आर्द्रा नक्षत्र फल लाभ हानि उपाय एवं विशेषताएँ | Ardra Nakshatra

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आर्द्रा नक्षत्र | Ardra Nakshatra

आर्द्रा नक्षत्र

आर्द्रा नक्षत्र का राशि चक्र में 66 डिग्री 40 अंश से लेकर 80 डिग्री 00 अंश क्षेत्रफल होता है। अरब सागर में इस नक्षत्र को अल हन ह, ग्रीक में इस नक्षत्र को बेतेलग्युजे और चीन सियु में शेन के नाम से जाना जाता है। वैदिक शास्त्र के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र हिन्दू तंत्र में हीरे के समान चमक वाले 2 तारों का समूह, अरब तंत्र में दो तारों और चीन तंत्र में कई तारों का समूह माना गया है। आर्द्रा नक्षत्र के देवता रूद्र जो आँधी, तूफान और विनाश के स्वामी, नाड़ी तंत्र के नियंता और इन्द्र के अनुज हैं।

इसी कारण इन्हे भगवान शिव ( कल्याण करने वाले ) का दूसरा रूप रूद्र ( विनाश करने वाले ) कहा जाता है।  आर्द्रा नक्षत्र के देवता रूद्र, स्वामी राहु और राशि मिथुन हैं जिसका क्षेत्रफल 06 डिग्री 40 अंश से 20 डिग्री 00 अंश तक होता है राशि के स्वामी बुध हैं। भारतीय खगोल के अनुसार यह छठा कुशाग्र और निर्दयी संज्ञक नक्षत्र है। इस नक्षत्र का एक तारा होता है जिसके कारण इसे अरुद्र भी का जाता है। आर्द्रा यानि छठा जिसका अर्थ भाग्य देवी है।

संस्कृत भाषा में आर्द्र कहा जाता है जिसका मतलब – गीला, नम, सिला, ताजा, हरा, रशिला और कोमल। जब आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य होता है तब पृथ्वी ऋतुमती होती है। आर्द्रा शुभ रजोगुणी स्त्री नक्षत्र है। इसकी जाति शूद्र, योनि श्वान, योनि वैर वानर, गण राक्षस और नाड़ी अन्त्य होती है। इस नक्षत्र को उत्तर दिशा का स्वामी माना गया है।


आर्द्रा नक्षत्र के उपाय | Ardra Nakshatra Remedy

ज्योतिषीय मतानुसार अगर किसी जातक की जन्म कुंडली में जन्म नक्षत्र आर्द्रा है तो वह अशुभ या परेशानी का कारण होगा। इसके लिए जातक को भगवान शिव की पूजा वंदना करने से लाभ प्राप्त होता है। अगर देखा जाए तो आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है जिसे ज्योतिष में साँप का मुह माना गया है। जो शिव जी के गलें में अपना स्थान ग्रहण करके उनकी खोबसूरती बढ़ाता है। इसीलिए ऐसी स्थिति में भगवान शिव की आराधना करना सबसे उत्तम उपाय माना गया है।

भगवान शिव की पूजा करते समय भगवान शिव के ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए जिसके शुभ प्रभाव से आर्द्रा नक्षत्र में उत्पन्न होने वाले दोष कम होते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि आर्द्रा नक्षत्र अशुभ न हो तब शिव जी पूजा आराधना अवश्य करनी चाहिए क्योंकि भगवान शिव के मंत्र जाप से उत्पन्न होने वाले दोष उभर नही पाते हैं। शिव जी के मंत्र, स्त्रोत और सहस्त्रनाम आदि का उच्चारण करने से अशुभ प्रभाव कम होते है।

यदि आप किसी कार्य की शुरुआत करना चाहते हैं और रुकावट पैदा हो रही है तो ऐसे में भी भगवान शिव के मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। इससे आपको कार्यों में सफलता मिलती है और सुख समृद्धि प्राप्त होती है।  ज्योतिष आचार्यों के अनुसार यदि जातक चमकीले या फिर गेरुआ रंग के वस्त्रों का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करता है तो आर्द्रा नक्षत्र के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और शुभ प्रभाव बढ़ते हैं।

आर्द्रा नक्षत्र के देवता शिव की पूजा वंदना करने के लिए फूल, सफ़ेद चन्दन, धूप, दीप, बेल पत्री, मीठा और गाय का घी की जरूरत होती है। यदि जातक आर्द्रा नक्षत्र के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए सिर्फ मंत्र का उच्चारण करना चाहता है तो वह आर्द्रा नक्षत्र के वैदिक मंत्र का जाप कर सकता है जिसके लिए शुद्ध घी में शहद मिलाकर आर्द्रा नक्षत्र के वैदिक मंत्र का उच्चारण प्रारम्भ करें। आर्द्रा नक्षत्र का वैदिक मंत्र रोज करने से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं और जातक अपने जीवन में सुख सम्पन्न हो जाता है। 

आर्द्रा नक्षत्र का वैदिक मंत्र कुछ इस प्रकार है-

नमस्ते रूद्रमन्यवउतो त इषवे नम: ।

बाहुभ्यामुतते नम: ऊँ रुद्राय नम: शिवाय नम: ।।


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आर्द्रा नक्षत्र फल लाभ हानि उपाय एवं विशेषताएँ | Ardra Nakshatra

