माणिक रत्न की सरल पहचान , फायदे और नुकसान

माणिक रत्न रूबी ruby

माणिक रत्न क्या हैं और उसके बारे में

इस  माणिक रत्न कि पूरब दिशा की ओर पड़ने वाले सभी देशो में इसकी मान्यता यह है की माणिक रत्न (रूबी-Ruby)धरती माँ के लहू का एक कतरा माना जाता है इसलिए इस रत्न को धरती माँ का लहू भी कहा जाता है ।  और इस कीमती माणिक रत्न को स्वामी व नायक के रूप में भी बहुत माना जाता है ।  हमारे भारत देश में लोगो का यह तक मानना है की जो भी व्यक्ति इस माणिक रत्न को भगवान् श्री कृष्णा के चरणों में अर्पित करता है उसके जीवन में भगवान् श्री कृष्णा की कृपा होती है । जिससे वह व्यक्ति अपने भविष्य में बहुत आगे तक जाता है । या हम कह सकते है की वह अपने जीवन में बहुत उन्नति करता है ।  इस माणिक रत्न को अंग्रेजी में रूबी (Ruby Gemstone) के नाम से भी जानते है ।  इस माणिक रत्न को एक लैटिन शब्द रूबर से इसका नाम रूबी रखा गया है ।  जिसका मतलब लाल यानी रेड होता है ।  इस माणिक रत्न का रंग भी बहुत ज्यादा गहरे लाल रंग का तथा हल्के गुलाबी रंग तक का होता है ।  इस माणिक रत्न में भी बहुत सी बातें पुरुष तथा महिलाओं के लिए निम्न है ।  जैसे यह माणिक रत्न महिलाओं के लिए हल्के रंग का तथा पुरुषों के लिए गहरे यानी चटक रंग का धारण करना उच्चित माना जाता है ।   ऊँचे पद पर बैठे हुए लोगो के लिए यह माणिक रत्न सबसे अधिक श्रेष्टतम माना गया है ।  माणिक रत्न यानी रूबी को संस्कृत व बाइबल में सबसे अधिक पुराने से पुराने रत्नों में से एक माना गया है ।  इस माणिक रत्न को सूर्य का रत्न भी कहा जाता है ।  इसे सूर्य का रत्न इसलिए माना गया है क्यूंकि इसके प्रभाव से बच्चा मानसिक तथा शारीरिक ढंग से पूर्ण रूप से स्वस्थ रहता है ।  इस संसार में जितने भी रत्न पाय जाते है उन सब में बर्मा देश का माणिक रत्न सबसे ज्यादा लोगों को पसंद आने वाला रत्न है ।  क्यूंकि इसकी जड़ गहरे लाल रंग के रत्न रूबी का सबसे अच्छा स्रोत माना गया है ।  

यह माणिक सबसे ज्यादा खनिज के रूप में म्यामार देश में पाया जाता है।  यहाँ म्यामार में सबसे ऊँचे स्तर का माणिक पाया जाता है ।  बहुत वर्ष पहले म्यांमार के उपरी भाग में इस रत्न की सबसे ज्यादा खाद्याने पाई जाती थीं ।  लेकिन फिर 1990 के बाद मध्य म्यांमार में इसकी खाने सबसे अधिक पाई जाने लगीं है ।  और मध्य म्यांमार का जो माणिक है वह इतना लाल है की इस माणिक (रूबी-Ruby)के गहरे लाल रंग की तुलना कबूतर के रक्त से की गई है ।  और यह रत्न सिर्फ म्यांमार में ही नही बल्कि कई देशों में पाया जाता है । जैसे नेपाल , आस्ट्रेलिया , भारत , कम्बोडिया , अफगानिस्तान , निमीबिया , कोलंबिया , जापान , स्कॉटलैंड , ब्राजील तथा पाकिस्तान जैसे देशों में भी पाया जाता है ।  इन सभी देशों के सिवाय श्रीलंका में भी माणिक रत्न की खाद्याने पाई जाती हैं ।  लेकिन श्रीलंका का माणिक सबसे निम्न स्तर का होता है।  और यहाँ के माणिक का रंग गुलाबी होता है ।  माणिक रत्न रत्नों का सबसे बड़ा श्रोत है ।  

