पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र फल लाभ हानि उपाय विशेषताएँ। Purva Ashadha Nakshatra

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पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र | Purva Ashadha Nakshatra

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का राशि चक्र में 253 डिग्री 20 अंश से 266 डिग्री 40 अंश तक विस्तार वाला क्षेत्रफल होता है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र को अरब मंजिल में ” अल ना’ म ” [ घास चरते हुए जानवर ] , ” ग्रीक में ” साजिटारी ” और चीनी सियु मे ” की ” के नाम से जाना जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूर्वाषाढ़ा का मूल अर्थ – पूर्व मतलब पहले और आषाढ़ा का मतलब जो जीता न गया हो या फिर अशांत होता है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चार तारे होते हैं जो हाथी के दातों के समान प्रतीत होते हैं। 

कुछ विद्वानों का मत है की यह हाथी की सूंड के समान मानते हैं। इसके नियामक देवता जल को माना गया है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के देवता अपः स्वामी गृह शुक्र और राशि धनु जो 13 डिग्री 20 अंश से 26 डिग्री 40 अंश तक के विस्तार वाले क्षेत्रफल में होती है। आकाशीय पिंडों के अध्यन से पता चलता है की यह 20 व उग्र संज्ञक नक्षत्र कहलाता है। यह अशुभ, नुकसानदायक, रजोगुणी स्त्री नक्षत्र होता है। इसकी जाति ब्राह्मण, योनि वानर, योनि वैर छाग, मनुष्य गण, नाड़ी मध्य होती है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र को पूर्व दिशा का स्वामित्व प्राप्त है। 

यह अपनी आकृति दो तारो के समूह से बनाता है जिसके कारण इसके दो तारे माने जाते हैं। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का मूल अर्थ जल्द विजय प्राप्त करना या पराजित होना होता है। इसके देवता संस्कृत भाषा में अप तथा संस्कृत शब्द के बहुवचन में जल अथवा पानी के नाम से जाना जाता है। ब्रह्मांड के रचने में पाँच तत्वों [ जल,  मन, आकाश, वायु और आग ] को सबसे महत्व माना गया है जिसमें जल को पहला तत्व बताया गया है। जल को ज्योतिषीय मतों अनुसार जलो के नाम से भी जाना जाता है।



पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र की पौराणिक कहानी । Purva Ashadha Nakshatra mythological story 

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के देवता अप यानि पानी हैं। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र की कथा के अनुसार यदि देखा जाए तो इस संसार में जल के बिना कुछ नही है क्योंकि प्रकृति की हरियाली मनुष्यों का जीवन तथा वनस्पति सब जल से ही जीवित हैं। इसीलिए जल को प्रकृति का जन्मदाता भी कहा जाता है। जल ही जीवन है क्योंकि जल को प्रकृति की सबसे शक्तिशाली शक्तियों में से एक माना गया है।

देवता अप यानि जल की दो संतान हैं। जिनके नाम वरुण और नपत है जिसमें नपट नदी अथवा झील के देवता और वरुण समुद्र के रक्षक और वारीश के देवता माने जाते हैं। हिन्दू धर्म के अनुसार गंगा नदी के जल से स्नान करने से पाप प्रभाव और पाप कर्म कम होते हैं साथ ही गंगा स्नान से मानी गई मनोकामनाएँ पूरी होती है।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र की विशेषताएँ । Purva Ashadha Nakshatra Importance

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र युद्ध के लिए सार्वजनिक रूप से की गई राजाज्ञा और विजय का नक्षत्र कहलाता है। इस नक्षत्र में जन्मे जातक को पराजित करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल होता है। जिसके कारण यह नक्षत्र कभी न हारने वाला नक्षत्र भी कहा जाता है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक जातक प्रभावशाली, अधिकारों को प्राप्त करने वाला, दिखावा करने वाला, सबको अपनी ओर भावुक करने वाला और समाज की सेवा करने वाला होता है।

इसके जातकों की प्रारम्भिक शिक्षा भंग होती है। जातक के लिए जल उद्योग, जल यात्रा अथवा विदेश यात्राएं फायदेमंद साबित होती हैं। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक विवाह के बाद चिंतित रहने वाले, वैवाहिक जीवन में परेशानियों का सामना करने वाले, युद्धपोत में जल्दी जीत को प्राप्त करने वाले, जीवन में अपने लक्ष्य तय करने के बाद जल्द ही सफलता को प्राप्त करने का कारक माना जाता  है।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के नाम अक्षर । पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र नामाक्षर

इस नक्षत्र के अनुसार जिस जातक का नाम आता है वह इस नक्षत्र के बताए गए गुण दोषों के समान होगा। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के नामाक्षर कुछ इस प्रकार है-  

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र – प्रथम चरण – भू

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र – द्वितीय चरण –

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र – तृतीय चरण –

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र – चतुर्थ चरण –           


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के उपाय । Purva Ashadha Nakshatra Remedy 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के देवता अप ( जल ) को माना गया है। इस नक्षत्र के अनुसार जल को अमृत के समान माना गया हैं क्योंकि जल के बिना जीवन है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्मे जातको को अशुभ अथवा पाप प्रभावों से बचने के लिए इसके उपाय अथवा उपचार करने चाहिए। क्योंकि जब इस नक्षत्र का अशुभ प्रभाव जातक के ऊपर होता है तो वह बरवादी की ओर बढ़ता है इसीलिए जातक को इसके अशुभ प्रभावों से बचाव के लिए उपाय अवश्य करना चाहिए। इसके बचाव के लिए कुछ उपाय जो इस प्रकार हैं-

