मूल नक्षत्र फल लाभ हानि विशेषताएँ। Mula(Moola)Nakshatra

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मूल नक्षत्र | Moola Nakshatra | Mula Nakshatra

मूल नक्षत्र Mula (Moola) Nakshatra

मूल नक्षत्र का राशि चक्र में 240 डिग्री 00 अंश तक विस्तार वाला क्षेत्रफल होता है। मूल नक्षत्र को अरब मंजिल में ” अल शोलह “,  ग्रीक में ” स्कॉरपी ” और चीनी सियु मे ” उई ” के नाम से जाना जाता है। मूल का अर्थ जड़ से होता है मूल को विच्रतो के नाम से भी जाना जाता है। जिसका मूल अर्थ दो छोडने वाले हैं।

शाक्य ऋषि के मतानुसार यह शेर की पुंछ के समान नौ तारों के समूह से बनी आकृति होती है। यहीं यदि देखा जाए तो खंडकातक सिर्फ 2 तारों का समूह होता है। अर्थवेद के अनुसार भी मूल नक्षत्र को दो तारों का होना माना जाता है।

अर्थवेद में इसका वर्णन किया गया है की जब मूल नक्षत्र का उदय होता है तब इससे उत्पन्न होने वाली बीमारियों सा छुटकारा मिलता है। 

बेंटली के अनुसार बताया गया है की गिनती की शुरुआत में एक जैसे होता है ठीक उसी प्रकार मूल को भी प्रथम स्थान प्राप्त है। मूल नक्षत्र के देवता निऋति, स्वामी ग्रह केतु और राशि धनु 00 डिग्री 00 अंश से 13 डिग्री 20 अंश तक विस्तार वाले क्षेत्रफल में होती है। आकाशीय पिंडों के अध्ययन में यह 19 व गण्ड, तीक्ष्ण संज्ञक नक्षत्र माना गया है। मूल नक्षत्र के 11 तारे होते हैं। मूल नक्षत्र के देवता को संस्कृत भाषा में निऋतः जिसका अर्थ नुकसान, विनाश, तोड़ना आदि होता है। निऋति देवता को दक्षिण-पश्चिम दिशा का स्वामित्व प्राप्त है।



मूल नक्षत्र की कथा पौराणिक कहानी । Mula [ Moola ] Nakshatra mythological story 

मूल नक्षत्र के देवता निऋति हैं। इन्हे हलचल, बर्वादी, समूह को तोड़ने, संकट की देवी माना जाता है। इसे ऋग्वेद में काल, नाश, तोड़ने और कलह की देवी माना गया है ठीक उसी प्रकार अर्थवेद में सुनहरे केश वाली और काले कपड़ों में बलि का भाग बनती है। इन्हे महाभारत में अधर्म की पत्नी के नाम से भी जाना जाता है। यह किसी के भरोषे न रहने वाली, मांगने वाली, बीमार, घृणित स्वभाव वाली होती है। 

जो धरती की दरार में, रेतीले स्थानों में और टूटे हुए खण्डहरों में रहती हैं। यह काले रंग की और इसके पसंदीदा कपड़े भी काले होते हैं। यह मारे हुए लोगों के शहर में वास करती है और इसका मुख्य काम नाश और बुराई का साथ देना होता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के मतानुसार इससे बचने के लिए किसी भी कार्य की शुरुआत से पहले पूजा की जाती है कभी-कभी परिवार के कलेश और नाश से बचाने के लिए भी इसकी पूजा अर्चना की जाती है।


मूल नक्षत्र की विशेषताएँ । Mula [ Moola ] Nakshatra Importance 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मूल नक्षत्र को अतिगण्ड नक्षत्र के नाम से जाना जाता है। इसे भाग्य का सूचक भी माना जाता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ सुखी जीवन यापन करने वाला होता है। जातक किसी भी चीज को सीखने के लिए उसका गहराई से अध्ययन करने वाला, लगन लगाकर कार्य करने वाला, ज्ञान की बढ़ोत्तरी के लिए कठिन से कठिन परिश्रम करने वाला, पारिवारिक कलह का कारण बनने वाला, शांत स्वभाव वाला लेकिन घमंडी होता है। 

जातक बड़ा बनने की इच्छा रखने वाला, अस्थिर, एक से अधिक कलाओं का ज्ञाता, शांत बातावरण में सबसे अधिक बोलने वाला, घमंड भरी बात करने वाला होता है। यदि जातक किसी विषय के बारे में जानने का प्रयास करता है तो वह उसके आगे सब नजरंदाज कर देता है लेकिन उस विषय पर अच्छी जानकारी प्राप्त करने वाला होता है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक समाज में अच्छा बोलने वाला, चिकित्सक, राजनीति में अच्छा कदम जमाने वाला, आत्मा और परमात्मा से संबंध रखने वाला गुरु होता है। 


मूल नक्षत्र के नाम अक्षर । मूल नक्षत्र नामाक्षर

इस नक्षत्र के अनुसार जिस जातक का नाम आता है वह इस नक्षत्र के बताए गए गुण दोषों के समान होगा। स्वाति नक्षत्र के नामाक्षर कुछ इस प्रकार है- 