माणिक  रत्न और इसकी तकनिकी विज्ञान 

माणिक रत्न अर्थात (Ruby) रूबी एक खनिज रासायनिक धातु तत्व के बचे हुए शेष भाग के साथ एलुमिनियम आक्साइड  ( Al2O3 ) का एक मिश्रण है ।  यह मिश्रण लाल रंग का होता है ।  इस माणिक रत्न (रूबी-Ruby)की जो गुरुत्वाकर्षण सीमा होती है वह 4.03 होती है ।  माणिक एक ऐसा रत्न हैं जो की  खनिज से उत्पन्न होने वाले वंशज कोरंडम से सम्बंधित होता है।  और इस रत्न की मोह्स स्केल पर इसका कडापन 9 होता है ।  अगर हम बात करें तो  इस रत्न के प्रकाश विज्ञान के छेत्र में यही मिसाल देते है।  की यह माणिक रत्न एक बहुत ही अनोखे मिजाज का रत्न है। 

और यह एक ऐसा खनिज पधार्थ है जिसकी बनाबट में क्रोमियम के साथ एल्युमीनियम आक्साइड के साथ इसके कई आणू  एक दुसरे के साथ जुड़े हैं । विज्ञानिकों के रासायनिक अध्यन के बाद हमे यह पता चला है की  ये माणिक रत्न (रूबी-Ruby)संतरी लाल तथा बैगनी लाल रंग की चमक या कह सकते है की इन रंगों का प्रकाश फैलाता है । 

माणिक रत्न और इसके फायदे 

माणिक रत्न एक सूर्य रत्न है । इस रत्न के पहनने से उस व्यक्ति की कुंडली में सूर्य कि बढ़ती दशा को  देखा जा सकता है । मनुष्य को हमेशा इस माणिक रत्न (रूबी-Ruby)को किसी जानकार ज्योतिष गुरु से परामर्श लेकर ही धारण करना चाहिए क्यूकी जीतने इसके लाभ है ।  उससे कई ज्यादा इसके नुकसान है अगर गलत तरहा से पहन लिया जाए तो । मनुष्य की कुंडली में सूर्य की स्थिति के आधार पे कुछ शुभ है या अशुभ संछेप में कुछ बिंदु उपस्थित किये जा रहे है कृपया आप पढ़ के जानकारी लेय । 

