राशि क्या है | 12 राशियों का परिचय और विशेषताएँ

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12 राशियाँ

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राशि का मतलब है समुदाय, समूह, झुंड होता है। नक्षत्रों का समूह ही राशि का मुख्य अर्थ होता है। राशि को अंगेजी भाषा में * साइन * ( SIGN ) या * जोड़ियाक साइन * ( ZODIAC SIGN ) कहा जाता है। इस पूरी दुनियाँ में ज़्यादातर सभी कार्यों में चन्द्र को अधिक श्रेष्टता दी जाती है। हमारे भारत देश में दिन प्रतिदिन के होने वाले सभी कार्यों में चन्द्र का ही इस्तेमाल किया जाता है। इसी प्रकार पश्चिमी देशों में ज़्यादातर कार्यों में सूर्य को अत्यंत प्रिय माना जाता है।

नोट- हिंदुस्तान में जन्मी ज्योतिष पद्धति चन्द्र पर पद्धति होती है और पश्चिमी देशों में सूर्य के आधार पर पद्धति होती है। 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के मतानुसार 12 राशियाँ मानव शरीर के अलग-अलग अंगों को भी संबोधित करती हैं। इसी प्रकार मानव शरीर में पाए जाने वाले मस्तिष्क के चार मुख्य भाग होता है और इस सब के तीन – तीन  उपभागों पर 12 राशियों का प्रतिनिधित्व होता है। जिस जगह पर व्यक्ति खड़ा होता है उस जगह को उसका केंद्र बिन्दु माना जाता है और उसके मस्तिष्क के ठीक ऊपर जो आकाशीय बिन्दु ठहरा होता है उसे शिरोबिंदु या स्वस्तिक बिन्दु कहते हैं, इस बिन्दु को अंग्रेजी भाषा में जेनिथ ( ZENITH ) कहा जाता है।  



ज्योतिष में राशि विचार 

  • वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे भारत देश में चन्द्र की राशि को सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है। पश्चिमी देशों में सबसे ज्यादा सूर्य का उपयोग किया जाता है। ऐसे देश भी हैं जहां चन्द्र और सूर्य दोनों को बराबर महत्वता दी जाती है। 
  • हिन्दू ज्योतिष में सभी कार्यों  जैसे- शुभ कार्य, गृह प्रवेश, वैवाहिक कार्य आदि के लिए जो मुहूर्त निकाला जाता है उसके लिए भी चन्द्र राशि ( जन्म राशि )  का उपयोग किया जाता है। 
  • इसी तरीके से अनिश्चित देशों अथवा गावों में जातक के प्रचलित नाम से भी फायदे/नुकसान, बिजनेस, नौकरी, कानूनी मुकदमा आदि के लिए उपयोग किया जाता है।  
  • कुंडली मिलान करने के लिए यदि जन्म राशि न पता हो तो विवाह के लिए जातक/जातिका के प्रचलित नाम से कुंडली मिलान करना चाहिए। 

12 राशियों के नाम ( हिन्दी/अंग्रेजी ), स्वामी ग्रह, तत्व और दिशा  

राशि नाम हिन्दी राशि नाम अंग्रेजी  राशि स्वामी ग्रह    राशि तत्व    राशि दिशा
        मेष       Aries        मंगल        राजस           पूर्व
      वृषभ      Taurus    शुक्र      तामस        दक्षिण
      मिथुन       Gemini      बुध      सात्विक        पश्चिम
      कर्क      Cancer      चन्द्र      राजस        उत्तर
      सिंह          Leo      सूर्य       तामस        पूर्व
      कन्या      Virgo        बुध       सात्विक        दक्षिण
      तुला      Libra        शुक्र       राजस        पश्चिम
      वृश्चिक      Scorpio      मंगल       तामस        उत्तर
      धनु    Sagittarius      गुरु       सात्विक        पूर्व
    मकर    Capricorn        शनि      राजस      दक्षिण
      कुंभ      Aquarius      शनि      तामस      पश्चिम
      मीन      Pisces        गुरु     सात्विक      उत्तर

एक राशि 30 डिग्री की होती है और एक राशि में सवा दो नक्षत्र होते हैं जो की नौ चरण बनाते  हैं। एक नक्षत्र में 4 चरण होते हैं।


राशियों का रूप और पहचान 

ज्योतिष शास्त्र का बखान करने के लिए कई रूप अपनाए जाते हैं जैसे- हस्तरेखा, अंक ज्योतिष, टैरो कार्ड और नाड़ी ज्योतिष आदि। जिसमें सभी राशियों का उपयोग किया जाता है जिस प्रकार ज्योतिष बाताने के लिए अलग-अलग तरीकों का उपयोग किया जाता है ठीक उसी प्रकार राशि को दर्शाने के लिए अलग-अलग रूप/आकृति को बताया गया है जो इस प्रकार है। हिंदुस्तान में राशियों को अंको के द्वारा भी प्रदर्शित किया गाय है जैसे- 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 । ठीक इसी प्रकार पश्चिमी देशों में राशियों को A, B, C, D, E, F, G, H, I, J, K, L दर्शाया गया है। 

