कृतिका नक्षत्र (कृत्तिका ) फल लाभ विशेषताएँ | Kritika Nakshatra

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यदि ज्योतिषीय गणना का आरंभ देखा जाए तो लगभग 400 ई॰ पूर्व कृतिका(कृत्तिका ) नक्षत्र से ही ज्योतिष गणना का आरंभ हुआ था। इसी कारण भारतीय ज्योतिष के आधार पर कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र सबसे पहला नक्षत्र माना जाता है। भारतीय ज्योतिषियों के द्वारा आकाशीय पिंडों के अध्ययन से यह पता चलता है की यह तीसरा शुभ, प्रतिनिधि के तौर पर काम करने वाला, तमोगुण संबंधी स्त्री नक्षत्र होता है। कृतिका (कृत्तिका )नक्षत्र को उत्तर दिशा का स्वामी माना जाता है। इस नक्षत्र के देवता कार्तिकेय और अग्नि को माना जाता है तथा स्वामी सूर्य को माना जाता है। इस नक्षत्र में मेष राशि का स्वामी मंगल और वृषभ राशि का स्वामी शुक्र होता है। कृतिका नक्षत्र में मेष 26 अंश 40 कला क्षेत्रफल से वृषभ 10 अंश 00 कला क्षेत्रफल तक का होता है। कृतिका नक्षत्र (कृत्तिका नक्षत्र )को अरब मंजिल में ” अल थुर्या ” के नाम से , ग्रीक में इसे ” अलसियोन ” के नाम से और चीन में इसे ” माओ ” के नाम से जाना जाता है। इस नक्षत्र की जाति ब्राह्मण, योनि छाग, योनि वैर वानर, गण राक्षस और नाड़ी अन्त्य होती है। सभी नक्षत्रों के माध्यम से जातक का व्यक्तित्व प्रकट होता है। नक्षत्रों से हमें जातक के बारे में कुछ अहम बाते जानने को मिलती हैं।

जैसे की आचार्यों के मतानुसार- 

  • फल विचार से जातक का जन्म चंद्र और जन्म लग्न के नक्षत्रों से विचार करना चाहिए। 
  • लग्न और चंद्र दोनों में से जो सबसे ज्यादा ताकतवर हो उसका परिणाम अच्छा होता है। 
  • परंतु कभी कभी जातक सभी अवस्थाओं में लग्न व चंद्र दोनों के परिणाम प्राप्त करता है। 
  • बल एवं बल के अभाव से कम या ज्यादा का अनुपात ही पता चलता है। 
  • वैदिक ज्योतिषीय परंपरानुसार जन्म चंद्र को ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र | Kritika Nakshatra 

कृतिका नक्षत्र Kritika Nakshatra

कृतिका (कृत्तिका )नक्षत्र दो भागों में बटा हुआ है। पहला भाग स्वामी मंगल का जो निर्दयी, प्रहार करने वाला, दुख देने वाला, तेज वाला, निजी और सामाजिक जीवन में बदलाव करने का प्रकाशक होता है। दूसरा भाग स्वामी वृषभ का है जो कोमल, स्नेह, कल्पना करने वाला, रूपवान, आभास करने वाला, ललित कला का प्रकाशक होता है। 

भारतीय ज्योतिष के आधार पर कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र के छह तारे होते हैं, जो आपस में मिलकर उस्तुरा, घास काटने एवं बाँस आदि छीलने का औज़ार [ खुरपा ] या फावड़ा के जैसा आकार दर्शाते हैं। वैदिक ग्रंथों के अनुसार धर्म में भी कृतिका नक्षत्र के यज्ञ में सात आहुतियां देने का वर्णन किया गया है। इससे हमें आभास होता है की प्राचीन समय में कृतिका नक्षत्र के सात तारे अहम माने जाते थे जो इस प्रकार है जैसे- अम्बा, दुला, नितत्नी, अभ्रयंति, मेघयंति और चपुनिका होते हैं। परंतु हमें 6 तारों के बारे में भी कई जगह देखने को मिलता है। 

इस नक्षत्र का नाम कार्तिक भगवान शिव के छोटे बेटे कार्तिकेय के नाम से पड़ा। कार्तिक नाम का अर्थ होता है- अग्निशिखा, किसी धारदार औज़ार की नोक अथवा उस्तरा। कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र का  [ प्रतीक ] चाकू के आकार का दिखने वाला छह तारों के समुदाय को माना जाता है। संस्कृत कृत्तिका का रूपांतरण कृतिका नक्षत्र होता है [ जिसे कृतिका या काटने वाला भी कहते हैं। ] कृतिका नक्षत्र के नियामक देवता अग्नि पांच महाभूतों में से एक माने जाते हैं। अग्नि को संसार में 8 दिशाओं में से पहला प्रधान शासक माना जाता है। कृतिका (कृत्तिका ) के नियामक अग्नि को ब्रह्मपुत्र भी खा जाता है। यदि कार्तिकेय को अन्य मतों से देखा जाए तो उन्हें भी अग्नि का पुत्र माना जाता है। इस नक्षत्र के छह तारों के युद्ध देवता कार्तिकेय की छह दासियाँ [ स्वर्गलोक स्त्रियां ]  होती हैं।


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र की कथा, पौराणिक कहानी | Kritika Nakshatra mythological Story

यदि पौराणिक कथाओं के माध्यम से देखा जाए तो कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र के देवता कार्तिकेय है परंतु ज्योतिषीय मतानुसार अग्नि को भी कृतिका नक्षत्र का देवता कहा जाता है। कार्तिकेय भगवान शिव और पार्वती के दूसरे बेटे है। पौराणिक कथाओं के अनुसार हमें यह भी पता चलता है कि कार्तिकेय के कुछ अन्य नाम भी हैं जैसे – स्कन्ध, सुब्रमण्यम, षडानन, गुहा और सन्मुख हैं। कार्तिकेय को छह मुखी भी खा जाता है। खतरनाक अग्नि रूप के कारण कार्तिकेय को युद्ध का देवता भी कहा जाता है। दक्षिण भारत में इन्हे ” मुरूगन ” के नाम से भी जाना जाता है। 