  1. सूर्य अगर मनुष्य के प्रथम भाव  में  (  लग्न  ) नीच का हो तो सूर्य उस मनुष्य की कुंडली में अपने आपने प्रभाव से   ( जिसे हम कह सकते है चमक में  )  कई प्रकार की बाधाएँ डाल सकता है ।  जिसमे मनुष्य को संतान से कई  समस्याएं सबसे ज्यादा होती  है ।   तथा स्त्री के लिए भी यह घातक हो सकता है ।  ऐसे व्यक्तियों को माणिक (रूबी-Ruby)परामर्श के बाद ज़रूर पहना चाहिए । 
  2. सूर्य का कुंडली के  दुसरे भाव में होना मनुष्य को सबसे ज्यादा धन से जुडी समस्यां देता है ।  और इसमें उस व्यक्ति की नौकरी तथा व्यापार में बहुत सी बाधाएँ आती है।  ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति को माणिक रत्न को पहनना उसके लिए शुभ माना जाता है ।  और ये माणिक रत्न उस व्यक्ति के जीवन में सूर्य के प्रकोप को कम करता है ।  और व्यक्ति अपने जीवन में माणिक धारण करने के बाद धन आदि की अच्छी प्राप्ति कर पाता है ।  परामर्श बहुत ज़रूरी है मगर ।   
  3. सूर्य का तीसरे भाव में व्यक्ति के छोटे भाई के लिए बहुत सी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है ।  ज्यादातर ऐसे लोगों के छोटे भाई का जन्म ही नहीं होता या फिर उनकी मौत हो जाती है ।  मनुष्य को सूर्य की इस दशा में भी माणिक रत्न (रूबी-Ruby)पहनना शुभ माना जाता है ।परामर्श बहुत ज़रूरी है मगर ।   
  1. सूर्य का चौथे भाव में ज्यादातर व्यक्ति को नौकरी , उसके जीवन में हो रही  एशो – आराम आदि में परेशानियाँ उत्पन्न होती हैं ।  ऐसी परिस्थिति में भी व्यक्ति के लिए माणिक पहनना शुभ है । परामर्श बहुत ज़रूरी है मगर ।   
  1. सूर्य अगर व्यक्ति के पांचवे भाव में है तो उस व्यक्ति को अपने जीवन में बढ़ोतरी करने  के लिए माणिक रत्न (रूबी-Ruby)को पहनना शुभ माना जाता है । परामर्श बहुत ज़रूरी है मगर ।   
  1. सूर्य अगर व्यक्ति के छठे अथवा आठवें स्थान पर हो तो उस व्यक्ति को माणिक रत्न पहनना लाभकारी सिद्ध होता है ।  परामर्श बहुत ज़रूरी है मगर ।   
  1. सूर्य अगर व्यक्ति के सप्तम स्थान पर है तो वह व्यक्ति को उसके स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं देता है ।  ऐसे व्यक्ति मानिक रत्न (रूबी-Ruby)को धारण करके अपने जीवन में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निजात पाते हैं । इसलिए माणिक रत्न ऐसे लोगों के लिए शुभ माना गया है । परामर्श बहुत ज़रूरी है मगर ।   
  1. सूर्य अगर व्यक्ति के अष्टमेश  या  षस्ठेश स्थान से होकर पांचवे अथवा नवे भाव में  बैठा हो तो ऐसे व्यक्तियों को माणिक रत्न अवश्य पहनना चाहिए । पर फिर भी पूरी कुंडली दिखा के ही रत्न पहने ।  
  2. सूर्य अगर मनुष्य की कुंडली में अपने ही भाव अथवा अष्टम में हो तो ऐसे व्यक्तियों को माणिक रत्न (रूबी-Ruby)बिना विलंब किए धारण करना शुभ माना जाता है । परामर्श बहुत ज़रूरी है मगर ।
  3. अगर सूर्य मनुष्य के ग्यारहवें भाव में बैठा है तो वह मनुष्य को उसके पुत्रों के स्वास्थ्य की चिंता देता है ।  और इसके साथ साथ उस व्यक्ति के बड़े भाई के विषय में थी चिंताएं उत्पन्न करता है ।  अर्थार्त उस व्यक्ति के बड़े भाई के लिए सूर्य ग्यारहवें स्थान में हानिकारक होता है ।  इसलिए ऐसे व्यक्तियों को भी माणिक्य अवश्य धारण कर  लेना चाहिए । परामर्श बहुत ज़रूरी है मगर ।   
  1. सूर्य अगर  व्यक्ति के बारहवें भाव में तो वह व्यक्ति को उसकी आंखों से संबंधित समस्याएं उत्पन्न करता है।  इसलिए ऐसे व्यक्तियों को भी माणिक(रूबी-Ruby) बिना किसी विलंब के धारण कर लेना चाहिए । परामर्श बहुत ज़रूरी है मगर।   
  1. माणिक रत्न यानी रूबी को पहनने के बहुत सारे फायदे हैं ।  यह मानिक रत्न सूर्य का रत्न है ऐसे में अगर व्यक्ति माणिक रत्न धारण करता है ।  तो उसके अंदर एक नई ऊर्जा का संचार होता है ।  इसके अतिरिक्त माणिक रत्न के अंदर वे सभी अच्छाइयां हैं जिनकी प्रतिनिधि का भाव सूर्य करते हैं ।  इस माणिक रत्न को धारण करने से व्यक्ति सफलता की ओर बढ़ता है  ।  कुछ व्यक्ति इसे ज्योतिष गुरु के परामर्श से धारण करते हैं लेकिन इसी के साथ कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जो इस रत्न को शान और शौकत के लिए पहनते हैं ।  
  2. सूर्य को ब्रह्मांड में सभी ग्रहों का स्वामी तथा मार्गदर्शन करने की शक्ति के लिए जाना जाता है ।  सूर्य को समर्पण किया हुआ यानी माणिक (रूबी-Ruby)इसे धारण करने से मनुष्य को एक नई शक्ति प्रदान होती है ।  तथा उसके अंदर भी मार्गदर्शन करने की शक्ति जागृत होती है ।  जिसके चलते उस  व्यक्ति को अधिकारी तथा प्रशासनिक पद की प्रशंसा प्राप्त होती है ।  
  3. मानिक रत्न ऐसा रत्न  है जो आपके अंदर छिपी बुराइयों को खत्म करता है । और आपको  आत्मविश्वास बढ़ाने की एक नई शक्ति प्रदान करता है । 
  4. इस गहरे लाल रंग के माणिक रत्न (रूबी-Ruby)को पहनने से उस व्यक्ति के अंदर अच्छाइयाँ , दिल में प्रेम , जोश  तथा एक नई उमंग उत्पन्न करता है । 
  5. जो भी व्यक्ति इस माणिक रत्न को धारण करता है उस व्यक्ति के अंदर  एक अलग  खिंचाव उत्पन्न होता है । 
  6. इस गहरे लाल रंग के माणिक (रूबी-Ruby)को पहनने से व्यक्ति के अंदर सुस्ती , तनाव  से लड़ने की शक्ति प्रदान होती है ।  और व्यक्ति को आंखों व रक्त संचार जैसी परेशानियों से निजात मिलता है ।  
  7. अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य द्वितीय या चतुर्थ भाव में बैठा है । तो व्यक्ति को अपने परिवार संबंधी समस्याओं से सामना करना पड़ सकता है ।  ऐसे व्यक्तियों को अपने पारिवारिक संबंधों को मजबूत बनाने के लिए मानिक रत्न को अवश्य धारण करना चाहिए । 