मेष राशि

इस राशि को मेढ़ा का स्वरूप दिया गया है। परश्चिमी देशों में इस राशि को सिंघों के रूप में जाना जाता है। इसका वास दिन में जंगल तथा रात में गांव होता है। इसका स्वामित्व मस्तक, खोपड़ी या सिर के ऊपर होता है…………………….. Read More

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वृषभ राशि 

इस राशि का स्वरूप बैल को माना जाता है। इसका रंग सफ़ेद, वर्ण वैश्य होता है। पश्चिमी देशों में इस राशि को बैल के सींगों के द्वारा दर्शाया जाता है। इसका वास दिन में खेत तथा रात में गांव होता है………………….. Read More

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मिथुन राशि 

इस राशि का स्वरूप गदाधारी नर या वीणधारी स्त्री को माना जाता है। पश्चिमी देशों में इस राशि को अपने प्रिय के साथ आलिंगन में बंधे हुए पुरुष और स्त्री को माना जाता है। इसका वास गांव अथवा शहर होता है। इसका स्वामित्व गर्दन से नीचे, दोनों कंधों सहित व्यक्ति हृदय के ऊपरी हिस्सा तक होता है………………… Read More 

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कर्क राशि

इस राशि का स्वरूप केकड़ा माना जाता है। इसका रंग महरून तथा वर्ण विप्र होता है। इसका वास जल में होता है जैसे- नदी, तालाब या समुद्र आदि। इसका स्वामित्व वक्ष, फेफड़े और हृदय का होता है……………………Read More

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सिंह राशि 

इस राशि का स्वरूप सिंह यानि शेर को माना जाता है। इसका रंग सलेटी और वर्ण क्षत्रिय होता है। पश्चिमी देशों में इस राशि को शेर की पुंछ के रूप से जाना जाता है। इसका वास जंगल, पहाड़ी इलाकेऔर गुफा में होता है। यह मांसाहारी होता है। इसका स्वामित्व व्यक्ति के शरीर में हृदय, नाभि और पेट के बीच में होता है………………..Read More

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कन्या राशि 

इस राशि का स्वरूप अनाज व दीपक लिए हुए लड़की को माना जाता है। इसका रंग मिश्रित और वर्ण वैश्य होता है। पश्चिमी देशों में इसे समरूप माना जाता है। इसका वास गहरा जल, गांव अथवा शहर दोनों जगह होता है। इसका स्वामित्व नाभि के नीचे और पेडू के ऊपरी भाग का होता है………………….Read More

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तुला राशि 

इस राशि का स्वरूप तराजू लिए हुए पुरुष होता है। पश्चिमी देशों में इसे सिर्फ तराजू के रूप में माना जाता है। इसका वास मार्केट या न्यायालय आदि में होता है। इसका स्वामित्व पेडू और लिंग के ऊपरी हिस्से का होता है……………… Read More

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वृश्चिक राशि 

इस राशि का स्वरूप बिच्छू होता है। इसका रंग गोरा और वर्ण विप्र होता है। पश्चिमी देशों में इसे डंक वाले बिच्छू के रूप में जाना जाता है। इसका वास चट्टानों के नीचे, पहाड़ी इलाकों और बिल में होता है। इसका स्वामित्व लिंग, प्रजनन अंग, बटक्स स्त्रियों की योनि पर होता है………………..Read More

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धनु राशि

इस राशि का स्वरूप धनुष ताने हुए पुरुष, घोड़े का पिछला हिस्सा होता है। इसका रंग पीला और वर्ण क्षत्रिय होता है। पश्चिमी देशों में इसे तीर के समान जाना जाता है। इसका वास युद्ध स्थल पर होता है। इसका स्वामित्व जांघ पर होता है…………………Read More

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मकर राशि 

इस राशि का स्वरूप हिरण के मुख वाला मगरमच्छ होता है। इसका रंग मिश्रित और वर्ण वैश्य होता है। पश्चिमी देशों में इसे हिरन के रूप में जाना जाता है। यह द्विचर होता है। इनका वास जंगल और जल में होता है। इसका स्वामित्व मानव शरीर के दोनों घुटनों पर होता है……………….Read More  

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कुंभ राशि 

इस राशि का स्वरूप घड़े से पानी बहाता हुआ पुरुष होता है। इसका रंग भूरा और वर्ण शूद्र होता है। पश्चिमी देशों में इसे जल तरंग से बहते हुए जल के रूप में जाना जाता है। इसका वास जंगल में सुखी भूमि, सूखे जलस्थानों में होता है। इसका स्वामित्व पैर की अग्रजंघा पर होता है…………….. Read More