  • माता लक्ष्मी या त्रिपुर सुन्दरी की पूजा अर्चना करने से इस नक्षत्र से उत्पन्न होने वाले दोष अथवा पाप प्रभाव कम होने लगते हैं। 
  • पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातक हीरा रत्न धारण कर सकते है।
  • लक्ष्मी सहस्त्रनाम का पाठ करने से भी इसके अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकता है। 
  • यदि जातक कनकधारा स्तोत्र अथवा महालक्ष्मी अष्टक का पाठ नियमित रूप से करता है तो जातक इससे उत्पन्न होने वाले समस्याओं से बाहर निकलने में सफल होता है।
  • पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के अशुभ प्रभावों को कम करके बल प्राप्ति कराने के लिए साफ-सुथरे कपड़े पहने और अपने आकर्षण को दूसरों की अपेक्षा ज्यादा बढ़ाएँ। 
  • यदि जातक खुद के पहनावे अथवा सजने-सवरने पर ज्यादा ध्यान देता है तो वह इसके अशुभ प्रभावों को कम कर सकता है और बल प्रदान कर सकता है। 
  • यदि जातक गुलाबी या फिर नीले रंग के वस्त्रों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करता है तो जातक इसके सकारात्मक प्रभावों को बढ़ा सकता है। 
  • यदि जातक किसी भी कार्य की शुरुआत नक्षत्र दिन में करते हैं तो उन्हे जल्द सफलता प्राप्त करते हैं। 
  • यदि चंद्र गोचर पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में और चन्द्र महीने में हो तब किसी भी कार्य की शुरुआत करने से बेहद उन्नति प्राप्त होती है।
  • पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के महीने, तिथि तथा नक्षत्र के दिन पूजा करने से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। 
  • पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के बीज मंत्र “ ऊँ बं ” का जाप लगभग 27 से 108 बार करने से इसके नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और सकारात्मक प्रभावों में बढ़ोत्तरी होती है।

यदि पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्मे जातक इसके इन उपायों को नही कर सकते हैं तो इसके लिए आपको सबसे आसान और सरल उपाय पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का वैदिक मंत्र होगा। इसके लिए जातक तालाब, झील, कुएं अथवा किसी नदी की पूजा कर सकता है जिससे इसके पाप प्रभाव कम होने लगेंगे। जातक वैदिक मंत्र के जाप के लिए सफेद चंदन, कमल का फूल, धूप, खुश्बू, घी, गुग्गल, शुद्ध घी का दीपक, खीर आदि लेकर होम करते हुए वैदिक मंत्र का जाप करें इससे आपके जीवन में नकारात्मक प्रभाव कम होने लगते हैं और जातक परेशानियों से मुक्त होने लगता है।

यदि ऐसी स्थिति में जातक होम करके वैदिक मंत्र का जाप न कर पाए तो वह सिर्फ वैदिक मंत्र का जाप करले तब भी जातक के जीवन में नकारात्मक्ता दूर होगी। याद रहे वैदिक मंत्र का जाप कम से केएम 108 बार नियमित रूप से करना चाहिए। 

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का वैदिक मंत्र 

ऊँ अपाघमप किल्विषमपत्यामपोरप: ।

अपामार्गत्वमस्मदप: दु:ष्वप्न्यगूंसुव ऊँ अद्भ्योनम: ।।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र फलादेश । पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का फल । Purva Ashadha Nakshatra Prediction

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक सदैव जीत को प्राप्त करने वाले, आजादी से जीवन जीने वाले, घमंडी, लोगों को अपनी ओर प्रभावित करने वाले, मजबूत इच्छा शक्ति वाले, समाज में प्रसिद्धि प्राप्त करने वाले, शिक्षा के क्षेत्र में नियमों का पालन न कर पाने वाले, कम उम्र में सफलता की ओर बढ्ने वाले, अच्छा बोलने वाले, मदद के लिए पास आय जातक को बिना मदद के वापस न जाने देने वाले, भाग्यवान, चालाकी से कार्य करने वाले होते हैं। 

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र युद्ध कला में माहिर बनाने अथवा युद्ध विजेता बनाने वाला होता है। इस नक्षत्र में जातक गुस्सेबाज़ और बहुत तेज होता है। यह नक्षत्र जल से संबन्धित व्यवसाय में जल्द सफलता प्रदान कराता है। जैसे- जलीय उध्योग, समुद्री यात्राएं आदि। यह नक्षत्र जल से संबन्धित नक्षत्र होता है। जातक अपने जीवन में सबसे अच्छा समय अपनी उम्र के इन वर्षों [ 8, 15, 20, 23, 25, 27, 30, 50 में जीता है और ये समय सबसे ज्यादा अच्छा माना जाता है।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के पुरुष जातक | Impact of Purva Ashadha Nakshatra on Male

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के पुरुष जातक लंबे शरीर वाले, सफ़ेद चमकदार दातों वाले, लंबे और गोल कान वाले, चमकदार और आकर्षक नेत्रों वाले, पतली कमर वाले, लंबी भुजाओं वाले होते है। ये अपने व्यक्तित्व को उभारने के लिए निरंतर प्रयास करता दिखाई देता होगा। पुरुष जातक शांत स्वभाव, दयावान, जरूरतमंदों की मदद करने वाला, ईमानदार, दूसरों का भला पहले अपना भला बाद में सोचने वाला, जरूरत पड़ने पर किसी अंजान व्यक्ति से मदद लेने वाला होता है। 