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में नक्षत्रों को तारों का समूह माना जाता है। आकाश में तारे अपने ही प्रकाश से चमकते और झिलमिलाते हैं। तारों की टिमटिमाहट आकाश को सुंदर बनाती है। ये धीमी गति से चलने वाले होते हैं। जिसके कारण इन्हे स्थिर तारे भी कहा जाता है। ठीक इसी प्रकार ग्रह भी तारों की झिलमिलाहट से प्रकाशित होते है। ग्रह तारों के प्रकाश से ही चमकते हैं क्योंकि इनका अपनी कोई चमक नही होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की चाल दो तरह की होती है। जो इस प्रकार है- 

1. धूर्णन ( चक्कर लगाना ) 

2. परिभ्रमण  ( चारो तरफ घूमना ) 


आर्द्रा नक्षत्र की कथा पौराणिक कहानी | Ardra Nakshatra mythological story

पौराणिक कथाओं के अनुसार रूद्र को ऋग्वेदिक देवता कहा गया है। जिसे हवा, आँधी, शिकार और तूफान का घोतक करने वाला कहा जाता है। यही कारण है की चारों वेदों में आने वाले पहले वेद ऋग्वेद में सभी शक्तियों में महाशक्तिशाली देवता के रूप में रूद्र की प्रशंसा की गई है। ऋग्वेद में रूद्र के बारे में 75 संदर्भ किए गए हैं। यजुर्वेद में श्री रुद्रम स्त्रोत्र रूद्र को समर्पण किए गए हैं, जो शिव से संबन्धित पारंपरिक मत में सबसे जरूरी मानी गई है। हिन्दू ज्योतिष शास्त्र में शिव और रूद्र की कई खूबियाँ एक समान मानी जाती है।

शिव रूद्र के गुण सूचक विशेषण के रूप में उत्पन्न हुए। जिससे वैदिक युग के बाद रूद्र और शिव दोनों एक दूसरे के लिए उपयोगी हो गए। मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव रूद्र के रूप में ऋषि कश्यप की धर्मपत्नी सुरभि के गर्भ से अवतार के रूप में पृथ्वी पर उत्पन्न हुए। जो कल्याण और विनाश का स्वरूप बताए गए हैं क्योंकि भगवान शिव कलयांकारी और रूद्र विनाशकारी माना गया है। ये रूद्र 11 प्रकार के होते है जो इस प्रकार है- कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्त्र, अजपाद, अर्हिबुन्ध्य, शम्भू, चाँद और भव हैं।


आर्द्रा नक्षत्र की विशेषताएँ | Ardra Nakshatra Importance

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस नक्षत्र में रुद्र के प्रभाव से जातक परेशान, दुखों से घिरा हुआ, बुराई को सहने वाला, गुस्सेबाज़, डरावनी शक्ल वाला और डरा हुआ होता है। आर्द्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक ताकतवर, कुर्बानी के लिए लालची, तेज तर्रार, स्थिर, बीमारियों से घिरा हुआ, डर में जीने वाला, गुस्सैल होता है।  


आर्द्रा नक्षत्र फलादेश | आर्द्रा नक्षत्र का फल | Ardra Nakshatra Prediction

आर्द्रा नक्षत्र में रूद्र के दो रूप होने के कारण इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के परिणाम मिलते हैं। इसमें जातक के अंदर अच्छाई और बुराई दोनों पाई जाती हैं। जातक हृदय से कोमल स्वभाव परंतु बातचीत करने में अकड़ू जैसा होता है। नक्षत्र फल के अनुसार जातक परिश्रमी, कठिनाइयों से जीवन यापन करने वाला, त्याग करने वाला, निर्दयी, अनुराग न रखने वाला, विरोध करने वाला, गुस्से वाला, बुद्धिमान, बुरे काम करने वाला, गरीबी में जीने वाला, धन कमाने में कठिनाइयों का सामना करने वाला, नासमझ और गंदे वस्त्र पहनने वाला होता है।


आर्द्रा नक्षत्र के पुरुष जातक | Impact of Ardra Nakshatra on Male   

आर्द्रा नक्षत्र के पुरुष जातक गठीले शरीर वाले, शारीरिक गतविधियों में दोनों तरह के जैसे मोटा या पतला, लंबा या छोटा, बुद्धिमान या नासमझ होते हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातक को अधिक लोगों के बीच आसानी से पहचाना जा सकता है। जातक प्रभावित करने वाले, स्थायी चित वाले, हसता हुआ, चिंतामुक्त, प्रेम करने वाले, आनंद लेने वाले, सही जगह पर बुद्धि का इस्तेमाल करने वाले, लोगों को राह दिखने वाले, मन को समझने वाले और बराबर जबाब देने वाले होते हैं। ज्योतिषीय मतानुसार यह गुण-दोष ग्रहों की स्थिति के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है। 

जातक अपने प्रेमी के साथ रहने वाले और उनकी हर संभव साहयता करने वाले होते हैं। यदि जातक का प्रेमी भी उसके साथ उसकी तरह ही व्यवहार करे तो वे अपने आपको बेहद सुखी मानते हैं। जातक का स्वभाव ठंडा-गरम होता है जिसके कारण उसके व्यवहार में भी उतार-चढ़ाव लगा रहता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक को ग्रहों की स्थिति बढ़ते रहने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन हिम्मत और जोश के साथ आगे बढ्ने के कारण ये अपनी मंजिल तक पहुँच जाते हैं। जातक सर्वज्ञाता यानि सभी क्षेत्रों में कार्य करने की क्षमता रखने वाला होता है लेकिन बुरा इस बात से लगता है की उसकी तारीफ कभी नही होती है। 