अग्नि को कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र का देवता माना जाता है क्योंकि इन्द्र के बाद दूसरे देवता अग्नि ही हैं। अग्नि शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जबकि लैटिन भाषा में इसे इग्निस और अंग्रेजी भाषा में इगनाइट कहते हैं। अग्नि को भलाई और बुराई [ दुर्दशा ] का प्रतीक भी माना जाता है। अग्नि को दक्षिण और पूर्व का अग्निपुत्र अंतर दिशा का और रुद्राक्ष का स्वामी माना जाता है। ज्योतिष मतानुसार हमें यह पता चलता है कि जिस प्रकार आग में सभी तरह की अशुद्धियों का नाश होता है उसी तरह तीन मुखी रुद्राक्ष पहनने से जातक के पापों का नाश, मन में सुधियाँ और कर्मों में पवित्रता आती है।


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र की विशेषताएँ | Kritika Nakshatra Importance

ज्योतिषीय मतानुसार यह मुहूर्त अनेक योगों से बना हुआ है। इसे हिम्मत, दुर्दशा और किसी चीज को अनुचित रूप से हड़पने का प्रतीक है। ऐसे में जातक को अपने जीवन में अच्छाई-बुराई का सामना और व्यर्थ की यात्राएं करनी पड़ती है। 


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र फलादेश | Kritika Nakshatra Predictions

इस नक्षत्र में जातक शुद्ध आहार, तला हुआ भोजन खाने का शौकीन होता है, परंतु इसी कारण वश जातक को अपने जीवन में स्वास्थ्य परेशानियों से गुजरना पड़ता है। जातक अपने स्वास्थ्य के प्रति चिंतित न रहने वाला होता है। अग्नि तत्व का यह कृतिका नक्षत्र छेदने वाला, भेद करने वाला और तेज वाला होता है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक लड़ाई-झगड़ों [ युद्ध ] में आगे रहने वाला होता है। ऐसे में जातक जरूरत पड़ने पर यह न समझने वाला होता है की अब क्या किया जाए, दूसरों को ताने देने वाला, गुड दोष की विवेचना करने वाला होता है। जातक की पाचन क्रिया अच्छी होती है। ये अच्छा खाना बनाना भी जानते होते हैं। इनके अलग रुतबे के कारण अवैध यौन संबंध ज्यादा होते हैं।


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र का पुरुष जातक पर प्रभाव | Impact of Kritika Nakshatra on Male

इस नक्षत्र में पुरुष जातक सामान्य विशेषताओं वाला, बीच के कद वाला, गठीले शरीर वाला, लंबी गर्दन और नाक वाला होता है। ऐसे में कुछ ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है जो शनि के प्रभाव से जातक लंबे कद वाला होता है। जातक लालची, बुरे कर्म करने वाला, मुख के रोग से पीड़ित, निकम्मा, बिना कर्तव्य के सब कुछ पाने वाला, निर्धन, अप्रसन्न, बातों को समझने वाला, दयालु, चालाक और पूर्ण रूप से आजाद होता है। व्यवसाय के कारण यात्राएं, असफल होने के कारण चिंतित, चंचल मन वाला, शांति बरतने वाला होता है। ऐसी स्थिति में जातक 25 से 35 वर्ष तक अच्छा जीवन व्यतीत करेगा किन्तु फिर 50 वर्ष तक की उम्र में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा उसके बाद 50 से 56 वर्ष तक अच्छा जीवन यापन करेगा। भारतीय ज्योतिषियों के अनुसार यह माना जाता है की जातक के पिता शुद्ध आत्मा और पवित्र होते हैं। जातक को माता पक्ष से स्नेह और खुशी मिलेगी। 


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र का स्त्री जातक पर प्रभाव | Impact of kritika Nakshatra on Female

इस नक्षत्र में स्त्री जातक लोगों को अपनी ओर प्रभावित करने वाली, छोटे कद वाली, बेहद सुंदर दिखने वाली, सुंदर शरीर वाली होती हैं। ऐसा माना जाता है की स्त्री जातक के जीवन में 27 वर्ष की उम्र में सुंदरता में कमी, जीवन में कई तरह की उलझाने, मानसिक तनाव, दुखी और अप्रसन्न रहती हैं। ये तेज वाली, प्रहार करने वाली, साहस वाली और किसी से न डरने वाली होती हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाली स्त्री जातिका खुद को पुरुषों से कमजोर न समझने वाली होती हैं। इनके अविवाहित और विवाहित जीवन में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इन्हे पति का प्यार नहीं मिलता और किसी न किसी कारणवश तलाक या विच्छेद की स्थिति बन जाती है। 


प्राचीन ऋषि मुनियों एवं आचार्यों के अनुसार कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र ( Kritika Nakshatra)

  • यदि कृतिका (कृत्तिका ) के प्रथम चरण को देखे तो मतलब मेष राशि में जन्म होता है जिसमें जातक कम खाने वाला होता है। द्वितीय चरण, तृतीय चरण और चतुर्थ चरण को देखें तो मतलब वृषभ राशि में जन्म होता है जिसमें जातक अधिक खाने वाला होता है। ऐसे जातक ज़्यादातर तेज वाले, सुंदर छवि वाले, बुद्धिमान, अधिक लोगों की संख्या में सबसे अलग दिखने वाले, धन पुण्य करने वाले, स्त्रियों का साथ पसंद करने वाले, कुशलता पूर्वक कार्य करने वाला, स्वाभिमान वाले, गलतियाँ निकालने वाले, अच्छे स्वभाव वाले, कार्य में लग्न रहने वाले होते हैं। — नारद
  • जातक धार्मिक ज्ञान रखने वाले, आज्ञाकारी, अच्छे विचार वाला, नई नई चीजों के बारे में विचार करने वाले, चिंतन-मनन करने वाले, अच्छी सोच रखने वाले, अपने वंश के अनुसार चरित्र वाले, धन-दौलत से सम्पन्न होते हैं।– पराशर 
  • यदि यह नक्षत्र अशुभ है तो जातक कड़वे बोल बोलने वाला, स्त्रियों को पसंद करने वाला, ज्यादा खाना खाने वाला, झूठ का साथ देने वाला, फालतू में घूमने वाला, झूठ-मूठ के दोष निकालने वाला होता है। ऐसे जातक ज़्यादातर पित्त [ यकृत में बननेवाला तरल पदार्थ ] पृकर्ति के होते हैं, पेंदा, गरिष्ठ भोजन करने वाला, ज्यादा खट्टा खाने से पाचन में परिवर्तन करने वाला होता है। — ढुंडीराज 