जातक साहसपूर्ण, बहादुर लेकिन समय पर सही निर्णय लेने में असमर्थ, जल्दबाज़ी के कारण गलत रास्ता चुनने वाला, अपने फैसले पर खरा उतरने वाला, अपनी गलती को स्वीकार करने वाला लेकिन किसी की मदद अथवा सलाह न लेने वाला, ईश्वर पर विश्वास करने वाला होता है। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के पुरुष जातक चिकित्सा के क्षेत्र में जल्द सफलता प्राप्त करने वाला होता है लेकिन व्यापार वर्ग के लोगों अपने कार्यस्थल पर कार्य करने वाले लोगों के भरोषे रहने वाले होते है। 

पुरुष जातक 30 से 32 वर्ष की उम्र तक कठिन परिश्रम करने वाला, परेशानियों का सामना करना पड़ता है लेकिन 50 वर्ष के बाद जीवन में सफलता को प्राप्त करने वाला होता है। इस नक्षत्र में जन्मे जातक को माता-पिता से जीवन में उन्नति के लिए मदद नही मिलती है लेकिन भाई-बहनों की मदद से जातक जीवन में उन्नति करने में सफल होता है। जातक व्यापार के मामले में घर से बाहर रहता है। जातक विवाह के लिए परेशान रहता है तमाम रुकाबटों का सामना करता है लेकिन जब विवाह होता है तब वह जल्द सफलता की ओर बढ़ता है क्योंकि जातक की पत्नी समान विचारधारा वाली और सुखी रखने वाली होती है।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के स्त्री जातक | Impact of Purva Ashadha Nakshatra on Female

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के स्त्री जातक खूबसूरत, सुंदर मुखाकृति वाली, रूपवान, गुणवान, पारिवार की शोभा बढ़ाने वाली होती हैं। चमकीले नेत्रों वाली, आकर्षक, लोगों को अपनी ओर मनमोहित करने वाली, छोटी-छोटी बातों में तर्क निकालने वाली, माता-पिता या पति से उम्मीद रखने वाली, भरी शरीर वाली, समस्याओं में भी अपने लक्ष्य कदम से न हटने वाली होती है। ये घरेलू [ पालतू ] जानवरों से बेहद प्यार करने वाली होती हैं जिसमें कुत्ता सबसे प्रिय होता है। रिशतेदारों में पूज्यनिय होने के बाद भी माता-पिता और भाई से संबंध अच्छे नही होते हैं। 

इस नक्षत्र की स्त्रियाँ उच्च शिक्षा, चिकित्सा के क्षेत्र में अच्छी उन्नति करने वाली, धार्मिक स्थानों की देखवाल करने वाली होगी। स्त्री जातक ललित कला में कार्यरत होती हैं। स्त्री जातक पुरुष जातक के समान 32 वर्ष की उम्र तक कठिनाइयों का सामना करने वाली, मुसीबत में रहने वाली लेकिन 50 वर्ष के बाद जीवन में सफलता को प्राप्त करने वाली होती हैं। स्त्री जातक माता-पिता साथ अभद्रतापूर्ण, उनके सहयोग के लिए मना करने वाली, लेकिन विवाह के बाद पति के साथ खुश रहने वाली होती हैं।


प्राचीन ऋषिमुनियों व आचार्यों के अनुसार पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र | Purva Ashadha Nakshatra

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातक जल के समान होते हैं ये जहां भी रहते हैं वहाँ सब अच्छा रहता है लेकिन जब ये दुखी होते हैं तो मानो सूखा पड़ जाता हो और जब सुखी होते हैं तो खूब बरसते हैं। इन जातकों के अंदर स्वाभिमान की भावना कूट-कूट कर भरी होती है। ये अपने कार्यों से बेहद प्रसन्न होते हैं। ऐसे जातकों की पत्नी अच्छे आचरण वाली और व्यवहारी होती है। ये एक से अधिक लोगों से मित्रता करते है लेकिन ऐसे मित्र बनाते हैं जो खुशी में नही बल्कि मुसीबत में साथ देते हैं।————— वराहमिहिर

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातक अपनी इच्छा से कार्य करने वाले, आजादी से जीवन जीने वाले, अपने कार्यों में पूरी तरह मन लगाकर सफल करने वाले होते हैं। इन्हे पानी अति प्रिय होता है जिसके कारण कभी-कभी ये कार्य करते समय बार-बार पानी पीते हैं। जब ये मेहनत का कार्य करते हैं तो इन्हे पसीना बहुत अधिक आता है। ये शराब के लिए भी कभी-कभी लती हो जाते हैं। —————–  नारद

ये जातक जल के रास्ते में यदि कोई सेतु बनाते हैं तो उससे इन्हे लाभ प्राप्त होता है। ये जल के रास्तों से अच्छा लाभ कमाते है। इन्हे जल यात्राएं बेहद प्रिय होती हैं। इस नक्षत्र के जातक  पथकर, सीमाकर, जलीय वस्तु जैसे रेत, शंख, जलीय जीव जन्तु, मछली पालन आदि से अपना जीवन यापन करते हैं।———– पराशर 

चन्द्र

यदि पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में चन्द्र हो तो जातक अहंकारी, कभी न हारने वाला, आजाद, लोगों को जल्द प्रभावित करने वाला, दूसरों पर अपना अधिकार जमाने वाला, किसी से न डरने वाला, बड़ा बनने की इच्छा रखने वाला, जीवन में सर्व सुख भोगने का इच्छुक, दर्शनशास्त्र का ज्ञाता होता है। ये कभी-कभी गुस्से में बहुत कड़वे शब्द बोलने वाले होते है।

