अश्विनी नक्षत्र फल लाभ हानि उपाय विशेषताएँ | Ashvini Nakshatra

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जिस प्रकार वैदिक ज्योतिष शास्त्र को वेदों में नेत्र माना गया है उसी प्रकार नक्षत्र को उस नेत्र की दृष्टि माना गया है। हमें कई ऐसे परिणाम देखने को मिलते हैं जैसे की प्राचीन समय में वैदिक ज्योतिष का बर्ताव नक्षत्रों  के जैसा ही था। यही कारण है कि नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष शास्त्र की आत्मा माना जाता है। हम कह सकते हैं कि इसी आत्मा के लिए भारतीय ज्योतिषियों नें एक अत्यंत मनोरम शरीर तैयार किया है जिसे हम नक्षत्र कहते हैं। 


अश्विनी नक्षत्र (Ashwini Nakshatra) 

Ashwini Nakshatra अश्विनी नक्षत्र

अश्विनी नक्षत्र (Ashwini Nakshatra) का क्षेत्रफल 00 अंश से 13 अंश तक का होता है। अश्विनी नाम का निर्माण दो अश्विन से मिलकर हुआ है। इस नक्षत्र ( Ashwini Nakshatra ) को सभी देशों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे- ग्रीक में कस्टर और पोलुक्स, अरब मंजिल में अल- शरतेैन और चीन के सियु में ल्यु के नाम से जाना जाता है।

चकलय और खंडकातक के माध्यम से अश्विनी समूह दो अश्वनियो का अंश दो तारों का समुदाय है। इसी तरह कालबुक और बाद के विचारों के माध्यम से अश्विनी नक्षत्र (Ashwini Nakshatra) दो अश्व मुख का अंश तीन तारों का समुदाय है। अश्विनी कुमार और स्वामी केतु को मेष राशि में 00 अंश से 13 अंश का 20 कला क्षेत्र प्राप्त है। खगोलीय मान्यताओं के अनुसार इस नक्षत्र ( Ashwini Nakshatra ) को सबसे पहले नक्षत्र माना गया है।

इस नक्षत्र के तीन तारे होते हैं जिन तारों से मेष राशि में वसंत दिन और रात का मान बराबर होने का समय शुरू होता है। इस नक्षत्र से लगभग 400 वर्ष प्राचीन समय की गिनती करना संभव हो गया है। इस नक्षत्र का नाम मुहूर्त ज्योतिष में लघु क्षिप्र नक्षत्र रखा गया है। इस अश्विनी नक्षत्र को दक्षिण दिशा का स्वामित्व प्राप्त है। यह नक्षत्र स्थिर कार्य, यथार्थ और महीन कार्यों में लाभदायक सिद्ध होता है। इस नक्षत्र शुभ होता है। इस नक्षत्र की जाति नाड़ी , योनि अश्व आदि होती हैं। 


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अश्विनी नक्षत्र की कथा पुराणिक कहानी | Ashwini Nakshatra mythological Story

इस नक्षत्र के देवता अश्विनी कुमार हैं। प्राचीन कथाओं के अनुसार अश्विनी कुमार एक साथ जुड़े 2 सिर वाले देवता हैं। जिन्हें धरती और आसमान पर सबसे पहला वैद्य माना गया है। अश्विनी का अर्थ है अश्व यानि घोडा या घोड़ी से जुड़ा  और कुमार का अर्थ परंपरानिष्ठ होता है। प्राचीन कथाओं के अनुसार बताया गया है की सूर्य की धर्मपत्नी संजना जिन्हें छाया के नाम से भी जाना जाता है।

क्योंकि वो एक वार छलावे से घोड़ी बनकर घूम रही थी लेकिन जब सूर्य ने अपनी पत्नी के छल को देखा तो वो भी घोडा बन गए और अपनी पत्नी के साथ घूमने लगे और दोनों ने एक दूसरे के साथ संभोग किया जिससे दो मुख वाले सर से घोडा और शरीर से मनुष्य के वेस में अश्विनी कुमार का जन्म हुआ। जिन्हे विद्या { ज्ञान } और रफ्तार { गति } का देवता माना जाता है। 


अश्विनी नक्षत्र के उपाय | Ashwini Nakshatra Remedy

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कभी-कभी जातक की कुंडली में जन्म नक्षत्र अशुभ प्रभाव में होता है या फिर गोचर में भी अशुभ प्रभाव का हो तो जातक को जन्म नक्षत्र के समय बुरे प्रभावों के कारण अश्विनी नक्षत्र से जुडने पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जातक को अपने जीवन में नुकसान और आर्थिक समस्याओं से गुजरना पड़ सकता है, जिसके लिए आप अश्विनी नक्षत्र के उपाय कर सकते हैं और गणपती जी का पूजन करके अपने जीवन में बाधाओं को कम कर सकते हैं। अश्विनी नक्षत्र के उपाय और मंत्र कुछ इस प्रकार है- 

  • गणेश जी के मंत्र ” ऊँ गं गणपतये नम: ” का उच्चारण 108 बार करने से जीवन में समस्याएँ कम होती है। 
  • जब अश्विनी नक्षत्र में चन्द्र का गोचर होता है तो उस गोचर के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए ” ऊँ ऎं ” या ” ऊँ इम् ” का कम से कम 27 बार जाप करना चाहिए।

यदि जातक गणेश जी के मंत्र का जाप निरंतर करता है तो उसे अपने जीवन में समस्याओं से छुटकारा मिलता है। इसके साथ-साथ स्वास्थ्य, धन, गौरव और स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव होते हैं। इस मंत्र के प्रभाव से जातक को समाज में सम्मान मिलता है। ऐसे जातक जो अश्विनी नक्षत्र के वैदिक मंत्र का जाप करना चाहते हैं तो अश्विनी नक्षत्र का वैदिक मंत्र कुछ इस प्रकार है – 

ऊँ अश्विना तेजसा चक्षु प्राणेन सरस्वती वीर्यम्।

वाचेन्द्रो बले नेन्द्रायद द्युरिन्द्रयम ।।


यह एक सामान्य विधि है परंतु अगर आप प्रबल और सटीक परिणाम चाहते हैं तो आपको अपनी कुंडली के आधार पर विधि और मंत्र लेना चाहिए।  


अश्विनी नक्षत्र की विशेषताऐ | Ashwini Nakshatra Importance

यह नक्षत्र व्यक्ति के जीवन में बुरे लक्षणों को दूर कर अच्छे लक्षणों का वास कराता है। इस नक्षत्र के प्रभाव से जातक तत्क्षण ऊंचाइयों को प्राप्त करता है। जातक विवेक और बुद्धि से परिपूर्ण हो जाता है।जब सूर्य से अश्विनी कुमार ने चिकित्सा शिक्षा ग्रहण करना चाही तब इन्द्र देव ने विघ्न डाली परंतु अश्विनी कुमार ने अपनी लगन से शिक्षा प्राप्त कर ही ली।