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मीन राशि

इस राशि का स्वरूप सिर व पैर से जुड़ी दो मछलियों का होता है। इसका रंग चमकीला और वर्ण विप्र होता है। इसका वास जल स्थलों में होता है जैसे- समुद्र, नदी, तालाब, सरोवर और सरिता आदि है। इसका स्वामित्व पैर पर होता है……………..Read More  

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12 राशियाँ – रत्न, धातु, अक्षर और स्वभाव  

  राशिराशि रत्न  राशि धातु        राशि नाम अक्षरराशि स्वभाव
    मेष      मूंगा     ताँबा चू, चे, चो, ल, ली, लू, ले, लो, अ         चार 
    वृषभ      हीरा    स्वर्ण  इ, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो       स्थिर
  मिथुन      पन्ना    स्वर्णका, की, कू, घ, ड़, छ, के, को, हा         द्वि
    कर्क    मोती    चांदी   ही, हू हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो         चार
    सिंह  माणिक    स्वर्ण    मा, मी, मु, मे, मो, टा,टी, टू, टे         स्थिर 
  कन्या    पन्ना    स्वर्ण    टो, पा, पी, पु, ष, ण, ठ, पे, पो        द्वि
    तुला    हीरा     स्वर्ण    रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते        चार
  वृश्चिक     मूंगा     तांबा  तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू        स्थिर 
    धनु  पुखराज     स्वर्ण  ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे         द्वि
  मकर    नीलम     लोहाभो,जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी        चार
    कुंभ    नीलम    स्वर्ण  गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा        स्थिर
    मीन  पुखराज    स्वर्ण    दी, दू, दे, दो, झ, चा, ची, थ         द्वि

ज्योतिष में 12 राशियों के नक्षत्र चरण फल

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के मतानुसार सभी राशियों में सवा दो नक्षत्र पाय जाते हैं। जिसके कारण एक राशि में नौ चरण बनते हैं। सभी चरणों का फल कुछ इस प्रकार है। 

अश्वनी और भरणी नक्षत्र के चार-चार चरण होते हैं और कृतिका नक्षत्र का एक चरण होता है।

मेष राशि – अश्विनी चरण फल 

प्रथम चरण- पहला चरण जातक को राजा के समान उच्च कार्यों को करने वाला, बहादुर और समाज के हित में विचार करने वाला बनाता है।

द्वितीय चरण – दूसरा चरण जातक को धन से जुड़े लाभ दिलाता है और जाटक को धनवान बनाने में उसकी मदद करता है।  

तृतीय चरण – तीसरा चरण जातक को शिक्षा के कार्यों में बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है जिससे वह विद्वान बनाता है।

चतुर्थ चरण – चौथा चरण जातक को चोरी-चकारी से जुड़े कार्यों की ओर प्रेरित करता है जिससे यह जातक को चोर या डाकू बनाता है। 

मेष राशि – भरणी चरण फल 

प्रथम चरण-  इस चरण में जन्मे जातक मोटी नाक, घने बालों और चौड़े शरीर वाले होते हैं। ये शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करते हुए अध्यापक या न्यायाधीश बनते हैं। 

द्वितीय चरण –  जातक हिरण के जैसी आखों वाला, मजबूत शरीर वाला, पेट निकला हुआ, ताकतबर भुजाओं वाला, अधिक बोलने वाला, लड़ाई-झगड़ों से डरने वाला होता है। ये अपने से अलग लिंग वाले लोगों की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं। 

तृतीय चरण – इसमें जन्में जातक चालाक प्रवर्ती के, साफ आँखों वाले, बाजारू स्त्री का पति या बोयफ्रेएंड होते हैं। ये लंबे चौड़े शरीर वाले, अपने कार्यों के प्रति घमंडी और अपने बारे में सोचने वाला होता है। 

चतुर्थ चरण – चौथे भाव में जन्म लेने वाले जातक बंदर के समान मुख आकृति वाले होते है। ये गुप्त कार्यों को अंजाम देने वाले, असत्यवादी, हिंसक कार्य करने वाले और दूसरे से अपना फायदा करने वाले होते हैं। 

मेष राशि – कृतिका चरण फल 

प्रथम चरण-  इस चरण में जन्म लेने वाले जातक लंबे शरीर वाले, मौड़े मस्तक, लंबे कान, घोड़े के समान मुख वाले, यात्रा प्रेमी, रोग ग्रस्त, लंबी उम्र जीने वाले और कई उपलब्धियां हासिल करते हैं। 


कृतिका नक्षत्र में तीन चरण, रोहिणी नक्षत्र में चार चरण और मृगशिरा नक्षत्र में 2 चरण होते है। 