माणिक रत्न के क्या है नुक्सान

इस ब्रह्मांड में जितने भी रत्न हैं एक रत्न का कोई ना कोई फायदा या दुष्प्रभाव जरूर होता है ।   ऐसे ही माणिक रत्न (रूबी-Ruby)के नुकसान जानने के लिए आप नीचे दिए गए बिंदुओं को ध्यान से पढ़ें । परामर्श इसीलिए बहुत ज़रूरी है ।   

  1. यह माणिक रत्न (रूबी-Ruby)रक्तदाब संबंधी  किसी  बीमारी का कारण बन सकता है । 
  2. यह (रूबी-Ruby)व्यक्ति के कार्य स्थल पर उससे उंचे  अधिकारियों के साथ मतभेद को उत्पन्न कर सकता है ।  
  3.  यह (रूबी-Ruby) उस व्यक्ति की कोमल भावनाओं , उसके व्यवहार तथा स्वभाव में बदलाव आने का कारण बन सकता है । 
  4.  माणिक रत्न (रूबी-Ruby)के दुष्प्रभाव के कारण व्यक्ति अपने सही – गलत फैसले लेने की क्षमता को खो देता है । इसी के दुष्प्रभाव के कारण व्यक्ति विलासिता पूर्ण जीवन व्यतीत करने लगता  है । वह अपने धन को ज्यादा से ज्यादा खर्च करने लगता है । अपने कामय हुए पैसों को  बर्बाद करने लगता  है । 
  5. माणिक रत्न (रूबी-Ruby)का संबंध सूर्य से होने के कारण यदि यह  आपके जीवन में ऊपर कही गई बातों का प्रभाव नहीं डालता है तो यह आपको दिल , आँखों अथवा अन्य रोगों से ग्रसित कर सकता है।   इन सबके साथ- साथ व्यक्ति के अंदर अहंकार की भावना को जगा देता है ।  