यही कारण है की किसी भी जातक को चिकित्सा शिक्षा ग्रहण करने में छोटी मोटी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन अश्विनी की तरह यदि शिक्षा ग्रहण करने की लगन है तो जातक किसी भी परेशानी से गुजरते हुए शिक्षा ग्रहण कर ही लेगा। इसी कारण से नक्षत्र ( Ashwini Nakshatra ) के जातकों की दोस्ती ज्येष्ठा नक्षत्र के जातकों से अच्छी नहीं रहती क्योंकि ज्येष्ठा नक्षत्र का देवता इंद्र है। 


अश्विनी नक्षत्र के प्रचलित लोग | Ashwini Nakshatra Famous Personality

रवीन्द्रनाथ टैगोर के राशि चक्र की गति पर चन्द्र नक्षत्र के चतुर्थ सामीप्य में था। 

एवरेस्ट पर्वतारोही के राशि चक्र की गति पर चन्द्र नक्षत्र के द्वितीय सामीप्य में था। 


अश्विनी नक्षत्र फलादेश | अश्विनी नक्षत्र का फल – Ashwini Nakshatra Predictions

अश्विनी नक्षत्र (Ashwini Nakshatra) से अब 390 से अधिक ई. पूर्व समय तक की गणना बड़ी ही आसानी से की जा सकती है। इसलिए यह नक्षत्र सबसे पहला नक्षत्र माना गया है। इसे परिवहन का भी नक्षत्र माना जाता है। जातक कार्यकुशल, विवेक, धन से परिपूर्ण और लोगों को पसंद आने वाला {लोकप्रिय}  होता है।

यह नक्षत्र चन्द्रमा के दिन उत्पन्न जातक,  चिकित्सक, पशुओं का मालिक होगा। अश्विनी नक्षत्र को स्वाक्षता का अंश माना जाता है। अश्विनी नक्षत्र की प्रारंभता कुछ अलग तरीके से होती हैं जैसे जातक चंचल, अधिक धन खर्च करने वाला,  सुंदर दिखने वाला, लोगों को अच्छी राह दिखाने वाला और साहसी होता है। 


अश्विनी नक्षत्र के पुरुष जातक | Impact of Ashwini Nakshatra on Male

खूबसूरत दिखने वाला, आंखें चमकदार तथा बड़ी होती है और नाक की आकृति लम्बी तथा गोल होती है। जातक जिद्दी होता है, लेकिन नि:शब्द होता है जातक किसी भी कार्य को बिना दर्शाए पूरा करने वाला होता है। यह लक्षण नक्षत्र में 14 अप्रैल से 20 अप्रैल तक उच्च का सूर्य और स्वाति में यह 14 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक नीच का सूर्य अच्छी तरह देखा हुआ होता है।

ये वस्तुगत विशेषताएं और सभी महीने में पैदा हुए जातकों में कम होती हैं। जातक विश्वाश के योग्य, सच्चा दोस्त, अपने से बड़ों की बात मानने वाला, दूसरों की बुराई न करने वाला, समय को महत्व देने वाला, किसी भी चीज पर बिना सोचे समझे विश्वास न करने वाला, परंपरावाद के सिद्धांत को मानने वाला होता है।

जातक को 30 वर्ष की उम्र तक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, 30 से 55 वर्ष तक की उम्र में स्थित होकर प्रगति होती है। जातक का विवाह 26 से 30 वर्ष तक सम्पन्न होता है। 


अश्विनी नक्षत्र के स्त्री जातक | Impact of Ashwini Nakshatra on Female 

स्त्री जातक में सभी गुण पुरुष जातक के समान होते हैं परंतु कुछ अंतर साफ दिखाई देता है जैसे- स्त्री जातक की आंखें पतली { मछली के समान } और चमकदार होती हैं। इनके व्यक्तित्व परिचय को देख कर अन्य जातक आकर्षित होते हैं। दिल से {पवित्र } अच्छी होती है, नए जमाने की होते हुए पुरानी परंपराओं के अनुसार श्रेष्ठों का आदर सम्मान करने वाली होती हैं।

ये स्त्रियाँ योन संसर्ग में ज्यादा चिपकी रहती हैं। अगर ये नौकरी करती हैं तो शासन से जुड़े कार्यों का करना ज्यादा पसंद करती हैं और प्रशासनिक कार्य से 50 वर्ष की उम्र में निवृत्ति ले लेती हैं। स्त्री जातक की शादी 23 वर्ष से 26 वर्ष तक के समय में सम्पन्न हो जाता है लेकिन कभी-कभी उनकी शादी जल्दी हो जाती है तो इनका छुटकारा हो जाता है या विधवा हो जाती हैं।


              { *जातक* = वह जीवधारी जिसके जन्म का विचार किया जा रहा हो उसे जातक कहते हैं। } 


प्राचीन ऋषि मुनियो आचार्यों के अनुसार अश्विनी नक्षत्र ( Ashwini Nakshatra ) 

नक्षत्र (Ashwini Nakshatra) में उत्पन्न जातक खूबसूरत, अच्छे भाग्य वाला, सम्पूर्ण कार्यों में कुशल, किसी भी निर्णय से पहले सुनने और समझने वाला, कपड़ों और आभूषणों से सम्पूर्ण, स्त्रियॉं को अपनी ओर खींचने वाले, अनुसंधान होता है।  — ऋषि नारद 

यदि जातक राज्य संबंधी कार्यों में है तो ऐसे जातक से शासन बेहद प्रसन्न रहता है। यदि जातक मजदूर वर्ग का होता है तो यह अपने से ऊंचे स्तर के लोगों से संबंध बनाना पसंद करता है। जातक सम्मान करने वाला होता है, भयहीन, वैद्य { जड़ी-बूटी } संबंधित चिकित्सक बनना पसंद करता है। —- ऋषि पराशर 

अश्विनी नक्षत्र में चन्द्र का प्रभाव आनंदमय, दिखावटी सभ्य व्यवहार और बुद्धिमान, श्रेष्ठता का कार्य करने वाला होगा।—- वराह मिहिर 

चंद्र – अगर अश्विनी नक्षत्र में चंद्रमा है तो जातक शांत, सोने-चांदी से बने आभूषणों का शौक रखने वाला होता है, गाने बजाने, परिवार से स्नेह करने वाला, भगवान को पूजने वाला, समझदार जातक होगा। 

