उत्तराभाद्रपद नक्षत्र फल लाभ हानि उपाय विशेषताएँ। Uttara Bhadrapada Nakshatra

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उत्तराभाद्रपद नक्षत्र | Uttara Bhadrapada Nakshatra

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का राशि चक्र में 333 डिग्री 20 अंश से 346 डिग्री 40 अंश तक विस्तार वाला क्षेत्रफल होता है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र को अरब मंजिल में ” अल फर्ग अल थानी ” [ पानी के मर्तबान के नीचे की टोटिया ] , ग्रीक में ” पेगेसी ” और चीनी सियु मे ” पाई ” के नाम से जाना जाता है। उत्तराभाद्रपद का मूल अर्थ बायाँ पैर होता है। विद्वानों के अनुसार उत्तराभाद्रपद नक्षत्र अचानक गुस्से का प्रतीक माना जाता है और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र को उस गुस्से को काबू में करने की शक्ति माना गया है। उत्तराभाद्रपद धार्मिकता की ओर चलने वाली हवा को प्रतीत करता है। इसीलिए इसे अध्यात्म का प्रतीक माना जाता है। 

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के देवता अहिर्बुध्न्य, स्वामी ग्रह शनि, राशि मीन 03 डिग्री 20 अंश से 16 डिग्री 40 अंश तक के विस्तार वाले क्षेत्रफल तक होती है। आकाशीय पिंडों के अध्ययन के अनुसार यह 26 व ध्रुव संज्ञक नक्षत्र है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के दो तारे होते हैं जो चारपाई के समान आकृति में दिखाई देते हैं। इस नक्षत्र को उत्तर सुखदायक भी कहा जाता है। उत्तराभाद्रपद शुभ राजसिक पुरुष नक्षत्र होता है। इसकी जाति क्षत्रिय, योनि गौ, योनि वैर व्याघ्र, मनुष्य गण, आदि नाड़ी है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र को उत्तर दिशा का स्वामित्व प्राप्त है।



उत्तराभाद्रपद नक्षत्र की कथा पौराणिक कहानी । Uttara Bhadrapada Nakshatra mythological story 

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के देवता अहिर्बुध्न्य हैं। देवता अहिर्बुध्न्य को साँप या फिर अजगर के समान माना जाता है। अहिर्बुध्न्य को भरे हुए गहरे पानी में नागिन या भगवान शिव का एक रुद्रो रूप माना जाता है। विश्वकर्मा शिल्प शास्त्र के माध्यम से इन्हे 11 रुद्र में तीसरा रुद्र माना जाता है। लेकिन रूपमंदना के अनुसार 12 रुद्रो में से 9 व रुद्र माना गया है। हिन्दू शास्त्र के अनुसार देवता अहिर्बुध्न्य को इस दुनियाँ की जड़ माना जाता है। 

देवता अहिर्बुध्न्य को एक हज़ार फन वाला शेष नांग माना गया है जिसके सर पर पूरी दुनियाँ घूमती है। वैष्णव ग्रन्थों के अनुसार यदि देवता अहिर्बुध्न्य को देखा जाए तो इन्हे भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है जो विष्णु भगवान के सबसे प्रिय भक्त होते है। अहिर्बुध्न्य ब्रह्म शक्ति के अनुसार अहिर्बुध्न्य को भगवान शिव के रूप से पहचाना जाता है।


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र की विशेषताएँ । Uttara Bhadrapada Nakshatra Importance 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसे अग्नि का एक तत्व माना जाता है। इसे सभी नक्षत्रों में स्थिर नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र के दौरान भवन निर्माण और अन्य कार्यों को करना बेहद लाभकारी माना जाता है। इस नक्षत्र में जन्मा पुरुष जातक अच्छे व्यवहार और स्वभाव वाला, समाज में सम्मान प्राप्त करने वाला, प्रसंसा योग्य होता है। जातक मित्रता को अच्छी तरह समझने वाला, लोगों को सम्मान देने और लेने वाला, किसी भी तरह का भेद भाव न करने वाला होता है। 

इस नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ अपने परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी निभाने वाली, घर में अच्छा माहौल बनाने का पूरा प्रयास करने वाली होती हैं। ये अपने पति के लिए सभी कार्य करने को तैयार रहने वाली, अपने परिवार की खुशी के लिए अपनी जान तक देने वाली होती हैं।


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के नाम अक्षर । उत्तराभाद्रपद नक्षत्र नामाक्षर

इस नक्षत्र के अनुसार जिस जातक का नाम आता है वह इस नक्षत्र के बताए गए गुण दोषों के समान होगा। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के नामाक्षर कुछ इस प्रकार है- 