मूल नक्षत्र – प्रथम चरणये

मूल नक्षत्र – द्वितीय चरण यो

मूल नक्षत्र – तृतीय चरण – भा

मूल नक्षत्र – चतुर्थ चरणभी


मूल नक्षत्र के उपाय । Mula [ Moola ]  Nakshatra Remedy 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मूल नक्षत्र के देवता डर व मृत्यु की देवी ” निऋति ” को माना गया है। इस नक्षत्र के पीड़ित अथवा अशुभ स्थिति में होने पर भगवान शिव का पूजन किया जाता है और भगवान शिव का पूजन इस लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसे भगवान शिव की रुद्र शक्ति या प्रलयशक्ति के समान माना जाता है। जब किसी जातक का जन्म नक्षत्र मूल हो और वह पीड़ित होकर अशुभ प्रभाव अथवा नकारात्मक प्रभाव दे रहा हो तो जातक को इसके दुष्प्रभावों से बचने के लिए मूल नक्षत्र उपाय अथवा उपचार करने चाहिए जो कुछ इस प्रकार हैं। 

  • इस नक्षत्र के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए लाल, काले और सुनहरे रंग का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए।
  • जातक मूल नक्षत्र से होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए लहसुनिया रत्न धारण कर सकता है इससे जातक के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।
  • माता काली की आराधना सबसे प्रभावकारी और असरकार मानी गई है जिसके करने से इसके दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।
  • देवी निऋति की उपासना करके इस नक्षत्र के अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकता है। 
  • भगवान शिव की पूजा वंदना करने से भी इस नक्षत्र के नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकते हैं। 
  • यदि जातक इस नक्षत्र से संबंधित रंगों का उपयोग करता है तो इससे जातक के जीवन में नकारात्मक प्रभाव कम होंगे और सकारात्मक प्रभावों में वृद्धि होगी।
  • ऐसे मैं कई विद्वानों का मानना है की यदि जातक मृत्यु का मनन-चिंतन करे तो इससे मूल नक्षत्र की नकरत्मक ऊर्जा को कम किया जा सकता है। 
  • जब चंद्र का गोचर मूल नक्षत्र में तब भगवान शिव की आराधना विशेष बल को प्रकट करती है जिससे मूल नक्षत्र के सकारात्मक प्रभावों में वृद्धि होती है। 
  • मूल नक्षत्र में चंद्र के गोचर के दौरान माता काली और दुर्गा की वंदना करने से इस नक्षत्र को बल की प्राप्ति होती है जिससे नकारात्मक्ता कम होने लगती है। 
  • यदि जातक मूल नक्षत्र के दुष्प्रभावों को कम करना चाहता है तो इसके लिए मंदार की जड़ दाँय हाथ की बाजू में बाधे या फिर गले में पहले इससे लाभ मिलेगा। 
  • मंदार की जड़ को मूल नक्षत्र में चन्द्र के गोचर के दौरान धारण करें इससे जल्द और अधिक लाभ मिलेगा। 

ऐसी स्थिति में जातक इन सभी उपायों को नहीं कर सकते हैं तो इसके लिए हमारे विद्वान ज्योतिषियों ने मूल नक्षत्र के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए मूल नक्षत्र के वैदिक मंत्र का सहारा लिया जो की काफी ज्यादा असरकारी भी साबित हुआ। जातक मूल नक्षत्र के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए प्रतिदिन स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर कम से कम 108 वैदिक मंत्र का जाप करे इससे बहुत जल्द लाभ प्राप्त होगा। 

मूल नक्षत्र का वैदिक मंत्र  

ऊँ मातवे पुत्रं पृथिवी पुरीष्यमग्निगूं स्वेयोनावाभारुषा ।

तां विश्वेदेवर्ऋतुभि संवदान: प्रजापतिर्विश्वकर्मा विमुचतु ऊँ निर्ऋतये नम: ।।


मूल नक्षत्र फलादेश । मूल नक्षत्र का फल । Mula [ Moola ] Nakshatra Prediction 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक अपने अधिकार को प्राप्त करने के लिए किसी की मदद या जरूरत नही समझता वह स्वंम लड़-झगड़कर लेने की क्षमता रखता है। जातक को व्यापार में लाभ न हो तो वह दूसरे व्यापार की ओर चलने वाला, जरूरत से ज्यादा फालतू के खर्चे करने वाला, माता-पिता की बात न मानने के कारण दुखी अथवा माता-पिता से झगड़े करते रहने वाला होता है। जातक किसी भी कार्य के लिए खुद पर विश्वासी नही होता है की मैं यह कार्य करलुंगा या नही! 

जातक मेहनत के लिए पीछे हटने वाला, लेखन का कार्य करने वाला, यात्राओं का शौकीन, हिंसक कार्य करने वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण, एक जगह बैठकर करने वाले कार्यों को पसंद करने वाला, शत्रुओं के कारण नुकसान का मुह देखने वाला, समय के साथ खुद को बदलते रहने वाला, विचलित मन का होता है।


मूल नक्षत्र के पुरुष जातक | Impact of Mula [ Moola ] Nakshatra on Male

मूल नक्षत्र के पुरुष जातक लोगों को अपनी ओर मोहित करने वाले, गठीले शरीर वाला, साफ-सुथरे पैरों वाला, आकर्षक नेत्रों वाला, प्रसन्नचित, मनमोहक स्वभाव वाला होता है। जातक जीवन में हर पल को खुलकर और हसकर जीने वाला, स्नेहपूर्ण, विद्वान के समान व्यवहार करने वाला, ईमानदार, किसी से बहस न करने वाला, विश्वास करने योग्य, जातक भविष्य की चिंता न करते हुए वर्तमान को खुलकर जीने वाला होता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक वादे के पक्के होते हैं। 