सूर्य- अगर अश्विनी नक्षत्र में सूर्य है तो जातक शान-शौकत से भरपूर्ण, अहंकारी, उल्लंघन करने वाला, हठी, बिजनेस करने वाला, राजनीतिज्ञ, विख्यात और बलवान होने की कामना रखता है। 

लग्न – अगर अश्विनी नक्षत्र में लग्न है तो जातक अच्छी सोच रखने वाला, साहसपूर्ण कार्य करने वाला, यात्राओं को पसंद करने वाला, लोगो को अपनी ओर आकर्षित करने वाला ( चुंबकीय आकर्षण वाला ), निडर होता है। जातक नशा युक्त चीजों का सेवन करने वाला। 


अश्विनी नक्षत्र का चरण फल | Prediction on Ashwini Nakshatra Charan Pada

प्रत्येक नक्षत्र में चार चरण होते है जिसमें एक चरण 3 अंश 20 कला का होता है। नवमांश की तरह होता है जिसका मतलब यह है कि इससे नौवें भाग का फलीभूत मिलता है। सभी चरणों में तीन ग्रहों का प्रभाव होता है जो इस प्रकार है–  राशि स्वामी, नक्षत्र स्वामी, चरण स्वामी। 

अश्विनी नक्षत्र का प्रथम चरण | Prediction on Ashwini Nakshatra First Charan Pada

इस चरण में मंगल, केतु और मंगल का सामर्थ्य होता है। मेष राशि का स्वामी मंगल है, अश्विनी नक्षत्र का स्वामी केतु है और इस चरण का स्वामी भी मंगल है। मेष 00 अंश से 03 अंश तक 20 कला क्षेत्रफल है। जातक के शरीर में होने वाली क्रिया, उग्रता, मन में उत्पन्न भाव का प्रकाशक है। जातक की लंबाई बीच की होती है { न ज्यादा लंबी और न ज्यादा छोटी }, बकरे के आकार का मुख, छोटी भुजा और छोटी नाक, कठोर वाणी, सिकुड़े हुए नयन, दुबला-पतला, शरीर का कोई अंग बेकार होता है। 

अश्विनी नक्षत्र के अच्छे बुरे प्रभाव प्रथम चरण | Ashwini Nakshatra First Charan GOOD BAD Impacts

शारीरिक रूप से सक्रिय होने का भाव, उग्रता, उत्साह बढ़ाना, भावपूर्ण नतीजे का बिना चिंता कार्य है। जातक राजा समान, निडर, सहसपूर्ण कार्य करने वाला, उड़ाई हुई खबर की ओर खींचा हुआ, कम खर्च करने वाला, मन की इच्छाओं में बंधा हुआ, सोचने समझने वाला होता है। 

अश्विनी नक्षत्र का द्वितीय चरण | Prediction on Ashwini Nakshatra Second Charan Pada  

इसमे मंगल, केतु और शुक्र का सामर्थ्य होता है। इसका स्वामी शुक्र होता है। इस चरण में मेष 03 अंश 20 कला क्षेत्रफल से 06 अंश 40 कला क्षेत्रफल तक है। इस चरण में जातक ज्ञानी, चीजों की खोज करने वाला, अच्छे विचारों का प्रकाशक होता है। जातक लेखक, उभरे हुए कंधों वाला, लंबी नाक , हाथ लंबे, सुंदर नेत्रों वाला, मीठी वाणी बोलने वाला, निर्बल योग का होता है। 

अश्विनी नक्षत्र के अच्छे बुरे प्रभाव द्वितीय चरण  | Ashwini Nakshatra Second Charan GOOD BAD Impacts 

जातक ज्ञान प्राप्त करने वाला, नई-नई चीजों की खोज करने वाला, अश्विनी कुमार की तरह हित की भावना, जातक नई बात सोचने और उस बात केपी पूरा करना होता है, जातक भक्ति भाव से जुड़ा हुआ, प्रसन्न और धन दौलत से परिपूर्ण होता है। 

अश्विनी नक्षत्र का तृतीय चरण | Prediction on Ashwini Nakshatra Third Charan Pada 

इस चरण में मंगल, केतु और बुध का सामर्थ्य होता है। इसका स्वामी बुध होता है। इसमें मेष 06 अंश 40 कला क्षेत्रफल से 10|00 अंश तक होता है। यह मनोरंजन, अपने पैर चारों दिशाओं में फैलाने वाला, कार्यों को समय से पूरा करने वाला { फुर्तीला }, अपनी व्याप्ति चारो ओर फैलाने वाला प्रकाशक है। जातक काले और घने बालों वाला, नाक की आकृति गोल, नेत्र चमकीले होते हैं, साफ रंग वाला, घुटने और कमर के बीच का भाग पतला, कमर के पीछे का भाग उभरा हुआ होता है।

अश्विनी नक्षत्र के अच्छे बुरे प्रभाव तृतीय चरण  | Ashwini Nakshatra Third Charan GOOD BAD Impacts   

मनोरंजन करने वाला, चीजों को एक दूसरे से लेने और देने वाला, उच्च स्तर की योग्यता ग्रहण , दिमाग से तेज चलने वाला है। जातक ज्ञानी, विद्वान, खाने पीने का शौकीन, भौतिक इक्षाएं रखने वाला, जिद्दी, जान समझ कर बात करने वाला, किसी से न डरने वाला होता है। 

अश्विनी नक्षत्र का चतुर्थ चरण | Prediction on Ashwini Nakshatra Fourth Charan Pada   

इस चरण में मंगल केतु और चंद्र का सामर्थ्य होता है। इस चरण का स्वामी चंद्र है। इसमें मेष 10 अंश 00 कला क्षेत्रफल से 13 अंश 20 कला क्षेत्रफल तक होता है। यह बुद्धिमान, सोचने समझने वाला, दयालुता का प्रकाशक होता है। जातक निडर, छोटे कद वाला, नाटक खेलने वाला, सभी दिशाओं में घूमने वाला, रुक्ष नाखून, कम घने रोम, दुबले पतले शरीर वाला और भाइयों से रहित होता है { जिसका कोई भाई न हो } ।

अश्विनी नक्षत्र के अच्छे बुरे प्रभाव चतुर्थ चरण  | Ashwini Nakshatra Fourth Charan GOOD BAD Impacts     

ज्ञानमूलक मनोव्रट्टी वाला, श्रेष्ठ, तमाम चीजों की जानकारी रखने वाला, भावो के वशीभूत होने वाला होता है। जातक भगवान को पूजने वाला, भगवान से डरने वाला, धर्म को मानने वाला, स्त्रियों से प्यार करने वाला, सदाचारी, अपने गुरु का भक्त होता है। 