चंद्र- 

यदि कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र में चंद्र हो तो जातक अधिक भोजन करने वाला, पूर्णतः बढ़ा हुआ, सुंदर छवि वाला, ख्यात होता है। जातक मित्रों अथवा परिवार का साथ देने वाला, संतान युक्त और भाग्यवान होता है। यह इरादे के बिना यात्राएं करने वाला, नीरश बुरा कार्य करने वाला परंतु स्त्री प्रसंग में पड़ा हुआ होता है। जातक के बचपन में ही सफ़ेद बाल, तेज हवा से डरने वाला, शरीर के किसी अंग पर तिल या मछ्ली आकार का कोई निशान होता है। 


सूर्य-

यदि कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र में सूर्य हो तो जातक आत्मा और परमात्मा से संबंध रखने वाला, शासन के अनुसार चलने वाला, मार्गदर्शन करने वाला, संगीत को पसंद करने वाला, नाटक और नृत्य में रुचि रखने वाला, अहंकारी, अकेला महसूस करने वाला, अकेले रहना पसंद करने वाला होता है। 


लग्न-

यदि कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र में लग्न हो तो जातक अभिमान वाला, सम्माननीय, बड़ा बनने की इच्छा रखने वाला, होसियार, धनवान, सत्य का साथ देने वाला, दयालु, ताकतबर, अच्छी पाचन क्रिया वाला और अस्थिर होता है। 


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र का चरण फल | Prediction on Kritika Nakshatra Charan Pada

प्रत्येक नक्षत्र में चार चरण होते है जिसमें एक चरण 3 अंश 20 कला का होता है। नवमांश की तरह होता है जिसका मतलब यह है कि इससे नौवें भाग का फलीभूत मिलता है। सभी चरणों में तीन ग्रहों का प्रभाव होता है जो इस प्रकार है–  राशि स्वामी, नक्षत्र स्वामी, चरण स्वामी।  


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र का प्रथम चरण | Prediction on Kritika Nakshatra First Charan Pada

इस चरण का स्वामी गुरु होता है। इस चरण में मंगल, सूर्य, गुरु का प्रभाव होता है। इस चरण में मेष 26 अंश 40 कला क्षेत्रफल से 30 अंश 00 कला क्षेत्रफल तक का होता है। नवमांश-धनु। यह चरण परोपकारी, बिना स्वार्थ कार्य करने वाला, महान, दयालुता, कामुक, मजबूत, सेना अधिकारी, अच्छे कर्मों का प्रकाशक होता है। 

कृतिका (कृत्तिका )नक्षत्र के अच्छे बुरे प्रभाव | Kritika Nakshatra First Charan GOOD BAD Impacts

इस चरण में जातक लंबे कद वाला, चौड़े कंधे, लंबे कान, घोड़ो की आकृति का मुह, यात्राएं करने वाला, बुद्धिमान,ममतारहित, छल करने वाला, विद्वान, रोगों से ग्रसित परंतु लंबी उम्र जीने वाला, सभी तरह से प्रसन्न रहने वाला, विशेष लक्षण प्राप्त करने वाला होता है। 


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र का द्वितीय चरण | Prediction on Kritika Nakshatra Second Charan Pada

इस चरण का स्वामी शनि होता है। इस चरण में शुक्र, सूर्य, शनि का प्रभाव होता है। इस चरण में वृषभ 26 अंश 40 कला क्षेत्रफल से 30 अंश 00 कला क्षेत्रफल तक होता है। नवमांश-मकर। इस चरण में यह अच्छा व्यवहार, बर्ताव का तरीका, भौतिक होने की अवस्था, शत्रुओं का विरोध और माता के पक्ष का प्रकाशक होता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र के अच्छे बुरे प्रभाव | Kritika Nakshatra Second Charan GOOD BAD Impacts

इस चरण में जातक मधुर वाणी बोलने वाला, असमान नेत्रों वाला, गंदी नज़र वाला, बुरे स्वभाव वाला, दूसरों का विरोध करने वाला होता है। ऐसे जातक की मृत्यु मघा के अंत में या तो फिर रेवती नक्षत्र में होती है। जातक आत्मा और परमात्मा से संबंध रखने वाले से घृणा करने वाला, अपने धर्म का विरोध करने वाला, दूसरों के धार्मिक ग्रंथों को न मानने वाला और अपमानित करने वाला, धर्म के विरुद्ध चलने वाला और लोगों को विरुद्ध चलने की सलाह देने वाला परंतु कभी-कभी कीर्तिमान भी होता है। 


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र का तृतीय चरण | Prediction on Krittika Nakshatra Third Charan Pada

इस चरण का स्वामी शनि होता है। इस चरण में शुक्र, सूर्य, शनि का प्रभाव होता है। इस चरण में वृषभ 33 अंश 20 कला क्षेत्रफल से 36 अंश 40 कला क्षेत्रफल तक का होता है। नवमांश- कुंभ। इस चरण में यह मनुष्यता, भविष्यवाद, पुराने समय का अस्तित्व देखने वाला, कर्म करने वाला, शिक्षा का प्रकाशक होता है।

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र के अच्छे बुरे प्रभाव | Kritika Nakshatra Third Charan GOOD BAD Impacts

जातक तेजदार नयन वाला, तिकोनी आकृति का सर, टेड़े मुख वाला, कमजोर ह्रदय वाला, बहुत जल्द नर्वस होने वाला, तुच्छ ज्ञान वाला, बुरे कर्म करने वाला, सत्य का साथ न देने वाला, ज्यादा बातचीत करने वाला होता है। जातक बहादुर, अभिमान वाला, छोटी सी बात पर गुस्सा करने वाला, बाजारू स्त्रियों के साथ संबंध बनाने वाला और छोटे जीवन वाला होता है। 


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र का चतुर्थ चरण | Prediction on Krittika Nakshatra Fourth Charan Pada

इस चरण का स्वामी गुरु होता है । इस चरण में शुक्र, सूर्य, गुरु का प्रभाव होता है। इस चरण में वृषभ राशि 36 अंश 40 कला क्षेत्रफल से 40 अंश 00 कला क्षेत्रफल तक का होता है। नवमांश-मीन। इस चरण में यह शालीनता, परोपकार, स्वरूप स्थिर करने का प्रकाशक होता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र के अच्छे बुरे प्रभाव | Kritika Nakshatra Fourth Charan GOOD BAD Impacts

