उत्तराषाढ़ा नक्षत्र फल लाभ हानि उपाय विशेषताएँ। Uttara Ashadha Nakshatra

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उत्तराषाढ़ा नक्षत्र | Uttara Ashadha Nakshatra

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का राशि चक्र में 266 डिग्री 40 अंश से 280 डिग्री 00 अंश तक विस्तार वाला क्षेत्रफल होता है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र को अरब मंजिल में ” अल बल्दाह ” [ शहर ] , ” ग्रीक में ” साजिटारी ” और चीनी सियु मे ” ताउ ” के नाम से जाना जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उत्तराषाढ़ा का मूल अर्थ – उत्तरा मतलब बाद और आषाढ़ा का मतलब जो जीता न गया हो या फिर अशांत होता है। 

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चार तारे होते हैं जो पलंग के समान आकृति बनाते हैं। इसके देवता विश्वदेव होते हैं। ज्योतिषय मतानुसार मनुष्य के दिमाग की कोशिकाएँ आकाश में चमकते तारों के समान होती हैं जिनहे विश्वदेव के नाम से जाना जाता है। यदि विश्वदेव को देखा जाए तो ये मस्तिष्क की कोशिकाओं को वश में करते हैं। 

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के देवता विश्वदेव, स्वामी ग्रह सूर्य और राशि धनु जो 26 डिग्री 40 अंश से 10 डिग्री 00 अंश राशि मकर तक होती है। आकशिय पिंडों के अध्यन में यह 21 व ध्रुव संज्ञक नक्षत्र होता है। यह अच्छा, बढ़ोत्तरी करने वाला, राजा के समान सुख देने वाला स्त्री नक्षत्र होता है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र की जाति क्षत्रिय, योनि नकुल, योनि वैर सर्प, गण मनुष्य, नाड़ी मध्य होती है। देवता विश्वदेव को दक्षिण दिशा का स्वामित्व प्राप्त है। यह नक्षत्र अपराजित नक्षत्र के नाम से भी जाना जाता है।



उत्तराषाढ़ा नक्षत्र की कथा पौराणिक कहानी । Uttara Ashadha Nakshatra mythological story 

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के देवता विश्वदेव [ विश्व देव कोई देवता नही है बल्कि ये देवताओं के समूह हैं ] हैं। ऋगुवेद की लगभग 35 से 40 रिचाओं में इनका वर्णन किया गया है। ऋगुवेद में सभी देवताओं को इन्द्र में रहने वाला माना गया है। वेदों में कहा गया है की 1500 ई0 से लेकर 900 ई0 पू0 सुर और देवताओं में किसी प्रकार का मतभेद नही था। सभी को बराबर का स्थान प्राप्त था।

सुर और असुरों को मित्र और वरुण के नाम से जाना जाता है लेकिन इनमे अग्नि, इन्द्र, विश्वदेव, मरुत, मित्र, अश्विन और वरुण प्रमुख है, अन्य उषा, सविता, अप्रिस, पृथ्वी, प्राजन्य, सूर्य और एक तारा है। कलानुसार हिन्दू युग में नौ गण देवता को मानते थे। जिसमें नौ देवता आदित्य, विश्वदेव, वसुनिल, आभासुर, तुषिता, महाराजिक, साध्य और रूद्र होते हैं। यदि विष्णु पुराण के माध्यम से देखा जाए तो विश्वदेव यक्ष की पुत्री के पुत्र थे।

जिन्हे क्रमशः 1 वसु, 2 सत्य, 3 क्रतु, 4 दक्ष, 5 काल, 6 काम, 7 धृति, 8 कुरु, 9 पुरुस्वास, 10 भद्रवास मूलतः 10 और दो जोड़े गये 11  रोदक या लोदन, 12 ध्वनि या धुरी है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जातक के मन में यह शंका उत्पन्न होती है की विश्वदेव ऋगुवेद में वर्णित किय गए देवताओं को मान्यता दी जाए या फिर वेद पुराण में बताए गए सभी देवताओं को मान्यता दी जाए। जातकों के मन में उत्पन्न होने वाली इस शंका के लिए ज्योतिष शास्त्र ने ॐ का प्रतीक दिया जिससे देवताओं को मानने में किसी भी प्रकार की शंका उत्पन्न नही होगा।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र की विशेषताएँ । Uttara Ashadha Nakshatra Importance

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक धर्म पुराण को पढ़ने का शौकीन, दोष रहित, जरूरत से ज्यादा ताकतवर, धैर्य रखने वाला, एक जगह स्थिर रहने वाला होता है। इन सभी गुणों की वजह से पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के अलग स्वभाव के होते हैं। इनमे बहुत भिन्नता होती है। यह नक्षत्र हारते-हारते जीतने वाला और मुक्त होने की अवस्था का कारक होता है। जातक के पारिवारिक जीवन में लगभग 27 से 30 वर्ष तक की उम्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। जातक मध्य जीवन में सुख भोगने वाला होता है।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के नाम अक्षर । उत्तराषाढ़ा नक्षत्र नामाक्षर

इस नक्षत्र के अनुसार जिस जातक का नाम आता है वह इस नक्षत्र के बताए गए गुण दोषों के समान होगा। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के नामाक्षर कुछ इस प्रकार है-  