अश्विनी नक्षत्र (Ashwini Nakshatra) को वैदिक ज्योतिष आचार्यों ने सूत्र रूप में बताया है लेकिन यह फलित में बहुत ज्यादा बदलाव हुआ है। 

यवनाचार्य

जातक अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में चोर या स्मगलर होता है, द्वितीय चरण में दुर्बल, तृतीय चरण में समृद्धि और सुंदरता पूर्ण तथा चतुर्थ चरण में जातक लंबी उम्र वाला और सुख संपन्न होता है। 

मानसागराचार्य-

जातक अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में राज पाट होता है, द्वितीय चरण में धन संपत्ति से परिपूर्ण होता है, तृतीय चरण में जातक शिक्षित और चतुर्थ चरण में जातक अपने गुरु का भक्त होता है। 


अश्विनी नक्षत्र का चरण ग्रह फल | Ashwini Nakshatra Prediction based on Planets

भारतीय ज्योतिष आचार्यों के मतानुसार सूर्य, बुध और शुक्र की एक दूसरे पर पूरी तरह से अवलोकन ( निगाह ) या चरण दृष्टि भी होती है, क्योंकि सूर्य ग्रह से बुध ग्रह 28 अंश तक और शुक्र ग्रह 48 अंश से ज्यादा दूर नहीं जा सकता है। 


सूर्य – SUN ( सूर्य अश्विनी नक्षत्र मे )

अश्विनी नक्षत्र Ashwini Nakshatra SUN

1. यदि चन्द्र अपनी दृष्टि सूर्य पर डालता है तो जातक दयावान, कृपावान और अन्य सभी जातकों की मदद करने वाला होता है।

2. जब मंगल की दृष्टि सूर्य पर पड़ती है तब जातक निर्दयी, लाल आंखो वाला और जिद्दी होता है।

3. जब गुरु की दृष्टि सूर्य पर पड़ती है तब जातक कोमलचित्त वाला और राजकीय अधिकारों को मानने वाला होता है। 

4. जब शनि की दृष्टि सूर्य पर पड़ती है तब जातक धनहीन हो जाता है और किसी भी कार्य को करने में उसका मन स्थित नही रहता है। 

अश्विनी नक्षत्र मे सूर्य | When Sun is in Ashwini Nakshatra – Prediction

सूर्य का अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल – Ashwini Nakshatra Charan Pad 1

जातक खुद पर विश्वास करने वाला, किसी भी कार्य को करने के लिए उत्साही होता है, जातक शासकीय सभा में ऊंचे पद पर बैठा हुआ, समाज में सबसे अधिक ताकतवर, प्राचीन देवालयों की यात्रा करने वाला, सभी बातों को साफ तरीके से कहने वाला होता है। जातक का अपने जीवनसाथी के साथ अच्छा लगाव होता है, परंतु उसके अंदर घमंड की भावना होने के कारण कुछ परेशानियां होती है- जैसे जातक के द्वारा जन्मा पहला पुत्र परेशानियों में रहता है। लेकिन जातक स्वास्थ्य से अच्छा और फुर्तीला रहता है।

सूर्य का अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल Ashwini Nakshatra Charan Pad 2

इस चरण में जातक कम उम्र में ही काफी उन्नति कर लेता है, परंतु जातक को कानूनी संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। यदि जातक अपने देश से किसी दुसे देश में रहता है तो वह स्वास्थ्य से परेशान, धन से परेशान और अशासकीय सहायता हासिल होती है। जातक के परिवार में एक -दूसरे के साथ विरोध होता है। जातक अपनी मेहनत से धन कमाने वाला परंतु जातक को आंखों में समस्या होती है। 

मतान्तर- 

इस चरण में सूर्य राशि चक्र की प्रदक्षिणा करने के बाद आराम करने की स्थिति में होता है जिसके करनवाश यह जातक को अशुभ फल देता है। सूर्य की निष्क्रियता के असर से जातक गरीब, धनहीन और भिखमंगा भी हो सकता है। 

यदि इस चरण में सूर्य चंद्रमा से जुड़ा हो तो जातक को बुरे प्रभाव देता है। जातक के साथ ऐसे में 8 वर्ष से पूर्व शुभ या अशुभ हो सकता है, जातक की उम्र में भी संदेहयुक्त होता है। इसके लांछन में यदि मंगल का प्रभाव या दृष्टि हो तो जातक को शुभ परिणाम प्राप्त होता है। 

सूर्य का अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल – Ashwini Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक धन संपत्ति से परिपूर्ण तो होता है परंतु समाज में बैठने योग्य नहीं होता, जातक खेती-बाड़ी सम्पन्न होता है, क्योंकि जातक जमीन-जायदाद का बिचौलिया होता है, जातक अच्छी तरह कार्य करने वाला, अपने बल पर अपने व्यवसाय में प्रोन्नति करने वाला, स्वास्थ्य से अच्छा रहता है, परंतु जातक के पीता किसी कानूनी उलझन में धन खर्च करने वाला होता है। 

सूर्य का अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल – Ashwini Nakshatra Charan Pad 4

जातक अध्यात्म का ज्ञान रखने वाला, धार्मिक ज्ञानी, खेती-बाड़ी से परिपूर्ण, अपने घर-परिवार के सदस्यों से प्रेम करने वाला, किसी पार्टी का नेता या सेना अध्यक्ष हो सकता है, जातक धनहीन होगा परंतु समाज में पूज्यनिय होगा, लंबी यात्राएं पसंद करने वाला, दान देने वाला, जरूरतमन्द व्यक्तियों को भोजन कराने वाला होता है। आगर सूर्य 8 से 10 अंश का होता है तो जातक को ज्यादा अच्छा नतीजा प्राप्त होता है। 


चन्द्र – MOON ( अश्विनी नक्षत्र में चन्द्र )

अश्विनी नक्षत्र Ashwini Nakshatra Moon

1. यदि सूर्य ग्रह की दृष्टि चंद्र पर हो तो जातक ऐसे लोगो की मदद करने में आगे रहता है जो वास्तव में मदद के लायक होते हैं। लेकिन उसकी सोच निर्दयी होगी। जातक सरकार की मदद से आगे बढ्ने का प्रयास करेगा। 

2. यदि मंगल की दृष्टि चंद्र पर हो तो जातक को मुख के किसी भाग { कान या नाक } में समस्या रहेगी और जातक समाज के किसी श्रेणी पर अवलंबित रहेगा। 