वृषभ राशि – कृतिका चरण फल 

द्वितीय चरण-  दूसरा चरण जातक को आसमान आँखों वाला, बुरी नज़र वाला, नीच कार्य करने वाला, समाज के विरुद्ध कार्य करने वाला, दूसरों की बुराई करने वाला और दूसरों के विरोध में खड़ा रहने वाला होता है। 

तृतीय चरण – इस चरण में जन्म लेने वाला जातक लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला, खोपड़ी तिरछी, पवित्र आत्मा, तुच्छ ज्ञानी, बेहतर कार्य, सत्य का साथ देने वाला और असत्य के विरुद्ध रहने वाला होता है। 

चतुर्थ चरण – जातक सुंदर रूप आकृति, लंबी नाक, बड़ी-बढ़ी आंखे, धार्मिक कार्यों पर विश्वास करने वाला, स्थिर, शुद्ध आहार, ह्रदय से साफ परंतु घमंडी, चिंताओं में ग्रसित, परेशान और मानसिक परेशानियों से जूझने वाला होता है।  

वृषभ राशि – रोहणी नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण – इस चरण में जन्म लेने वाले जातक छोटे कद और छोटी आँखों वाले होते हैं। ये गुस्सैल स्वभाव के, दूसरों को हरा कर खुद जीतने वाले, प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में टांग अड़ाकर उसे हड़पने वाले होते हैं।

द्वितीय चरण- जातक बड़े नेत्र, चौड़ा मुख,लंबी और ऊंची नाक, शरीर पर अधिक बाल,  वृहत कमर, बुरी आदत, खुद से बात करने वाला होता है। 

तृतीय चरण-  इस चरण में जातक मधुर भाषी, सुंदर शरीर, हसी-मज़ाक वाला, कार्यों में निपुण, अधिक बातचीत करने वाला होता है। 

चतुर्थ चरण-  इसमें जातक पुत्रहीन, स्त्रियों की ओर आकर्षित होने वाला, लंबी नाक, बढ़ी-बड़ी आखें, लंबे पैर, और चौड़े कंधों वाला होता है।

वृषभ राशि- मृगशिरा नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण- इस चरण में जन्म लेने वाला जातक अच्छे दाँत और आँखों वाला, मोटी नाक, मजबूत नाखून, घमंडी, अधिक बोलने वाला होता है। 

द्वितीय चरण – दूसरे चरण में जातक समाज में पसंद किया जाने वाला, साहस से परिपूर्ण, झगड़ों से दूर, कमजोर शरीर, नशेड़ी, धन बचत करने वाला होता है। 


मृगशिरा नक्षत्र में दो चरण, आर्द्रा नक्षत्र में चार चरण और पुनर्वसु नक्षत्र में 3 चरण होते हैं।

मिथुन राशि – मृगशिरा नक्षत्र चरण फल 

तृतीय चरण – इस चरण में जातक घने बाल, चौड़े कंधे, लंबी नाक, रोमांस से भरा हुआ, अधिक सोच विचार करने वाला, सच बोलने वाला होता है। 

चतुर्थ चरण-  जातक कलश के समान खोपड़ी वाला, धर्म को मानने वाला, बातुनी, कार्यकुशल, हिंसक कार्य करने वाला, महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाला होता है। 

मिथुन राशि – आर्द्रा नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण- इसमें जन्म लेने वाले जातक साधारण शरीर वाले, लंबी और गोल नाक, पतला चहरा, घने बालों से भरी भौ वाला, लोगों को प्रभावित करने वाला होता है। 

द्वितीय चरण- इस चरण में जन्मा जातक पतली भौं वाला, छोटे मुख वाला, चौड़े सीने वाला, सेक्स के लिए दीवाना, आतंकवादी, अच्छा व्यवहार करने वाला होता है। 

तृतीय चरण- जातक भारी चेस्ट, चौड़ी कमर, लंबी और ताकतवर भुजाओं वाला, चौड़ी खोपड़ी, छल करने वाला, दूसरों के मन की बात जानने वाला और तेज दिमाग वाला होता है।

चतुर्थ चरण- चौथे चरण में जातक नशीली आँखों वाला, मजबूत शरीर वाला, लाल होठ, गंदे या पीले दाँत, जुआ खेलने वाला और बुरे कर्म करने वाला होता है।

मिथुन राशि- पुनर्वसु नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण – इसमें जातक गलत बोलने वाला, समान नेत्रों वाला, बड़े और चौड़े सिने वाला,  शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने वाला और मज़ाकिया होता है। 

द्वितीय चरण-  जातक मधुर भाषी, मजबूत शरीर, पतले और तिरछे नयन, मनन करने वाला, कला में निपूर्ण और बिना मेहनत [ऐसे कमाने की इच्छा रखने वाले होते हैं। 