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का नाम अक्षर – भे

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का नाम अक्षर – भा

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का नाम अक्षर – जा

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का नाम अक्षर – जी


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के उपाय । Uttra Ashadha Nakshatra Remedy 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के देवता विश्वदेव को माना गया है। जब किसी जातक का जन्म नक्षत्र उत्तराषाढ़ा हो और उसे अशुभ प्रभाव मिल रहे हों तो जातक को इससे संबन्धित उपायों को करना चाहिए जिससे नकारात्मक प्रभाव कम होने लगेंगे। जातक को इसके उपायों के लिए पूजा अर्चना करने की भी अवश्यकता होती है जो उपाय और पूजा हम आपको नीचे दिय गए बिन्दुओं में बताते हैं। 

  • भगवान शिव के पुत्र गणेश जी की पूजा करने से इससे संबन्धित दोष कम होने लगते हैं और जातक सकारात्मक्ता की ओर बढ्ने लगता है।
  • उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का शुभ रत्न माणिक है।
  • यदि जातक गणेश जी के संकट स्त्रोत का पाठ सच्चे मन और श्रद्धा से करे तो जातक जीवन में उन्नति की ओर बढ़ता है। 
  • इस नक्षत्र के लिए गणपति जी को सबसे श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि इनकी कृपा से जातक बड़ी से बड़ी समस्याओं से बाहर निकल जाता है। 
  • संकट स्त्रोत को नियमित रूप से करने से जीवन में आने वाल कष्ट, रुकावटें और परेशानियाँ कम होती हैं।
  • पीले, नारंगी और हल्के नीले रंग के वस्त्रों अथवा इन रंगों से जुड़ी वस्तुओं का उपयोग करने से जातक को सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।  
  • यदि जातक अपने जीवन में उन्नति के लिए किसी कार्य की शुरुआत करना चाहता है तो वह उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के समय या तिथि पर करे इससे जातक को जल्द सफलता प्राप्त होती है। 
  • इस नक्षत्र के पाप स्थिति में होने पर जातक इसके बीज मंत्र “ऊँ भाम्” का प्रतिदिन कम से कम 108 बार जाप करे इससे जल्द शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। 
  • बीज मंत्र के जाप से धन की वृद्धि होती है और यश, सम्मान तथा बीमारी से मुक्ति मिलती है। 
  • उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के वैदिक मंत्र का जाप करने से भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है। 

जातक इस नक्षत्र के असरकारी और शुभ परिणाम पाने के लिए वैदिक मंत्र का जाप पूरे विधि विधान से करे तो अवश्य लाभ मिलता है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र जिस दिन पड़े उस दिन 108 से लेकर 10 हजार बार तक वैदिक मंत्र का जाप कर सकता है इससे अशुभ प्रभाव कम होकर जातक को शुभ परिणाम देता है। जातक अन्य सभी दिनों इस वैदिक मंत्र का जाप 108 बार कम से कम करता रहे इससे पाप प्रभाव कम बने रहेंगे।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का वैदिक मंत्र        

ऊँ विश्वेदेवा: श्रृणुतेम गूं हवं में ये अन्तरिक्षे य उपद्यविष्ठाय ।

अग्निजिह्वा उतवायजत्र आसद्यास्मिन्बर्हिर्षिमादयध्वम् ।।

ऊँ विश्वेभ्यो देवेभ्यो नम: ।।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्मे जातक । People born in Uttra Ashadha Nakshatra

भारत के दार्शनिक रजनीश ओशो का जन्म इसी नक्षत्र के चौतुर्थ चरण में हुआ था।

स्वामी विवेकानंद जी का लग्न और सूर्य इसी नक्षत्र में था।

महेश योगी जी का जन्म नक्षत्र प्रथम चरण उत्तराषाढ़ा था।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का जन्म उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में हुआ था।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र फलादेश । उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का फल । Uttara Ashadha Nakshatra Prediction

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक मेहनत के अनुसार अपने जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं। इस नक्षत्र में जातक जिस विषय का बारे में जानने का इच्छुक होता है वह उसके बारे में बहुत गहराई से जाने बिना पीछे नही हटता है। जातक उच्च किसी पार्टी में उच्च स्तर का नेता या मंत्री होता है। इस नक्षत्र में जातक भौतिक और आध्यात्मिक दोनों को बराबर की समानता देने वाला, लैंगिक सुख भोगने वाले, जीवन का आनंद लेने वाले, विवाह के बाद चहरे की चमक, मुस्कुराहट बढ़ जाती है और जातक शारीरिक, परिपारिक आदि सभी सुखों से लिप्त रहने वाला होता है। 

अच्छे गुणों के कारण समाज में अच्छा स्थान प्राप्त करने वाला और सम्मानित होता है। कट्टर, बोले हुए शब्दों पर खरा उतरने वाला, आध्यात्मिक, तमाम सारे दोस्तों वाला, लंबे शरीर वाला, विजय प्राप्त करने वाला, सुख भोगने वाला और बहादुर होता है। जातक अच्छे मार्गों पर चलने वाला, ईश्वर भक्त, धर्म के लिए लोगों को प्रेरित करने वाला, धार्मिक नियमों का पालन करने वाला, लोगों का उपकार करने वाला, गुस्सेबाज परंतु खुद को नियंत्रित रखने वाला होता है। इस नक्षत्र का जातक कभी-कभी बेहद आलसी और लापरवाह होता है।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के पुरुष जातक | Impact of Uttara Ashadha Nakshatra on Male