सूर्य

यदि पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में सूर्य हो तो जातक कोमल शरीर वाला, दुश्मनों का नाश करने वाला, शांत स्वभाव वाला, बलवान, शक्तिशाली, विद्वान, राज्य के भरोषे रहने वाला, स्त्रियॉं इसकी ओर मोहित होती है जिसके कारण ये अपने आकर्षण को और ज्यादा बढ़ाने का प्रयास करने वाले होते हैं।

लग्न

यदि पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में लग्न हो तो जातक ताकतवर, उपकार करने वाला, समाज में पूज्यनिय, स्वभाव से शांत परंतु कभी-कभी गुस्से के कारण बहुत उग्र हो जाता है। गुप्त योजनाओं का निर्माण करने वाला, जल अथवा जल से जुड़ी वस्तुओं से अच्छा लाभ कमाने वाला तथा इसी से लाभ प्राप्त करने वाला होता है।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का चरण फल | Prediction of Purva Ashadha Nakshatra Charan pada 

प्रित्येक नक्षत्र में चार चरण होते हैं जिसमें एक चरण 3 अंश 20 कला का होता है। नवमांश की तरह होता है जिसका मतलब यह है की इससे नौवे भाग का फलीभूत मिलता है सभी चरणों में तीन ग्रहों का प्रभाव होता है जो इस प्रकार है – पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के देवता अतः [ जल ], स्वामी ग्रह शुक्र और राशि धनु।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का प्रथम चरण | Prediction of Purva Ashadha Nakshatra First Charan pad

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य है। इस चरण में गुरु, शुक्र और सूर्य का प्रभाव होता है। राशि धनु 253 डिग्री 20 अंश से 256 डिग्री 40 अंश तक होती है। नवमांश सिंह ! यह अहंकार, भरोषे और आत्मा परमात्मा से संबंध का कारक होता है। इस चरण के जातक लंबे चौड़े शरीर वाला, शेर के समान मुख वाला, आकर्षक नेत्रों वाला, मोटी और बड़ी भौं वाला, चौड़े तथा बाहर निकले हुए कंधे वाला, घने बाल तथा रोम वाले, घमंडी के समान दृढ़शक्ति वाला होता है। 

इस चरण में जातक उच्च कोटी का विद्वान, विश्वास करने योग्य, समाज में उन्नतिवान, अच्छी छवि बनाने वाला, अच्छे परिवार में जन्म लेने वाला, मजबूत आर्थिक स्थिति वाला, अच्छे चरित्र वाला होता है।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का द्वितीय चरण | Prediction of Purva Ashadha Second Charan pad 

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध है। इस चरण में गुरु, शुक्र और बुध का प्रभाव होता है। राशि धनु 256 डिग्री 40 अंश से 260 डिग्री 00 अंश तक होती है नवमांश कन्या ! यह चरण बढ़ोत्तरी, भौतिकवाद का कारक होता है। इस चरण में जातक गोरे रंग वाला, कोमल और नाजुक शरीर वाला, चौड़े कंधों वाला, बड़ी-बड़ी आँखों वाला, बड़े मस्तक वाला, बड़े मुख वाला, अच्छे आचरण वाला, अच्छा बोलने वाला, भाग्य का तेज परंतु परेशानियों का सामना करने वाला, उच्च कोटी का विद्वान और अच्छा शिक्षक भी होता है। 

जातक कार्य-कुशल, विवाह के बाद गलत आदतों को त्यागने वाला, वैवाहिक जीवन सुखमय जीने वाला, उच्च कोटी का ज्ञाता होता है। इस नक्षत्र के द्वितीय चरण में जन्मे जातक अपने व्यापार के लिए कठिन परिश्रम करने वाला और उन्नति के लिए निरंतर प्रयास करते रहने वाला होता है। जातक जीवन में बड़े  मुकाम तक पहुचने की इच्छा रखने वाला होता है। नकलची लोग इसके आगे अपने घुटने टेक देते हैं क्योंकि इस चरण का जातक बेहद आकर्षक और बुद्धिमान होता है।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का तृतीय चरण | Prediction of Purva Ashadha Nakshatra Third Charan pad

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र है। इस चरण मे गुरु, शुक्र और शुक्र का प्रभाव होता है राशि धनु 260 डिग्री 00 अंश से 263 डिग्री 20 अंश तक होती है। नवमांश तुला ! यह चरण विलास भाव, स्नेह, व्यापार में साझेदारी, भौतिक वाद का कारक होता है। इस चरण में जन्मे जातक काले अथवा सांबले रंग वाला, ऊंचे मस्तक वाला, मधुर बोलने वाला, संग्रहकर्ता, गुप्त योजनाओं का निर्माता, अपने काम को दूसरों से करवाने में माहिर, अपने से बड़ी स्त्रियों से अच्छे संबंध बनाकर रखने वाला होता है। 

इस चरण में जन्मा जातक उच्च स्तर का व्यापारी, विवाह के बाद बिना किसी मेहनत के अच्छा धन प्राप्त करने वाला होता है। जातक का वैवाहिक जीवन एसो आराम से काटने वाला और सभी सुखों को भोगने वाला होता है।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का चतुर्थ चरण | Prediction of Purva Ashadha Nakshatra Fourth Charan pad