यदि किसी कार्य को लेकर इनके मन में किसी प्रकार का संदेह उत्पन्न हो जाए तो ये उस कार्य को छोडना पसंद करते हैं। जातक भगवान में विश्वास रखने वाला, समस्याओं में मुस्कुराते रहने वाला होता है। जातक अपने लक्ष्य तक जाने में बेहद कठिन परिश्रम करता है तब जाके उसे अपनी मंजिल प्राप्त होती है। जातक अपनी छवि अच्छी बनाने के लिए सभी क्षेत्रों में कार्य करना पसंद करता है। जातक अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए खर्चों में कमी करता है। अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए जातक विदेशों की यात्रा करता है। 

जातक कम उम्र से मेहनत करने वाला, किसी की मदद न मिलने से वह खुद को आत्मनिर्भर बनाने वाला होता है। जातक का वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। जातक को 27, 31, 45, 50, 55, 60 वे वर्ष में बीमारी के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विद्वानों के मतानुसार मूल नक्षत्र के जातकों को जहरीले पदार्थों से बचने की आवश्यकता होती है।


मूल नक्षत्र के स्त्री जातक | Impact of Mula [ Moola ] Nakshatra on Female

मूल नक्षत्र के स्त्री जातक अपने आकर्षण से सबको अपनी ओर मोहित करने वाली, सुंदरता से लोगों को इतना मोहित कर लेती हैं की वे उसके आगे सब कुछ भूल से जाते हैं। स्त्री जातक में मौसम के अनुसार कोई बदलाव नही होता है बल्कि हर मौसम में यह खुद को वैसा ही बना लेती हैं। मूल नक्षत्र की स्त्रियाँ साफ दिल वाली, जीवन को खुलकर जीने वाली, खुश रहने वाली, जिद्दी स्वभाव की न होकर स्नेहपूर्ण होती हैं। भगवान की भक्ति के लिए इनका रवैया भी पुरुष जातकों के समान होता है। स्त्री जातक वादे की पक्की, नियमों का पालन करने वाली, अच्छे आचरण वाली और धोखेबाज लोगों को उनकी औकात दिखाने वाली होती हैं। 

स्त्री जातक ज्ञान के मामले में सामान्य होती हैं। यदि मूल नक्षत्र में गुरु हो तो इस नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ चिकित्सा के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली होती हैं। विवाह के बाद परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिसके कारण इनका वैवाहिक जीवन दुखद साबित होता है। विवाह के बाद पति से लड़ाई-झगड़ों अथवा पति की मृत्यु के कारण परिवार अथवा पति से दूर रहना पड़ सकता है। यदि जन्म नक्षत्र में ग्रह अनुकूल स्थिति में हो तब भी वैवाहिक जीवन कष्टमय होता है।

मूल नक्षत्र में जन्मी स्त्रियों के ऊपर विद्वानों के कुछ मतभेद जो इस प्रकार हैं।

  • यदि स्त्री जातक के पैर की सबसे छोटी उंगली जमीन पर न लगती हो। 
  • यदि ऊपर के दातों में अधिक छेद हो।

ऐसे लक्षण होने पर स्त्री जातक के विधवा होने का संकोच रहता है। ऐसे में यदि मूल नक्षत्र पीड़ित हो तो स्त्री जातक के पुट्टे [ बम्स ] या जांघ [ थाई ] में दर्द होता रहता है। ऐसी स्थिति में रक्त विकार, कमर और बाजू में अधिक दर्द रहता है।


प्राचीन ऋषिमुनियों व आचार्यों के अनुसार मूल नक्षत्र | Mula [ Moola ] Nakshatra

मूल नक्षत्र में जन्मा जातक हिंसक कार्य करने वाला, ये अपनी चीजों का दिखावा करने वाले, दूसरों की बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहने वाले होते है। ये गुप्त बातों अथवा चीजों को जल्द ही प्रकट कर देते हैं।- नारद 

इस नक्षत्र में जन्मे जातक जीवन में अच्छा धन प्राप्त करते हैं ये धन बचाने और दूसरों के पैसों को हथियाने में भी माहिर होते हैं। इन्हे परिवार में कलेश मचाना बेहद पसंद होते हैं। ये वृक्ष, जीव-जंतुओं को पालकर और प्रकृति से प्राप्त वस्तुओं से अपना जीवन यापन करते हैं। – पराशर

इस नक्षत्र में जन्मे जातक हिंसक कार्यों से दूर, कलेश और लड़ाई-झगड़ों से खुद को बचाने वाले होते हैं। ये जातक कभी बिना बात किसी से नही उलझते हैं। – वराहमिहिर

सभी आचार्यों के मतानुसार मूल नक्षत्र के जातक समान स्वभाव वाले हैं परंतु वराहमिहिर के अनुसार ये जातक इन सभी आचार्यों के हिसाब से अलग मत वाले होते हैं। 

चन्द्र

मूल नक्षत्र में चन्द्र हो तो जातक मनमोहक, घमंडी स्वभाव वाला, अध्यात्म से जुड़ा, दिमाग की स्थिरता को बनाए रखने वाला, शांत रहने वाला, विदेश में अपने व्यापार को फैलाने वाला, धनवान, ईमानदार, सुख भोगने वाला होता है। जातक सच के साथ रहने वाला, बड़ा बनने की इच्छा रखने वाला, परिस्थितियों के कारण खुद को कैद समझने वाला, धोखे की वजह से समस्याओं में उलझा हुआ, भाग्य के लिए भगवान भरोषे रहने वाला होता है। जातक अपनी सेहत के लिए लापरवाही दिखाने वाला, वाहन, लड़ाई-झगड़ों आदि दुर्घटनाओं में जातक फसता तो है लेकिन वह खुद को सुरक्षित बचा लेता है। जातक सुरक्षित बचने के बाद ऐसे कार्य करता हैं जिसमें उसे फिर से एक नई समस्या से जूझना पड़ता है।