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का नाम अक्षर – दू

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का नाम अक्षर –

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का नाम अक्षर –

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का नाम अक्षर –


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के उपाय । Uttara Bhadrapada Nakshatra Remedy 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के देवता अहिर्बुध्न्य है। यदि जातक का जन्म नक्षत्र उत्तराभाद्रपद है और वह पाप अथवा अशुभ स्थिति में हो तो जातक को इसके उपाय करने चाहिए जिनकी मदद से इसके अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं। यदि यह नक्षत्र अशुभ स्थिति में हो तो इस नक्षत्र के जातकों को जीवन में बहुत अधिक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। जिसके लिए उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के उपाय कुछ इस प्रकार हैं-

  • भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना करने से जातक को जीवन में अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं और नक्षत्र को बल मिलता है। 
  • माँ दुर्गा की पूजा वंदना करने से इससे उत्पन्न होने वाले कष्ट दूर होते हैं और होने वाली रुकावटों से छुटकारा मिलता है। 
  • यदि कुंडलिनी जागरण करने का प्रयास किया जाए तो जातक को इसके अशुभ प्रभावों से बचने में आसानी हो सकती है। 
  • यदि जातक इसके अशुभ प्रभावों से बचना चाहता है तो वह इसके बीज मंत्र का जाप कर सकता है जो सबसे लाभकारी साबित होगा। 
  • उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का बीज मंत्र “ ऊँ शं ”, “ ऊँ सं ” का जाप कम से कम 108 बार प्रतिदिन करना चाहिए इसके प्रभाव से अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।
  • उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के दिन यदि बीज मंत्र या इससे संबंधित मंत्र का जाप किया जाए तो बेहद लाभ प्राप्त होता है। 
  • विष्णु सहस्त्रानाम का पाठ करके भी इसके नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है। 
  • विष्णु भगवान के किसी भी स्वरूप की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। तीर्थ यात्राएं करने से भी अशुभ फलों में कमी आती है। 
  • भगवान शिव और विष्णु जी के अवतारों की आराधना करने से बेहद लाभ प्राप्त होता है। 
  • नीले अथवा पीले वस्त्रों का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए इससे नक्षत्र को बल प्राप्त होता है। 
  • उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के देवता अहिर्बुध्न्य का पूजन प्रतिदिन करने से इस नक्षत्र में उत्पन्न जातक को लाभ मिलता है और अशुभता दूर होती है।
  • महामृत्युंजय अष्टक का पाठ भी लाभकारी सिद्ध होता है।
  • अश्वत्थ की जड़ गले अथवा बाजू में ताबीज की तरह पहनने से नकारात्मक्ता को दूर किया जा सकता है।

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के बुरे प्रभावों को कम करने के लिए इस नक्षत्र के वैदिक मंत्र का जाप प्रतिदिन कम से कम 108 बार करना चाहिए। यदि संभव हो तो होम करते हुए वैदिक मंत्र का जाप करना चाहिए इससे बहुत जल्द नक्षत्र को बली बनाया जा सकता है और उसकी नकारात्मक्ता को दूर किया जा सकता है। 

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का वैदिक मंत्र

ऊँ शिवोनामासि स्वधितिस्तेपिता नमस्ते अस्तु मामाहि गूंसी:

निवर्त्तयाम्यायुषेSन्नाद्यायप्प्रजननाय ।

रायस्पोषाय सुप्प्रजास्त्वायसुवीयर्याय ।। ऊँ अहिर्बुध्न्याय नम: ।।


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र फलादेश । उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का फल । Uttara Bhadrapada Nakshatra Prediction 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उत्तराभाद्रपद नक्षत्र स्थिरता और निर्माण का कारक होता है। इस नक्षत्र के प्रभाव पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के समान होते हैं लेकिन ये कोमल और नाजुक होता है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक नियमों का पालन करने वाला, अच्छा भाषण देने वाला, लेखन का कार्य करने वाला, गुस्सेबाज, लड़ाई-झगड़ों पर काबू पाने वाला, सुस्त, जीवन के मध्य समय में पिता की संपत्ति प्राप्त करने वाला होता है। 

जातक अकेले रहना पसंद करने वाला, शांत वातावरण की तलास में रहने वाला, अपनी मानने वाला, अंदर की भावनाओं को जानने वाला, जन्म स्थल से दूर रहकर खुशी जीवन जीने वाला, वैवाहिक जीवन में मधुरता होती है। जातक संतान सुख प्राप्तक, धर्म को मानने वाला, दुश्मनों का नाश करने वाला, देवताओं के समान पूजा जाने वाला होता है।