माणिक रत्न कितने रत्ती का पहनना चाहिये और उसकी विधि 

जब बात माणिक रत्न ( रूबी RUBY) की हो रही हो तब व्यक्ति को ज्योतिष आचार्या  के द्वारा बताए गए तत्वों के आधार पर व्यक्ति को माणिक रत्न कम से कम पाँच  कैरेट का पहनना चाहिए । माणिक रत्न को सोने और तांबे की अंगूठी में जड़वाकर पहनना चाहिये पर ऐसा देखा गया है की कभी कभी सोने और ताम्बे की धातु वाले माणिक दिक्कत दे देता है इसलिए किसी भी धातु का प्रयोग करने से पहले किसी ज्योतिष आचार्य से परामर्श जरुर ले लें ।   लेकिन व्यक्ति अगर 5 से 7 कैरेट तक का माणिक रत्न पहनता है तो वह बहुत ही ज्यादा उचित तथा सबसे ज्यादा श्रेष्ठ माना जाता है ।  इनके सिवा एक बात और है वो  है की माणिक रत्न एक गर्म रत्न है ।  जो  व्यक्ति के यकृत में बनने वाले तरल पदार्थ को प्रतिबद्ध करने का काम करता  है ।  यह व्यक्ति के शरीर में यकृत में बनने वाले तरल पदार्थ को या अग्नि के तत्वों का परिचालन करता है ।  यदि हम इस अनमोल रत्न के सुगमता से परिचालित गुणों के परिणाम की बात करे तो  स्पस्ट यह है की ये रत्न एक बहुत अच्छा तपिश का चालक है ।  व्यक्ति को इस बात का अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि जो अंगूठी माणिक रत्न से जड़वाकर बनवाई है उस  अंगूठी  में लगा माणिक रत्न  आपकी त्वचा से सटा रहे ।  माणिक रत्न को पहनने से पहले इस रत्न को खरीद कर हमें इसका शुद्धिकरण करना चाहिए।  इसका शुद्धिकरण एक अनुभवी ज्योतिष आचार्य से ही करवाना चाहिये क्युकी रत्न की शुद्धिकरण की विधि काफी कठिन है और मात्र गंगाजल से धोकर पहनने से माणिक पूरी तरह शुद्ध नही होता है ।  माणिक को पूरी तरह शुद्ध करबाकर ही पहनना चाहिये ।  अंगूठी को पहनने से पहले भगवान शिव तथा भगवान विष्णु को सफेद या लाल फूल अवश्य समर्पित करें और फिर धूप जलाकर सूर्य के इस बीज मंत्र ह्राँ ह्रीं ह्रोंम स: सूर्याय नमः का 108 बार जाप करना चाहिए । यह सब करने के बाद आप अंगूठी को रविवार , सोमवार और बृहस्पतिवार को धारण कर सकते हैं । 

माणिक रत्न (रूबी-Ruby)और उसका 12 राशी पर प्रभाव 

भिन्न-भिन्न राशियों का माणिक रत्न (रूबी-Ruby)का प्रभाव इस प्रकार है 

मेष राशि-   कभी- कभी मेष राशि के व्यक्तियों को अपने स्वंय के काम- काज में  निपून होने के लिए माणिक रत्न पहनने की सलाह दि जाती है जिसे पहनने से उस व्यक्ति को अपने काम- काज में सफलता प्राप्त होती है ।  

वृषभ राशि- इस राशि के व्यक्तियों को अपनी स्वंय की जिंदगी व पेशेवर ( प्रोफेशनल )

परिस्थिति में सुधार लाना है तो उस व्यक्ति को किसी जानकारी ज्योतिष से परामर्श लेने के बाद माणिक रत्न (रूबी-Ruby)धारण करना चाहिये ।  

मिथुन राशि- मिथुन राशि के जातकों को माणिक रत्न (रूबी-Ruby) न धारण करने का परामर्श दिया जाता है ।  इसलिए इस राशि के जातकों को ज्योतिषी परामर्श अवश्य लेना चाहिये । 

कर्क राशि- कर्क राशि के व्यक्तियों को उनके स्वंय के काम- काज तथा उनके निजी जीवन में उनकी सभी कमियों को दूर करता है।  और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाता है यह माणिक रत्न ।  इन सब के सिवाए यह माणिक रत्न (रूबी-Ruby) इस राशि के व्यक्तियों को उनके स्वास्थ्य से जुडी सभी समस्याओं तथा विशेष रूप से यह व्यक्ति की आँखों की समस्या को दूर करने में मदद  करता है ।  

सिंह राशि-  सिंह राशि का स्वामी यानी लॉर्ड  सूर्य है इसलिए इस राशि के लोग मनचाही फल प्राप्त के लिए माणिक रत्न (रूबी-Ruby) अवश्य पहन सकते है । 