सूर्य

मूल नक्षत्र में सूर्य हो तो जताक समाज में प्रचलित, धन-दौलत से परिपूर्ण, बलवान, राजाओं के समान व्यवहार वाला, रहस्यमयी चीजों को खोजने वाला, साहसपूर्ण और वाहमयुक्त होता है।

लग्न 

यदि मूल नक्षत्र में लग्न हो तो जातक संदेह युक्त, खुद के भरोषे कार्य करने वाला, बड़ा बनने की इच्छा रखने वाला, महान, बुद्धिमान, चालाकी से पैसे कमाने वाला, बीमार, पति-पत्नी के बीच आपसी मतभेद वाला होता है। जातक किसी भी बात को लेकर इतना ज्यादा क्रोधित होने वाला होता है की वह गुस्से के आगे नुकसान भी नही देखता है।


मूल नक्षत्र का चरण फल | Prediction of Mula [ Moola ] Nakshatra Charan pada 

प्रित्येक नक्षत्र में चार चरण होते हैं जिसमें एक चरण 3 अंश 20 कला का होता है। नवमांश की तरह होता है जिसका मतलब यह है की इससे नौवे भाग का फलीभूत मिलता है सभी चरणों में तीन ग्रहों का प्रभाव होता है जो इस प्रकार है – मूल नक्षत्र के देवता निऋति, स्वामी ग्रह केतु और राशि धनु।


मूल नक्षत्र का प्रथम चरण | Prediction of Mula [ Moola ] Nakshatra First Charan pad

मूल नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल है। इस चरण में गुरु, केतु और मंगल का प्रभाव होता है। राशि धनु 240 डिग्री 00 अंश से 243 डिग्री 20 अंश तक विस्तार वाले क्षेत्रफल में होती है। नवमांश मेष ! यह चरण ज्ञान प्राप्ति की इच्छा, सकारात्मक्ता और आत्मा परमात्मा से संबन्धित होता है। इस चरण में जातक सुंदर मुख, आँख और नाक वाला, सफ़ेद चमकदार दातों वाला, साफ बात कहने वाला, विद्वान लोगों में श्रेष्ठ, सच कहने से न डरने वाला और साहस वाला होता है। 

इस चरण में जातक भौतिकवादी, समाज के हित में विकासशील, समाज को ऊंचाइयों तक ले जाने वाला होता है। इस चरण में जन्मे जातक के अंडकोश बहुत ही छोटे होते हैं। पुरुष जातक अपने परिवार के साथ-साथ खुद को भी बदलता रहता है। जातक स्वतंत्र तरीके से जीवन यापन करने वाला, बड़ा बनने की इच्छा रखने वाला, जीवन के मध्यकाल में सम्मानित होता है। अपने ज्ञान का फायदा उठाकर अच्छा लाभ कमाने वाला होता है। 

जातक जरूरतमंदों की मदद करने वाला लेकिन यदि कोई बार-बार मदद मागता है तो वह उसे माना कर देने वाला होता है। जातक को बचपन में आग से जलने का दाग बन सकता है। इस चरण में जन्मे जातक 35 से 37 वर्ष की उम्र में हड्डी टूटने के कारण अथवा आग से जलने के कारण परेशान होना पड़ता है।


मूल नक्षत्र का द्वितीय चरण | Prediction of Mula [ Moola ] Nakshatra Second Charan pad 

मूल नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र है। इसमें गुरु, केतु और शुक्र का प्रभाव होता है। राशि धनु 243 डिग्री 20 अंश से 246 डिग्री 40 अंश तक के विस्तार वाले क्षेत्रफल में होती है। नवमांश वृषभ ! यह चरण कठिन परिश्रम, कलेश और बड़प्पन का कारक होता है। इस चरण में जन्मे जातक मध्यम लंबाई वाले, चौड़े और गठीले शरीर वाले, मोटी-मोटी जांघों वाले, भरी हुई टांगों वाले होते हैं। 

जातक भरी हुए हुई और चौड़ी ठुड्डी से पहचाना जाने वाला होता है। इस नक्षत्र के द्वितीय चरण में जन्मा जातक उच्च कोटी का ज्ञाता, ज्योतिषी या फिर पंडित होता है। जातक हल्के और भारी कार्यों के लिए पीछे न हटने वाला होता है।


मूल नक्षत्र का तृतीय चरण | Prediction of Mula [ Moola ] Nakshatra Third Charan pad

मूल नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध है। इसमें गुरु, केतु और बुध का प्रभाव होता है। राशि धनी 246 डिग्री 40 अंश से 250 डिग्री 00 अंश तक के विस्तार वाले क्षेत्रफल में होती है। नवमांश मिथुन ! यह चरण शब्द, मनोरंजन, बढ़ोत्तरी और सम्बन्धों का कारक होता है। इस चरण में जन्मा जातक रूपवान, मनमोहक नेत्रों वाला, शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा ज्ञाता, निडर, सभी कार्यों को गंभीरता से करने वाला, तमाम नीतियों का ज्ञाता होता है। 

इस चरण में जातक स्त्रियों की संगत पसंद करने वाला, मनोरंजन करने और कराने वाला, नियमित तरीके से कार्य करने वाला, ईश्वर भक्ति और संसार की गतविधियों में बराबर समय देने का प्रयास करने वाला होता है। जातक सभी कार्यों में माहिर, पूरी तरह से कुशल और अपनी बात पर डट कर खड़ा रहने वाला होता है। इस चरण में जन्मे जातक भौतिक उन्नति के लिए असमर्थ रहते हैं।