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल है। इस चरण में गुरु, शुक्र और मंगल का प्रभाव होता है। राशि धनु 263 डिग्री 20 अंश से 266 डिग्री 40 अंश तक होती है। नवमांश वृश्चिक ! यह गुप्त योजनाओं, रहस्यमयी, मनोवाद, अभिमान, निडरता, भौतिकता का कारक होता है। इस चरण में जातक की नाक चपटी, चौड़ा और भारी शरीर, मध्यम कद वाला, अनोखे नेत्रों वाला, दुश्मनों को हराने वाला, लड़ाई-झगड़े करने वाला, अपने आगे किसी की न मानने वाला होता है। 

इस नक्षत्र में जन्मा जातक अनोखे स्वभाव वाला, अद्भुद विषयों का ज्ञाता या फिर जानने की इच्छा रखने वाला, अंतर्राष्ट्रीय मामलों में विशेषज्ञ, छोटे बच्चों की देख रेख करने वाला होता है। जातक बच्चों से जुड़ी संस्थाओं में धन दान करने वाला होता है। इन्हे अपने मुह अपनी तारीफ करना बेहद पसंद होता है क्योंकि इनका स्वभाव मिया मिट्ठू के जैसा होता है।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष आचार्यों ने सूत्र रूप में बताया है लेकिन यह फलित में बहुत ज्यादा बदलाव हुआ है। 

यावनाचार्य

                पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण में जातक महान व्यक्तित्व वाला, द्वितीय चरण में राजा के समान जीवन यापन करने वाला, तृतीय चरण में निंदा करने वाला, चतुर्थ चरण में धन-दौलत से परिपूर्ण होता है। 

मानसागराचार्य 

                     पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के पहले चरण में अधिक गुस्सा करने वाला, दूसरे चरण में पुत्र रत्न प्राप्तक, तृतीय चरण में कर्मों के अनुसार फल की इच्छा रखने वाला, चौथे चरण में धन-दौलत से परिपूर्ण होता है।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्मे जातक । People born in Purva Ashadha Nakshatra

जर्मन के तानाशाह एडोल्फ हिटलर का चन्द्र पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में था। 

भारत के दार्शनिक रजनीश ओशो का सूर्य इसी नक्षत्र में था।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का चरण ग्रह फल | Purva Ashadha Nakshatra Prediction based on planets   

भारतीय ज्योतिष आचार्यों के मतानुसार सूर्य, बुध और शुक्र इन ग्रहों की पूरी तरह अवलोकन या चरण दृष्टि होती है, क्योंकि सूर्य ग्रह से बुध ग्रह 28 अंश और शुक्र 48 अंश से दूर नही जा सकता है। 


सूर्य – Sun [ पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में सूर्य ] 

  • चन्द्र की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक सुंदर, रूपवान, एक से अधिक लोगो के बीच बैठकर प्रवचन देने वाला, कलाओं को रचने वाला होगा। 
  • मंगल की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक शासन में कार्यरत, सुरक्षा विभाग का अधिकारी, कीर्तिमान होगा। 
  •  गुरु की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक नेता या मंत्री के समकक्ष रहने वाला होगा, 
  • शनि की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक बुरे लोगों की संगति वाला, जानवरों का पालन-पोषण करने वाला तथा उन्ही से अपनी जीविका करने वाला होगा।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में सूर्य | When sun is in Purva Ashadha Nakshatra – Prediction

सूर्य का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक स्वाभिमान वाला, आनंदमय जीवन जीने वाला, पराक्रम करने वाला, शत्रुओं का नाश करने वाला, बात से मुकरने वाला, भौतिकवादी, आत्मा परमात्मा में विश्वास रखने वाला, कार्य कुशल, आजादी से जीवन जीने वाला, स्वतंत्रता पूर्ण व्यवहार वाला, कंपनी या फ़ैक्टरी में कार्य करने वाला होता है। ऐसे में कुछ जातक अपने पिता की संपत्ति को बढ़ाने के लिए कार्य करने वाले होते हैं और उनके व्यवसाय को बढ़ाने वाले होते है।

सूर्य का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक अधिक बोलने वाला, गुस्सेबाज़, अहंकारी, समुद्री रास्तों पर यात्राएं करने का शौकीन, हमला करने वाला, जल सेना में उच्च पर का अधिकारी होता है। जातक अपने आकर्षण से सबको अपने समूह में एकत्रित करने वाला होता है।

सूर्य का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक समाज में सबसे अच्छा बनने की इच्छा रखने वाला, ताकतवर, दर्शनशास्त्र का ज्ञाता, जल्दबाज़ी के कारण गलत फैसले लेने वाला, जल से संबन्धित कार्यों को करने वाला, जलीय मार्गों से अच्छा लाभ कमाने वाला होता है। जातक लड़ाई-झगड़ों में विजय प्राप्त करने वाला होता है। यह चरण यदि गुरु से युत हो तो जातक शैतान या फिर नुकसान करने वाला होगा।

सूर्य का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक गुस्सेबाज़, तीव्र, घमंडी, किसी से न डरने वाला, पनी गलती पर दूसरो की सलाह नही मानाने वाला, नेवी में उच्च पद का अधिकारी होता है। जातक सबकी नज़रों में मसीहा होता है। 


चन्द्र – Moon [ पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में चन्द्र ]