जातक सुंदर और कोमल शरीर वाला, लंबी और मोटी नाक वाला, बड़ी-बड़ी आंखों वाला, धार्मिक कार्यों में अपना योगदान देने वाला, धर्म को मानने वाला, स्थिर रहने वाला, अच्छे कार्यों को करने वाला, देखभाल करने वाला, चोरी या हिंसक कार्य करने वाला, विनीत परंतु अहंकारी, मनन करने वाल, परेशान, दुखी, रोगो से पीड़ित और मानसिक तनाव से घिरा रहता है। 


नक्षत्र का वैदिक ज्योतिष आचार्यों ने सूत्र रूप में बताया है लेकिन इसका फलित में बहुत ज्यादा बदलाव हुआ है। 

यवनाचार्य-

              यवनाचार्य के मतानुसार जातक प्रथम चरण में प्रतापी, द्वितीय चरण में शास्त्र के बारे में जानने वाला, चतुर्थ चरण में लंबी उम्र जीने वाला और पुत्रवान होता है। 

मानसागराचार्य-

                     मानसागराचार्य के मतानुसार जातक प्रथम चरण में अच्छे गुणों वाला, द्वितीय चरण में कीर्तिमान, तृतीय चरण में पुत्र संतान वाला, चतुर्थ चरण में बहादुर होता है। 


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र का चरण ग्रह फल | Kritika Nakshatra Prediction based on Planets

भारतीय ज्योतिषियों के मतानुसार सूर्य, बुध, शुक्र इन ग्रहों की एक दूसरे के साथ आपस में पूर्ण या पाद दृष्टि नही होती है, क्योंकि सूर्य से बुध 28 अंश और शुक्र 48 अंश से भी अधिक दूर नहीं हो सकता है। इसलिए इनकी आपस में दृष्टि नहीं हो सकती है।  


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र में सूर्य | SUN in Kritika Nakshatra

कृतिका नक्षत्र में सूर्य SUN in Kritika Nakshatra
  • यदि चंद्र की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक सुंदर छवि वाला, प्रसन्न, बुद्धिमान और शांत स्वभाव का होता है। 
  • यदि मंगल की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक स्पष्ट रूप से बात कहने वाला, अच्छे स्वभाव वाला होता है। जातक समाज में सम्मानित, धन-दौलत से परिपूर्ण, प्रसिद्धि प्राप्त होती है। 
  • यदि गुरु की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक समाज में सबसे अच्छा, धनवान, समाज का सेवक या फिर सांस्कृतिक मंत्री होता है। 
  • यदि शनि की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक स्वास्थ्य से परेशान, खराब आर्थिक स्थिति, बुरी संगत के कारण निर्धन अतः परिवार में कलेश होता है।

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र के चरण पर सूर्य का प्रभाव

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र प्रथम चरण | Sun-Surya in Kritika Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक अपने जीवन से परेशान, अधिक संतान वाला, निर्धन होता है। इस चरण में जातक ज्योतिष के विषय में जानने और सीखने का इच्छुक होता है। जबकि जातक के लिए ज्योतिषीय ज्ञान हानिकारक होता है। जातक को आंखों में समस्या, अधिक भोजन करने वाला, चर्बी युक्त शरीर वाला [ मोटा ] होता है। जातक को सबसे ज्यादा आग से डर लाग्ने की संभावना रहेगी। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र द्वितीय चरण | Sun-Surya in Kritika Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक लंबी उम्र वाला, संतान पक्ष से प्रसन्न, बुद्धिमान, जीवन के मध्य समय में अधिक धनवान, शासन के द्वारा दंडित किया हुआ, साधु स्वभाव का, धर्म की बाते करने वाला, संगीत सुनने का शौकीन, नाटक पसंद करने वाला होता है। अगर जातक को सही मार्ग दिखाने वाला मिलता है तो जातक उसका फायदा उठाता है और चर्म रोग संबंधी डॉक्टर या दवाई सेलर बन जाता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र तृतीय चरण | Sun-Surya in Kritika Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक सादा जीवन जीना पसंद करता है, खुद की गलती से हुए रोग से पीड़ित, जातक को 12 वर्ष [ बचपन में ही मृत्यु ] की उम्र तक कोई गंभीर कष्ट होने की संभावना रहती है। जातक बाल [ नाई ] काटने वाला या अन्य किसी स्रोत से अपने जीवन का भरण-पोषण करने वाला होता है। ऐसी स्थिति में कई ऐसे भी जातक होते हैं जो भीख मांग कर अपना जीवन यापन करते हैं। यदि इस चरण में सूर्य की दृष्टि चंद्र से हो तो स्त्री जातक गंदे चरित्र वाली, संविधान के विरुद्ध जाने वाली, प्रेम के कारण रोगों से ग्रसित होती है।  

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र चतुर्थ चरण | Sun-Surya in Kritika Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक बहुत परेशानी के साथ और अत्याचार सहन करते हुए अपना जीवन यापन करता है। ऐसे में ज्यादा तक जातक दूसरों की नौकरी करते हैं। जातक कठोर ह्रदय, हत्या करने वाला, परिवार में उत्पन्न समस्याओं को महसूस करने वाला होता है। जातक गलत तरीके से धन कमाने का प्रयास करते है और धन के लालच में घर-परिवार से झूठ बोलने वाला होता है। जातक जन्म से ही किसी रोग से ग्रसित होगा या तो फिर कोई शारीरिक अंग खराब होता है। 


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र में चंद्र | Moon in Kritika Nakshatra