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के पुरुष जातक लोगों को अपनी ओर मोहित करने वाला, गठीले शरीर वाला, गोरे रंग वाला, प्रतिभाशाली होता है। इस नक्षत्र के जातक के शरीर में पीठ या चहरे पर मस्सा होता है। जातक बिना कपट के कार्य करने वाला, अच्छा बोलने वाला, अच्छे लोगों से व्यवहार रखने वाला, लोगों की मदद करने वाले, किसी का अहित न करने वाला, किसी के नीचे कार्य न करने वाले, किसी के सामने न झुकने वाला, अपने कार्य के लिए किसी पे भरोषा न करने वाला, अपना काम किसी के भरोषे न छोडने वाला, जल्दबाज़ी में किसी भी कार्य का जिम्मा न लेने वाला होता है। 

जातक अपने जीवन में स्त्रियों को सबसे अधिक सम्मानित करने वाला और उनका आदर करने वाला होता है। जातक समाज में या किसी समूह में अपनी बात को साफ और सटीक तरीके से बताने वाला, अन्य किसी की सलाह को नजरंदाज करने वाला, गलती पर छमा मांगने वाला लेकिन गलती न होने पर किसी के सामने कभी न छमा मांगने वाला होता है। इसकी वजह से जातक के साथ अथवा साथ कार्य करने वाले लोग इसे घमंडी स्वभाव वाला कहते हैं। जातक अपने ही प्रयासों से अपने जीवन में उन्नति करने वाला, समस्याओं से लड़ने की शक्ति रखने वाला होता है। 

इस नक्षत्र में जातक उच्च स्तर का चिकत्सक, वैज्ञानिक या फिर कला के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने वाला होता है। जातक के जीवन में 27 से 30 वर्ष तक की उम्र में सकारात्मक बदलाव होते रहते हैं लेकिन कुछ समय के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है लेकिन उसके बाद जातक अपने जीवन में पूरी तरह सफल और उन्नतिशील हो जाता है। जिससे समाज में जातक की अच्छी छवि बन जाती है। विवाह के बाद खुश और आनंदित रहने वाला, पत्नी का प्यार पाने वाला, शारीरिक सुख में डूबा हुआ होता है। सेहत के मामले में थोड़ा उथल-पुथल रहती है लेकिन गंभीर बीमारी या समस्या नही होती है।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के स्त्री जातक | Impact of Uttara Ashadha Nakshatra on Female

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के स्त्री जातक गोरे रंग वाली, रूपवान, अच्छी छवि वाली, छोटे मस्तक वाली, आकर्षक नयनों वाली, उभरी हुई तथा सुंदर नाक वाली, अच्छा बोलने वाली, अपनी बातों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने का हुनर रखने वाली, सभी कार्यों के प्रति सचेत रहने वाली, ईमानदारी से कार्य करने वाली, घर में सबसे सुंदर और लाड़ली होती हैं। 

स्त्री जातक सबके बारे में अच्छी भावना रखने वाली, मीठा बोलने वाली, अच्छे चरित्र और गुणों वाली, सबका हित करने वाली होती है। लेकिन स्त्री जातक का पारिवारिक जीवन थोड़ा परेशानियों में गुजरने वाला होता है। इस नक्षत्र की स्त्री जातक को विवाह के बाद बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिसके कारण ये खुद को काफी कमजोर समझने लगती है। इन्हे अपने पति व अपनी ससुराल से दुख मिलता है।


प्राचीन ऋषिमुनियों व आचार्यों के अनुसार उत्तराषाढ़ा नक्षत्र | Uttara Ashadha Nakshatra

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के जातक क्रतज्ञ होने का भाव रखने वाले, धर्म को मानने वाले तथा धर्म के प्रति लोगों को उत्साहित करने वाले होते हैं। ये पुत्र रत्न का सुख भोगने वाले, विद्वान और समाज में सबसे अधिक बुद्धिमान जाने जाने वाले होते हैं। जातक की पत्नी रूपवान तथा अच्छे गुणों से पूर्ण होती है। इनकी पत्नी अपने आकर्षण से सबको अपनी ओर मोहित करने की शक्ति रखने वाली होती है। ——- नारद

इस नक्षत्र के जातक खुद ज्यादा सजाने-सवारने में समय बरवाद नही करते हैं, क्योंकि इनके लिए काम सबसे महत्वपूर्ण होता है और ये अपने जीवन में इज्जत, धन और रिश्तों को महत्वता देते हैं। इनके अंदर विदेशों में घूमने, रेतीले इलाकों में घूमने और ठंडी तथा बर्फीली जगहों में घूमने के शौकीन होते हैं। ये अपने जीवन को घूमते फिरते जीना पसंद करते हैं। इन्हे किसी के कार्य या किसी की परेशानी से कोई मतलब नही होता है बस अपनी धुन में मस्त रहने वाले होते है। ———– पराशर 