तृतीय चरण- इस चरण में जातक सुंदर शरीर वाला, खेल-कूद में लगाव रखने वाला, विज्ञान का ज्ञान रखने वाला, इस चरण में जन्मे जातकों को धन कमाने की इच्छा और सफलता प्राप्त करने का भूत सवार रहता है। 


पुनर्वसु नक्षत्र में एक चरण, पुष्य में चार चरण और अश्लेषा नक्षत्र में 4 चरण होते हैं। 

कर्क राशि- पुनर्वसु नक्षत्र चरण फल 

चतुर्थ चरण – जातक साफ-सुतरा रहने वाला, पेट बाहर निकला हुआ, बड़े-बड़े नयन, छोटी भुजाओं वाला, अपने प्रिय का ख्याल रखने वाला होता है। 

कर्क राशि- पुष्य नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण- इस चरण में जन्मा जातक सुंदर और चमक वाला, गोल मुख आकृति, लंबी और चौड़ी भुजाएँ, शादी के लिए उतावला, कला के क्षेत्र में निपूर्ण होता है। 

द्वितीय चरण- जातक चमकीले नयन वाला, सुंदर शरीर, मधुर भाषी, स्त्री के समान व्यवहार करने वाला, सच बोलने वाला, विद्वान, आलसी और लोगों को प्रभावित करने वाला होता है। 

तृतीय चरण- इसमें जातक श्याम वर्णी, मोटे शरीर वाला, पतली और तिरछी भौ वाला, पतली आँख और नाक वाला, सुख भोग प्राप्त करने वाला, भाग्यवान, जातवादी और लोगों की मदद करने वाला होता है। 

चतुर्थ चरण-  जातक लंबी गर्दन और शरीर वाला, लंबी और मजबूत भुजाओं वाला, लोगों की सेवा करने वाला, कमबुद्धि वाला, बुरे कर्म करने वाला और सहन करने की क्षमता न रखने वाला होता है। 

कर्क राशि – अश्लेषा नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण – जातक इस चरण में जन्म लेता है तो वह संतान हीन होता है, जिसके कारण संतान प्राप्ति की इच्छा अधिक रहती है। 

द्वितीय चरण- इसमें जातक दूसरों के नीचे कार्य करने वाला यानि दूसरों के काम से खुद का भरण-पोषण करने वाला होता है। 

तृतीय चरण- तीसरे चरण में जन्म लेने वाला जातक रोगों से ग्रसित होता है, जिसके कारण उसे कुछ न कुछ शारीरिक परेशानियाँ होती रहती हैं। 

चतुर्थ चरण-  चौथा चरण जातक को सौभाग्यशाली बनाता है जिससे वह अपने कार्यों में कुशलता पूर्वक सफलता प्राप्त करता है। 


मघा नक्षत्र और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में चार चरण, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में एक चरण होता है।

सिंह राशि – मघा नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण – इस चरण में जन्म लेने वाला जातक यवनाचार्य के अनुसार पुत्रहीन होता है, और वह पुत्र प्राप्ति की इच्छा अधिक रखने वाला भी होता है। 

द्वितीय चरण- दूसरा चरण जातक को पुत्रवान बनाता है जिससे वह संतान पक्ष से सुख का अनुभव करता है और पुत्र से उसे आर्थिक मदद भी मिलती है। 

तृतीय चरण- तीसरा चरण जातक को रोगी बनाता है जिससे वह जीवन में रोगों के कारण मुसीबतों का सामना करता है। 

चतुर्थ चरण- चौथा चरण जातक को बुद्धिमान बनाता है जिससे वह शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करता है और ज्ञान को प्राप्त करता है। 

सिंह राशि – पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण-  मानसागराचार्य के अनुसार इस चरण में जन्म लेने वाला जातक अपने सामाजिक कार्यों को स्वंम करने वाला होता है। 

द्वितीय चरण- दूसरे चरण में जातक अपने माता-पिता की सेवा करने वाला और उनके प्रति अच्छे विचार रखने वाला होता है। 

तृतीय चरण- तीसरे चरण में जातक राजश्री होता है, जिसके कारण वह राजा के समान कार्य करने की इच्छा रखने वाला होता है।  

चतुर्थ चरण- मानसागराचार्य के अनुसार यह चरण जातक को धनवान बनाता है जिससे वह अपने जीवन में सभी जरूरतों को पूरा करते हुए सुख भोगता है। 

सिंह राशि – उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण – यावनाचार्य के माध्यान से इस चरण में जन्मा जातक पंडित या पंडित के स्वभाव का होता है जिससे वह धार्मिक कार्यों में अपना समय ज्यादा देता है।  


उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में तीन चरण, हस्त नक्षत्र में चार चरण और चित्रा नक्षत्र में दो चरण होते हैं।

कन्या राशि- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र चरण फल 

द्वितीय चरण- यावनाचार्य जी के अनुसार इस चरण में जन्म लेने वाला जातक राजा के सामना कार्य करने वाला या जनता के बारे में अच्छा सोचने वाला होता है। 