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के पुरुष जातक | Impact of Uttara Bhadrapada Nakshatra on Male

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के पुरुष जातक मनमोहक, सुंदर और आकर्षक, मासूमियत से भरा हुआ होता है। यदि इस नक्षत्र के जातक को कोई स्त्री एक बार देख ले और ये मुस्कुरा दे तो वह इसकी दीवानी हो जाती है। जातक गरीब और अमीर में किसी भी तरह का कोई भेदभाव न करने वाला, सबको बराबर की समानता देने वाला होता है। जातक जिससे स्नेह करता है उसके लिए अपनी जान तक देने वाला, यदि जिसे ये चाहते हैं और वह छोड़ दे तो जातक बेहद गुस्सा करने वाला और जमीन को सर पर उठा लेने वाला होता है। 

जातक बुद्धिमान, अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए दूसरों तक शिक्षा प्रसार करने वाला, अपनी बातों से लोगों को अपनी ओर खीचने वाला, जलने वालों को और भी जलाते हुए आगे बढ्ने वाला, उन्नतिवान, स्त्रियों के साथ संबंध बनाने के लिए उन्हे जो पसंद होता है वह करने वाला, संभोग क्रिया के लिए उतावला रहने वाला होता है। जातक एक समय में समस्याओं के चलते अपनी शिक्षा को पूरा नही कर पाता है लेकिन अपनी भाषा शैली से लोगों का दिल जीतने वाला, विवाह के बाद जातक अपने जीवन में उन्नति करता है और पूरी तरह स्थिर हो जाता है। 

जातक 17 से 20 वर्ष की उम्र में जीवन में उन्नति पाने के लिए परेशान और कठिन परिश्रम करने वाला, पिता की मदद न मिलने के कारण अकेला और जन्म भूमि से दूर जाकर उन्नति करता है। जातक का वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है क्योंकि जातक की पत्नी अच्छे आचरण वाली, आज्ञा का पालन करने वाली और समझदारी के साथ जीवन में आगे बढ्ने वाली होती है। संतान सुख भोगने वाला होता है।


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्त्री जातक | Impact of Uttara Bhadrapada Nakshatra on Female

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्त्री जातक पुरुष जातक के समान गुणदोष वाली होती है। परंतु इसके अंदर कुछ बदलाव होते हैं जो कुछ इस प्रकार हैं- इस नक्षत्र की स्त्रियाँ मध्यम कद वाली, कमजोर शरीर वाली, बाहर की ओर निकली हुई आँखों वाली होती हैं। इस नक्षत्र की स्त्रियाँ परिवार में माता लक्ष्मी के समान, परिवार में सबसे सुशील और गुणवान, ये सबका सम्मान करने वाली, सबके लिए अपने आपको नज़रअंदाज़ करने वाली होती है। 

इस नक्षत्र की स्त्रियों के अंदर तीन वाल होते हैं- अनुकूल होने की अवस्था, निष्पक्ष होने की अवस्था और समानता। यदि ये व्यवसाय या नौकरी करने वालो होगी तो अच्छे स्तरका व्यवसाय और उच्च पद पर नौकरी करने वाली होती है। इस नक्षत्र की स्त्रियाँ अपनी ससुराल और अपने मायके दोनों जगह बराबर का स्नेह करने वाली और सम्मान पाने वाली होती है। इन्हे घर की लक्ष्मी के समान सम्मान दिया जाता है।


प्राचीन ऋषिमुनियों व आचार्यों के अनुसार उत्तराभाद्रपद नक्षत्र | Uttara Bhadrapada Nakshatra

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक की संतान एक से अधिक, अच्छा बोलने वाला, धर्म के प्रति जीवन समर्पण करने वाला, खुशहाल जीवन जीने वाला, वादे को पूरा करने वाला होता है। इस नक्षत्र का जातक कार्य करने में माहिर और तीव्रता से करने वाला होता है। ————— नारद

इस नक्षत्र के जातक अपने वंश को समाज में प्रचलित और प्रशंसित करने का प्रयास करते रहने वाले होते हैं। ये बुद्धिमान, शिक्षा से अच्छा धन कमाने वाले, अच्छे स्वभाव वाले होते हैं। ये जहां भी जाते हैं चार चाँद लगा देते हैं। इनकी लंबाई सामान्य होती है। ये एक बार में कई कार्यों को करने की शक्ति रखने वाले, ये किसी से वैर नही करते यदि इनसे कोई करता भी है तो ये अपनी मधुर वाणी और शांत चित्त से सामने वाले को अपना दीवाना बना लेने वाले होते हैं।———— वराहमिहिर