मूल नक्षत्र का चतुर्थ चरण | Prediction of Mula [ Moola ] Nakshatra Fourth Charan pad

मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी चन्द्र है। इस चरण में गुरु केतु और चन्द्र का प्रभाव रहता है। राशि धनु 250 डिग्री 00 अंश से 253 डिग्री 20 अंश तक के विस्तार वाले क्षेत्रफल में होती है। नवमांश कर्क ! यह चरण भावनाओं और शांत वातावरण में हलचल का कारक होता है। इस चरण में जन्मे जातक गोरे रंग वाले, भारी और निकले हुए पेट वाले, सुंदर और काले घने बालों वाले, परेशान रहने वाला, उच्च शिक्षा प्राप्तक, इधर-उधर देश-विदेश में घूमने वाला होता है। 

इस चरण में जातक अपने लक्ष को तय कर पाने में असफल रहता है साथ ही वह अपने जीवन को बेहतर बनान के लिए लिए जाने वाले फैसलों को लेने में भी कतराता है। इसके कारण समाज में जातक हास्य का पात्र बनता है। जातक अपनी इन कमजोरियों के कारण दुखी, समाज में आदर-सम्मान खो देने वाला होता है। ऐसी स्थिति में हम आपको यही सलाह देना चाहेंगे की जातक अपने साथियों और सगे संबंधियों से ज्यादा से ज्यड़ा दूरी बना कर रखें।


मूल नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष आचार्यों ने सूत्र रूप में बताया है लेकिन यह फलित में बहुत ज्यादा बदलाव हुआ है। 

यावनाचार्य

स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण में भोगवान, द्वितीय चरण में त्याग करने वाला, तृतीय चरण में धार्मिक मान्यताओं को मानने वाला, चतुर्थ चरण में राजा के समान होता है। 

मानसागराचार्य 

स्वाति नक्षत्र के पहले चरण में बुद्धिमान, दूसरे चरण में गरीब अथवा धनहीन, तृतीय चरण में बुरे कर्म करने वाला, चौथे चरण में राजा के समान रहने वाला होता है।


मूल नक्षत्र में जन्मे जातक 

बौद्ध धर्म के पूज्यनिय गुरु दलाई लामा का जन्म मूल नक्षत्र में हुआ है।

अमेरिका के 40वे राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का जन्म नक्षत्र मूल है।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो का जन्म नक्षत्र मूल है।

जापान के मसीहा [ सम्राट ] हिरोहितो का जन्म नक्षत्र मूल है।


मूल नक्षत्र का चरण ग्रह फल | Mula [ Moola ] Nakshatra Prediction based on planets   

भारतीय ज्योतिष आचार्यों के मतानुसार सूर्य, बुध और शुक्र इन ग्रहों की पूरी तरह अवलोकन या चरण दृष्टि होती है, क्योंकि सूर्य ग्रह से बुध ग्रह 28 अंश और शुक्र 48 अंश से दूर नही जा सकता है।


सूर्य – Sun [ मूल नक्षत्र में सूर्य ] 

  • चन्द्र की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक अपनी बातों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला होगा।
  • मंगल की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक परिवार से दूर अथवा सरकारी किसी सुरक्षा विभाग का सदस्य होगा।
  •  गुरु की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक आत्मा और परमात्मा असे संबंध रखने वाला, राज्य शासन में मंत्री पद पर और परिवार के साथ रहने वाला होगा।
  • शनि की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक वहम करने वाला होता है।

मूल नक्षत्र में सूर्य | When sun is in Mula [ Moola ] Nakshatra – Prediction

सूर्य का मूल नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक बलवान, धन-दौलत से परिपूर्ण, समाज के अधिकारों को मानने वाला, इंसानियत को जिंदा रखने वाला होता है। जातक जमीन से उत्पन्न होने वाली वस्तुओं से अपना जीवन यापन करने वाला होगा। भगवान के समान बुद्धिमान सतमार्ग दिखाने वाला पिता होता है। 

सूर्य का मूल नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक अपने जीवनसाथी या प्रेमी पर सक करने वाला, रहस्यमयी चीजों की खोज करने वाला लेकिन इधर की बार उधर करने वाला होता है। जीवन में सफलता को प्राप्त करना इनका मकसद होता है। जातक अपने जीवन की शुरात छोटे-मोटे व्यापार से करने वाला होता है। 

सूर्य का मूल नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक ईश्वर भक्ति का प्रचारक, बलवान, सुखी जीवन यापन करने वाला, अधिकारों को मानने वाला, पुत्री संतान से बेहद प्रेम करने वाला होता है। जातक  रसायनिक पदार्थों से जुड़ा व्यापार करने वाला होता है। जातक हसी-मज़ाक करने वाला होता है।

सूर्य का मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक सेहत को लेकर परेशान रहने वाला, काम करने में मुसीबत का सामना करने वाला, अपने आपको बड़ा दिखाने के लिए चीजों को बढ़ा-चढ़कर बताने वाला, सभी सुखों को भोगने वाला, लड़ाई-झगड़ों में आगे रहने वाला होता है। 


चन्द्र – Moon [ मूल नक्षत्र में चन्द्र ]