इस नक्षत्र के जातक शिल्पकला के अच्छे ज्ञाता होते हैं इसीलिए इस नक्षत्र के बहुत से जातक कला के क्षेत्र में अपना भविष्य चुनते हैं और सफलता को भी प्राप्त करते हैं। इनमे कई जातक मकान बनाने वाले, इंजीनियर, वस्तुओं के निर्माता और नक्शा बनाने वाले भी होते हैं जो इस क्षेत्र से अच्छा पैसा भी कमाते हैं। इस नक्षत्र के जातक गरीबों की मदद और धर्म के लिए दान देने में कभी पीछे नही रहते हैं। ——– वरामिहिर

चन्द्र

यदि इस नक्षत्र में चन्द्र हो तो जातक दयालु स्वभाव वाला, अपने माता-पिता तथा पूर्वजों की आज्ञा का पालन करने वाला, धार्मिक चीजों से संबंध रखने वाला, अधिक मित्रों वाला परंतु अच्छे मित्रों की संगति वाला होता है। जातक समाज में अपनी छवि कुछ इस प्रकार बनाता है की उसे सब जानते हैं यह कैसा है कैसा नही और क्या कर सकता है।

सूर्य

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में यदि सूर्य धनु राशि में हो तो जातक भगवान में पूर्ण विश्वास रखने वाला, शारीरिक सुख प्राप्त करने वाला लेकिन वैश्याव्रत्ति के कारण समाज मे चरित्रहीन जाना जाने वाला, जातक बुद्धिमान लेकिन गुस्से में अपनी अज्ञानता का परिचय देने वाला, अपने माता-पिता का समान न करने वाला होता है। इस नक्षत्र में कई जातक त्वचा से संबंधित बीमारी का शिकार होते हैं।

लग्न 

यदि लग्न इस नक्षत्र में हो तो जातक बुद्धिमान, ताकतवर, ज्ञानियों का ज्ञानी, धार्मिक प्रथाओं में पूर्ण मान्यता रखने वाला, अपने कुल में सबसे महान होता है। इस नक्षत्रे के जातक ऐसे में अपने माता-पिता को ईश्वर की समानता देने वाला होता है।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का चरण फल | Prediction of Uttara Ashadha Nakshatra Charan pada 

प्रित्येक नक्षत्र में चार चरण होते हैं जिसमें एक चरण 3 अंश 20 कला का होता है। नवमांश की तरह होता है जिसका मतलब यह है की इससे नौवे भाग का फलीभूत मिलता है सभी चरणों में तीन ग्रहों का प्रभाव होता है जो इस प्रकार है – उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के देवता विश्वदेव, स्वामी ग्रह सूर्य और राशि धनु।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का प्रथम चरण | Prediction of Uttara Ashadha Nakshatra First Charan pad

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी गुरु है। इसमें गुरु, सूर्य और गुरु का प्रभाव होता है। राशि धनु 266 डिग्री 00 अंश से 270 डिग्री 00 अंश तक के विस्तार वाले क्षेत्रफल तक होती है। नवमांश धनु ! यह चरण बढ़ोत्तरी, भरोषे और अधिक खर्चों का कारक होता है। इस चरण में जातक सभ्यतादार, गोरे रंग वाला, घोड़े के समान मुख वाला, लंबी और गोल आँखों वाला, टेड़े पैरों अथवा जांघों वाला, कम बलने वाला, स्त्री के कारण जीवन में परेशान रहने वाला होता है।

जातक अपने कार्यों को अच्छे और ईमानदारी से करने वाला, सच के साथ रहने वाला, मायावाद को मानने वाला, समाज के बने नियमों का पालन करने वाला, पूरे संसार को ब्रह्म के समान मानने वाला, अच्छे चरित्र वाला, गरीब अथवा सहाय लोगों से घृणा करने वाला, कठोर व्यवहार करने वाला होता है।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का द्वितीय चरण | Prediction of Uttara Ashadha Second Charan pad 

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शनि है। इस चरण में शनि, सूर्य और शनि का प्रभाव होता है। मकर धनु 270 डिग्री 00 अंश से 273 डिग्री 00 अंश तक होती है नवमांश मकर ! यह सांसारिक गतिविधियों, व्यक्ति के विशेष गुण और सांसारिकता का कारक होता है। इस चरण में जन्मे जातक के दातों के बीच जगह, सावले रंग वाले, भरी आवाज वाला, लंबे और घने काले बालों वाला, गंदे और गरब नाखूनों वाला, गाने-बजाने वाला, ताकतबर होता है।

जातक मजबूत इच्छाशक्ति वाला, स्वस्थ हृदय, ठंडे खून वाला, जातक अपने लक्ष्य को पूरा करे बिना पीछे न हटने वाला, ईश्वर भक्ति वाला, धार्मिक प्रथाओं में पूर्ण विश्वास रखने वाला, अन्य सभी बातों के अलबा जातक धार्मिक स्वभाव का ज्यादा होता है। जातक सोच-समझकर बोलने वाला, अपनी सोच को मजबूत बनाने वाला, महान और शक्तिशाली होता है।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का तृतीय चरण | Prediction of Uttara Ashadha Nakshatra Third Charan pad