इस नक्षत्र के जातक गहरे पानी से डरने वाले, समुद्री या नदी के तट पर जाने में सबसे ज्यादा भयभीत होने वाले, अंदर की भावनाओं को समझने वाले, साफ चित्त वाले होते हैं। ये राजा के समकक्ष कार्य करने वाले, अनेक संतानों युक्त, शिक्षा के मामले में ज्ञान बढ़ाने के बड़े शौकीन होते हैं। ————- पराशर

चन्द्र

यदि इस नक्षत्र में चन्द्र हो तो जातक नियमों के अनुसार चलने वाला, अच्छा भाषण देने वाला, मन का ज्ञानी, अंदर की ओर झाँकने वाला, मनमोहक, पिता की संपत्ति पर राज करने वाला, पारिवारिक जीवन को खुशहाली से जीने वाला, अकेले रहना पसंद करने वाला होता है। इस नक्षत्र के जातक के चहरे पर मासूमियत साफ दिखाई देती है। नौकरीपेशा, दुश्मनों का नाश करने वाला होता है। इस नक्षत्र के कई जातक बेहद सुस्त होते हैं। 

सूर्य

यदि इस नक्षत्र में सूर्य हो तो जातक बुद्धिमान, तेज बुद्धि वाला, सबसे हटके कार्य करने वाला, ईमानदार, अच्छा लेखक, खोज कर्ता, गुप्त योजनाओं का निर्माता, चतुराई से कार्य करने वाला, कार्य-कुशल, धर्म को मानने वाला, मधुर और आकर्षक बोलने वाला होता है। 

लग्न 

यदि इस नक्षत्र में लग्न हो तो जातक महान कार्य करने वाला, एतिहासिक, अच्छे स्वभाव वाला, संतान सुख भोगने वाला, पारिवारिक जीवन को मधुरता पूर्वक जीने वाला, यात्राएं करने का शौकीन, लेखन कार्य करने वाला, शत्रुओं युक्त होता है।


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का चरण फल | Prediction of Uttara Bhadrapada Nakshatra Charan pada 

प्रित्येक नक्षत्र में चार चरण होते हैं जिसमें एक चरण 3 अंश 20 कला का होता है। नवमांश की तरह होता है जिसका मतलब यह है की इससे नौवे भाग का फलीभूत मिलता है सभी चरणों में तीन ग्रहों का प्रभाव होता है जो इस प्रकार है – उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के देवता अहिर्बुध्न्य, स्वामी ग्रह शनि और राशि मीन है।


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का प्रथम चरण | Prediction of Uttara Bhadrapada Nakshatra First Charan pad

उत्तराभाद्रपद  नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य है। इस चरण में गुरु, शनि और सूर्य का प्रभाव होता है। राशि मीन 333 डिग्री 20 अंश से 336 डिग्री 40 अंश तक होती है। नवमांश सिंह ! यह चरण हिंसक, घमंड और इच्छा का कारक होता है। इस चरण में उत्पन्न जातक मोटी नाक व भौं वाला, सुंदर और आकर्षक शरीर वाला, कार्य कुशल, जंगलों में भ्रमणशील या विचारशील होता है। 

जातक धार्मिक कार्यों में पूरा सहयोग करने वाला, धार्मिक प्रवत्ति वाला लेकिन मांस मदिरा का सेवन करने वाला होता है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक कार्य करने में तीव्र, उच्च स्तर का विद्वान, समाज में सम्मानित और प्रचलित, जातक की बातों का विरोध करने वाले लोग इसके विचारों को दबाने वाले और जातक को झुकाने की कोशिश करते रहने वाला होता है। जातक अपने परिवार से छिपा कर मांस मदिरा का सेवन पान करने वाला होता है।


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का द्वितीय चरण | Prediction of Uttara Bhadrapada nakshatra Second Charan pad 

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध है। इस चरण में गुरु, शनि और बुध का प्रभाव होता है। राशि मीन 336 डिग्री 40 अंश से 340 डिग्री 00 अंश तक होती है। नवमांश कन्या ! यह चरण बढ़ोत्तरी, तुलना और योजनाओं का कारक होता है। इस चरण में जातक गोरे रंग वाला, अच्छे और आकर्षक नेत्रों वाला, सुंदर शरीर वाला, संयम रखने वाला, बुद्धिमान, नाजुक या कोमल, दयालु स्वभाव वाला, विनय से युक्त होता है। 

इस चरण में जातक प्रयासरत, अपने नियमों का पालन करने वाला और लक्ष्य को प्राप्त करने की इच्छा रखने वाला, दिमाग से काम लेने वाला, अंदर की ओर देखने वाला, विपरीत लिंग की ओर जल्द आकर्षक होने वाला या उनके विकास के लिए सोच-विचार करने वाला होता है।