कन्या राशि-  कन्या राशि के लोगो को माणिक रत्न (रूबी-Ruby) नही पहनना चाहिये क्युकी अगर इस राशि का व्यक्ति माणिक रत्न पहनता है तो उसके ऊपर माणिक रत्न का बुरा प्रभाव हो सकता है। परामर्श के बाद पहन सकते है । 

तुला राशि–  तुला राशि के व्यक्तियों को भी माणिक रत्न (रूबी-Ruby) न धारण करने का सुझाव दिया जाता है क्युकी इस राशि के व्यक्तिओं पर भी इसका बुरा प्रभाव हो सकता है  | क्यूकी शुक्र सूर्य का दुश्मन माना जाता है । पर अगर ज्योतिष आचार्य जी बताएं तो आप ज़रूर पहन सकते है । 

वृश्चिक राशि-  वृश्चिक राशि के व्यक्तिओं के लिए यह माणिक रत्न (रूबी-Ruby) बहुत ही लाभकारी है । क्युकी अगर इस राशि के व्यक्ति माणिक रत्न धारण करते है तो उनका हर  काम  सफल होता है । खासतौर पर उनके ऑफिस का हर काम आसानी से हो जाता है । 

धनु राशि-  धनु राशि के व्यक्तियों को माणिक रत्न ज़रूर पहनना चाहिये । क्युकी यह रत्न इनके लिए बहुत ज्यादा लाभकारी है ।  धनु राशि के जातक अगर इस रत्न (रूबी-Ruby) को धारण करते है तो उनका भाग्य चमक उठता है । 

मकर राशि- मकर राशि के  व्यक्तियों के लिए यह रत्न बहुत ज्यादा घातक हो सकता है इसलिए मकर राशि के जातको को माणिक रत्न (रूबी-Ruby) न धारण करने की सलाह दि जाती है । क्यूकी इस राशि का स्वामी शनि है और शनि सूर्य का कट्टर दुश्मन है । पर अगर ज्योतिष आचार्या जी कहें तो आप यह रत्ना धारन कर सकते है ।   

कुंभ राशि-   कुंभ राशि के व्यक्ति इस माणिक रत्न को पहन तो सकते है परन्तु कुछ विशेष परिस्थिति में वो भी किसी ज्योतिष आचार्य के परामर्श से ।  

मीन राशि –  अगर हम मीन राशि की बात करें तो इस राशि के लोग माणिक रत्न (रूबी-Ruby)सिर्फ किसी विशेष परिस्थिति या अपनी किसी इच्छा को पूरा करने के लिए पहनते है ।  एक जानकार ज्योतिषी आचार्य इस बात का फैसला ले सकता है की किस व्यक्ति को रत्न धारण करना चाहिये किस व्यक्ति को नही धारण करना चाहिये ।  

(  एक विशेष जानकारी –  मैं इस  रत्न के बारें में पढने वाले हर व्यक्ति को यह कहना चाहता हु की कोई भी व्यक्ति जब तक किसी ज्योतिष आचार्य से जानकारी न ले ले तब तक किसी भी रत्न को धारण न करे  )

रत्न का असली या नकली की पहचान

अगर हम असली माणिक की पहचान करना चाहे तो वह उसके रंग से होती है ।  असली माणिक (रूबी-Ruby) गहरे लाल रंग का  होता है ।  असली माणिक को जब हम देखते है तो उसमे एक अलोकिक चमक देखने को मिलती है परन्तु नकली माणिक में ऐसी चमक देखने को नही मिलती है ।  और नकली माणिक बेजान सा नजर आता है ।   लेकिन असली माणिक अत्यधिक निष्ठुर होता है और रत्न को पहचानने का सबसे आसान तरीका है लैब से प्रमाणित सर्टिफिकेट जो की आपको DsK Astrology पे बहुत आसानी से मिल जाएगा । 