  • सूर्य की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक वैभव युक्त होगा। 
  • मंगल की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक विजय प्राप्त करने वाला, सेना या सुरक्षा विभाग का अधिकारी होगा। 
  • बुध की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक अच्छा बोलने वाला, सुवक्ता या फिर चतुर एवं बुद्धिमान होगा।
  • गुरु की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक अच्छे आचरण वाल, सुंदर व्यवहार वाला होगा।  
  • शुक्र की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक धन-दौलत से परिपूर्ण, धर्म को मानने वाला होगा।
  • शनि की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक शास्त्रों का ज्ञाता, धार्मिक विचार धारा वाला, निर्दयी होगा।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में चन्द्र | When Moon is in Purva Ashadha Nakshatra – Prediction

चन्द्र का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक गुस्सेबाज, निखार वाला, प्रभाव वाला, भ्रष्ट आचरणों वाला, दूसरों पर अपना अधिकार जमाने वाला, घमंडी स्वभाव वाला, जल से संबन्धित वस्तुओं को पसंद करने वाला, अधिक प्यास लगने के कारण बार-बार पानी पीने वाला होता है।

चन्द्र का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक सभ्यतादार, चमकीले तथा आकर्षक नेत्रों वाला, अपने स्वाभिमान के लिए जीवित रहने वाला, आजादी से कार्य करने वाला, स्त्रियों की संगत पसंद करने वाला, किसी के सामने हांजी-हुज़ूरी न करने वाला, समाज में अच्छी छवि बनाने वाला, परिवार में सबका चाहीता, जरूरतमन्द की मदद करने वाला होता है। 

चन्द्र का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक छोटी सी बात पर बेहद प्रसन्न होने वाला, अपनी खुशी से किसी गरीब को धन देने वाला, यदि किसी से गुस्सा हो जाए तो उसका धन मारने वाला और नुकसान करने वाला होता है। जातक अपने बनाए नियमों से चलने वाला किसी की बात न सुनने वाला होता है। जातक 35 से 40 वर्ष की उम्र के बाद प्रत्याशित कार्यो मे अपना धन निवेश करेगा। 

चन्द्र का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक आजादी से कार्य करना पसंद करता है वह किसी के नीचे कार्य करने से भी कतराने वाला होता है। अपनो का भला करने वाला और दूसरो  का बुरा करने वाला, दूसरों के कार्यों में कमी निकालने वाला, अपनी स्त्री को छोड़ दूसरों की स्त्रियों पर गंदी नज़र रखने वाला, अहंकारी होता हैं।


मंगल – Mars [ पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में मंगल ]

  • सूर्य की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक भाग्यवान, समाज के साथ-साथ दुनिया में भी प्रसिद्धि प्राप्त करने वाला होगा।  
  • चन्द्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक शरीर के किसी अंग के खराब होने की वजह से जातक दुखी, जातक अपराधियों के समान जीवन जीने वाला होगा।  
  • बुध की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक अनेक कलाओं और एक से अधिक विषयो का ज्ञाता, उच्च कोटी का विद्वान होगा।
  • गुरु की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक सर्व सुख सम्पन्न, राजा के समान जीवन जीने वाला होगा।  
  • शुक्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक स्त्रियों को दिखाने के लिए बहुत सीधा और दान-धर्म करने वाला और काम करने वाला होगा।
  • शनि की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक शारीरिक कष्टों को सहने वाला और अधर्मी तथा अज्ञानी होगा।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में मंगल | When Mars is in Purva Ashadha Nakshatra – Prediction

मंगल का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक लालची स्वभाव वाला, लड़कियों और स्त्रियों का साथ पाने के लिए स्मार्ट बनकर रहने वाला, एक से अधिक स्त्रियों के साथ संभोग करने वाला, शारीरिक कमजोरी से जूझने वाला, अपना भला पहले करने वाला होता है। इस चरण के कई जातक मांश-मदिरा का सेवन करने वाले होते हैं।

मंगल का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक समाज में लज्जित किया जाने वाला, वैश्या स्त्रियों के साथ रहने वाला तथा उसके साथ संभोग क्रिया में लिप्त रहने वाला, शराबी, चील की निगाह रखने वाला, गलत संगत के कारण कुकर्म करने वाला, मानसिक तनाव का शिकारी होता है।

मंगल का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक अभिमानी, खुश रहने वाला होता है। यदि जातक का कोई नुकसान करदे तो वह गुस्से के कारण उसके पैसे मारने वाला तथा खुश करने वाले व्यक्ति को सबकुछ देने की क्षमता रखने वाला होता है। जातक अपने दोस्तों के साथ शराब आदि का लती, रास्तों पर टैक्स बसूल करने वाला, बाँध निर्माण करने वाला होता है जिससे वह अपना जीवन यापन करता है। 

मंगल का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक घमंडी स्वभाव वाला, किसी के सामने न झुकने वाला, निडर, जरूरतमन्द की मदद करने वाला, नेवी में अच्छे पद पर होता है। जातक शास्त्रों का ज्ञाता होने के साथ-साथ अस्त्रों का भी ज्ञाता होता है। जातक जलीय कार्यों से अच्छा धन लाभ कमाने वाला होता है।


बुध – Mercury [ पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में बुध ] 

  • चन्द्र की दृष्टि बुध पर हो तो जातक विश्वास करने योग्य, व्यवहार अच्छा रखने वाला और लेखन का कार्य करने वाला होगा।
  • मंगल की दृष्टि बुध पर हो तो जातक गंदे कार्यों से पैसा कमाने वाला, गंदी फिल्मे तथा अश्लील्ता पर लेखन कार्य करने वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि बुध पर हो तो जातक उच्च शिक्षा प्राप्तक, मनमोहक व्यक्तित्व वाला, राजनीति में अच्छा पद प्राप्त करने वाला होगा। 
  • शनि की दृष्टि बुध पर हो तो जातक निर्दयी, दुखी और मन में अशांति महसूस करने वाला होगा। 