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का तृतीय चरण | Prediction of Uttara Bhadrapada Nakshatra Third Charan pad

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र है। इस चरण मे गुरु, शनि और शुक्र का प्रभाव होता है। राशि मीन 340 डिग्री 00 अंश से 343 डिग्री 20 अंश तक होती है। नवमांश तुला ! यह चरण धैर्य, मंजिल को पाने और बड़े बनने की इच्छा का कारक होता है। इस चरण में जातक अच्छे गुणों से युक्त, मुसीबतों का सामना करने की शक्ति वाला, मदद करने वाला, ईमानदार, धर्म से संबंधित कार्यों में अपना योगदान देने वाला, बुद्धिमान, साहस वाला, पूर्ण, लंबी और ऊंची नाक वाला होता है। 

इस नक्षत्र का जातक शुद्धता से संबंध रखने वाला, ज्योतिष विध्या का ज्ञान रखने वाला और उससे संबंधित ज्ञान को प्राप्त करने की इच्छा रखने वाला, आध्यात्मिक, धार्मिक शुद्धता को बरकरार रखने वाला, धर्म के लिए अपना और अपने परिवार तक को बलिदान देने वाला, जीवन में कष्टों को सहने वाला, बुरा और विरोध करने वाले लोग से बहुत ज्यादा परेशान होता है।


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का चतुर्थ चरण | Prediction of Uttara Bhadrapada Nakshatra Fourth Charan pad

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल है। इस चरण में गुरु, शनि और मंगल का प्रभाव होता है। राशि मीन 343 डिग्री 20 अंश से 346 डिग्री 40 अंश तक होती है। नवमांश वृश्चिक ! यह चरण जादू का ज्ञान, शक्ति और गोपनियता का कारक होता है। इस चरण में जातक लंबे कद वाला, सावले अथवा काले रंग वाला, छोटी नाक वाला, हिंसक कार्य करने वाला, अध्यात्म से जुड़ा होता है। 

इस चरण का जातक एतिहासिक चीजों को खोजने से संबंधित, धार्मिकता के नाम पर होने वाला अंधविश्वास को सबके सामने लाने वाला होता है। इस नक्षत्र का जातक धार्मिकता का पर्दा फास करने और गुप्त चीजों को सबके सामने लाने वाला जिसके कारण जीवन में खतरा अधिक होता है। इस नक्षत्र के जातकों को जीवन में कष्ट सहने पड़ते हैं चाहे वो इस जन्म में या फिर अकले जन्म में। इस चरण में उत्पन्न जातक वाकई तीन चरणों के जातकों से अलग होता है।


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष आचार्यों ने सूत्र रूप में बताया है लेकिन यह फलित में बहुत ज्यादा बदलाव हुआ है। 

यावनाचार्य

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के जातक प्रथम चरण में राजा के समान, द्वितीय चरण में चीजे चुराने वाला, तृतीय चरण में शारीरिक कष्टों को सहने वाला, चतुर्थ चरण में सुख भोगने वाला होता है। 

मानसागराचार्य 

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के पहले चरण में अनेक इच्छाएँ रखने वाला परंतु अज्ञानी, दूसरे चरण में कामी, तीसरे चरण में धन-दौलत से पूर्ण, चौथे चरण में चोरी-चकारी करने वाला होता है।


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का चरण ग्रह फल | Uttara Bhadrapada Nakshatra Prediction based on planets   

भारतीय ज्योतिष आचार्यों के मतानुसार सूर्य, बुध और शुक्र इन ग्रहों की पूरी तरह अवलोकन या चरण दृष्टि होती है, क्योंकि सूर्य ग्रह से बुध ग्रह 28 अंश और शुक्र 48 अंश से दूर नही जा सकता है।


सूर्य – Sun [ उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में सूर्य ] 

  • चन्द्र की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक पुत्र सुख प्राप्त करने वाला, भाषण से लोगों को आकर्षित करने वाला होगा। 
  • मंगल की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक कानूनी विभाग में कार्यरत और अच्छा लाभ कमाने वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक नेता या मंत्री के समकक्ष कार्य करने वाला होगा।   
  • शनि की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक कुसंगति करने वाला होगा।

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में सूर्य | When sun is in Uttara Bhadrapada Nakshatra – Prediction

सूर्य का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक गुस्से और हिंसक कार्यों को काबू में करने वाला, गुप्त योजनाएँ बनाने वाला, गुप्त बातों को छिपाने वाला, चालाक प्रवत्ति का होता है। यदि इस नक्षत्र में सूर्य हो तो जातक राजा के समान, परिवार का सुख भोगने वाला होता है।