 मनुष्य द्वारा माणिक रत्न सन 1837 में बना लिया गया था | माणिक रत्न मनुष्य से सबसे पहले फिटकरी को ऊँचे तापमान पर गर्म करके क्रोमियम के साथ मिश्रित करके बनाया था । इसके बाद रसायन ने प्रतिष्ठित के कई मानिक ती तरह दिखने वाले तथा सस्ते बनाबटी माणिक बनाने में सफल हो गय | परन्तु कामर्सिअल इन रत्नों की पयदाबारी 1903 में सुरु कर पाया था | माणिक की तरह दिखने बाले रत्न को बनाने के लिए 30 भट्टियाँ लगे गई और पुरे वर्ष में 1000 किलोग्राम माणिक बनाकर तैयार किया जाता था | 

इसके बाद बाजार में नकली माणिकों की भरमार हो गई जिससे लोग असली माणिक को पहचानने और खरीदने में बहुत दिक्कत महसूस करने लगे इसलिए व्यक्ति माणिक खरीदने के विषय में बहुत सतर्क हो गए है ।  तभी कहते है की माणिक खरीदने वाले व्यक्ति को हमेशा सतर्क एवं साबधान रहना चाहिये ।  अक्सर लोग माणिक खरीदने के बाद पछताते है क्युकी हर महंगा माणिक (रूबी-Ruby)असली तो नही होता है इसलिए लोग नकली माणिक को असली माणिक की तरह रखते है ।  और उस नकली माणिक की कीमत असली माणिक के बराबर ले लेते है । एक महंगे रत्न को ज्यादा विशेषण माना जाता है ।  लेकिन वह रत्न किसी लैब द्वारा प्रमाणित  किया गया होना चाहिये ।  तब जाके आप असली व नकली रत्न की पहचान कर सकते हो । इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए किसी भी रत्न को जब ख़रीदे तब देख ले की वह रत्न किसी लैब द्वारा प्रमाणित है या नहीं।  अगर लैब द्वारा प्रमाणित है तो वह रत्न असली होगा । अगर नही है तो वह रत्न नकली  होगा ।  इसलिए लिए आपसभी से अनुरोध है की नकली रत्नों से सतर्क एवं साबधान रहे ।   

 माणिक रत्न का विकल्प उपरत्न क्या है

माणिक रत्न (रूबी-Ruby) एक ऐसा रत्न है जिसकी कीमत बाजार में बहुत अधिक होती है ।  और ऐसा भी नही हो सकता कि सभी कोई व्यक्ति इस रत्न को खरीदकर पहन सकें क्युकी इस रत्न को सभी व्यक्ति नही ले सकते ।  हाँ ले सकता है परन्तु कुछ माणिक रत्न के जैसे दिखने बाले रत्न होते है और वे माणिक रत्न से कम कीमत के भी होते है इसलिए वह रत्न व्यक्ति आसानी से खरीद सकता है ।  इन सभी रत्नों में पहला स्थान इस्पैनेल का होता है ।  जिसको हम सब हिंदी भाषा में लालड़ी कहते है फिर इसके बाद दूसरा स्थान  गार्नेट रत्न होता है ।  इसके बाद तीसरा जिर्कान और फिर सबसे आखिरी यानी चौथा रत्न एजेड होता है ।  कभी ऐसी स्थिति आजाये की माणिक रत्न न मिले या तो फिर व्यक्ति अपनी आर्थिक परिस्थिति के कारण माणिक रत्न न धारण कर पाने की स्थिति में हो तो वह इन्हें धारण कर सकता है ।  

माणिक रत्न से साबधानी भी ज़रूरी है

यहाँ तक हम सभी ये तक जानते है की माणिक रत्न (रूबी-Ruby) जैसे हमे फायदा पहुचाते है ठीक उसी प्रकार हमे नुक्सान भी पहुँचा सकते है ।  इसलिए हमे कभी भी गलत रत्न धारण नही करना चाहिये और हमेशा किसी भी रत्न को पहनने से पहले ज्योतिष आचार्य से जानकारी अवश्य ले लें। उसके बाद ही किसी रत्न को धारण करे । अन्य था रत्न हमे किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी में डाल सकते है ।  और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की हमे माणिक के किसी भी विकल्प के साथ हीरा , नीलम , लहसुनिया और गोमेद को नही धारण करना चाहिये ।