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में बुध | When Mercury is in Purva Ashadha Nakshatra – Prediction

बुध का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक बदचलन, वैश्या स्त्रियों के साथ संभोग करने का लती, रंगरलिया मनाने वाला, अपनी मर्जी से कार्य करने करने वाला होता है। जातक अपने सुख के लिए किसी का भी उपयोग करने वाला होता है। स्त्री जातक सुख से वंचित, शिक्षा के मामले में बहुत पीछे होती है। 

बुध का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक स्त्रियों के सुंदर रंग-रूप से उनकी ओर प्रभावित होने वाला होता है। जातक दूसरों के धन और दूसरों की स्त्रियो पर अपनी नियत खराब करने वाला होता है। जातक समुद्र यात्राएं पसंद करता है। अच्छे आचरण के कारण लोग इन्हे बेहद पसंद करते हैं। जातक सरकारी नौकरी में हो, तो मंत्री का सहायक और स्वतंत्र व्यवसायी होगा। जातक कानून विशेषज्ञ  या लेखा नियंत्रक होता है।

बुध का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक ढान-पुण्य करने वाला, अपने से बड़ो का सम्मान करने वाला, अपनी इज्जत पर जरा सी आंच न आने देने वाला होता है। जातक अपने कार्यों को अच्छी तरह करने वाला होता है। जातक की पत्नी बेहद अच्छी और शुभ आचरण वाला होता है।

बुध का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक जिससे गुस्सा होता है उसका बहुत बुरा सोचने तथा बुरा करने वाला होता है। जातक अपनी मर्जी से कार्य करने वाला, गलती पर दंड पाने वाला होता है। जातक को 40 से 50 वर्ष की उम्र में बड़ी-बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


गुरु – Jupiter [ पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में गुरु ]

  • सूर्य की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक धन हीन, सबसे उदासीन होगा। 
  • चन्द्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक भाग्यवान, धन-दौलत से परिपूर्ण, सुख-सुविधाओं के साथ जीवन जीने वाला, पारिवारिक सुख से घिरा हुआ होगा। 
  • मंगल की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक निर्दयी, परेशानियाँ उत्पन्न करने वाला, दुश्मनों से कारण दुखी अथवा नुकसान सहने वाला होगा।
  • बुध की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक राजनीति में अच्छा अच्छा पद प्राप्त करने वाला, मंत्री या नेता के समक्ष रहने वाला होगा।   
  • शुक्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक लंबी उम्र जीने वाला, भाग्यशाली होगा।
  • शनि की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक चोरी करने वाला, बुरे कार्यों से धन कमाने वाला होगा।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में गुरु | When Jupiter is in Purva Ashadha Nakshatra – Prediction 

गुरु का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक गिरगिट के समान रंग बदलने वाला कभी कुछ कहने वाला तो कभी कुछ कहने वाला होता है। यदि जातक किसी से प्रसन्न हो तो उसके लिए सब करने वाला लेकिन किसी से नाराज़ हो तो उसका सब कुछ बेकार कर देने वाला होता है। अपनी इच्छा से कार्य करने वाला होता है।

गुरु का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल  

इस चरण में जातक सुंदर, आजाद पंक्षी की तरह रहने वाला, स्वाभिमान वाला, सुंदर और अच्छे आचरण वाली पत्नी, समुद्र से प्राप्त वस्तुओं से व्यापार करने वाला होता है जिसके कारण इसे समुद्र आभूषणों का राजा भी कहा जाता है। ऐसे में कुछ जातक मछुआरा, नाव चलाने वाले या फिर समुद्र तट पर रहने वाले होते है।

गुरु का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक अच्छे स्वभाव वाला, एक से अधिक विषयों का ज्ञान रखने वाला, ईश्वर भक्ति में लीन, अपने तरीके से जीवन जीने वाले होता है। जातक मूत्र संबंधी रोगों से ग्रस्त होते हैं। कुछ जातक अपने लक्ष्य के लिए कठिन परिश्रम करने वाले होते हैं।

गुरु का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक गुस्सेबाज़, नशे आदि का बहुत बड़ा लती, आपस में मतभेद रखने वाला, समुद्रीय तटों पर खुश और शांत महसूस करने वाला होता है। जातक समुद्रीय व्यापारों में अपना निवेश करने वाला जिससे अच्छा धन लाभ कमाने वाला होता है। जलाशय कार्यों से अपना जीवन यापन करने वाला होता है।


शुक्र – Venus [ पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में शुक्र ]

  • चन्द्र की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक राजा के समान  एशो आराम करने वाला, वैश्याओं के साथ संभोग क्रिया में रत रहने वाला होगा। 
  • मंगल की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक धन-दौलत से परिपूर्ण, घर-जगह और वाहन आदि का मालिक होगा।
  • गुरु की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक विवाह के बाद तलाक करने वाला या फिर दूसरा विवाह करने वाला होगा जिसके कारण जातक का परिवार भी काफी बड़ा होगा। 
  • शनि की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक भाग्यशाली, सर्व सुख प्राप्तक होगा। 

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में शुक्र | When Venus is in Purva Ashadha Nakshatra – Prediction