सूर्य का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक एक से अधिक संतानों वाला, अच्छा लेखक, आकर्षक भाषण देने वाला, मधुर वाणी बोलने वाला, वादे को किसी भी हद में पूरा करने वाला, परिवार में सबसे अच्छा, योजनाएँ बनाने में माहिर होता है।

सूर्य का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक धार्मिक कार्यों को करने वाला, ईमानदार, दयावान, सबसे हटकर कार्य करने वाला, कार्य कुशल, अच्छे स्वभाव के कारण महान होता है। यदि बुध की दृष्टि हो तो जातक तीव्र बुद्धि वाला और उच्च स्तर का विद्वान होगा।

सूर्य का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक मध्यम कद वाला, कार्य-कुशल, चतुराई से जीवन जीने वाला, पानी के करीब जाने पर सबसे अभी भयभीत होने वाला, अच्छे स्वभाव के कारण दुश्मन नही होते हैं। जातक की संताने अधिक होती हैं।


चन्द्र – Moon [ उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में चन्द्र ]

  • सूर्य की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक राजमान्य, धन-दौलत से परिपूर्ण सर्व सुख भोगने वाला होगा।  
  • मंगल की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक कानूनी विभाग में होगा। 
  • बुध की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक शिल्पकार और नौकर चाकर से युक्त होगा।
  • गुरु की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक सुंदर आकृति वाला, किसी संस्था का अध्यक्ष होगा।
  • शुक्र की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक धन-दौलत से पूर्ण, जीवन के सर्व सुख भोगने वाला होगा।
  • शनि की दृष्टि चन्द्र पर हो तो जातक शास्त्रों का अच्छा ज्ञाता होगा।

उत्तरा’भाद्रपद नक्षत्र में चन्द्र | When Moon is in Uttara Bhadrapada Nakshatra – Prediction

चन्द्र का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक मनमोहक मुखाकृति वाला, अनेकों संतान से युक्त, अच्छा धन कमाने वाला, खुशहाल वैवाहिक जीवन जीने वाला, अकेले रहना पसंद करने वाला, अनुशासन के अनुसार कार्य करने वाला, परिवार के लिए बलिदान करने वाला होता है।

चन्द्र का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक नियमों के अनुसार चलने वाला, खुशहाल रहने वाला, उच्च स्तरीय लेखक, अंदर की ओर देखने वाला, आजादी पूर्ण जीवन जीने वाला, पिता की संपत्ति पर राज करने वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण, आत्मवादी होता है। इस नक्षत्र के कुछ जातक सुस्त और पानी से डरने वाला होता है।

चन्द्र का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक आकर्षक और चहरे से मासूम दिखने वाला, उत्सुक, नौकरी पेशा, साफ दिल वाला, सुखी दांपत्य जीवन जीने वाला, अच्छे गुणों से युक्त, बुद्धिमान, धनवान, अच्छे स्वभाव के कारण जातक जिस जगह जाएगा चार चाँद लगाने वाला होता है।

चन्द्र का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक रूपवान, खुशहाल जीवन यापन करने वाला, अनुशासन का स्नेही, अकेले रहना पसंद करने वाला, संतान सुख भोगने वाला, दुश्मनों का नाश करने वाला, अच्छे संपर्क से समाज में अच्छा नाम कमाने वाला होता है।


मंगल – Mars [ उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में मंगल ]

  • सूर्य की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक समाज में सम्मान पाने वाला, भाग्य से तेज होगा। 
  • चन्द्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक शारीरिक कष्ट सहने वाला, शरीर का कोई अंग भ्भ्रष्ट होगा। 
  • बुध की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक अनेकों कलाओं का ज्ञाता और अन्य विषयों में भी अच्छी जानकारी रखने वाला होगा। 
  • गुरु की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक धन-दौलत से परिपूर्ण, खुशहाल जीवन यापन करने वाला, नौकर-चाकरों से युक्त होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक एक से अधिक स्त्रियों के साथ यौन सुख भोगने वाला, दान-पुण्य करने वाला होगा। 
  • शनि की दृष्टि मंगल पर हो तो जातक शरीर के किसी भाग के ना होने के कारण परेशान, लफंगा, निर्दयी, गुस्सेबाज होगा।

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में मंगल | When Mars is in Uttara Bhadrapada Nakshatra – Prediction

मंगल का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक आने वादे का पक्का, संभोग करने की तीव्र इच्छा रखने वाला, अनेकों संतान युक्त, जल से भयभीत होने वाला, पिता के समान गुणों वाला, देश विदेश में भटकने वाला, भरोशे के कारण धोखा खाने वाला होता है। जातक जीवन में आर्थिक परेशानियों से जूझने वाला, यदि किसी से मदद मागेगा तो घर से बाहर निकालने की धम्की या घे से निकाला जाएगा। 

