवा पेट्रोलियम पढ़ार्थों को बेचने खरीदने वाला होगा।

गुरु का पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक तेज वाला, सर्वगुण सम्पन्न, दयालु, विश्वास करने के योग्य, समाज में सम्मानित, बहादुर, आदर प्राप्त करने वाला होता है। कई जातक ऐसे होते हैं जिनकी शादी में रुकावटें आती है जिससे विवाह में देरी होती है। जातक अल्सर, कैंसर या पथरी जैसे रोगों से ग्रसित होगा। कृषि कार्यों से अच्छी कमाई करने वाला होगा। मकान या बांध बनाने का इंजीनियर अथवा मिशत्री होगा। 

गुरु का पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक गणित का ज्ञानी, शिल्पकला में रुचि रखने वाला, बुरी आदतों वाला, बुद्धिमान, अपने वंश का नाम आगे बढ़ाने वाला, अच्छा इंजीनियर या तरल पदार्थों का व्यापार करने वाला होगा।


शुक्र – Venus [ पुष्य नक्षत्र में शुक्र ]

  • चन्द्र की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक मनमोहक, दो माताओं वाला, खुशहाल जीवन जीने वाला होगा। 
  • मंगल की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक कलात्मक, कला के क्षेत्र में अपनी मेहनत लगाकर उसी से अपना जीवन यापन करने वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक सर्वसुख सम्पन्न होगा। 
  • शनि की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक धनहीन, बुरी सूरत वाला, शरीर में लकवा से पीड़ित और हृदय रोग का शिकारी होता है।

पुष्य नक्षत्र में शुक्र | When Venus is in Pushya Nakshatra – Prediction

शुक्र का पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक डरने वाला, लापरवाह, छल करने वाला, दिखावा करने वाला, लोगों के द्वारा त्यागा गया, चरित्रहीन, दुश्मनों से डरके रहने वाला, कई जातक ईमानदार होते है। जातक नेत्र रोगी, महान एवं सफलता पूर्वक कार्य करने वाला होता है। जातक विदेशों तक अपना व्यापार करने वाला, स्त्री जातक डॉक्टर या नर्स होगी।

शुक्र का पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक काम करने में असमर्थ, भयानक रोग से ग्रसित, शिक्षित, एक से अधिक खूबियों वाला होता है। पुरुष और स्त्री जातक के अंदर विपरीत लिंग को मोहित करने की कला होती है। 

शुक्र का पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक बुजदिल, प्रेम पांश के कारण दुखी, जानवरों को पालने वाला, पशुपालन से नुकसान होगा। जातक अपनी जन्मभूमि में भाग्य अनुकूल नही होगा। पढ़ाई में रुकावटों के कारण कमजोर रहता है। 

शुक्र का पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक दूसरों की बुराई करने वाला, बदचलन, गंदी-गंदी बाते करने वाला, चरित्रहीन, रक्त से जुड़े रोग होते हैं। जातक भीख मांगने वाला, चिंता करने वाला, परिवार का जीवन खतरे से भरा रहता है। शादी बहुत कठिनाइयों के बाद होती है। यदि होता है तो जातक की पत्नी रोहिणी नक्षत्र की होती है।


शनि – Saturn [ पुष्य नक्षत्र में शनि ]

  • सूर्य की दृष्टि शनि पर हो तो जातक बाल्यावस्था में दया के योग्य, पिता की सेवा करने से वंचित, मामा पक्ष से बचपन में मदद मिलेगी। 
  • चन्द्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक मातृदुख, बड़े भाइयों की तरफ से घर से बेघर किया गया होगा। 
  • मंगल की दृष्टि शनि पर हो तो जातक अच्छी सेहत वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण, जीवन में सुख भोगने वाला होता है। 
  • बुध की दृष्टि शनि पर हो तो जातक समाज के हित में बेहतर कार्य करने वाला परंतु गुस्सैल और नक्सेबाज़ होगा। 
  • गुरु की दृष्टि शनि पर हो तो जातक वाहन, घर, धन – दौलत, स्त्री सुख, सनतान सुख से पूर्ण होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सुंदर न दिखने वाला परंतु अच्छे व्यवहार वाला, माता के लिए दुखदाई परंतु खुद सुख भोगने वाला होगा।  