  • सूर्य की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक वैभव युक्त, समाज में प्रसिद्धि प्राप्तक होगा।
  • मंगल की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक स्थिर मन वाला परंतु घमंड भारी बाते करने वाला होगा।
  • बुध की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक ज्योतिष विध्या का ज्ञाता, शिल्पकला प्रेमी और सेवक-सेविकाओं से भरा होगा।
  • गुरु की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक विदेश में रहकर अपना गुजारा करने वाला लेकिन धर्म प्रचारक होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक भोग-विलासी, धोखे के कारण नुकसान और समस्याओं से घिरा होगा। 
  • शनि की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक परिस्थितियों के कारण जीवन में उलझाने महसूस करने वाला होगा।

मूल नक्षत्र में चन्द्र | When Moon is in Mula [ Moola ] Nakshatra – Prediction

चन्द्र का स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक मनमोहित करने वाला, स्थिर मन वाला, खुद में शहँशाह समझने वाला, बीमार, अपने देश में ठोकरे खाने वाला परंतु विदेश में अच्छी सफलता प्राप्त करने वाला होता है। जातक सुख सम्पन्न, बड़ा बनने की इच्छा रखने वाला, आक्रामक होता है। अगर आर्द्रा नक्षत्र लग्न में हो मंगल व शुक्र का मिलन हो तो पत्नी पति की अनुपस्थिति में दूसरे पुरुषों से मिलेगी।

चन्द्र का मूल नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक बड़ा बनने की इच्छा रखने वाला, समस्याओं और जिम्मेदारियों से घिरा हुआ, धोखेबाज़ी के कारण दुखी रहने वाला, बाते बड़ी-बड़ी करने वाला लेकिन बेईमानी से कार्य करने वाला होता है। 

चन्द्र का मूल नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक खुशहाल रहने वाला, दिखावटी, मेहनत के पश्चात अच्छा धन अर्जित करने वाला, दूसरों के पैसों को चालाकी से हड़पने वाला होता है। सूर्य या मंगल या फिर शनि की दृष्टि हो तो जातक वकील अथवा अधिवक्ता होता है। 

चन्द्र का मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक सच बोलने वाला, सच के सामने किसी की माँ सुनने वाला, कार्य के लिए उत्साहित, दिखावा करने वाला, पेड़-पौधों को लगाना और उनकी देखवाल करना बेहद पसंद होता है। जातक लापरवाही के कारण सेहत और दुर्घटनाओं का शिकार होता है।


मंगल – Mars [ मूल नक्षत्र में मंगल ]

  • सूर्य की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक समाज में सम्मान योग्य, भाग्यवान और निर्दयी होगा।
  • चन्द्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक कमजोर शरीर वाला, शारीरिक अंग भ्रष्ट और अभियुक्त होगा।
  • बुध की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक एक से अधिक विषयों का ज्ञाता और समाज में सबसे अधिक बुद्धिमान होगा।
  • गुरु की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक सुख भोगने वाला लेकिन पारिवारिक सुख प्राप्त करने के लिए दुखी होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक खुले हाथों दान देने वाला और स्त्रियों का स्नेह पाने के लिए आतुर होगा।
  • शनि की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक जीवन के किसी लक्ष्य पर न चलने वाला बल्कि इधर-उधर फालतू में घूमने वाला होगा। 

मूल नक्षत्र में मंगल | When Mars is in Mula [ Moola ] Nakshatra – Prediction

मंगल का मूल नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक अपना अधिकार न मिलने पर अधिकार जबर्दस्ती प्राप्त करने वाला, हिंसक कार्य करने वाला, एक से अधिक लोगों के बीच बहस होने पर चुप न रहने वाला, हिंसक कार्य करने वाला, एक जगह स्थिर होके कार्य करने वाला, शत्रुओं के कारण नुकसान का मुख देखने वाला होता है। विवाह के बाद लगभग एक वर्ष तक कष्ट उठाने पड़ते हैं।

मंगल का मूल नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक परिवार की स्थिरता को तोड़ने वाला, पूर्वजों के द्वारा चली आ रही परंपरा के विपरीत कार्य करने वाला, वात रोग से पीड़ित, मोटे और भरी शरीर के कारण काम करने में असमर्थ लेकिन कठिन परिश्रमी होता है। जातक दिखावा करने वाला, हिंसक कार्य करने वाला होता है। 

मंगल का मूल नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक हिंसक कार्य करने वाला, झगड़ालू स्वभाव वाला, समूह को तोड़ने वाला, वंश परंपरा को बदलने वाला, अपने पैसे और चीजों का दिखावा करने वाला, स्थिर तरीके से कार्य करने वाला, दूसरों की बात को पेट में न रखने वाला इधर-उधर कहने वाला होता है। 

मंगल का मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक सुख-संपत्ति वाला, परिवार का भरण-पोषण वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण, दूसरों के पैसों पर गंदी नज़र रखने वाला, तंत्र-मंत्र आदि जैसी विध्या सीखने का शौकीन होता है।


बुध – Mercury [ मूल नक्षत्र में बुध ] 

  • चन्द्र की दृष्टि बुध पर हो तो जातक विश्वास करने योग्य, मित्रतापूर्ण व्यवहार वाला, मिलनसार होगा।
  • मंगल की दृष्टि बुध पर हो तो जातक लेखन का कार्य करने वाला लेकिन मान्यता प्राप्ति के लिए इधर-उधर भटकने वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि बुध पर हो तो जातक अच्छी नस्ल वाला, राजनीति में अच्छा कदम जमाने वाला, प्रसिद्ध होगा।
  • शनि की दृष्टि बुध पर हो तो जातक बुरे कर्म करने वाला, निर्दयी, गुस्सेबाज़ होगा।