कृतिका नक्षत्र में चंद्र Moon in Kritika Nakshatra
  • यदि सूर्य की दृष्टि चंद्र पर हो तो जातक अत्यधिक संपन्नता प्राप्त करता है। सूर्य की शुभ दृष्टि से जातक कृषि के क्षेत्र में या किसी गतिहीन जायदाद के कारोबार [ व्यापार ] में सफलता प्राप्त करता है। 
  • यदि मंगल की दृष्टि चंद्र पर हो तो जातक मानव जाति की विभिन्न नस्लों की ओर चुंबक की तरह खीचा रहता है। जातक स्त्रियों के साथ यौन संबंध बनाने में रत रहता है। स्त्रियों से ज्यादा संबंध बनाने के कारण जातक को कई परेशानियों से गुजरना पड़ता है। जातक अपने परिवार का सबसे ज्यादा चाहिता होता है। 
  • यदि बुध की दृष्टि चंद्र पर हो तो जातक विद्वान, ईमानदार और गरीबों की मदद करने वाला होता है। 
  • यदि गुरु की दृष्टि चंद्र पर हो और शनि की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक की माता किसी रोग से पीड़ित या किसी तरह की परेशानी में रहती हैं। जब शनि की दृष्टि गुरु पर नहीं होती है, और शनि की दृष्टि चंद्र पर हो तो जातक अपने जीवन में सभी तरह का सुख भोगता है तथा लोगों के बीच प्रसिद्ध धनवान होता है।
  • यदि बुध की दृष्टि चंद्र पर हो तो जातक अच्छे घर में रहने वाला, वस्त्रों और आभूषणों से युक्त, नौकर चाकर वाला, घर में सारे सामान होते हैं, परंतु जातक अपनी माँ का प्यार नहीं मिलता है। जैसे हम कह सकते हैं बचपन में ही माँ से बिछड़ जाना। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र के चरण पर चंद्र का प्रभाव- 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र प्रथम चरण | Moon-Chandra in Kritika Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक तंत्र-मंत्र से लोगों को अपने वश में करने वाला, काला जादू में कालवृत्त होता है। विपरीत लिंग के कारण जातक को अपने जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र द्वितीय चरण | Moon-Chandra in Kritika Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक ताकतवर होने के कारण अपनी ताकत का इस्तेमाल हर जगह करना पसंद करेगा। जातक लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला और बुद्धिमान लोगों का साथ रखने वाला होता है। जातक यकृत में बनने वाले तरल पदार्थ को बढ़ाने वाला, कई तरह की परेशानियों से जूझने वाला, रसायनिक अध्ययन या भूगोल शस्त्र के अध्ययन में लगाव रखने वाला होता है। अगर चंद्र पर शनि की दृष्टि हो तो जातक पिता के सुख से वंचित रहता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र तृतीय चरण | Moon-Chandra in Kritika Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक हष्ट पुष्ट [ अच्छा स्वास्थ्य ], ऊंचे कद वाला और धनहीन [ कंगाल ] होता है। इसी चरण में यदि स्त्री जातक की कुंडली में राहू या मंगल की दृष्टि हो तो स्त्री जातक 36 वर्ष की उम्र में तलाक या विधवा हो जाती है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र चतुर्थ चरण | Moon-Chandra in Kritika Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक गठीले शरीर वाला तथा नेत्र रोग से पीड़ित होता है। जातक बुद्धिमान, लौकिक, अधिक धन अर्जित करने वाला व्यापारी, कानूनी मामलो या अन्य सभी मामलों में जातक किस्मत वाला होता है, परंतु जातक के जीवन में कष्ट ही कष्ट होता है। जातक का ससुराल पक्ष [ससुर ] से झगड़ा रहता है। जातक समाज में सम्मानित होने के कारण कठिन से कठिन परिश्रम करता है ताकि समाज में उच्च स्थान पा सके। इस चरण में स्त्री और पुरुष जातक दोनों एक दूसरे के प्रतिद्वंदिता रहित घनिष्ठ मित्र होते हैं। 


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र में मंगल | MARS in Kritika Nakshatra

कृतिका नक्षत्र में मंगल MARS in Kritika Nakshatra
  • यदि सूर्य की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक का जीवनसाथी लोभी होता है, इसी कारण जातक अपने जीवनसाथी की चाह [ इच्छा ] कभी पूरा नहीं कर पाएगा। 
  • यदि चंद्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक माता की बात न मानने वाला और माता के विरोध में रहने वाला, दो से तीन शादियाँ करके पत्नियों के साथ रहने वाला होता है। 
  • यदि बुध की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक अकेला रहना पसंद करने वाला, कम शत्रुओं वाला, धैर्यवान, कलात्मक, मधुर वाणी बोलने वाला, विद्वान होता है। 
  • यदि गुरु की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक संगीत में रुचि, कला में माहिर, परिवार का भरण-पोषण करने वाला, जातक कठिन परिश्रमी होने के कारण 30 वर्ष उम्र तक धनवान हो जाता है। 
  • यदि शुक्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक कानूनी विभाग का अधिकारी या अध्यक्ष, ऑर्डिनेंस कंपनी का मैनेजर होता है। 
  • यदि शनि की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक धन-दौलत से परिपूर्ण, अच्छे स्वास्थ्य वाला, नौकरी करने वाला, समाज में सम्मानित होता है।

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र के चरण पर मंगल का प्रभाव- 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र प्रथम चरण | Mars-Mangal in Kritika Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक लोगों को दंडित करने वाला, समादेश करने वाला, ताकतवर, बॉर्डर की सेना का कमांडर, कानूनी शासन लागू करने वाला होता है। यदि मंगल 28 अंश से 30 अंश के मध्य हो तो उपरिनिर्दिष्ट के उच्च पद का अधिकारी होता है। 

मतान्तर- 

यदि मंगल या सूर्य वृषभ राशि में गोचर करेगा या तो फिर दशा, आधिपत्य काल हो तो जातक ख्याति पाने वाला होता है। जातक दूसरों की स्त्रियां ज्यादा पसंद करता है क्योंकि वह उनके साथ अवैध संबंध बनाने वाला होता है। इस चरण में यह भी योग बंता नज़र आ रहा है की वह जाने-अंजाने में जहर खा लेगा जिससे उसकी मौत हो सकती है। यदि मंगल पर शनि की दृष्टि हो तो जातक की पत्नी या पति गंदे चरित्र वाला होता है। 