3. यदि बुध की दृष्टि चंद्र पर हो तो जातक ख्याति हासिल करेगा और अपने जीवन में चैन का अनुभव करेगा। 

4. यदि गुरु की दृष्टि चंद्र पर हो तो जातक ज्ञानी और दूसरों को ज्ञान देने वाला होता है जिसे हम कह सकते हैं शिक्षक होता है।  

5. यदि शुक्र की दृष्टि चंद्र पर हो तो जातक स्त्रियों के साथ रहना पसंद करेगा और जातक धन संपत्ति से परिपूर्ण होगा। 

6. यदि शनि की दृष्टि चंद्र पर हो तो जातक की सेहत खराब रहेगी, जातक दूसरे व्यक्तियों के साथ खराब व्यवहार करने वाला होगा परंतु जातक अच्छी संतान प्राप्ति के लिए पछताएगा। 

अश्विनी नक्षत्र में चन्द्र | When Moon is in Ashwini Nakshatra – Prediction

अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में चन्द्र का फल – Ashwini Nakshatra Charan Pad 1

इस चरण में जातक दुबला-पतला और नाटे कद वाला, सुंदरता में निखार नहीं होगा, मानसिक तनाव या कफ जन्य जैसे रोग से ग्रसित होगा, कमजोर, व्यभिचारी, प्रेम में कभी सफलता न हासिल करने वाला, निर्दयी, दुष्ट, कपड़ों और आभूषणो का शौकीन, राज्य से लाभ प्राप्त करने वाला, और धन संपत्ति से परिपूर्ण होगा। विद्वानों के सामने अपनी भावना प्रकट करने वाला होता है। अगर लग्न और गुरु दोनों प्रथम चरण में हों तो जातक की उम्र लंबी होती है। 

अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण में चन्द्र का फल – Ashwini Nakshatra Charan Pad 2 

इस चरण में जातक लोगों को अपनी ओर मोहित करने वाला, सुंदर, ताकतवर, अच्छे बोल  { मधुरता भरी वाणी }  बोलने वाला, धन संपत्ति से परिपूर्ण, अच्छे विचारों वाला, अच्छी संतान प्राप्त करने वाला, भगवान पर भरोसा रखने वाला, संगीत सुनने वाला, रूप से निखरता हुआ, लोगों की सेवा करने वाला { डॉक्टर या वैद्य } । मेहमानदारी को पसंद करने वाला और स्त्रियों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला होता है। 

मतान्तर- 

जातक लंबे कट वाला, होसियार, मदिरा-पान को पसंद करने वाला, महिलाओं से परेशान, बड़ा आदमी बनने की इच्छा रखने वाला, स्वार्थी होता है। शुक्र की दृष्टि यदि चंद्रमा पर हो तो जातक भाग्यवान होता है और अपनी संतान के साथ अच्छा जीवन यापन करने वाला होता है। यदि चंद्र पर शनि की दृष्टि होगी तो जातक जलन करने वाला, खुद से अप्रसन्न और दया करने योग्य होता है। स्त्री जातक में चंद्रमा का मिलन मंगल और राहू से हो तो स्त्री 30 वर्ष की उम्र में ही विधवा हो जाती है। 

अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण में चन्द्र का फल– Ashwini Nakshatra Charan Pad 3

इस चरण में जातक गोरे रंग वाला, सुंदर, बहुत मजबूत अंग-प्रत्यंग वाला, अच्छी बाते करने वाला, लोगो को प्रभावित करने वाला, मन से प्रसन्न, बनिया, धन-दौलत, बुद्धि विवेक, सत्य की राह पर चलने वाला, सभी कार्यों को ईमानदारी से करने वाला होता है। ऐसे में कई ऐसे भी जातक होते हैं जो त्वचा रोग से ग्रसित होते हैं या फिर त्वचा रोग विशेषज्ञ होते हैं। 

अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चन्द्र का फल– Ashwini Nakshatra Charan Pad 4 

यदि इस चरण में सूर्य चंद्र का मिलन न हो तो उसकी स्थिति बेहतर रहेगी। इस चरण में जातक की त्वचा रूखी, दुबला-पतला, झुका हुआ, स्त्रियों को पसंद आने वाला, कीर्तिमान, राज्य से सम्मान प्राप्त करने वाला, पुत्री संतान के जन्म से प्रसन्न होने वाला, विश्वास करने वाला होता है। अगर चंद्र 12 से 13 अंश का होता है तो जातक प्रशासनिक सेवा में किसी अधिकारी पड़ पर या शासन में किसी उच्च पद पर होता है। 

प्राचीन धारणाओं के अनुसार यदि देखा जाए तो अश्विनी नक्षत्र के देवता अश्विनी कुमार का मुख्य कार्य चिकित्सा है। इसलिए इस चरण में जातक चिकित्सा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते हैं। अगर लग्न इस चरण में होता है तब भी जातक को वही परिणाम मिलते हैं। 


मंगल – MARS ( अश्विनी नक्षत्र में मंगल )

अश्विनी नक्षत्र Ashwini Nakshatra Mars

1. सूर्य की दृष्टि यदि मंगल पर हो तो जातक अत्यंत प्रिय, शिक्षित व्यक्ति और अपने पूजनीय माता-पिता की आज्ञा का पालन करने वाला होता है। 

2. चंद्र की दृष्टि यदि मंगल पर हो तो जातक अपनी स्त्री को न चाह के दूसरों की स्त्रियों को ज्यादा पसंद करता है। 

3. बुध की दृष्टि यदि मंगल पर हो तो जातक बाजारू स्त्रियों पर आपना धन उढ़ाता है, ऐयासी करता है, किसी भी कार्यक्रम में दिखावा करने के लिए अधिक धन खर्च करने वाला होता है। 

4. गुरु की दृष्टि यदि मंगल पर है तो जातक धन-दौलत, ताकतवर, प्रभुत्व और अपने घर परिवार का मालिक होता है। 

5. शुक्र की दृष्टि यदि मंगल पर हो तो जातक सुख-चैन से खाना पीना नहीं खा पाता है, वह अपना समय स्त्रियों के चक्कर में बर्बाद करने वाला, अपनी गलती के कारण बड़ी मुसीबत में भी पड़ जाता है, परंतु जातक समाज के हित के लिए अच्छे कार्य करना पसंद करता है। 

6. शनि की दृष्टि यदि मंगल पर हो तो जातक अपनी माता की परवरिश, प्रेम से वंचित रहता है और धन-दौलत से निःसृत किया हुआ होता है। 