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शनि है। इस चरण मे शनि, सूर्य और शनि का प्रभाव होता है। राशि धनु 273 डिग्री 20 अंश से 276 डिग्री 40 अंश तक होती है। नवमांश कुम्भ ! यह परिवार, समूह को जोड़ने का कारक होता है। इस चरण में जातक की नाक टेड़ी, लंबे चौड़े शरीर वाला, अपने कार्यों के लिए लापरवाह, एक से अधिक स्त्रियों के साथ रहने वाला, दूसरों की स्त्रियों पर गंदी नज़र रखने वाले होते हैं। जातक फालतू की बकबास करने वाला, गाने-बजाने में रत, लड़कियों से स्नेह करने की इच्छा रखने वाले होते हैं। 

इस चरण में जातक मेहनत करने वाला, अपने कार्यों के लिए कठिन परिश्रमी होते हैं। जातक अपने कार्यों के साथ-साथ समाज को भी समय देने वाला होता है। जातक बुद्धिमान लोगों की संगत करने वाला, जरूरत पड़ने पर किसी भी काम के लिए पीछे न हटने वाला, धैर्यवान, शादी के बाद ससुराल में स्त्रियों के साथ हसी-मज़ाक करने वाला होता है।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का चतुर्थ चरण | Prediction of Uttara Ashadha Nakshatra Fourth Charan pad

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी गुरु है। इस चरण में गुरु, सूर्य और गुरु का प्रभाव होता है। राशि मकर 276 डिग्री 40 अंश से 280 डिग्री 00 अंश तक होती है। नवमांश मीन ! यह चरण शरीर की ताकत, सांसारिक गतिविधियों में व्यस्त रहने वाला और धर्म के प्रति समस्त ऊर्जा को जागृत करने का कारक होता है। इस चरण में जन्मे जातक गोरे रंग वाला, भुई आँखों वाला, साफ-सुथरे कपड़े पहनने वाला, एक से अधिक दोस्त रखने वाला, गायक, कलाकार, अच्छे कर्म करने वाला होता है।

इस चरण में जातक आदर्शवान, मनभावुक, कठिन से कठिन परिश्रम के लिए तैयार रहने वाला, धर्म को मानने वाला, धार्मिक प्रथाओं के अनुसार चलने वाला, लोगों को मसवारा देने वाला, ईश्वर की भक्ति करने वाला, गांव के कार्यों से धन लाभ प्राप्त करने वाला, गाने का शौकीन और अधिक मित्रों वाला होता है।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष आचार्यों ने सूत्र रूप में बताया है लेकिन यह फलित में बहुत ज्यादा बदलाव हुआ है। 

यावनाचार्य

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण में जातक राजा के समान सुख प्राप्त करने वाला, द्वितीय चरण में दोस्तो के साथ गलत करने वाला, तृतीय चरण में स्वाभिमानी, चतुर्थ चरण में धर्म के प्रति पूर्ण भावना रखने वाला होता है। 

मानसागराचार्य 

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के पहले चरण में रक्त संबंधी रोगों से ग्रसित, दूसरे चरण में शारीरिक कष्ट सहने वाला, तृतीय चरण में अपने गुरु का भक्त, चौथे चरण में अच्छे गुणों से युक्त होता है।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का चरण ग्रह फल | Uttara Ashadha Nakshatra Prediction based on planets   

भारतीय ज्योतिष आचार्यों के मतानुसार सूर्य, बुध और शुक्र इन ग्रहों की पूरी तरह अवलोकन या चरण दृष्टि होती है, क्योंकि सूर्य ग्रह से बुध ग्रह 28 अंश और शुक्र 48 अंश से दूर नही जा सकता है।


सूर्य – Sun [ उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में सूर्य ] 

  • चन्द्र की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक पुत्र रत्न का सुख भोगने वाला, समाज को अपनी ओर आकर्षित करने की शक्ति वाला होगा।
  • मंगल की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक साहस वाला, नाम कमाने वाला होगा।
  •  गुरु की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक आभूषणों का शौकीन, राज्य का मंत्री हो सकता है। 
  • शनि की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक बुरे लोगों की संगति करने वाला होगा।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में सूर्य | When sun is in Uttara Ashadha Nakshatra – Prediction

सूर्य का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक ईश्वर में विश्वास रखने वाला, धर्म से डरने वाला, बुद्धिमान, विद्वानों के समान व्यवहार रखने वाला, एक से अधिक स्त्रियों के साथ संभोग करने वाला तथा इच्छा रखने वाला, विवाह के बाद शारीरिक सुख का आनंद लेने वाला होता है। 

सूर्य का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक देश-विदेश में घूमने का शौकीन, यात्रा प्रेमी, सावधान रहने वाला, साधारण जीवन यापन करने वाला, अच्छाई को बुराई से दूर रखने वाला होता है। ऐसे कुछ जातक जिन्हे त्वचा, क्षय जैसे रोगों की समस्या से जूझना पड़ता है। 

सूर्य का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक जरूरत के कार्यों में अधिक महत्वता देने वाला, अच्छे बुरे लोगों को पहचानने वाला, खुद को सजा-सवारके रखने वाला और यात्राओं का शौकीन होता है।