मंगल का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक अनुशासन प्रिय, अपनी इच्छाओं को काबू में रखने वाला, महान, संयम रखने वाला, अच्छा भाषण बाज, वादे का पक्का, अच्छे काम करने वाला होता है। इस नक्षत्र के कई जातक मतलबी, बड़े बुड़े लोगों का सम्मान न करने वाला, परेशान रहने वाला, कैंसर रोग से पीड़ित होता है।

मंगल का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक मध्यम लंबाई वाला, कार्य करने में तेज, संभोग क्रिया में रत, सुंदर स्त्रियों की तलाश में रहने वाला, समाज में लोगों का सम्मान करने वाला, सेहत से परेशान रहने वाला, चापलूसी करने वाला होता है।

मंगल का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक साहस वाला परंतु पानी से भयभीत होने वाला, नदी और समुद्रीय तटों से दूर रहने वाला, संभोग करने का बेहद इच्छुक, अपनी मेहनत से जीवन में सफलता प्राप्त करने वाला, चतुराई से कार्य करने वाला, किसी भी हालत में हानि न होने देने वाला होता है। यदि बुध की दृष्टि हो तो जातक का अपनी पत्नी के साथ मतभेद होगा।


बुध – Mercury [ उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में बुध ] 

  • चन्द्र की दृष्टि बुध पर हो तो जातक विश्वास करने योग्य, मित्रतापूर्ण स्वभाव वाला, लेखन कार्य करने वाला होगा। 
  • मंगल की दृष्टि बुध पर हो तो जातक लेखन का कार्य करने अच्छा लाभ कमाने वाला लेकिन लेखन कार्य पसंद नही होगा। 
  • गुरु की दृष्टि बुध पर हो तो जातक अच्छी नस्ल वाला, मनमोहक, विद्वान, राजनीति से अच्छा लाभ कमाने वाला होगा।  
  • शनि की दृष्टि बुध पर हो तो जातक निर्दयी, झूठ बोलने वाला, बिना अस्तित्व वाला होगा।

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में बुध | When Mercury is in Uttara Bhadrapada Nakshatra Prediction

बुध का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक ईश्वर को न मानने वाला, धार्मिक परम्पराओं को न मानने वाला और उनका विरोध करने वाला, वादे का पक्का, साफ-सुथरी बात कहने वाला, अपने कुल में सबसे ज्यादा उन्नति करने वाला होता है। जातक की उम्र जैसे-जैसे बढ़ेगी वैसे-वैसे वह अपने जीवन में सकारात्मक सुधार करेगा।  

बुध का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक धर्म को मानने वाला, परम्पराओं को मानने वाला लेकिन समय के अनुसार परम्पराओं में परिवर्तन करने वाला, अपने कुल का मुखिया, गुणवान, पैसे से समाज में सबसे अलग छवि बनाने वाला, गणित विषय का अच्छा ज्ञाता होता है। 

बुध का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक धर्म को मानने वाला, महान, अच्छा और आकर्षक भाषण देने वाला, अनेकों संतान युक्त, गुणों से युक्त, पैसों से त्योहारों की रौनक बढ़ाने वाला होता है। जातक पानी से डरने वाला, शत्रुओं को परास्त करने वाला, आजादी से जीवन जीने वाला, लेखन कार्य करने वाला होता है। यदि यह चरण बुध से दृष्ट हो तो जातक परम्पराओं के अनुसार कार्य करेगा।

बुध का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक फालतू की बात करने वाला, लोगों का दिमाग खाने वाला, धार्मिक कार्यों में कमियाँ निकालने वाला, लापरवाह, खुशहाल जीवन जीने वाला होता है। यदि बुध का नकारात्मक प्रभाव हो तो जातक दूसरों के नीचे कार्य करने वाला होगा।


गुरु – Jupiter [ उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में गुरु ]

  • सूर्य की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक पैसों के लिए परेशान रहने वाला, समाज में लोगों के द्वारा न पसंद किया जाने वाला होगा।  
  • चन्द्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक धनवान, सर्व सुख भोगने वाला, भाग्य का अच्छा होगा।  
  • मंगल की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक निर्दयी, समस्याओं को उत्पन्न करने वाला लेकिन शत्रुओं का नाश करने वाला होगा। 
  • बुध की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक राजनीति में या शासन के किसी विभाग का अध्यक्ष होगा।  
  • शुक्र की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक लंबी उम्र जीने वाला, अच्छे भाग्य वाला होगा।  
  • शनि की दृष्टि गुरु पर हो तो जातक चोरी करने वाला, समाज के द्वारा नापसंद किया जाने वाला होगी।