मूल नक्षत्र में बुध | When Mercury is in Mula [ Moola ] Nakshatra – Prediction

बुध का मूल नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक फालतू की बकबास करने वाला, परिवार में रिश्तों को तोड़ने वाला, किसी भी कार्य के लिए पूर्ण न होने वाला, अधिकार के लिए झगड़ा करने वाला, शासन में किसी उच्च पदीय अधिकारी से मददगार होता है।

बुध का मूल नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक धन-दौलत से परिपूर्ण, मिलनसार, व्यवसाय के लिए इधर-उधर घूमने वाला, पारिवारिक कलह का कारण होता है। यदि ऐसे में शुक्र राहु का मिलन हो तो जातक इंजीनियर या फिर उत्पादक होता है।

बुध का मूल नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक अच्छे कर्म करने वाला, कठिन परिश्रम से ज्ञान प्राप्त करने वाला, विद्वानों के समान समाज में सम्मान प्राप्तक, रहस्यमयी चीजों की खोज करने वाला, दर्शाने वाला, शांत स्वभाव वाला, आजादी से कार्य अथवा व्यवसाय करने वाला और माता-पिता से संबंध बिगाड़ने वाला होता है।

बुध का मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक लाभ न होने पर व्यापार में बदलाव करने वाला, दुश्मन को हराकर जीतने वाला, बुद्धिमान, अशांति फैलाने वाला, शांति भंग करने वाला होता है। जातक बड़ा बनने की इच्छा रखने वाला, देश-विदेश की यात्रा करने वाला होता है।


गुरु – Jupiter [ मूल नक्षत्र में गुरु ]

  • सूर्य की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक धनहीन परंतु समाज में लोगों के द्वारा पसंद किया जाने वाला होगा।   
  • चन्द्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक भाग्य से तेज, धन-दौलत से परिपूर्ण, सुख-सम्पन्न होगा।
  • मंगल की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक पारिवारिक दुख का कारण और निर्दयी होगा। 
  • बुध की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक प्रभावशाली, नेता या किसी मंत्री के साथ रहने वाला होगा।
  • शुक्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक जीवन में सभी सुखों को भोगने वाला, लंबी उम्र जीने वाला होता है।
  • शनि की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक समाज में नीच पहचान बनाने वाला, चोरी करके जीविका करने वाला होगा।  

मूल नक्षत्र में गुरु | When Jupiter is in Mula [ Moola ] Nakshatra – Prediction 

गुरु का मूल नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक भौतिकवादी, दिखावा करके खुशी महसूस करने वाला, पाप कर्म करने वाला, गाँव या समाज का प्रधान, फालतू के खर्चे करने वाला, साफ दिल, एक जगह स्थिर होकर कार्य करने वाला होता है। 

गुरु का मूल नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल  

इस चरण में जातक राजा के समान जीवन जीने वाला, दूसरों की बातों को इधर-उधर फैलाने वाला, खुद को समय के अनुसार बदलने वाला होता है। 

गुरु का मूल नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक बुद्धिमान, किसी भी विषय के बारे में गहराई से जानने की इच्छा रखने वाला, व्यापार में कमाई के अनुसार बदलाव करने वाला, अधिक बोलने वाला, संसार की उलझनों में फसा रहने वाला होता है। जातक किसी समुदाय का मुखिया भी हो सकता है। 

गुरु का मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक धन-दौलत से परिपूर्ण, मन भावक, कठिन फैसले लेने में असमर्थ, बुद्धिमान, ज्ञानी, अपने संतुलन को खोने वाला, धर्म को मानने वाला और विज्ञान के क्षेत्र में अच्छा नाम कमाने वाला होता है।


शुक्र – Venus [ मूल नक्षत्र में शुक्र ]

  • चन्द्र की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक भोग-विलासी, राजा के समान शौक करने वाला होगा।  
  • मंगल की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक अच्छा धन अर्जित करने वाला, एक से अधिक वाहनों अथवा मकानों का मालिक होगा। 
  • गुरु की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक एक से अधिक स्त्रियों के साथ विवाह करेगा जिसके कारण बड़ा परिवार होगा। 
  • शनि की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक भाग्य का तेज जिससे जातक के पास धन-दौलत सब कुछ होगा।   

मूल नक्षत्र में शुक्र | When Venus is in Mula [ Moola ] Nakshatra – Prediction

शुक्र का मूल नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक निर्दयी, घर में अशांति फैलाने वाला, हिममटवाला, किसी से न डरने वाला, हिंसक कार्य करने वाल, एक की बात दूसरे से कहने के कारण लोगों के आपस में मतभेद कराने वाला होता है। 

शुक्र का मूल नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक अपने व्यापार में बढ़ोत्तरी के लिए समय-समय पर बदलाव करते रहने वाला, बड़ा बनने की इच्छा रखने वाला, मेहनत और लगन से अच्छा ज्ञान प्राप्त करने वाला, शांत स्वभाव के कारण अकेला रहना पसंद करने वाला, अपने अधिकार को प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जाने वाला होता है। 

शुक्र का मूल नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक उच्च कोटी का विद्वान, धर्म का प्रचारक, धन-दौलत और वाहन आदि से पूर्ण सम्पन्न, कार्यो से अच्छा पैसा कमाने का इच्छुक, एक की चार लगाने वाला, दूसरों की बातों को हवा में उड़ाने वाला होता है। यदि अकेला शुक्र हो, तो जातक निर्धन व दुखी होगा।