पुष्य नक्षत्र में शनि | When Saturn is in Pushya Nakshatra – Prediction

शनि का पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक के लिए शनि का प्रभाव नकारात्मक होता है। जातक छोटी-छोटी चीजों के लिए बोलने वाला, अधिक गुस्सा करने वाला, अहंकारी, नष्ट करने वाला, शिक्षित लोगों से घृणा करने वाला, लड़ाई-झगड़ों में हारने वाला होता है। 

शनि का पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक खुशहाल जीवन यापन करने वाला,महान, दयालु, दिखने में शेर लेकिन अंदर से डरपोक होगा। जातक बाल्यावस्था में मानसिक रोगी अथवा शरीर से अपाहिज होगा। 

शनि का पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक शिक्षित, उच्च कोटी का वैज्ञानिक, उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाला, खोज करने वाला, शिक्षा विभाग में उच्च पद का अधिकारी, चतुर, प्रॉपर्टी डीलर होगा। 

शनि का पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक दूसरों की बुराई करने वाला, कमियाँ ढूँढने वाला, मामा पक्ष मे बड़ा हुआ, बाल्यावस्था में माँ-बाप खो देने वाला, आर्थिक अथवा शारीरिक समस्याओं से बचा हुआ, करीबी रिशतेदारों से मददगार, धन-दौलत से परिपूर्ण लेकिन मध्यम वर्गी होगा। 


राहु – Rahu [ पुष्य नक्षत्र में राहु ]

पुष्य नक्षत्र में राहु | When Rahu is in Pushya Nakshatra – Prediction

राहु का पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक सामान्य शिक्षा ग्रहण करने वाला, कविताएं लिखने का शौकीन, बाल्यावस्था में हुई परेशानियों और समस्याओं के ऊपर कविताएं लिखने वाला, प्रेम पांश में धोखा मिलने की बजह से स्त्री जातक से नफरत करने वाला परंतु शादी के बाद अपनी पत्नी से अत्यधिक प्रेम करने वाला होगा।

राहु का पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक पशु पालन से जीवन यापन करने वाला, खेतीबाड़ी वाला, दो विवाह करने वाला होगा। अगर मंगल की दृष्टि राहु पर हो तो जातक उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाला और उच्च पदीय अधिकारी होगा। इस पाद मे इसके हानिकारक परिणाम नही मिलेंगे। 

राहु का पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक लेखन का कार्य करने वाला, नई-नई चीजों की खोज करने वाला, समाज में सम्मानित और प्रचलित होगा। जातक के शरीर का कोई अंग नष्ट होगा अथवा जल जनित रोग होता है। कई जातक सफ़ेद दाग अथवा चक्कतों से पीड़ित होते हैं। 

राहु का पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक समाज में प्रशंसिक परंतु धन कमाने में असमर्थ, दांपत्य जीवन में कष्टों का सामना करने वाला होगा। जातक के माँ-बाप की उम्र लंबी होती है लेकिन जातक को यकृत अथवा आँखों की समस्या होती है।


केतु – Ketu [ पुष्य नक्षत्र में केतु ]

पुष्य नक्षत्र में केतु | When Ketu is in Pushya Nakshatra – Prediction

केतु का पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक को केतु के हानिकारक प्रभाव देखने को मिलते हैं। जातक घर से बेघर और जीवन में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जातक काफी समय तक इधर-उधर दूसरों की नौकरी करेगा जहां कोई इज्जत नही होगी परंतु कुछ समय बाद सम्मानित काम मिल जाता है। 

केतु का पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक गलत संगत वाला, बुरे कार्य करने वाला, पिता की पूजी खर्च करने वाला, माता को दुख देने वाला, पारिवारिक कलह मचाने वाला होगा। एक से अधिक विवाह करने वाला होगा। 

केतु का पुष्य नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक कर्जदार, इधर-उधर भटकने वाला, रोगों से पीड़ित होगा। अपने परिवार से दूर रहने वाला, दूसरे शहर या देश में जाकर धन कमाने वाला, मौज-मस्ती करने वाला परंतु कमाई गई संपत्ति छीन जाएगी। जिसके कारण वह पहले जैसी स्थिति में आ जाएगा। अगर गुरु मकर में हो तो जातक धन कमाने का गुणी होगा। 

केतु का पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक मशीनरी कार्य करने वाला, अच्छा धन कमाने वाला, चरित्रहीन स्त्रियों के ऊपर अपना धन लुटाने वाला, अपनी पत्नी से रुष्ट रहने वाला होगा। जातक 35 से 40 वर्ष की उम्र के बाद अच्छा और खुशहाल दांपत्य जीवन जिएगा। 


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