अश्विनी नक्षत्र में मंगल | When MARS is in Ashwini Nakshatra – Prediction

मंगल का अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक चुस्त-दुरुस्त, अच्छी तरह कार्य करने वाला, साहस वाला, किसी से न डरने वाला, अन्य जातकों को परेशानी देते वाला, हथियार चलाने में माहिर, तनावपूर्ण, अपने कार्य में व्यस्त रहने वाला, लड़ाई-झगड़े में आगे रहे वाला, कुमार्गी, साधुओं से वैर करने वाला, कानून के किसी विभाग में अधिकारी, फोड़े-फुंसी से जुड़ा चिकित्सक होता है। अगर मंगल पाप दृष्टि में है तो जातक गुंडागर्दी करने वाला, स्वेच्छाचारी होता है। अगर ऐसा जातक शासकीय नौकरी में होता है तो इससे सरकार बेहद खुश रहती है। 

मंगल का अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक सुंदर छवि वाला, अपने परिवार के सभी सदस्यों से प्रेम करने वाला,  गुरुओं का आदर करने वाला, मधुर वाणी बोलने वाला, किसी अच्छी नौकरी में, धर्म के हिसाब से चलने वाला, सभी से मित्रता पूर्ण व्यवहार करने वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण होता है। अगर मंगल और शुक्र का मिलन होता है तो जातक को लिंग संबंधी सुख प्राप्त होता है, स्त्री से संबंध बनाने में रुकावट पैदा होती हैं और योग की साधना करने वाला होता है। 

मतान्तर- 

जातक धन हीन होता है, संतान हीन होता है और प्रतिरोध करने वाला होता है। जातक को ऐसे में अग्नि, वाहन दुर्घटना एवं बीमार होने का डर होता है। ऐसे में यदि संभव होगा तो जातक की संतान कन्या के रूप में जन्म लेगी। 

मंगल का अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक का रंग साफ, कुशलता पूर्वक बातचीत करने वाला, गुरुओं का सम्मान करने वाला, संत स्वभाव का होता है, किसी भी कार्य को धैर्य के साथ करने वाला, प्रॉपर्टी या जमीन को बेचने वाला दलाल और जातक जानवरों का चिकित्सक या वैद्य भी होता है। यदि सूर्य की दृष्टि जातक के स्वास्थ्य, धन-दौलत पर है तो जातक सुखी जीवन व्यतीत करेगा।

अगर अनिष्टकारी मंगल पर अनिष्टकारी सूर्य की दृष्टि हो तो मंगल ज्यादा प्रभावशाली हो जाता है। और यदि सूर्य या गुरु की दृष्टि न हो तो जातक की माता का निधन बाल अवस्था में हो जाता है। अतः जातक योग सुख का भरपूर आनंद उठाता है। 

मंगल का अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक शांत स्वभाव का होता है, प्रसन्न मन वाला, सम्मान करने वाला, स्वाभिमान वाला, मित्रता पूर्ण व्यवहार करने वाला, संतुष्ट, कुशलता पूर्वक कार्य करने वाला, वीर, संतानयुक्त, अच्छे-अच्छे आहार खाने वाला होता है। अगर सूर्य, चंद्र और मंगल का मिलन होता है तो जातक सुराज्य होता है। यदि इस चरण में गुरु की दृष्टि हो तो जातक को अपने पिता की संपत्ति प्राप्त होगी। अश्विनी नक्षत्र के 12 से 13 अंश के बीच में जन्म लेने वाला जातक इंजीनियर होता है।  


बुध – MERCURY ( अश्विनी नक्षत्र में बुध )

अश्विनी नक्षत्र Ashwini Nakshatra Mercury

1. चंद्र की दृष्टि यदि बुध पर हो तो जातक गाने-बजाने और कला से स्नेह करने वाला होता है और इसी से अपने जीवन को आगे बढ़ाता है। ऐसे में जातक को गाड़ी, घर, और स्त्री आदि का सुख मिलेगा। 

2. मंगल की दृष्टि यदि बुध पर हो तो जातक शासन कर्ता के करीब होने से सभी तरह की सुविधाएं प्राप्त करेगा। 

3. गुरु की दृष्टि यदि बुध पर हो तो जातक घर-परिवार, संतान और धन-संपत्ति से परिपूर्ण होगा। 

4. शनि की दृष्टि यदि बुध पर हो तो जातक समाज के हित में कार्य करने वाला, लंबे कद वाला, लेकिन अपने परिवार के सदस्यों से निष्पादन नहीं होगा।  

अश्विनी नक्षत्र में बुध | When MERCURY is in Ashwini Nakshatra – Prediction 

बुध का अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक शारीरिक रूप से कमजोर, फालतू की बाते करने वाला, लोगों से जलने वाला, चालबाज, मित्रों के हित में न रहने वाला, विद्वेषक, सजा काटने वाला, त्वचा संबंधी रोग से ग्रसित, चालक, किसी के अधीन रहने वाला, जायकेदार भोजन करने वाला, दारू और स्त्रियों का शौकीन होता है। 

बुध का अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक सुन्दर दिखने वाला, भाग्यवान, वैभवशाली, ईमानदार, बड़े बुजुर्गों और अपने गुरुओं का आदर-सम्मान करने वाला, निष्ठा रखने वाला, पुराने रीत-रीबाजों पर यकीन करने वाला, साहित्यिक रचना से लाभ प्राप्त करने वाला, परंपरागत चिकित्सा पर भरोषा करने वाला होता है। ऐसे में जातक 30 वर्ष के बाद सन्यासी का रूप धारण कर सकता है। 

बुध का अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक अच्छे विचार वाला, दमकती त्वचा, ऐश्वर्यवान होता है, लोगों के हित में अच्छा सोचने वाला, एक अच्छा चिकित्सक, वैध्य की तरह जड़ी-बूटियों के बारे में जानने वाला, दयावान, चिकित्सा के क्षेत्र में नई नई खोज करने वाला, प्रसन्न रहता है। अगर बुध नीच या उग्र ग्रहों के साथ मिलन करता है तो जातक ऐश्वर्य हीन, फालतू की बकवास करने वाला और कई रोगों से ग्रसित होता है।

बुध का अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक धनहीन, चरित्रहीन, बिजनेस में असफल, प्यार-मोहब्बत में फसा हुआ, अवैध संतान को जन्म देने वाला, बुरे कर्म करने वाला, निर्दयी, बुरे स्वभाव का होता है। अगर बुध की दृष्टि शुभ हो तो जातक का विवाह, नगर का सभासद और लेखक बन सकता है।


गुरु – JUPITER ( अश्विनी नक्षत्र में गुरु )