मतान्तर-

ज्योतिषीय मतानुसार जातक नशीले पढ़ार्थों का सेवन करने वाला, स्वास्थ्य परेशानियों से पीड़ित होता है। जातक ब्लैक में दवाइयां बेच कर पैसा बनाने वाला होता है। ऐसे में जातक अपने बचपन में 12 साल से पहले किसी आग या सिर पर चोट का शिकार हो सकता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र द्वितीय चरण | Mars-Mangal in Kritika Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक अच्छे स्वभाव वाला, लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करने वाला, प्रतिकार लेने वाला, रिश्तेदारी में रहकर भरण पोषण करना पसंद करता है। जातक की गलतियों के कारण बचपन में ही मानसिक बीमारी का शिकार होना पड़ता है। जातक गंदे चरित्र वाला, किसी सरकारी नौकरी के पद पर भी हो सकता है। जातक इंजीनियर या तो फिर हथियारों का निर्माण करके अच्छा धन कमाने वाला होता है। यदि मंगल अन्य ग्रहों के साथ मिलन करता है तो स्त्री जातक का गर्भवती होना असंभव होता है या गर्भवती तो होती है पर बच्चा गिर जाता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र तृतीय चरण | Mars-Mangal in Kritika Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक शासन की तरफ से अच्छे मौके का फायदा उठा कर लाभ प्राप्त करेगा। जातक वस्त्राभूषणों से युक्त होता है। यदि जातक व्यापार से जुड़ा है तो वह अच्छी सफलता प्राप्त करेगा और धन लाभ करेगा। जातक बुद्धिमान, धर्म को मानने वाला, बचपन से ही सच का साथ देने वाला परंतु जिद्दी होता है। जातक लड़ाई-झगड़ों में माहिर, धार्मिक ग्राथों का ज्ञान रखने वाला होता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र चतुर्थ चरण | Mars-Mangal in Kritika Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक चर्बी युक्त मोटे शरीर वाला, शीतला नामक रोग से बुरी तरह प्रभावित होता है। जातक अपने जीवन में खुश रहकर सभी सुखों का आनंद लेने वाला होता है। जातक अपने मित्रों का साथ देने वाला अच्छा मित्र होता है। यदि मंगल चंद्र के साथ मिलन कर रहा हो तो जातक रासायनिक या दवाइयों के उत्पाद से अपने जीवन का भरण-पोषण करने वाला होता है। ऐसे योग बनते नज़र आ रहें हैं की जातक के पिता की मृत्यु के बाद व्यापार में उन्नति होने लगती है।


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र में बुध | MERCURY in Kritika Nakshatra

कृतिका नक्षत्र में बुध MERCURY in Kritika Nakshatra
  • यदि चंद्र की दृष्टि बुध पर हो तो जातक धनवान होने के लिए बहुत अधिक प्रयास और कठिन मेहनत करने वाला होता है। 
  • यदि मंगल की दृष्टि बुध पर हो तो जातक थोड़ी बहुत परेशानी के कारण अस्वस्थ होने वाला, सरकार के लिए कार्य करने वाला, अपने परिवार से दूर परदेश में रहने वाला होता है। 
  • यदि गुरु की दृष्टि बुध पर हो तो जातक नगर निगम में या नगर पालिका का अधिकारी , शिक्षित होने के कारण उच्च पद की प्राप्ति करने वाला होता है। 
  • यदि शनि की दृष्टि बुध पर हो तो जातक निर्धन, अपने जीवनसाथी और संतान पक्ष से अप्रसन्न होता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र के चरण पर बुध का प्रभाव-  

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र प्रथम चरण | Mercury-Budh in Kritika Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक शासन के अनुसार चलने वाला कार्यकर्ता, व्यापार करने वाला, स्त्रियों के साथ संबंध बनाने वाला, नशा करने वाला, अपने जीवन काल में वह आधी उम्र तक ही जीवित रहने वाला होता है। जातक का अन्य व्यक्तियों के द्वारा समाज में सम्मान और प्रशंसा करने वाला होता है। जातक लेखन का कार्य पसंद करने वाला, संगीत का शौकीन, व्यापार करने धन अर्जित करने वाला होता है। अगर बुध मंगल या शनि से दृष्ट हो तो जातक कमजोर, बाजारू स्त्रियों के साथ यौन संबंध बनाने वाला, पैसे का सदुपयोग करने वाला होता है। अगर बुध सूर्य के साथ मिलन करता हैं तो जातक डॉक्टर या वैद्य होता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र द्वितीय चरण | Mercury-Budh in Kritika Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक शादी करने का इच्छुक, गठीले शरीर वाला, लंबी उम्र जीने वाला, प्रसन्न, अपने आप में खुश रहने वाला, व्यापार के मामले में अच्छा जानकार, परंपरानिष्ठ, जातक कठिन परिश्रम करने वाला परंतु 40 वर्ष के बाद उन्नति [ ख्याति प्राप्त ] करता है। अगर बुध गुरु के साथ मिलन करता है तो जातक ज्योतिष विद्या सीखने वाला या तो फिर तंत्र-मंत्र का जादू करने वाला होता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र तृतीय चरण | Mercury-Budh in Kritika Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक अपने कार्य और व्यवहार से अच्छा, जीवन में खुश रहने वाला, लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला, अपनी बातों से लोगों को प्रभावित करने वाला होता है। अगर बुध शनि के साथ मिलन कर रहा है तो जातक वैज्ञानिक खोज करने वाला या बुद्धिजीवी होता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र चतुर्थ चरण | Mercury-Budh in Kritika Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक अच्छा खासा व्यापारी, सत्य के मार्ग पर चलने वाला, कर्म के अनुसार फल प्राप्त करने की इच्छा रखने वाला, समाज में सम्मान प्राप्त करने वाला होता है। इस चरण में ऐसा स्त्री जातिकाओं कि अपेक्षा पुरुष जातक अधिक होते हैं। जातक 60 से 62 साल तक अपना जीवन जीने वाला होता है। जातक अपने जीवन काल के मध्य में अपनी किसी बीमारी के कारण काफी धन खर्च करता है। अगर बुध गुरु के साथ मिलन करता है तो जातक राजनीतिज्ञ या नेता, लोगों को परामर्श देने वाला होता है। 


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र में गुरु | JUPITER in Kritika Nakshatra  

कृतिका नक्षत्र में शुक्र VENUS in Kritika Nakshatra
  • यदि सूर्य की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक लड़ाई-झगड़ों में प्रसिद्ध होता है, परंतु जातक लड़ाई-झगड़े के कारण किसी बड़ी चोट का शिकार होना पड़ता है। जातक धनवान, नौकरी, गाड़ी [ वाहन ] आदि से परिपूर्ण होता है। 
  • यदि चंद्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक सत्य के मार्ग पर चलने वाला, शांत स्वभाव वाला, ईमानदार होता है। जातका के लिए माता-पिता का स्नेह फायदेमंद साबित होता है। 
  • यदि मंगल की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक की संतान अत्यंत लक्षणों वाली होती है। जातक समाज में सम्मानित, भाग्यवान, सरकारी अधिकारियों से अच्छा व्यवहार रखने वाला होता है। 
  • यदि बुध की दृष्टि गुरु के साथ हो तो जातक शासन का कार्य करने वाला, शासन के द्वारा सम्मानित, प्रभावित होता है। जातक तंत्र-मंत्र जानने वाला, दूर-दूर तक फैला हुआ होता है। 
  • यदि शुक्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक धन-दौलत से परिपूर्ण, सुखी जीवन जीने वाला, लोगों के बीच प्रशंसनीय होने के कारण आनंद लेने वाला होता है। 
  • यदि शनि की दृष्टि गुरु पर है तो जातक आज्ञाकारी पत्नी और संतान से प्रसन्न, जनसमूह या गांव का मुखिया, नगर प्रमुख भी हो सकता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र के चरण पर गुरु का प्रभाव