जातक अपने व्यापार के कार्यों में व्यस्त रहने की वजह से अपने घर-परिवार से दूर रहता है। यह 30 से 32 उम्र के बाद अपने जीवन में तरक्की करता है, जिससे वह 40 से 45 वर्ष की उम्र में पूर्ण उन्नति को प्राप्त कर पाता है। जातक के वैवाहिक जीवन में तनाव उत्पन्न होता है जिससे घर में कलेश की स्थिति बनी रहती है। जातक अपने जीवनसाथी के कारण मानसिक तनाव का शिकार रहता है। जातक अपनी परेशानियों को अपने जीवनसाथी के साथ साझा नही करता है क्योंकि उसका जीवनसाथी तनाव की स्थिति पैदा करता है जिससे जातक को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। 


आर्द्रा नक्षत्र के स्त्री जातक | Impact of Ardra Nakshatra on Female

आर्द्रा नक्षत्र की स्त्री जातकों में कई बदलाव देखने को मिलते हैं जैसे स्त्रियॉं का बंगठाव सामान्य से अलग-अलग तरह का होता है। जिसके कारण इनकी पहचान करने में कोई परेशानी नही होती है। स्त्री जातक रूपवान और कोमल शरीर वाली मनमोहक होती है। आर्द्रा नक्षत्र के स्त्री जातक प्यार के बढ़ाने वाले, दयावान और कोमल हृदय होती हैं। इस नक्षत्र की स्त्रियाँ ताकतवर, शक्तिशाली और साफ सुथरी बात करने वाली होती है। ये लोगों के सामने अपनी कोमलता को जाहीर नही होने देती हैं।

ये अपने प्रेमी को प्यार देने वाली, मदद करने वाली, जीवयुक्त और प्रशन्न होती है। ये जहां जाती है वहाँ आनंदमय माहौल बनाने के कारण अपनी एक अलग छवि छोड़कर आती है। ये दूसरों की गलतियाँ और दूसरे से कहने वाली बात सामने कहती हैं पीछे नही। ये डरती नही हैं। स्त्री जातक समझ से काम लेने वाली, विद्वान, खोज करने वाली, कभी-कभी किसी समस्या के कारण निराश होती हैं। ये मेडिकल लाइन या वैधुत विभाग से जुड़े कार्यों में कार्यरत होती हैं।

इनका पारिवारिक जीवन दुखों और संकटों से भरा रहता है। इनके घर में सबकी सोच अलग-अलग होती है। ये अपनी पति के खिलाफ रहती है क्योंकि इनकी अपने पति से कभी बनती नही है। जिसके कारण ये भी कभी अच्छी पत्नी नही बन पाती है। इनकी शादी देर से होती हैं लेकिन अगर किसी कारण जल्दी हो जाती है तो इनका दांपत्य जीवन परेशानियों से भरा रहता है। लेकिन कभी-कभी इनका तलाक भी हो जाता है। इन्हे अपने परिवार और माता-पिता का भी सहयोग नही मिलता है।


प्राचीन ऋषिमुनियों व आचार्यों के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र | Ardra Nakshatra 

जातक कटुभाषी, विद्रोह करने वाला, जरूरत से ज्यादा गुस्सा करना इनकी विशेष पहचान होती है। — वराहमिहिर  

जातक चीजों को बेचने और खरीदने में पूर्ण, परंतु ये बिजनेस करने में अनाड़ी होते हैं। मेहनती और कामुक होते हैं। — नारद 

अगर आर्द्रा नक्षत्र अशुभ प्रभाव में हो और मंगल युक्त हो तो जातक सचिव और लोलुप होने का भाव आ जाता है। जातक के चरित्र का मूल्यांकन, विरोध के कारण निराश होने वाला और अपना रास्ता बादल लेने वाला होता है। 

चन्द्र – 

        यदि इस नक्षत्र में चन्द्र हो तो जातक नई-नई चीजों को सीखने वाला, व्याकुल, लेखक या कवि, लेक्चरार, चालाक, धोखा देने वाला, चीजों को नष्ट करने वाला, बर्बाद करने वाला, पुरानी इमारत का उद्धार करने वाला होता है। ये गणित में नीपूर्ण, हठ करने वाला, नियंत्रण में रहने वाला, शक्तिशाली होते हैं। जातक धर्म को मानने वाले, कानूनी केस में फसने वाले, वासनात्मक, कामचोर और भावुक परवर्ती के होते हैं। 

सूर्य –

       यदि सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में हो तो जातक समाज के हित में कार्य करने वाला, राजनेता, दोष निकालने वाला, चतुर, स्थिर न रहने वाला, बईमान, परेशान होता है। मान्यताओं के अनुसार सूर्य जब आर्द्रा नक्षत्र में होता है तब पृथ्वी को रजोगुणी की प्राप्ति होती है। 

लग्न –  

       यदि लग्न आर्द्रा नक्षत्र में हो तो जातक लेखन का कार्य करने वाला, संचारित, बुद्धिमान, तेज-तर्रार, सर्वज्ञाता,किए हुए उपकार को न माननेवाला और समय पर धोखा देने वाला होता है। 