अश्विनी नक्षत्र Ashwini Nakshatra Jupiter

1. सूर्य की दृष्टि यदि गुरु पर हो तो जातक पुण्यात्मा, नीति विरुद्ध कार्यों से दूर, अन्य जातकों के हित में अच्छा करने वाला होता है। 

2. चंद्र की दृष्टि यदि गुरु पर हो तो जातक धन-दौलत और ख्याति प्राप्त करने वाला होता है। 

3. मंगल की दृष्टि यदि गुरु पर हो तो जातक दूसरों की असफलता का कारण बनने वाला, शासकीय कार्यों से लाभ अर्जित करने वाला और हिंसक कार्य करने वाला होता है। 

4. बुध की दृष्टि यदि गुरु पर हो तो जातक लोगों के साथ बुरा व्यवहार करने वाला, बिना वजह लड़ाई-झगड़ा करने वाला होता है। 

5. शुक्र की दृष्टि यदि गुरु पर हो तो जातक स्त्रियों के सजावट की सामग्री से जुड़ा व्यापार करता है और स्त्रियों के स्नेह में डूबा रहता है। 

6. शनि की दृष्टि यदि गुरु पर हो तो जातक अपने घर परिवार में अशांति फैलाने वाला और निर्दयी होता है। 

अश्विनी नक्षत्र में गुरु | When JUPITER is in Ashwini Nakshatra – Prediction 

गुरु का अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक को मुख से जुड़ा रोग जैसे कैंसर आदि, बुरे कर्म करने वाला, बुरी आदतों में का सौकीन, जिस डर का पता नही उससे डरा हुआ, धन दौलत से परिपूर्ण, शासन के अधिकारों पर चलने वाला लेकिन पढ़ा लिखा समझदार होता है। क्योंकि ऐसे जातकों को अपने सम्मान की बहुत फिक्र होती हैं। 

मतान्तर-

जातक धार्मिक पुस्तकों को पढ़ने वाला और मानने वाला, साक्षात्कार के क्षेत्र में जानकार, लोगों का अच्छी बातों से मन जीतने वाला, ऐसे में जातक 35 से 36 वर्ष की आयु में विख्यात हो सकता है। जातक अपने इत्रों और रिशतेदारों की मदद के लिए हमेशा उसके साथ खड़ा रहेगा। 

गुरु का अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक शारीरिक स्थिति में मजबूत, लोगों का मन जीत लेने वाला, प्रतापी, सम्मान प्राप्त जातक, पवित्र आत्मा वाला, धर्म को मानने वाला, अच्छे गुणों वाला, सुख संपन्न परिवार वाला, जमीन जायदाद वाला, सुख भोगने वाला, संतान रहित, सभी बातों को अच्छे से सुनकर समझने वाला होता है। ऐसे में कई जातक ऐसे होते होते हैं जो अय्याशी करने वाला, कर्जदार और स्त्री के प्रेम प्रसंग में रहने वाला होता है। 

गुरु का अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक सुंदर मुख आकृति वाला, कोमल शरीर वाला, साफ कपड़े पहनने वाला, आभूषणों का शौकीन, हथियार बाजी में माहिर, पूर्वजों को सम्मान देने वाला, सुंदरता से परे, सबसे अगल विचार रखने वाला होता है। अगर शनि मंगल के साथ मिलन कर रहा है या बुरा है तो जातक को परेशानी, रोगों से ग्रसित, त्रिदोष और नुकसान होता है।

इस चरण में सिर्फ कुछ आधारों पर ही जातक का जीवन काल 16 साल होने से ” राजाधिराज ” योग जो कभी संभव नहीं हो सकता है। 

गुरु का अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक अतिथि बनकर रहना पसंद करता है, मन से प्रसन्न, स्त्रियों का अभिप्रेत, न्याय के साथ रहने वाला, शासन के द्वारा सम्मानित होता है, संतान अच्छे संस्कारों वाली और सट्टेबाजी में लाभ होता है। 


शुक्र – VENUS ( अश्विनी नक्षत्र में शुक्र )

अश्विनी नक्षत्र Ashwini Nakshatra Venus

1. चंद्र की दृष्टि यदि शुक्र पर हो तो जातक उच्च पद की प्राप्ति करता है, लेकिन स्त्रियों के कारण समाज में बदनाम होता है। 

2. मंगल की दृष्टि यदि शुक्र पर हो तो जातक को धन हानि, अपने घर के सदस्यों की मदद नहीं मिलती है तथा पारिवारिक जीवन तनाव पूर्ण रहता है। 

3. गुरु की दृष्टि यदि शुक्र पर हो तो जातक ऐश्वर्य वाला, घर परिवार के साथ सुखमय जीवन व्यतीत करने वाला और संतान एवं धन दौलत से परिपूर्ण होता है। 

4. शनि की दृष्टि यदि शुक्र पर हो तो जातक अपने पूर्वजों की संपत्ति का दिखावा न करने वाला, चोरी और दलाली से धन कमा कर गरीबों में दान करने वाला होता है। 

अश्विनी नक्षत्र में शुक्र| When VENUS is in Ashwini Nakshatra – Prediction

शुक्र का अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक प्रसन्न, मोटे शरीर वाला, लोगों से जलन रखने वाला, बुरे लोगों की संगति रखने वाला, शारीरिक रूप से सभी सुख भोगने वाला, खनिज पढ़ार्थों का संसोधन करने वाला, हवाई जहाज का ड्राइवर परंतु बाजारू स्त्रियों का बहुत सौकीन होता है। ऐसे जातक को किसी राज पाट युक्त व्यक्ति से या जंगलों में रहने वाले डाकुओं से परेशानी हो सकती है। 

शुक्र का अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक सुंदर छवि वाला, लोगों का मन मोहने वाला, रण [ युद्ध ] में विजय हासिल करने वाला, एक अच्छा चिकित्सक या वैद्य, परमात्मा और आत्मा से संबंध रखने वाला, शुद्ध मन वाला, शुशील, साहस रखने वाला, अचानक किसी जगह से धन प्राप्ति करने वाला होता है। ऐसे जातक के सौन्दर्य सजावट से रोजी रोटी चलती है। 

शुक्र का अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक रोग मुक्त होता है, शिक्षित, उत्तम कोटी का विद्वान, तीर्थ यात्राओं पर जाने वाला, धार्मिक विचार रखने वाला, धार्मिक स्थलों पर रहने वाला, नेता या किसी विभाग का अधिकारी, दलाली का काम करने वाला, आभूषणों या वस्त्र का विक्रेता, सुख भोगने वाला होता है। अगर शुक्र का बुरा असर हो तो जातक के किसी अंग में कमी देखने को मिलती है जैसे- लूला-लिगड़ा आदि । 