सूर्य का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक विवाह के पश्चात पत्नी के साथ संभोग क्रिया में रत रहने वाला, माता-पिता से गुस्सा करने वाला, अपने वंशज का सबसे महान, विद्वानों के समान ज्ञानी, समाज में सबका प्रिय होता है। जातक कुछ गलतियों की वजह से समाज में अपनी छवि खरब करने वाला होता है।


चन्द्र – Moon [ उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में चन्द्र ]

  • सूर्य की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक राजा के समान जीवन यापन करने वाला और वैभव युक्त होगा। 
  • मंगल की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक साहस वाला और गठीले तथा मासल शरीर वाला होगा। 
  • बुध की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक शिल्पकार और उच्च शिक्षा प्राप्त करने से बुद्धिमान होगा।
  • गुरु की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक अच्छे आचरण वाल, सुंदर व्यवहार वाला होगा।  
  • शुक्र की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक धर्म को मानने वाला, स्त्रियों से खुद को दूर रखने वाला होगा। 
  • शनि की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक धर्म ज्ञाता, निर्दयी और धर्म के कार्यों से धन कमाने वाला होगा।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में चन्द्र | When Moon is in Uttara Ashadha Nakshatra – Prediction

चन्द्र का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक सुंदर, दयालु, बड़े-बड़े दांतों वाला, अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करने वाला, गाने-बजाने का शौकीन होता है। जातक अधिक मित्रों के कारण कभी अकेला न रहने वाला होता है।

चन्द्र का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक धर्म का ज्ञान रखने वाला, कठोर हृदय वाला, आत्मा परमात्मा में पूर्ण विश्वास रखने वाला, सांसरिक गतिविधियों से खुद को दूर रखने वाला होता है। जातक समाज को दिखाने के लिए दान-पुण्य करने वाला परंतु वास्तव में वह बहुत कंजूस होता है।  

चन्द्र का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक धर्म के प्रति लोगों को प्रेरित करने वाला, संसार के कार्यों में कम तथा धर्म के कार्यों में ज्यादा समय देने वाला होता है। जातक अच्छे गुणों से युक्त होता है। जातक का शारीरिक भाग मोटा-पतला सा होता है। इस चरण में जन्मे जातक ठंडे मौसम और सर्दियों से बहुत डरते हैं।  

चन्द्र का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक अधिक मित्रों वाला, गुजनों तथा माता-पिता का आदर करने वाला, कार्य-कुशल, अच्छी सुंदर और गुणवान पत्नी वाला, पारिवारिक जीवन में सुख भोगने वाला, शांत स्वभाव का होता है। जातक विवाह के बाद अपने वैवाहिक जीवन में खुद को सबसे अच्छा महसूस करने वाला होता है।


मंगल – Mars [ उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में मंगल ]

  • सूर्य की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक भाग्यवान, समाज में प्रसिद्धि प्राप्त करने वाला होगा।  
  • चन्द्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक शरीर के किसी अंग के खराब होने की वजह से जातक दुखी, जातक अपराधियों के समान जीवन जीने वाला होगा।  
  • बुध की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक अनेक कलाओं और एक से अधिक विषयो का ज्ञाता, उच्च कोटी का विद्वान होगा।
  • गुरु की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक सर्व सुख सम्पन्न, वैवाहिक जीवन में कष्ट सहने वाल होगा।  
  • शुक्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक स्त्रियों को दिखाने के लिए बहुत सीधा और दान-धर्म करने वाला होगा।
  • शनि की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक लफंगों की तरह घूमने वाला, आवारा और कठोर हृदय का होगा।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में मंगल | When Mars is in Uttara Ashadha Nakshatra – Prediction

मंगल का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक रूपवान, पिता के व्यापार को संभालने की ज़िम्मेदारी लेने वाला, मकानों का निर्माता या फिर नक्शे बनाने का कार्य करने वाला होता है। 

मंगल का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक अपने पहनावे को लेकर सावधान रहने वाला, समाज के बने नियमों का पालन करने वाला, गलत बोलने वाला होता है। यदि जातक से कोई अच्छा बर्ताव करे तो ये अपना अशिक्षित होना साफ प्रदर्शित करने वाले होते है। 

मंगल का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक कार्य-कुशल, पहाड़ी इलांकों में घूमने का शौकीन, खुद में अशांत महसूस करने वाला, पारिपारिक जीवन में कष्ट सहने वाला होता है। जातक अपने ही कार्यों के लिए परेशानी का वीणा उठाने वाला होता है। 

मंगल का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक मशीनों से जुड़े व्यवसाय में अपना समय व्यतीत करने वाला, मशीनों में अपना धन व्यय करके अच्छा लाभ कमाने वाला होता है। जातक अपने कार्यों के लिए पहाड़ी इलाकों में जगह ढूंढकर वहा शुरुआत करता है और सफलता को प्राप्त करता है।


बुध – Mercury [ उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में बुध ] 