आर्द्रा नक्षत्र का चरण फल | Prediction of Ardra Nakshatra Charan pada

प्रत्येक नक्षत्र में चार चरण होते हैं जिसमें एक चरण 3 अंश 20 कला का होता है। नवमांश की तरह होता है जिसका मतलब यह है की इससे नौवे भाग का फलीभूत मिलता है सभी चरणों में तीन ग्रहों का प्रभाव होता है जो इस प्रकार है – राशि- मिथुन, देवता रूद्र और स्वामी राहु। 

आर्द्रा नक्षत्र का प्रथम चरण | Prediction of Ardra Nakshatra First Charan pad

आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी ग्रह गुरु है। इसमें बुध, राहु और गुरु का प्रभाव होता है। राशि मिथुन 66 अंश 40 कला से 70 अंश 00 कला क्षेत्रफल होता है। नवमांश धनु ! यह खोजकर्ता, यथार्थवाद, प्रशन्न चित्त का कारक होता है।

इस चरण में जातक लाल रंग का, समशरीर वाला, लंबी नाक और चहरे वाला, काली और घनी भौ वाला होता है। जातक बातचीत से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला और चतुर स्वभाव वाला होता है। जातक के मन में चंचलता रहती है, जिसके कारण जातक अपने जीवन में निर्णय लेने में परेशानी महसूस करता है। जातक को इन परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए विचार करना चाहिए।


आर्द्रा नक्षत्र का द्वितीय चरण | Prediction of Ardra Nakshatra Second Charan pad

आर्द्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शनि है। इसमे बुध, राहु और शनि का प्रभाव होता है। इसमें राशि मिथुन 70 अंश 00 कला क्षेत्रफल से 73 अंश 20 कला क्षेत्रफल तक होता है। नवमांश मकर ! यह भौतिकवाद, दुख, अधिक भृष्टाचार और परेशानी का कारक होता है।

इस चरण में जातक की काली और घनी भैं, सुंदर शरीर वाला, श्यामवर्णी, छोटी मुखाकृति वाला, चौड़े सीने वाला, संभोग के लिए तैयार रहता है। इस नक्षत्र की नकारात्मक चीजें इस चरण में सबसे अधिक होती है लेकिन जातक अच्छे व्यवहार वाला और सांसरिक होता है। यदि बुध और शनि शुभ स्थिति में हों तो जातक 30 से 32 वर्ष की उम्र तक कठिन परिश्रम करता है लेकिन उसके बाद उन्नति प्राप्त करता है।


आर्द्रा नक्षत्र का तृतीय चरण | Prediction of Ardra Nakshatra Third Charan pad

आर्द्रा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शनि होता है। इसमें बुध, राहु और गुरु का प्रभाव होता है। इसमें राशि मिथुन 73 अंश 20 कला क्षेत्रफल से 76 अंश 40 कला क्षेत्रफल तक होता है। नवमांश कुम्भ ! यह शोध करने, उत्साह बढ़ाने, मानसिक क्रियाओं का कारक होता है।

इस चरण में जातक बड़े मुख वाला, चौड़े सीने वाला, मोटी कमर वाला, लंबी चौड़ी भुजाओं वाला, मोटे सिर वाला, कंजूस, बुरा, बाहर निकली हुई नाड़ी, नेत्रों को देखकर मन की बात न समझने वाला होता है। जातक समाज के हित में कार्य करने वाला, कार्यों में कुशल, तीव्र बुद्धि वाला और समाज में लोगों की आर्थिक रूप से मदद न कर पाने के कारण शारीरिक रूप से मदद करने वाला होता है।


आर्द्रा नक्षत्र का चतुर्थ चरण | Prediction of Ardra Nakshatra Fourth Charan pad

आर्द्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी गुरु होता है। इसमें बुध, राहु और गुरु का प्रभाव होता है। इसमें राशि मिथुन 76 अंश 40 कला क्षेत्रफल से 80 अंश 00 कला क्षेत्रफल तक होता है। नवमांश मीन ! यह सहानभूति, हमदर्दी और शांति का कारक होता है।

जातक मोटी आँखों वाला, अधिक बोलने वाला, चौड़े माथे वाला, शक्तिशाली शरीर वाला, गुलाबी होठ, दाँत पीले, गलत संगत में रहने वाला, बुरा और अंडबंड बकनेवाला करने वाला होता है। जातक हंसी का विषय, दान करने वाला, बिना संकोच किए दूसरों से आर्थिक मदद लेने वाला, तेज दिमाग वाला, फायदेमंद कार्यों में व्यस्त रहने वाला होता है।


मृगशिरा नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष आचार्यों ने सूत्र रूप में बताया है लेकिन यह फलित में बहुत ज्यादा बदलाव हुआ है।

यावनाचार्य- 

                 आर्द्रा के पहले चरण में जातक अधिक धन खर्च करने वाला, दूसरे चरण में जातक धन हीन, तीसरे चरण में जातक कम उम्र तक जीने वाला और चौथे चरण में जातक दूसरों का सामान चोरी करने वाला होता है। 

मानसागराचार्य – 

                 आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण में जातक गलत बोलने वाला, द्वितीय चरण में जातक धन-दौलत से परिपूर्ण, तृतीय चरण में जातक भाग्यशाली और चतुर्थ चरण में जातक राजा के समान सुख भोगने वाला होता है।