शुक्र का अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक सुंदर दिखने वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण, कलाकारी में  माहिर, संगीत का रचनाकार, जातक का जीवनसाथी { स्त्री } अच्छे गुणों वाला, अभिमुख होता है। जातक अपने मित्रों के साथ सुख का अनुभव करता है। ऐसे में स्त्री जातक अपने पति का निष्पादन करने वाली और उसे बेहद प्रेम करने वाली होती है।  


शनि – SATURN ( अश्विनी नक्षत्र में शनि )

अश्विनी नक्षत्र Ashwini Nakshatra Saturn

1. सूर्य की दृष्टि यदि शनि पर हो तो जातक जानवरों को रखने वाला और उनके दूध को बेचने वाला होता है।

2. चंद्र की दृष्टि यदि शनि पर हो तो जातक गंदे विचारों वाला, धन हीन और निर्दयी होता है। 

3. मंगल की दृष्टि यदि शनि पर हो तो जातक बढ़ा-चढ़ाकर बात को कहने वाला, दूसरों की मदद करने की वजाह उन्हे परेशान करने वाला होता है। 

4. बुध की दृष्टि यदि शनि पर हो तो जातक बुरे काम करके धन इकट्ठा करने वाला, वैवाहिक जीवन में खुशियों के लिए बेचैन रहने वाला होता है।

5. गुरु की दृष्टि यदि शनि पर हो तो जातक किसी विभाग का बड़ा अधिकारी { ऊंचे पद वाला }, धन-संपत्ति से परिपूर्ण और वैवाहिक जीवन में पत्नी और संतान का सुख भोगने वाला होता है। 

6. शुक्र की दृष्टि यदि शनि पर हो तो जातक परदेश में रहने वाला, लोगों पर प्रभावी न होने वाला और स्त्रियों के साथ संभोग करने का शौकीन होता है। 

अश्विनी नक्षत्र में शनि | When SATURN is in Ashwini Nakshatra – Prediction

शनि का अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक कार्य करने के बाद अफसोस करने वाला, बेरहम, लज्जा न करने वाला, बुरे स्वभाव वाला, ठस बुद्धि वाला, गलत बात बोलने वाला, चुगली करने वाला, ह्रदय का रोगी, त्वचा रोगी, कमजोर शरीर वाला, बचपन में परेशानियों में रहने वाला परंतु बाद में सुखी, प्राचीन कथाएँ पढ़ने का सौकीन होता है। 

शनि का अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक मधुर वाणी बोलने वाला, कमजोर, तसल्ली रखने वाला, उपकार मानने वाला, सबसे अलग मिजाज वाला, समाज के हित में कार्य न करने वाला, वन विभाग या खनिज पढ़ार्थों का व्यवसाय करने वाला, सभी कार्यों से कुशलता पूर्वक करने वाला, परेशानियों में उलझा हुआ, वीरता में परिवर्तन करने वाला होता है। 

शनि का अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक सुख भोगने वाला, व्यवसाय में बढ़ोत्तरी करने वाला, भाग्यवान, कार्यों को नियम पूर्वक करने की निष्ठा रखने वाला, बड़ा बनने की इच्छा रखने वाला परंतु मिजाजी, किसी के आधीन रहने वाला होता है। 

शनि का अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक अपनी और आकर्षित करने वाला, सुंदर नयन वाला, प्रसन्न, धर्म को मानने वाला, पुजारी या लोगो को अच्छे मार्ग पर चलने की सलाह देने वाला, नई-नई चीजों को खोजने वाला होता है।  यदि जातक के जन्म का समय रात्रि में हो तो जातक सर्वाधिक शक्तिशाली होता है।

इस चरण में सूर्य की शुभ दृष्टि पड़ने पर जातक जमीन जायदाद वाला या धनवान कृषक होता है। इस चरण में सूर्य की दृष्टि होने से स्त्री जातक का विवाह नहीं होता है, ऐसे में विवाह यदि हो भी गया तो वह बदकिस्मत होती है। यदि चंद्र की दृष्टि इस चरण में हो तो जातक बुरे स्वभाव वाला और बुरे रंग-रूप वाला होता है। 


राहु – RAHU ( अश्विनी नक्षत्र में राहु )

अश्विनी नक्षत्र में राहु | When RAHU is in Ashwini Nakshatra – Prediction

राहु का अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक ताकतवर, गठीले शरीर वाला, शिक्षित और पिता का सम्मान करने वाला होता है। 

राहु का अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक को ननिहाल पक्ष से परेशानी मिलेगी, मानसिक तनाव, लंबी यात्रा के योग और जातक के द्वारा बनाई गई योजनाओं में बदलाव होता है। 

राहु का अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक कार्य में मन न लगने वाला, गुस्सैल, दिखावा करने वाला और दाम्पत्य जीवन में परेशानियों का सामना करने वाला होता है। 

राहु का अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक न डरने वाला, साहस वाला, अच्छी तरह कार्य करने वाला, पेट से जुड़ी किसी बीमारी का शिकार होता है। सूर्य की दृष्टि यदि इस चरण में हो तो जातक जिम्मेदारी निभाने वाला होता है। ऐसे जातक की सहायता परेशानियों में कोई अनजान व्यक्ति कर सकता है। 

राहु गोचर 20221-2022


केतु – KETU ( अश्विनी नक्षत्र में केतु )

अश्विनी नक्षत्र में केतु | When KETU is in Ashwini Nakshatra – Prediction

केतु का अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक बुद्धिमान, पढ़ाई के क्षेत्र में उन्नति करने वाला, जन साधारण को पसंद आने वाला { मेकेनिकल इंजीनियर } होता है। 

केतु का अश्विनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक मध्यम वर्ग का जीवन यापन करने वाला, स्त्रियों से स्नेह करने वाला, समाज में अच्छी जान- पहचान वाला होता है। 

केतु का अश्विनी नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक समाज में सबके साथ अच्छा व्यवहार बना के रखने वाला, परेशानी में मदद करने वाले लोगों के लिए अच्छा सोचने वाला होता है। 

केतु का अश्विनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक अपने जन्मस्थान को छोड़ कर दूर रहने वाला, अपने परिवार में प्रसन्न रहने वाला, दूसरों के अधीन रहने वाला होता है। कुछ जातकों की उम्र सिर्फ 30 वर्ष ही होती है। 


केतु गोचर 2021-2022


             *जातक* = ज्योतिषीय विचारों से जिस प्राणी का वर्णन किया जाए उसे जातक कहते हैं। 


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