  • चन्द्र की दृष्टि बुध पर हो तो जातक विश्वास करने योग्य, व्यवहार अच्छा रखने वाला और लेखन का कार्य करने वाला होगा।
  • मंगल की दृष्टि बुध पर हो तो जातक गंदे कार्यों से पैसा कमाने वाला, गंदी फिल्मे तथा अश्लील्ता पर लेखन कार्य करने वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि बुध पर हो तो जातक उच्च शिक्षा प्राप्तक, राजनीति में अच्छा पद प्राप्त करने वाला होगा। 
  • शनि की दृष्टि बुध पर हो तो जातक निर्दयी, दुखी और मन में अशांति महसूस करने वाला होगा।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में बुध | When Mercury is in Uttara Ashadha Nakshatra – Prediction

बुध का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक लंबे कद वाला, गठीले शरीर वाला, अच्छा बोलने वाला, अपनी बातों से सबको अपनी ओर मोहित करने वाला होता है। जातक समाज के अनुसार कार्य करता है लेकिन उच्च शिक्षा प्राप्तक होने के कारण लोग अपने कार्यों की शुरुआत के लिए इससे राय लेते हैं। 

बुध का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक धार्मिक कार्यों से दूर भागने वाला, धर्म के नाम पर पीछे हटने वाला, जरूरतमंद की मदद न करने वाला, अपने कार्यों की बढ़ोत्तरी के कारण शत्रुओं को जन्म देने वाला होता है। जातक अपने     

लाभ के लिए किसी का भी नुकसान करने वाला होता है। 

बुध का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक उघोग से संबंध रखने वाली कलाओं की शिक्षा ग्रहण करने वाला, इंजीनियर, साफ बात करने वाला, सच सामने कहने वाला होता है। धार्मिक प्रथाओं को न मानने वाला होता है। 

बुध का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक अपने पहनावे को सबसे अलग रखने वाला, सुंदर स्थानों पर घूमने का शौकीन, मकानों का निर्माण करने वाले होते हैं। वस्तुओं के कार्यों से अच्छा लाभ कमाने वाले होते हैं। जातक अपने व्यापार में उन्नतिशील होता है।


गुरु – Jupiter [ उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में गुरु ]

  • सूर्य की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक धन हीन, समाज में लोगों के द्वारा न पसंद किया जाने वाला होगा।  
  • चन्द्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक भाग्यवान, धन-दौलत से परिपूर्ण, सुख-सुविधाओं के साथ जीवन जीने वाला होगा। 
  • मंगल की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक दया न करने वाला और समस्याओं को पैदा करने वाला होगा। 
  • बुध की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक राजनीति में अच्छा अच्छा पद प्राप्त करने वाला, मंत्री या नेता के समक्ष रहने वाला होगा।   
  • शुक्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक लंबी उम्र जीने वाला, भाग्यशाली होगा।
  • शनि की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक चोरी करने वाला, बुरे कार्यों से धन कमाने वाला होगा।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में गुरु | When Jupiter is in Uttara Ashadha Nakshatra – Prediction 

गुरु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक मनमोहक, अपनी सुंदरता से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला, धर्म के प्रति पूर्ण विश्वास वाला, धर्म का प्रसार करने वाला, कार्य कुशल होता है। जातक इस चरण में सुख भोगने वाला होता है। 

गुरु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल  

इस चरण में जातक निर्दयी, विशेष प्रकार की ऊर्जा शक्ति वाला, वन विभाग से जुड़े कार्यों को करने वाला, ऊंचे-नीचे स्थानों में रहने वाला, समुद्री तट पर निवास करना बेहद पसंद करने वाला होता है। जातक संसार की धरोहर में डूबा रहने वाला होता है। 

गुरु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक द्वितीय चरण के गुणदोषों के समान होते हैं। जातक शक्तिशाली, सुंदर स्थानों पर घूमना बेहद पसंद करने वाला होता है। वस्तुओं का निर्माता, यंत्र संबंधी ज्ञान और कला आदि का जानकार होता है।

गुरु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक धार्मिक स्थानों में सबसा अच्छा महसूस करने वाला, ईश्वर में पूर्ण विश्वास करने वाला, बुद्धिमान, अच्छे आचरण वाला, अपने पहनावे के लिए बेहद सतर्क रहने वाला होता है। समुद्री अथवा पहाड़ी इलाकों में रहने वाला होता है।


शुक्र – Venus [ उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में शुक्र ]

  • चन्द्र की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक राजा के समान एशो आराम करने वाला होगा। 
  • मंगल की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक धन-दौलत से परिपूर्ण, घर-जगह और वाहन आदि का मालिक होगा।
  • गुरु की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक विवाह के बाद तलाक करने वाला या फिर दूसरा विवाह करने वाला होगा जिसके कारण जातक का परिवार भी काफी बड़ा होगा। 
  • शनि की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक धन-दौलत से परिपूर्ण, सर्व सुख प्राप्तक होगा।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में शुक्र | When Venus is in Uttara Ashadha Nakshatra – Prediction

शुक्र का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक रूपवान, मनमोहक, अपने आकर्षण से सबका दिल जीतने वाला, धार्मिक नियमों का पालन करने वाला, धार्मिक ग्रन्थों की शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखने वाला, विवेकवान, पहनावे के लिए सावधानी बर्तने वाला होता है। 

शुक्र का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक अपने कार्यों में व्यस्त रहने वाला, लगन और मेहनत से कार्य करने वाला, धर्म के प्रति झूठ बोलने वाला, मलिन होता है। जातक अपने पहनावे को दिखाने वाला बल्कि सावधानी वर्तने वाला होता है। 