आर्द्रा नक्षत्र का चरण ग्रह फल | Ardra Nakshatra Prediction based on planets   

भारतीय ज्योतिष आचार्यों के मतानुसार सूर्य, बुध और शुक्र इन ग्रहों की पूरी तरह अवलोकन या चरण दृष्टि होती है, क्योंकि सूर्य ग्रह से बुध ग्रह 28 अंश और शुक्र 48 अंश से दूर नही जा सकता है। 


सूर्य – Sun [ आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य ]

  • चन्द्र की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक को अपने करिबियों से दुख, परिवार का भरण-पोषण करने के लिए घर से दूर रहना पड़ता है। 
  • मंगल की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक कामचोर, अपने दुश्मनों से परेशान रहने वाला होता है। 
  • गुरु की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक तंत्र-मंत्र का ज्ञानी, इधर-उधर घूमने वाला होता है।
  • शनि की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक चतुर, कपटी, स्त्रियों का सम्मान न करने की वजह से अपमानित होता है। 

आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य | When sun is in Ardra Nakshatra – Prediction

सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाला, धन कमाने वाला, जाना-माना ज्योतिषी, बही खाता लिखनेवाला कर्मचारी होता है। अगर इस चरण में सूर्य बुध और गुरु का योग हो तो जातक की जुड़वा संतान पैदा होती हैं। सूर्य यदि शुक्र के साथ योग बना रहा हो तो जातक कानूनी किसी विभाग में कार्य करने वाला होता है। जातक बुढ़ापे मे आँखों की समस्या से परेशान रहता है। 

सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक हास्य रस का लेखक, पढ़ा-लिखा, उपहास पैदा करनेवाला प्रेमी, मधुर वाणी बोलने वाला, परिवार में प्यार बढ़ाने वाला, इस चरण में सूर्य अगर गुरु के साथ योग बनाए तो जातक किसी पार्टी का मंत्री या फिर शासन के किसी विभाग में उच्च पद का अधिकारी होता है। सूर्य अगर शनि के साथ योग बनाए तो जातक अपने बच्चों में पुत्री के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक होता है। 

सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक एक से अधिक क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शंकारी, 35 से 40 वर्ष की उम्र के बाद स्त्री/परूष जातक महान ज्योतिषी होता है। जातक अपनी कमाई को ज्यादा बढ़ा नही पाता है क्योंकि वह मुनीम या सलाहकार होता है।

सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक शास्त्रों का ज्ञान रखने वाला, अच्छे चरित्र वाला, ज्योतिषी, 40 वर्ष के बाद जातक धनवान और प्रचलित होता है। इसमें पुरुष जातक का विवाह 24 से 25 वर्ष की उम्र और स्त्री जातक का 22 से 23 वर्ष की उम्र तक विवाह हो जाता है। 


चन्द्र – Moon [ आर्द्रा नक्षत्र में चन्द्र ]

  • सूर्य का की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक ईश्वर संबंधी तत्वज्ञान, संपत्ति हो त्यागने वाला होता है। 
  • मंगल की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक अच्छा प्रदर्शनकारी और ऊंचे कद वाला होता है। 
  • बुध की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक शासन की मदद से जीवन यापन करने वाला होता है। 
  • गुरु की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक टीचर या भाषण देने वाला होता है। 
  • शुक्र की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक सुखी जीवन जीने वाला, भोग-विलास को प्राप्त करने वाला होता है।
  • शनि की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक धनहीन होता है। 

आर्द्रा नक्षत्र में चन्द्र | When Moon is in Ardra Nakshatra – Prediction 

चन्द्र का आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक जलने वाला, निर्दयी होता है। इस चरण में अगर चन्द्र मंगल के साथ मिलन करता है तो जातक ईश्वर संबंधी तत्वज्ञान प्राप्त करने वाला, चमड़े से जुड़ा व्यवसाय करने वाला और मिट्टी के बर्तन बनाने वाला होता है। रेवती नक्षत्र लग्न में हो और चन्द्र गुरु के साथ मिलन करे तो जातक बेहद उच्चकोटी का धनवान होता है। 

चन्द्र का आर्द्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक तंत्र-मंत्र का ज्ञानी होता है। चन्द्र यदि शुक्र से युत हो तो जातक अच्छा गायक, बाजा बजाने वाला और दमा रोग से ग्रसित होता है। 

चन्द्र का आर्द्रा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक ज्ञानी, आनंदित रहने वाला, प्रवाहशील और अच्छा बोलने वाला होता है। अगर लग्न रोहिणी नक्षत्र में हो तो जातक कम खर्चे करने वाला कंजूस होता है। अगर चन्द्र तृतीय चरण में हो और लग्न रोहिणी या कृतिका हो तो जातक का सगा भाई मानसिक रोगी होता है।

चन्द्र का आर्द्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल  

इस चरण में जातक फालतू के खर्चे करने वाला, गलत संगत में रहकर गलत ज्ञान प्राप्त करने वाला, अच्छे कार्यों से धन कमाने वाला, ईश्वर के प्रति श्रद्धा रखने वाला, परिवार की सोच से अलग सोचने के कारण पारिवारिक सुख नही मिल पाता है। जातक अक्सर अपनी पत्नी से नीचे स्तर पर कार्यकरने वाला होता है लेकिन इस बात का पछतावा जातक की पत्नी को बाद में होता है। इससे साफ होता है की जातक और उसकी पत्नी एक ही विभाग में कार्य करने वाले होते हैं। 


मंगल – Mars [ आर्द्रा नक्षत्र में मंगल ]