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र प्रथम चरण | Jupiter-Guru in Kritika Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक नई-नई बातों को जानने का इच्छुक होता है, इसी वजह से जातक विद्वान, मर्म, भविष्य को समझने वाला, आत्मा और परमात्मा से संबंध रखने वाला होता है। संतान युक्त, पिता की संपत्ति पाने का इच्छुक, सुख भोगने वाला, नशा करने वाला, स्त्रियों के साथ अवैध संबंध बनाने वाला होता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र द्वितीय चरण | Jupiter-Guru in Kritika Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक कद से लंबा, मातृ प्रेम करने वाला, धर्म से संबंध रखने वाला, धार्मिक स्थलों में प्रचलित होता है। जातक अपनी कमजोरियाँ स्त्रियों को सौंपा हुआ होता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र तृतीय चरण | Jupiter-Guru in Kritika Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक शासन की किसी कार्य में व्यस्त रहने वाला, जातक सबसे अलग स्वभाव का, सबके द्वारा पसंद किया जाने वाला, गरीब परिवार में जन्म लेने वाला, समाज के हित में सोचने वाला, समाज के नियमानुसार चलने वाला परंतु जातक अन्य किसी व्यक्ति के सामने समाज के नियमों का पालन न करने वाला होता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र चतुर्थ चरण | Jupiter-Guru in Kritika Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक अच्छे कार्य करने वाला, सत्य के मार्ग पर चलने वाला, मातृ पक्ष से धन प्राप्त करने वाला, लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करने वाला, शांत स्वभाव वाला, विद्वान होता है। जातक का विवाह 27 वर्ष तक संपन्न हो जाता है। इस चरण में स्त्री या पुरुष जातक अपने पति-पत्नी के द्वारा अच्छी आमदनी होती है। 


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र में शुक्र  | VENUS in Kritika Nakshatra

कृतिका नक्षत्र में शुक्र VENUS in Kritika Nakshatra
  • यदि चंद्र का प्रभाव शुक्र पर हो तो जातक साफ मन वाला, संभोग करने में रत रहने वाला, बिजनेस में हानि करने वाला, अपने परिवार का लाडला होता है। 
  • यदि मंगल की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक अशान्त स्वभाव वाला, दुखी, बुरे भाग्य वाला, गंदे काम करने अपने जीवन का भरण-पोषण करने वाला होता है। 
  • यदि गुरु की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक अधिक धन संपत्ति वाला, संतान और पत्नी के द्वारा धन संचय किया हुआ होता है।
  • यदि शनि की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक दुबला पतला, लंबे कद वाला, मजबूत हड्डियों वाला, परिवार में कलेश करने वाला, परिवार के सम्मान को खत्म करने वाला, परंतु परिवार का चहेता होता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र के चरण पर शुक्र का प्रभाव

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र प्रथम चरण | Venus-Shukra in Kritika Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में पुरुष जातक [ स्त्रियोचित ] स्त्री के समान और स्त्री जातक [ पुरुषोचित ] पुरुष के समान होते हैं। जातक को रातोंदी का रोगी, वायु या जल या थल सेना का उच्च पद अधिकारी हो सकता है। जातक का वैवाहिक जीवन परेशानियों भरा रहता है। यदि शुक्र सूर्य के साथ मिलन करे तो जातक का तरुण अवस्था में विवाह, पैतृक संपत्ति का मालिक हो सकता है। यदि स्त्री जातक में शुक्र चंद्रमा के साथ मिलन करता है तो जातक स्त्री जातक कई बार गर्भवती होकर गर्भपात हो जाती है। ऐसे में 100% में से 30% ही स्त्री जातिका गर्भवती हो जाती हैं। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र द्वितीय चरण | Venus-Shukra in Kritika Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक जल से जुड़े व्यापार करके धन अर्जित करता है। गुरु यदि चंद्र के साथ मिलन करता है तो जातक की पत्नी बीमार रहती है तथा संतान के सामने बुरी परिस्थितियां आती हैं। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र तृतीय चरण | Venus-Shukra in Kritika Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक साफ हृदय, एक से अधिक पत्नियों के साथ रहने वाला, बुद्धिमान, उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाला, विद्यार्थियों को पढ़ाने वाला [ अध्यापक ] होता है। ऐसे में कम पढे-लिखे लोग स्त्री सौन्दर्य या फैसन से जुड़ा व्यापार करना पसंद करते हैं। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र चतुर्थ चरण | Venus-Shukra in Kritika Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक नायक या नायिका, संगीत प्रेमी होता है। ऐसी स्थिति में कई जातक बहुत अधिक धन-संपत्ति एकत्रित करने वाले होते हैं। वसीयत या दलाली करके भी धन अर्जित करते हैं। संदेहयुक्त चरित्र वाले होते हैं।


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र में शनि  | SATURN in Kritika Nakshatra

  • यदि सूर्य की दृष्टि शनि पर हो तो जातक अच्छा भाषण देने वाला, शांत स्वभाव वाला, भोजन के लिए दूसरों के सहारे रहने वाला होता है। 
  • यदि चंद्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक समूह के साथ रहने के कारण शासन से मदद मिलती है। समाज में सम्मानित स्त्रियों के साथ रहने वाला और उनके माध्यम से धन एकत्रित करने वाला होता है।
  • यदि मंगल की दृष्टि शनि पर हो तो जातक लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला और अधिक बातचीत करने वाला होता है।
  • यदि बुध की दृष्टि शनि पर हो तो जातक स्त्रियों के साथ रहना पसंद करने वाला, व्यापार में जिनसे फायदा दिखेगा उनके साथ रहने वाला, बुरे लोगों से मित्रता करने वाला, निर्धन, गरीबी का जीवन यापन करने वाला होता है। 
  • यदि गुरु की दृष्टि शनि के साथ हो तो जातक दूसरों की मदद करने वाला, समाज सेवा करने वाला, जातक समाज में सम्मानित और प्रसिद्ध होता है। 
  • यदि शुक्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक घमंडी, एक जगह स्थिर रहने वाला होता है। इस स्थिति में जातक के जीवन में होने वाली जरूरतें आसानी से पूरी होंगी। जातक शासन के सरकारी अधिकारियों से अच्छे संबंध बना के रखता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र के चरण पर शनि का प्रभाव