तृतीय चरण- इस चरण में जन्मा जातक अपने कार्यों में सफलता प्राप्त करता है, जिससे वह अपने जीवन में एक सफल व्यक्ति बन पाता है। 

चतुर्थ चरण- चौथा चरण जातक को धर्म को मानने वाला बनाता है जो उसे धार्मिक गुरु बनाने में भी मददगार साबित होता है। 

कन्या राशि – हस्त नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण- यावनाचार्य जी के अनुसार यह चरण जातक को विवादी मामलों से बचाने में मददगार बनाता है जिससे वह शूरवीर भी कहलाता है। 

द्वितीय चरण- यह चरण जातक को रोगों से ग्रस्त बनाता है, जिससे जातक जीवन भर रोगों से लड़ता रहता है। 

तृतीय चरण- इस चरण में जन्म लेने वाल जातक धन धान्य से परिपूर्ण होता है, जिससे वह समाज की सेवा करता है और अपना जीवन सुखमय व्यतीत करता है। 

चतुर्थ चरण- यह चरण जातक को श्रीमान बनाता है, जो समाज में पूज्यनीय होता है। 

कन्या राशि – चित्रा नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण- मानसागराचार्य के अनुसार इस चरण में जन्म लेने वाला जातक सर्व कार्यकुशल होता है, जिससे वह अपने जीवन में सभी कार्यों को सफलता पूर्वक करके आगे बढ़ने में सक्षम रहता है। 

द्वितीय चरण- यह चरण जातक को बहादुर बनाता है जिससे वह अपने माता-पिता और गुरुओं की सेवा/सम्मान करते हुए आगे बढ़ता है।  


चित्रा नक्षत्र के दो चरण, स्वाती नक्षत्र के चार चरण और विशाखा नक्षत्र के तीन चरण होते हैं।

तुला राशि- चित्रा नक्षत्र चरण फल 

तृतीय चरण- यह चरण जातक को धन का भोगी बनाता है जिससे वह अपने जीवन में धन अर्जित करने में सक्षम रहता है। 

चतुर्थ चरण- यह चरण जातक के लिए सबसे ज्यादा अच्छा होता है क्योंकि यह चरण जातक को धनेश्वर बनाता है। जो जातक को जमीदार भी बना सकता है। 

तुला राशि- स्वाति नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण-  मानसागराचार्य के माध्यम से यह चरण जातक को धन हीन बनाता है जिससे जातक को अपने जीवन में जरूरतें पूरी करने में असमर्थ रहता है। 

द्वितीय चरण-  यह चरण जातक को शारीरिक अंग में कमी या गूंगा बनाता है। जिससे जातक का समाज में अच्छा आकर्षण नही रह पाता है। 

तृतीय चरण- तीसरा चरण जातक को कर्मशील बनाता है, जो जातक के लिए बहुत जरूरी भी होता है। 

चतुर्थ चरण- यह चरण जातक को स्त्रियॉं के करीब रखने वाला होता है, जिससे उनका आकर्षण स्त्रियों के लिए ज्यादा रहता है। 

तुला राशि – विशाखा नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण- यावनाचार्य के अनुसार इस चरण में जन्म लेने वाला जातक अपने कल्याणकारी कार्यों के प्रति हठी होता है, क्योंकि वह अपने कार्यों को अधूरा नही छोड़ता है। 

द्वितीय चरण- यह चरण जातक को सकारात्मक विचारो और गुणों से परिपूर्ण बनाता है। जिससे वह समाज में सबसे अच्छा बताया जाता है। 

तृतीय चरण – इस चरण में जन्म लेने वाला जातक धन संपत्ति से परिपूर्ण होता है, जो उसे अपने जीवन में सुख का आनंद दिलाता है। 


विशाखा नक्षत्र का एक चरण, अनुराधा के चार और जेष्ठा नक्षत्र के भी चार चरण होते हैं।

वृश्चिक राशि – विशाखा नक्षत्र चरण फल 

चतुर्थ चरण- चौथे चरण में जन्म लेने वाला जातक स्त्रियों के प्रति आकर्षित होने वाला होता है। जो उसे स्त्री प्रेम से रत रखता है।

वृश्चिक राशि – अनुराधा नक्षत्र चरण फल

प्रथम चरण- यवनाचार्य जी के अनुसार पहला चरण जातक को खरे स्वभाव वाला बनाता है जिससे व्यक्ति हमेशा लोगों से अकड़ भरी बा करता है। 

द्वितीय चरण- यह चरण जातक को धार्मिक बनाता है जिससे जातक धर्म के कार्यों में अपना ज्यादा लगाव रखता है। और ईश्वर पर विश्वास रखता है। 