  • सूर्य की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक धन-दौलत से परिपूर्ण, लकड़ी से जुड़े व्यापार को करने वाला, कानूनी किसी विभाग में कार्यरत होता है। 
  • चन्द्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक कानूनी विभाग का अधिकारी, चरित्रहीन स्त्रियों के करीब करने वाला जिसके कारण जातक यौन संबंधी समस्याओं से ग्रसित होता है। 
  • बुध की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक महान ज्योतिषी, वैवाहिक जीवन को खुशहाल तरीके से जीने वाला होता है। 
  • गुरु की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक लेखन का कार्य करने वाला, वक्ता, सुखमय जीवन यापन करने वाला होता है।
  • शुक्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक की पत्नी किसी अच्छे विभाग में उच्च पद की अधिकारी होगी। 
  • शनि की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक नौकर या गुलाम होगा परंतु जातक की पत्नी शिष्ट होगी। 

आर्द्रा नक्षत्र में मंगल | When Mars is in Ardra Nakshatra – Prediction

मंगल का आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक अच्छा भोजन करने वाला और पीने वाली चीजों का शौकीन होगा जिसके कारण कई बार ऐसे जातक शराब के भी लाती हो जाते हैं। जातक ताकतबर, लड़ाई-झगड़ों में आगे रहने वाला, भाग्यवान, वाहन आदि का शौकीन होता है। जातक अपने जीवन में एक रास्ते पर चलने वाला होता है। 

मंगल का आर्द्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक दूसरों के पैसों पर और दूसरों की स्त्री पर अपनी गंदी नज़र रखने वाला, बुरे काम करने वाला, दूसरों के अंदर कमियाँ ढूँढने वाला, दूसरों को परेशान करने वाला, गुप्त रोग से ग्रसित, छोटी-छोटी बात पर क्रोधित होने वाला, अपने प्रेमी से दूर रहने वाला और पराई स्त्रियों से अच्छा व्यवहार रखने वाला होता है।  

मंगल का आर्द्रा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक अधिक गुस्सा करने वाला, परूषों के मुक़ाबले स्त्रियों को कमजोर समझने वाला होता है लेकिन अगर स्त्री इसका आदर करती है तो यह उनका सम्मान करने वाला भी होता है। जातक फालतू की बाते करने में आगे, अधिक बोलने वाला, मेहनती काम करने वाला होता है। जातक सरकार के हित में कार्य करने के कारण दूसरे देशों में रहने वाला होता है।

मंगल का आर्द्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक स्नेहपूर्ण, अनुशाशन का नुकसान होने पर निराश रहने वाला, ताकतबर, बहादुर, शांत स्वभाव वाला, लेकिन अधिक गुस्सा करने वाला और किसी विषय का अच्छा ज्ञाता होता है। जातक ज्योतिष या रसायन में अच्छे स्तर की शिक्षा ग्रहण करता है। शरीर मोटा होने के कारण कई बीमारियों का शिकार होता है।    


बुध – Mercury [ आर्द्रा नक्षत्र में बुध ] 

  • चन्द्र की दृष्टि बुध पर हो तो जातक शहर या गाँव में संस्था आदि का प्रधान अधिकारी, समाज में लोगों के द्वारा सम्मानित होता है।
  • मंगल की दृष्टि बुध पर हो तो जातक शासन करने वाला अधिकारी होगा। 
  • गुरु की दृष्टि बुध पर हो तो जातक धनवान, उन्नति को प्राप्त करने वाला, लेखापाल और वित्त संबंधी घूसखोर होगा।
  • शनि की दृष्टि बुध पर हो तो जातक अच्छा व्यवहार रखने वाला और समाज में सम्मानित होगा।  

आर्द्रा नक्षत्र में बुध | When Mercury is in Ardra Nakshatra – Prediction

बुध का आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक सभ्यतादार, शान-दौलत से परिपूर्ण, समाज में सम्मान प्राप्त करने वाला, सभी कार्यों में कुशल, ज्योतिष विधा का ज्ञान रखने वाला, वेदों और शास्त्रो का भी ज्ञाता होता है। जातक चीजों को खरीदने बेचने में माहिर होते हैं लेकिन इन्हे बिजनेस करने का तरीका नही पता होता है। जातक एक से अधिक स्त्रियों के साथ संबंध रखने वाला होता है।

बुध का आर्द्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक समाज और धर्म का विरोध करने वाला, गलत लोगों का साथ देने वाला, सभी कायों में निपूर्ण, अधिक बोलने वाला, मधुर वाणी, अच्छे स्तर का ज्योतिषी, पुत्र संतान सुख प्राप्त करने वाला होता है।

बुध का आर्द्रा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक महान गुणों वाला होता है। अगर इस चरण में लग्न हो तो जातक के जीवन में बहुत अच्छे नतीजे प्राप्त होते हैं जैसे- जातक धनवान, अच्छे परिवार और अच्छे जीवनसाथी वाला होता है। 

बुध का आर्द्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक सुख-सम्पन्न और समाज में अच्छी छवि वाला होता है। जातक कम खर्च करने वाला होगा जिससे वह अपने जीवन में अच्छी उन्नति प्राप्त करते हुए अच्छा-खासा धन जमा कर लेता है। जातक कई तरह के फायदे लेने वाला होता है। अच्छे मित्रों की संगत करने वाला, अच्छे आचरण वाला, साफ हृदय वाला होता है। इस चरण में जातक को पहले चरण के भी परिणाम प्राप्त होते है।