शुक्र का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक परेशान रहने वाला, किसी के आसरे रहने वाला, दूसरों के कार्य करने वाला, बुरे आचरण वाला, चरित्रहीन, दूसरों की स्त्रियों पर गंदी नज़र रखने वाला, शराब पीने वाला, घमंडी स्वभाव का होता है। जातक को विवाह के लिए कोई रुकावट नही होती है।

शुक्र का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक स्वतंत्र स्वभाव वाला, खुशियों की वजह ढूँढने वाला, अच्छे आचरण और व्यवहार करने योग्य होता है। जातक जलीय वस्तुओं से अपना जीवन यापन करने वाला होता है। जातक गलत संगत के कारण नशे आदि का लती हो जाता है।

शुक्र का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक स्वाभिमान वाला, सफलता की ओर बढ्ने वाला, कुशलता पूर्वक कार्य करने वाला,पसीना और प्यार अधिक लगती है। जिसके कारण अधिक पेशाब भी करने वाला होता है।

शुक्र का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक चरित्रहीन, स्त्रियो से अनैतिक अवैध यौन सम्बन्ध रखने वाला, गुस्सैल, घमंडी, दुश्चरित्र, धनी और दयालु, जरुरतमंदो का मददगार होता है।


शनि – Saturn [ पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में शनि ]

  • सूर्य की दृष्टि शनि पर हो तो जातक गरीब, धनहीन, दूसरों के भरोशे अपना जीवन जीने वाला होगा।
  • चन्द्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सरकार की तरफ से सम्मानित तथा लाभ प्राप्तक होगा।
  • मंगल की दृष्टि शनि पर हो तो जातक  अधिक बोलने वाला और हमेशा खुश रहने वाला होता है। 
  • बुध की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सर्व कार्य करने में माहिर परंतु गलत लोगों से मित्रता करने वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि शनि पर हो तो जातक दूसरों की मदद करने वाला होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सोने-चाँदी से बने आभूषणों का व्यापारी होगा।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में शनि | When Saturn is in Purva Ashadha Nakshatra – Prediction

शनि का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक छोटी-छोटी बातों में कमियाँ निकालने वाला, जातक बादल के समान होता है जैसे बादल बिना बरसे भी नुकसान करता है और बरसने के बाद भी नुकसान करता है। जातक जरूरत से ज्यादा गुस्सा करने वाला, समाज में इज्जत खो देने वाला होता है। 

शनि का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक बुद्धिमान, अपने ज्ञान का प्रसार करने वाला, जरूरतमंदों की मदद करने वाला, शरण में आय लोगों की मदद करने वाला होता है। जातक ऐसी स्थिति में यात्राओं का शौकीन, समुद्रीय तट पर रहना पसंद करने वाला होता है। भाई की मदद न मिलने के कारण परेशान रहने वाला होता है। 

शनि का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक स्वाभिमान वाला, पत्नी से स्नेह करने वाला, अच्छे मित्रों की संगति करने वाला, जातक जल से जुड़ी वस्तुओं से अपना जीवन यापन करने वाला होगा। 

शनि का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक अहंकारी, गाली-गलौज करने वाला, दूसरों की औरतों को पसंद करने वाला, शराब का लती और एक बार लती होने के बाद जल्द न छोडने वाला होता है। जातक दिन रात नशे की लत में रहने वाला, चालक होता है।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में राहु | When Rahu is in Purva Ashadha Nakshatra – Prediction

राहु का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक जीवन में भांति-भांति प्रकार की परेशानियों को सहने वाला, बीमार रहने वाला, भाई-बहनों की ज़िम्मेदारी लेने वाला, नुकसान का सामना करने वाला और स्त्री की संगति के कारण संकट पैदा करने वाला होता है।

राहु का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक मूत्र समस्या और अंडकोश में समस्या रहती है। जिसके कारण जातक को संभोग करने में दिक्कत होती है या फिर नपुंसक होता है। 

राहु का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक दूसरों के झगड़ों में टांग अड़ाने वाला जिसके कारण खुद कानूनी विवादों में फसने वाला होता है। जातक दूसरों के चक्कर में अपना नुकसान करने वाला होता है।

राहु का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक आकर्षक, प्रभावशील, ईमानदार, विश्वास करने योग्य और कलाओं का ज्ञाता होता है। जातक को दूसरों की मदद करने वाला होता है।


पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में केतु | When Ketu is in Purva Ashadha Nakshatra – Prediction

केतु का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक को प्यास अधिक लगने वाला, अधिक पानी पीने की वजह से अधिक मूत्र करने वाला होता है। जातक शराब का आदी होता है जिसके कारण परिवार में कलेश मचा रहता होगा।

केतु का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक अपने दुश्मनों को हराने वाला, स्त्रियों की संगत के कारण दुखी रहने वाला और समाज में बदनामी करवाने वाला होता है। जातक अपनी गलत आदतों की वजह से पारिवारिक कलह का कारण होता है।

केतु का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक जल से संबन्धित वस्तुओं से अच्छा लाभ प्राप्त करने वाला, व्यसन क्रिया में व्यस्त, शारीरिक सुख के लिए दुखी रहने वाला, नुकसान का मुख देखने वाला, बीमार होता है। 

केतु का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक अपने जीवन में नकारात्मक बदलाव करने वाला होता है, लेकिन शराब का लती, प्रेम-प्रसंग के कारण समाज में बदनामी कराने वाला, यौन क्रियाओं में व्यस्त, अपने परिवार को नीचा दिखाने वाला होता है जिसके कारण जातक को घर में भी इज्जत नही मिलती है।   

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र
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