शुक्र का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक तृतीय चरण के समान गुणदोष वाला, शत्रुओं के कारण अपना नुकसान करने वाला, भौतिकवादी, घरेलू जानवरों से अधिक लगाव रखने वाला होता है। पारिवारिक सुख के लिए परेशान रहने वाला होता है। जातक को इस चरण में मधुमेह जैसे रोग से परेशान होना पड़ता है। 

शुक्र का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक गरीबों अथवा जरूरतमंदों की मदद करने वाला, साधु संतों की मदद करने वाला, सुंदर और रहस्यमयी स्थानो पर घूमना पसंद करने वाला, धार्मिक प्रथाओं में पूर्ण विश्वास रखने वाला होता है। जातक सबसे अच्छा और मधुर बोलने वाला होता है।


शनि – Saturn [ उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में शनि ]

  • सूर्य की दृष्टि शनि पर हो तो जातक धनवान, दूसरों के भरोशे अपना जीवन जीने वाला होगा।
  • चन्द्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक अपनी माता को परेशानी देने वाला होगा।
  • मंगल की दृष्टि शनि पर हो तो जातक समाज से निकाला हुआ, कानूनी विवादों में फसा हुआ होगा। 
  • बुध की दृष्टि शनि पर हो तो जातक राजनीति में अच्छा कदम जामाने वाला और समाज में अच्छी छवि बना के रखने वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि शनि पर हो तो जातक अध्यापक, उच्च कोटी का बुद्धिमान होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक जिम्मेदारियों को निभाने वाला, अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाला, अपनी सगी माता के प्यार से वंचित रहने वाला होगा।

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में शनि | When Saturn is in Uttara Ashadha Nakshatra – Prediction

शनि का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक धार्मिक विचारधारा वाला, धर्म के कार्यों में अपना समय देने वाला, धार्मिक स्थलों पर घूमने वाला, पहनावे को लेकर सावधान रहने वाला, शिल्पकार या कलात्मक क्षेत्रों से जुड़ा हुआ होता है। 

शनि का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक माध्यमिक शिक्षा प्राप्त, बार-बार अपना व्यवसाय बदलने वाला, पत्नी रोगिणी, मानसिक रूप से व्याकुल और अशांत, आर्थिक हानि सहने वाला होता है। जातक सावले रंग वाला, लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला होता है।

शनि का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक पुत्र संतति का सुख प्राप्त करने वाला, साधारण कपड़े पहनने वाला, शासक से लाभान्वित, संस्था या विभाग का अध्यक्ष होगा।  अपनी उन्नति के बजाय दूसरो की उन्नति चाहने वाला होता है। 

शनि का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक प्रथम चरण के समान गुणदोष वाला होता है। जातक परिवार के साथ खुश रहने वाला, अच्छे आचरण वाली पत्नी, पुत्र के साथ निवास करने वाला, उघोग संबंधित व्यापार करने वाला होता है।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में राहु | When Rahu is in Uttara Ashadha Nakshatra – Prediction

राहु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक समाज में प्रसिद्धि प्राप्तक, किसी एक विषय का अच्छा ज्ञाता, उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाला, अपने ज्ञान से अच्छा लाभ कमाने वाला होता है। जातक कार्यों को करने से पीछे न हटने वाला होता है। 

राहु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक गठीले शरीर वाला, सांवले रंग का, धर्म के विरुद्ध कार्य करने वाला, दुखी, तेल या स्टील के उघोग से धन कमाने वाला, पारिवारिक कलह का कारण होता है।

राहु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक परिवार अथवा मित्रों के साथ गलत करने वाला, लड़ाई-झगड़े में आगे रहने वाला, पैसे बरवाद करने वाला होता है। जातक अपने शौक पूरे करने के लिए पैसे की बरवादी करने वाला लेकिन परिवार के लिए एक पैसा न खर्च करने वाला होता है। 

राहु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक आकर्षक, प्रभावशील, कलाओं का ज्ञाता होता है। जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाला, देश-विदेश की यात्रा करने वाला, कार्यों को शेख़ी में आकर करने वाला होता है।


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में केतु | When Ketu is in Uttara Ashadha Nakshatra – Prediction

केतु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक कार्यों से कम लाभ कमाने वाला, धार्मिक स्थलों में कम जाने वाला, धर्म के कार्यों में नाम के लिए जाने वाला, परिवार के साथ पूरी तरह सुखी नही होता है। 

केतु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक कलेश मचाने वाला, धन की बरवादी करने वाला, फालतू के खर्चे करने वाला, शारीरिक कष्टों को सहने वाला, पिता से लाभ की इच्छा रखने वाला होता है। 

केतु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक द्वितीय चरण के समान गुणदोष वाला होता है। जातक अपने जीवन में किसी भी कार्य को नियमानुसार नही करता है। जिसके कारण उसे बाद में पछतावा होता है। 

केतु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक प्रथम चरण के समान गुणदोष वाला होता है। जातक मुसीबत से पैसे कमाने वाला, धन का नाश करने वाला, बीमारी से परेशान रहने वाला होता है।   


उत्तराषाढ़ा नक्षत्र
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