गुरु – Jupiter [ आर्द्रा नक्षत्र में गुरु ]

  • सूर्य की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक संततिवान, उत्तम गुणों वाली पत्नी। धनवान, समाज में सम्मानित होगा। 
  • चन्द्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक गाँव का प्रधान और किसी संस्था का अधिकारी होगा। 
  • मंगल की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक वाहन चालक या फिर वायु सेना में कार्यरत होगा। 
  • बुध की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक अच्छा ज्योतिषी या गणित विषय का ज्ञाता होगा।
  • शुक्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक अधिक धन कमाने वाला होगा परंतु उस धन का उपयोग कर पाने में सक्षम नही होगा। 
  • शनि की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक समाज में अलग पहचान वाला, वैवाहिक जीवन में संतान और पत्नी का सुख पाने वाला, धनवान और मर्यादा में रहने वाला होगा। 

आर्द्रा नक्षत्र में गुरु | When Jupiter is in Ardra Nakshatra – Prediction

गुरु का आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक बहादुर और मौज-मस्ती में रहने वाला, स्त्री जातक पुत्र सुख पाने वाली, शास्त्रों का ज्ञानी, सुंदर रुचि वाला, महान, गाँव अथवा शहर में विकास करने का इच्छुक, अनुशासन को मानने वाला और आत्म सम्मान वाला होता है।  

गुरु का आर्द्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक कानूनी विभाग किसी विभाग में उच्च पद का अधिकारी, राजनीति में अच्छा नेता होता है। जातक की संतान कर्तव्यों का पालन करने वाली होती है। 

गुरु का आर्द्रा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक खुद पर भरोषा करने वाला, गुस्से वाला, शासन के द्वारा दुतकारा गया, गाँव अथवा शहर में बढ़ोत्तरों करने की इच्छा रखने वाला होता है। अगर 14 से 15 वर्ष की उम्र में गुरु की दशा हो तो जातक अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में कठिनाइयों का सामना करने वाला होता है। जातक के जीवन में शादी के बाद सकारात्मक बदलाव आते है। 

गुरु का आर्द्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में  जातक विकास के कार्यों में व्यस्त रहने वाला, राज्य स्तर पर उच्च पद का अधिकारी, उत्पत्ति करने वाला, अधिक क्रोधित होने वाला लेकिन समय से पहले शांत हो जाने वाला, सुखमय जीवन व्यतीत करने वाला, एक से अधिक विषयों का जानकार होता है। यदि इस चरण में लग्न हो तो जातक का अच्छा और समय से विवाह होता है। 


शुक्र – Venus [ आर्द्रा नक्षत्र में शुक्र ]

  • चन्द्र की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक कार्यों को करने में संकोच करने वाला और अपने विचार दूसरों के सामने न रख पाने के कारण वह गलत समझा जा सकता है।
  • मंगल की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक भाग्यशाली होगा। 
  • गुरु की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक विद्वान, उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाला और समाज में लोगों की सेवा करने वाला होगा। 
  • शनि की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक अधिक संभोग करने की वजह से यौन समस्याओं से ग्रसित होगा।  

आर्द्रा नक्षत्र में शुक्र | When Venus is in Ardra Nakshatra – Prediction

शुक्र का आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक बुद्धिमान और स्त्रियों को आदर-सम्मान देने वाला, धार्मिक ग्रन्थों में रुचि रखने वाला, विवेक वाला, सरकारी कर्मचारियों की छत्रछाया में रहने वाला, ईश्वर और दानव में भिन्नता मानने वाला होता है। इस चरण में पुरुष जातक विज्ञान के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाला और स्त्री जातक अशुभ ग्रहों के प्रभाव से अपने शरीर को बेचने वाली होती है।  

शुक्र का आर्द्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक न ज्यादा लंबा और न ज्यादा छोटा, विद्वान, मनमोहक, लंबी उम्र जीने वाला होता है। एक दूसरे को छूने से फैलाने वाले रोग से घिरा, पारिवारिक सुख से पिछड़ा हुआ होता है। नीच लोगों से दुखी होने वाला होगा। केमिकल इंजिनयर हो सकता है लेकिन अगर बुध की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक खुशहाल वैवाहिक जीवन जीने वाला होगा। 

शुक्र का आर्द्रा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक बुद्धिमान, धन-दौलत से परिपूर्ण, धर्म को मानने वाला, धार्मिक कार्यों को सच्चे मन से करने वाला, सरकार की तरफ से फायदा होगा परंतु स्त्रियों के संपर्क में आने से हानि का शिकार होगा। 

शुक्र का आर्द्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक धर्म के हित में अच्छा विचार करने वाला, शास्त्रों का ज्ञानी, मेहनती कार्यों को करने में पीछे न हटने वाला, सभी सुखों को भोगते हुए कार्य करने वाला, ताकतबर, गायक या अभिनेता होता है। जातक ललित कला प्रेमी, संगीत से अच्छा धन कमाने वाला होता है। जातक उम्र के चौथे दस वर्ष में जीवन बहुत मनोहर तरीके से जीता है।  


शनि – Saturn [ आर्द्रा नक्षत्र में शनि ]