तृतीय चरण- तीसरा चरण जातक को लंबी उम्र वाला बनाता है जिससे जातक इस दुनिया में रहकर अपनी जिंदगी का मजा लंबे समय तक ले पाता है। 

चतुर्थ चरण – इस चरण में जन्म लेने वाला जातक चरित्रहीन होता है क्योंकि यह जातक को किसी एक का होने से संतुष्ट नही करता इसलिए जातक कई लोगों से अपने संबंध बनाता है। 

वृश्चिक राशि – ज्येष्ठा नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण- मानसागराचार्य के माध्यम से यह चरण जातक को धन-धान्य से परिपूर्ण बनाकर उसे जीवन में पड़ने वाली जरूरतों में मदद करता है। 

द्वितीय चरण– इस चरण में जन्मा जातक शिक्षित और समझदार होता है जिससे समाज में वह प्रचलित होता है और उसे विद्वान बताया जाता है। 

तृतीय चरण- तीसरा चरण जातक को राजमान्य बनाता है, क्योंकि इस चरण में जातक राजा के समान कार्य करने वाला आबंता है। 

चतुर्थ चरण-  यह चरण जातक को कीर्तिमान व सुख्यात बनाता है जिससे वह अपने जीवन में सुखो का भोग कर पाने में सक्षम बन जाता है। 


मूल नक्षत्र और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में चार-चार चरण, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में एक चरण होता है।

धनु राशि – मूल नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण- यवनाचार्य के मतानुसार इस चरण में जन्म लेने वाला जातक मौज-मस्ती करने वाला होता है, क्योंकि यह जातक को खुशहाल जीवन जीने में मदद करता है। 

द्वितीय चरण- दूसरे चरण में जन्म लेने वाला जातक त्याग करने वाला होता है, क्योंकि यह जातक को बुरे कार्यों को अपने जीवन से त्याग करने वाला बनाता है। 

तृतीय चरण- यह चरण जातक को अच्छे और समय पर साथ देने वाले मित्रो का चयन करने वाला बनाता है, जिससे जातक को बुरे समय में अपने मित्रों का साथ मिलता है। 

चतुर्थ चरण-  चौथा चरण जातक राजा के समान बनाता है, जो जातक को राजा के समाज जनता के हिट में सोचते हुए कार्य कराता है। 

धनु राशि- पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण- मानसागराचार्य के मतानुसार इस चरण में जन्म लेने वाला जातक क्रोधी होता है जिसके कारण वह छोटी से बात पर गुस्सा करने वाला बन जाता है। 

द्वितीय चरण- इस चरण में जन्म लेने वाला जातक पुत्रवान होता है क्योंकि इसके कारण ही उसे पुत्र की प्राप्ति होती है। 

तृतीय चरण- तीसरा चरण जातक को कामुक बनाता है, जिससे उसे कार्यों में मेहनत करके आगे बढ़ना ही अच्छा लगता है। 

चतुर्थ चरण-  चौथा चरण जातक के लिए धनवान होता है क्योंकि इस चरण में जातक धन नय-नय श्रोतों से कमाने वाला बनता है। 

धनु राशि – उत्तराषाढ़ा नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण- पहला चरण जातक के लिए रक्त विकार होता है क्योंकि इस चरण में जन्म लेने वाले जातकों को रक्त से संबंधित समस्याएँ होती है। 


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में तीन चरण, श्रावण नक्षत्र में चार चरण और धनिष्ठा नक्षत्र में दो चरण होते हैं।

मकर राशि – उत्तराषाढ़ा नक्षत्र चरण फल 

द्वितीय चरण- दूसरा चरण जातक को अंगहीन बनता है, क्योंकि इस चरण में जन्म लेने वाला जातक किसी न किसी अंग से कम होता है। 

तृतीय चरण- इस चरण में जन्म लेने वाले जातक स्वाभिमानी होते हैं क्योंकि ये अपनी इज्जत का ज्यादा ख्याल रखते हैं। 

चतुर्थ चरण-  चौथे चरण में जन्म लेने वाले जातक धार्मिक होते हैं, क्योंकि ये धर्म के कार्यों में अधिक लगाव रखते हैं। 

मकर राशि – श्रवण नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण- मानसागराचार्य जी के मतानुसार पहले चरण में जन्म लेने वाले जातक स्त्रीगामी होते हैं, क्योंकि जातक स्त्रियों से ज्यादा लगाव रखता है। 

द्वितीय चरण- इस चरण में जन्मा जातक देवंश होता है,क्योंकि जातक देवों के समान साफ मन और लोगों का अच्छा चाहने वाला होता है। 

तृतीय चरण- तीसरे चरण में जन्म लेने वाले जातक पुत्रवान होते हैं, क्योंकि जातक को इस चरण के कारण पुत्र की प्राप्ति होती है। 

चतुर्थ चरण- इस चरण में जन्म लेने वाले जातक उत्तम स्त्री वाले होते हैं, जो जातक को जीवन यापन के लिए बेहद जरूरी होता है। 