शुक्र का मूल नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक धन-दौलत कमाने के लिए आतुर रहने वाला, परिवार में कलेश बनाए रखने वाला, मिलनसार होता है। यदि सूर्य शनि का मिलन हो तो जातक एक से अधिक ग्रन्थों का ज्ञाता परंतु सामान्य धनवान होगा।


शनि – Saturn [ मूल नक्षत्र में शनि ]

  • सूर्य की दृष्टि शनि पर हो तो जातक जाना-पहचाना, समाज में प्रसिद्ध, भगवान की भक्ति करने वाला और सर्व सुख को भोगने वाला होगा।  
  • चन्द्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक विज्ञान के क्षेत्र में अच्छी उन्नति करने वाला, माता पक्ष से थोड़ा चिंतित परंतु खुद के परिवार में सुखी रहता होगा। 
  • मंगल की दृष्टि शनि पर हो तो जातक गलत कार्यों की वजह से थाने-अदालत के चक्कर लगाने वाला, समाज में दुतकारा जाने वाला और निर्दयी होगा। 
  • बुध की दृष्टि शनि पर हो तो जातक नेता या मंत्री के साथ रहने वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सभी सुखों को भोगने वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण, उच्च कोटी का शिक्षक होगा।
  • शुक्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक एक जगह स्थिर होकर कार्य करने वाला, परिवार की जिम्मेदारियों को समझने वाला, माता के अलावा मौसी या फीर किसी अन्य के द्वारा पाला-पोशा जाने वाला होगा।

मूल नक्षत्र में शनि | When Saturn is in Mula [ Moola ] Nakshatra – Prediction

शनि का मूल नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक कठिन परिश्रम करने के कारण अपने व्यापार में सफल और अच्छा धन प्राप्त करने वाला होता है। जातक अपने परिवार में सबसे शांत और अच्छा ईमानदार व्यक्ति होता है।

शनि का मूल नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक बुद्धिमान, धैर्य के साथ कार्य करने वाला, अपनी बात को छिपाने वाला लेकिन दूसरों की बात को इधर-उधर बताने वाला, दिखावा करने वाला, मददगार मित्रो की संगत करने वाला होता है।

शनि का मूल नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक अपने ज्ञान से अच्छा धन अर्जित करने वाला, बुद्धिमान, अपने अधिकार को पाने के लिए लड़ाई-झगड़ों से भी पीछे न हटने वाला, व्यवसाय में सफलता मिलने तक मेहनत और प्रयास करते रहने वाला होता है।

शनि का मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक गुप्त चीजों का दिखावा करने वाला, पारिवारिक संकट का कारण, विज्ञान के क्षेत्र में अच्छा खोजकर्ता, गाँव या शहर का प्रधान, किसी समूह का मुखिया होता है। जमीन सी उत्पन्न होने वाली वस्तुओं से अच्छा धन लाभ अर्जित करने वाला होता है।


मूल नक्षत्र में राहु | When Rahu is in Mula [ Moola ] Nakshatra – Prediction

राहु का मूल नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

यदि पुष्य नक्षत्र मे शनि, चंद्र, हो तो पुरुष जातक अपनी संतान के कारण मानसिक तनाव का शिकार, स्त्री जातक गर्भाशय के विकार से पीड़ित होगी तथा पुत्र के कारण मानसिक कष्टों को सहन करने वाला होगा। 

राहु का मूल नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

यदि मृगशीर्ष नक्षत्र लग्न हो, तो स्त्री जातक अपने परिवार के विनाश का कारण बनेगी और सुख के लिए इधर-उधर भटने वाली होगी। 

राहु का मूल नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक वेदों का ज्ञाता, जमीदार, घर-वाहन आदि से पूर्ण होता है लेकिन वह अपनी आधी उम्र में [ लगभग 50 से 60 वर्ष ] किसी स्त्री को दे देता है। यदि चंद्र ज्येष्ठा नक्षत्र में हो तो ये परिणाम अवश्य देखने को मिलते हैं।

राहु का मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक किसी उच्च पद के अधिकारी के साथ रहने वाला, अधिकारियों के साथ यात्राएं करने वाला, समाज की चिंता न करते हुए वैश्य स्त्रियों के साथ रहने वाला होगा। यदि विशाखा प्रथम या द्वितीय चरण में लग्न में हो तो जातक इन परिणामों को अवश्य देखेगा।  


मूल नक्षत्र में केतु | When Ketu is in Mula [ Moola ] Nakshatra – Prediction

केतु का मूल नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक घर-वाहन आदि का मालिक होता है। जातक लगभग 30 वर्ष की उम्र तक आधी चीजे बरवाद करदेगा लेकिन 35 से 40 वर्ष की उम्र तक वापस प्राप्त कारलेगा।

केतु का मूल नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक को प्रथम चरण के समान गुणदोष प्राप्त होते हैं। ऐसे में यदि मंगल की युति हो तो जातक मंत्री या मंत्री के समक्ष कार्यकारी होगा।

केतु का मूल नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक त्वचा रोग से पीड़ित, रक्त विकार जैसी समस्याओं से जूझने वाला, हृदय रोग के कारण बेहद दुखी रहने वाला होता है एकिन इस चरण में प्रथम तथा द्वितीय चरण के समान गुणदोष प्राप्त होते हैं। 

केतु का मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक एक नौकरी छोड़ दूसरी पकड़ेगा जिसके कारण परिवार में पैसों की तंगी तथा कलेश मचा रहेगा। परिवार के लोग जातक से नफरत करने वाले होंगे। 


मूल नक्षत्र
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