  • सूर्य की दृष्टि शनि पर हो तो जातक के अपने पिता के साथ संबंध अच्छे नही होंगे और न पिता पक्ष के कोई सुख मिलता है। 
  • चन्द्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक की बहन शादी के बाद भी उसी के भरोषे रहेगी। 
  • मंगल की दृष्टि शनि पर हो तो जातक को पिता की दौलत पाने में मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। 
  • बुध की दृष्टि शनि पर हो तो जातक उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाला, विज्ञान के क्षेत्र में चुना जाने वाला, जीवन में परेशानियों का सामना करने वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सरकार की तरफ से लाभ और सम्मान प्राप्त करेगा। 
  • शुक्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सोने-चांदी से जुड़े व्यापार में दलाली करेगा और एक से अधिक स्त्रियों से विवाह करने वाला होगा। 

आर्द्रा नक्षत्र में शनि | When Saturn is in Ardra Nakshatra – Prediction

शनि का आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चारण में जातक दूसरों से धन उधार लेने के कारण कर्जदार, बुरे काम करने वाला होता है। ऐसे में कई जातक चोरी-डकैती करने वाले, शर्म न करने वाले और इधर-उधर छिपता रहने वाला होता है। 

शनि का आर्द्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक अपने पिता की संपत्ति को कब्जाने वाला, पिता पक्ष से दुखी रहने वाला, धर्म को मानने वाला होता है। अगर इस चरण में चन्द्रमा की दृष्टि को तो जातक समाज की सेवा करने वाला नेता, धन दौलत के साथ साथ पहचान बनाने वाला होता है। यदि इस चरण में सिर्फ चन्द्र की दृष्टि हो तो जातक को सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। 

शनि का आर्द्रा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक महान, समाज में नेता के समान प्रसिद्ध, गुणवान पत्नी वाला होता है। अगर इस चरण में शनि हीन बलि हो तो ऐसी स्थिति में भी शनि सकारात्मक परिणाम देता है। माना जाता है की इस चरण में जातक बुरी संगत में रहने वाला, गुंडा, पत्नी के साथ अच्छे संबंध न रखने वाला होता है। 

शनि का आर्द्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक शास्त्रों का जानकार होने के कारण हेरा फेरी करने वाला, कपट करने वाला, कलेश मचाने वाला, पत्नी के पैसों पर जीने वाला, धनहीन, दुखों से घिरा हुआ होता है। जातक गलत संगत के कारण शराब और बुरे काम करने वाला जिससे वह कानूनी मामलों में फसा रहता है। 


आर्द्रा नक्षत्र में राहु | When Rahu is in Ardra Nakshatra – Prediction

राहु का आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक श्यामवर्णी, अपनी चीजों पर घमंड करने वाला, धर्म को न मानने वाला और लोगों को अपने जाल में फसाने वाला होता है। एक से अधिक स्त्रियों से संबंध रखने वाला, अधिक धन कमाने वाला, वैश्य स्त्रियों पर अपना धन खर्च करने वाला होता है। 

राहु का आर्द्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक झगड़ा करने वाला, चीजों को न भूलने वाला, मन में ख्याली पुलाव पकाने वाला, अधिक बोलने वाला, गंदे चरित्र वाला, घमंड और गुस्से के कारण दुश्मनों को जन्म देने वाला और बाल्यावस्था में गंभीर चोट का शिकारी होता है। 

राहु का आर्द्रा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक विदेश में रहने वाला, गांव का प्रधान, अपनी पत्नी से दूर रहने वाला, अन्य स्त्रियों से संबंध रखने वाला और अस्थिर चित्त वाला होता है। 

राहु का आर्द्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक ईश्वर को मानने वाला, अच्छे परिवार वाला, ललित कला प्रेमी, शांत स्वभाव वाला, सभी कार्यों में निपूर्ण, योग का अभ्यास करने वाला, तंत्र मंत्र का ज्ञान रखने वाला होता है। शुरुआत में शिक्षा ग्रहण करने में रुकावटों का सामना करना पड़ता है लेकिन बाद में पूर्ण कर लेता है।


आर्द्रा नक्षत्र में केतु | When Ketu is in Ardra Nakshatra – Prediction

केतु का आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक कानूनी मामलों में कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने वाला, पैसों को बरवाद करने वाला, एक से अधिक रोगों से पीड़ित, एहशान न मानने वाला, सरकार के द्वारा निंदित किया हुआ, माध्यम आयु वाला होगा। जातक की पत्नी रोहिणी नक्षत्र की होगी या फिर उसकी मृत्यु जातक से 35 या 36 वर्ष पहले हो सकती है। 

केतु का आर्द्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक पद से हटाया हुआ, परिवार में लड़ाई-झगड़ा करने वाला, धनहीन, वैवाहिक जीवन में पत्नी और संतान से विच्छेद, जातक नय लड़कों की तरह व्यवहार करने वाला होता है।  

केतु का आर्द्रा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक खेती-बाड़ी करने वाला, लड़ाई-झगड़े के कारण अपनी जमीन खो देने वाला, दांपत्य जीवन में कलेश करने वाला और संतान की अचानक मृत्यु से निराश हो सकता है। 

केतु का आर्द्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक कान से जुड़ी समस्याओं से ग्रसित, ज़्यादातर दूसरे देश में रहने वाला, पिता पक्ष से दुखी, पिता का धन-संपत्ति न ले पाने वाला होगा। जातक शारीरिक रूप से विकलांग या फिर जहर दिया जाने का डर ज्यादा रहता है। 


आर्द्रा नक्षत्र
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