मकर राशि – धनिष्ठा नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण- इस चरण में जन्म लेने वाले जातक आक्रामक होते हैं, सुंदर शरीर वाले, गो मस्तक और शक्तिशाली होते हैं।

द्वितीय चरण- दूसरा चरण जातक को गंभीर बनाता है जिससे जातक अपने सभी कार्यों में गंभीरता से कार्य करता है।


घनिष्ठा नक्षत्र में दो चरण, शतभीषा नक्षत्र में चार चरण और पूर्वाभाद्रपद में तीन चरण होते हैं।

कुंभ राशि- धनिष्ठा नक्षत्र चरण फल 

तृतीय चरण-  यवनाचार्य के मतानुसार तीसरे चरण में जन्म लेने वाला जातक समाज के हित में विचार करने वाला, वैवाहिक सुख का अनुभव करने वाले होते हैं।

चतुर्थ चरण-  मानसागराचार्य के अनुसार इस चरण में जन्मा जातक अच्छे लक्षणो वाला होता है, इससे वह अपने जीवन में बेहतर करने का प्रयास करते हैं। 

कुंभ राशि- शतभीषा नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण-  इस चरण में जन्म लेने वाला जातक सुंदर शरीर वाला, मधुर भाषी, कार्यों में कुशल और समाज में अच्छा वक्ता भी होता है। 

द्वितीय चरण- दूसरे चरण में जातक बातों को बेहतर तरीके से समझने वाला, समाज में अच्छा व्यवहार बनाए रखने वाला, कार्यों के प्रति गंभीर रहता है। 

तृतीय चरण- यह चरण जातक को कटु वाणी बोलने वाला, गोरा रंग, मजबूत शरीर वाला, घने और मोटे बाल होते हैं। 

चतुर्थ चरण-  यवनाचार्य के मतानुसार इस चरण में जन्म लेने वाला जातक विचार करने की शक्ति, ईमानदार, संवेदनशील और दयालु अच्छी होती है।

कुंभ राशि- पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण- यवनाचार्य के अनुसार इस चरण में जन्म लेने वाला जातक बहादुर होता है जिससे वह अपने जीवन में समय आने पर वीरता/बहादुरपन दिखाता है। 

द्वितीय चरण- इस चरण में जन्म लेने वाला जातक ज्ञानी होता है, जिससे वह समाज में अपने ज्ञान का प्रसारण करता है। 

तृतीय चरण- तीसरे चरण में जन्म लेने वाला जातक विकासशील होता है, जिससे वह अपने साथ-साथ अपने नगर/गाँव/शहर का भी विकास करता है। 


पूर्व भद्रपद नक्षत्र में एक चरण, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में चार-चार चरण होते हैं।

मीन राशि- पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र चरण फल

चतुर्थ चरण- इस चरण में जन्म लेने वाला जातक इंद्रिय सुखभोग की इच्छा रखने वाला होता है। जिससे वह अपने जीवन में सुख भोगता है। 

मीन राशि – उत्तराभाद्रपद नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण – इस चरण में जन्म लेने वाला जातक राजा के समान कार्य करने वाला क्योंकि यह समाज और लोगों के हित में अच्छा विचार करने वाला होता है। 

द्वितीय चरण – मानसागराचार्य के मतानुसार इस चरण में जन्म लेने वाला जातक चोरी करने वाला होता है, जो गलत कार्य करके अपना भरण  पोषण करते हैं।

तृतीय चरण – इस चरण में जन्म लेने वाला जातक पुत्रवान होता है इससे जातक को जरूरत के समय पुत्र की प्राप्ति हो जाती है।

चतुर्थ चरण – यवनाचार्य के अनुसार इस चरण में जन्म लेने वाला जातक सुखमय जीवन यापन करने वाला होता है। 

मीन राशि – रेवती नक्षत्र चरण फल 

प्रथम चरण- यवनाचार्य के अनुसार इस चरण में जन्म लेने वाला जातक बुद्धिमान होता है जिससे वह समाज में अपने साथ-साथ दूसरों का भी ज्ञान बढ़ाना चाहता है। 

द्वितीय चरण- इस चरण में जन्मा जातक चोर/डाकू होता है, जिससे वह सिर्फ लोगों का नुकसान करके अपना जीवनयापन करने वाला होता है। 

तृतीय चरण- तीसरे चरण में जन्म लेने वाला जातक कानूनी विवादों में सफलता प्राप्त करने वाला होता है, जिससे वह कोर्ट-कचहरी में ज्यादा चक्कर नही लगाता है। 

चतुर्थ चरण- यह चरण जातक को धनवान तो बनाता है लेकिन घर की उलझनों में फसा रहता है। जिससे वह तनाव पूर्ण जीवन यापन करता है।