कृतिका नक्षत्र में शनि SATURN in Kritika Nakshatra
कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र प्रथम चरण | Saturn-Shani in Kritika Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक कुशलता पूर्वक कार्य करने वाला होता है, परंतु जातक पिता के विरोध में कार्य करना पसंद करता है। जातक को बचपन से ही कठिन परिश्रम करना पड़ता है परंतु बाद में सुख भोगता है। जातक मधुर वाणी बोलने वाला, कमजोर, कार्य के प्रति उत्साहित, जो सबसे ज्यादा जरूरी होता है वह कार्य करना पसंद करता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र द्वितीय चरण | Saturn-Shani in Kritika Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक किसी अपने से ज्यादा उम्र वाली स्त्री के स्नेह में आकर जातक उससे शादी कर सकता है। यही कारण होता है जातक के जीवन में दुखी होने का क्योंकि उसका जीवन नर्क के समान हो जाता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र तृतीय चरण | Saturn-Shani in Kritika Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक कृषि क्षेत्र से जुड़ा व्यवसाय करने वाला होता है। यदि सूर्य की दृष्टि इस चरण में हो तो स्त्री और पुरुष जातक के विवाह में परेशानियां उत्पन्न होने लगती है। यहां पर कभी-कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है की जातक का विवाह ही संपन्न नहीं होता है। जिससे जातक अपने जीवन में मानसिक तनाव का शिकार भी हो जाता है। इस चरण में यदि बुध की दृष्टि हो तो पुरुष जातक नामर्द [ नपुंसक ] और स्त्री जातक संतान रहित [ बाँझ ] होती है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र चतुर्थ चरण | Saturn-Shani in Kritika Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक विवाहित होने के बावजूद अन्य स्त्रियों के स्नेह में रत रहने वाला होता है। यदि इस चरण में चंद्र की दृष्टि हो तो जातक की पत्नी अपने आकर्षण को त्याग देती है क्योंकि वह बाद-चलन होती है। जातक की पत्नी गंदी आदतों की वजह से अपने स्वास्थ्य में कमी पैदा करती है। अगर यहां पर पुरुष जातक की कुंडली में शनि पर सूर्य की दृष्टि हो तो जातक दुखी, लोगों को न पसंद आने वाला, बुरे स्वभाव का होता है। 

यदि इस चरण में चंद्र की दृष्टि हो तो जातक स्त्रियों के परिधान का बिजनेस करता है। 


कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र में राहु  | RAHU in Kritika Nakshatra

कृतिका नक्षत्र में राहु RAHU in Kritika Nakshatra

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र प्रथम चरण | Rahu in Kritika Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक के चहरे पर काला मस्से का निशान, कुशलतापूर्वक कार्य करने वाला, जातक का विवाह होने के बाद भी वह दूसरी स्त्री के साथ अवैध संबंध रखने वाला होता है। जातक धन संपत्ति वाला, पिता के लिए पूर्ण समर्पित, बुद्धिमान, रोग मुक्त, नियुक्त करने वाले का साथ मिलता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र द्वितीय चरण | Rahu in Kritika Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक आत्मा और परमात्मा को मानने वाला, संतान रहित, निर्धन,जातक एक से अधिक महिलाओं के साथ संबंध रखने वाला होता है। अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए परदेश में रहने वाला होता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र तृतीय चरण | Rahu in Kritika Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक की वाणी में कुछ हकलाहट व गूंगापन होता है। कार्यों से बेदखल किया हुआ क्योंकि जातक मन से किसी कार्य को न करने वाला होता है। ऐसी स्थिति में जातक को आर्थिक परेशानी और गरीबी में रहकर गुजारा करना पड़ता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र चतुर्थ चरण | Rahu in Kritika Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक अपने पारिवारिक जीवन में अपने कर्तव्यों को न समझने वाला, विवाह के बाद भी जिम्मेदारियों से मुह मोड़ने वाला होता है। जातक आत्मा और परमात्मा से संबंध रखने के लिए घर-परिवार का त्याग करने वाला, साधु का वेश धारण कर लेता है। जातक ने अपने जीवन में कमाया हुआ सारा धन भगवान के नाम से चंदा [ दान ] या गरीबों में बाँट देता है।

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र में केतु | KETU in Kritika Nakshatra

कृतिका नक्षत्र में केतु KETU in Kritika Nakshatra
कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र प्रथम चरण | Ketu in Kritika Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक अपने बिजनेस में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, यौन संबंधी रोग [ नपुंसक, नामर्द या एड्स आदि ] होते हैं। जातक किसी सरकारी विभाग का अधिकारी [ मौसम विभाग ] होता है। जातक धातु संशोधन या तकनीकी व्यवस्था में कार्यरत होता है। जातक अपनी आधी [ 50 से 55 ] उम्र तक ही जीवित रहता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र द्वितीय चरण | Ketu in Kritika Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए परदेश जाकर दूर रहता है। जातक की आर्थिक स्थिति ठीक न होते हुए भी वह नशा और बाजारू स्त्रियों के साथ संभोग करने का शौकीन होता है। जातक दूसरों के जाल में फस कर अपना धन बर्बाद करने वाला होता है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र तृतीय चरण | Ketu in Kritika Nakshatra Charan Pad 3 

इस चरण में जातक सट्टेबाजी में अपना नुकसान और शासन के द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का सामना करने वाला होता है। जातक की पत्नी किसी दूसरे के साथ अवैध संबंध रखने के कारण अवैध बच्चे को जन्म देने वाली होती है। जातक के परिवार में उसका अनादर किया जाता है परंतु कभी-कभी परिवार की ओर से मदद भी मिल जाती है। 

कृतिका (कृत्तिका ) नक्षत्र चतुर्थ चरण | Ketu in Kritika Nakshatra Charan Pad 4

इस चरण में जातक व्यापारी होता है परंतु बड़े व्यापारियों से दूरी बना के रखने वाला होता है। जातक को अपने वैवाहिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यदि जातक का विवाह ज्यादा उम्र के बाद हो तो वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है।


*जातक* = ज्योतिषीय विचारों से जिस प्राणी का वर्णन किया जाए उसे जातक कहते हैं। कृत्तिका के उपाय में माणिक रत्न भी काफी कारगर है पर बिना सलाह के कोई भी रत्न उपरतन या रुद्राक्षा नहीं पहनना चाहिए ।