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में गुरु | When Jupiter is in Uttara Bhadrapada Nakshatra – Prediction 

गुरु का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक निर्दयी स्वभाव वाला, अकेले रहना पसंद करने वाला, अपने घर परिवार से दूर रहकर उन्नति करने वाला, जीवन के मध्य समय में पिता की संपत्ति प्राप्त करके राज करने वाला, पानी को काल के समान मानने वाला होता है। 

गुरु का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल  

इस चरण में जातक धार्मिक प्रवत्ति वाला, अच्छा भाषण बाज, उत्सवों में रौनक लाने वाला, अच्छा और मधुर बोलने वाला, अच्छे गुणो से युक्त, धन-दौलत युक्त, पिता के समान गुणों वाला, दुश्मनों को अपनी उंगली पर नचाने वाला, ज्ञान बढ़ाने का शौकीन होता है।

गुरु का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का फल 

इस चरण में जातक गोरे रंग वाला, धर्म के कार्यों में पूरा सहयोग करने वाला, देवताओं के समान माना जाने वाला, खुशहाल पारिवारिक जीवन जीने वाला, विरोधी लोगों को अपने अच्छे स्वभाव से झुकाने वाला, ईश्वर भक्ति में लीन रहने वाला होता है। 

गुरु का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक चालबाज, ईश्वर को न मानने वाला, धार्मिक कार्यों में विघ्न उत्पन्न करने वाला, समाज में अपमानित, कार्य कुशल, दुश्मनों का नाश करने वाला, जलीय तटों से दूर रहने वाला, स्त्रियों के साथ संभोग क्रिया में रत रहने वाला होता है।


शुक्र – Venus [ उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में शुक्र ]

  • चन्द्र की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक राजा के समान सुख सुविधाओं युक्त होगा।   
  • मंगल की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक आर्थिक रूप से मजबूत, घर वाहन आदि का सुख भोगने वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण होगा।
  • गुरु की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक एक से अधिक विवाह करने वाला जिसके कारण परिवार बड़ा होगा। 
  • शनि की दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक जीवन में सर्व सुख भोगने वाला होगा।

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में शुक्र | When Venus is in Uttara Bhadrapada Nakshatra – Prediction

शुक्र का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक डरपोक लेकिन अपने दुश्मनों को उनकी औकात दिखाने वाला, तेजी से कार्य करने वाला, स्त्रियों के साथ संबंध बनाने का शौकीन, प्रयत्नशील, धोखा देने वाला, लापरवाह होता है। इस चरण की स्त्रियाँ गुस्सेबाज़, घमंडी स्वभाव की होती है।

शुक्र का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक धार्मिक प्रवत्ति वाला, ईश्वर भक्ति में लीन होने से अधिक पूजा पाठ करने वाला, खुशहाल पारिवारिक जीवन जीने वाला, गुणवान, अच्छे स्वभाव और धन के बलबूते माहौल में मधुरता लाने वाला, भाग्यवान, हमेशा खुश रहने वाला, ईमानदार होता है। 

शुक्र का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक संभोग क्रिया की तीव्र इच्छा रखने वाला, धार्मिक कार्यों में सहयोग करने वाला लेकिन चतुर, संभोग इच्छा रखने वाला, सुंदर, अच्छे गुणों से युक्त, स्थिर न रहने वाला, धन-दौलत से परिपूर्ण, सर्व सुख भोगने वाला, अच्छे कार्यों में माहिर और उन्नतिवान होता है। जातक लेखन का कार्य करके अच्छा लाभ कमाएगा लेकिन इसके साथ-साथ सट्टेबाजी जैसे कार्यों से अच्छा पैसा कमाने वाला होता है।

शुक्र का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक अच्छी सेहत वाला, धर्म को मानने वाला, दयालु स्वभाव वाला, परिवार का स्नेह भजन करने वाला, अनेकों गुणों से युक्त, अच्छे स्वभाव के कारण उत्सव में खुशियाँ भरने वाला, अधिक संतानों से युक्त, भवन आदि से संबन्धित व्यापार करने वाला होता है।


शनि – Saturn [ उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में शनि ]

  • सूर्य की दृष्टि शनि पर हो तो जातक ईश्वर में विश्वास रखने वाला और अच्छा धन कमाने वाला होगा।
  • चन्द्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक माता-पिता के जीवन में परेशानियाँ उत्पन्न करने वाला होगा।
  • मंगल की दृष्टि शनि पर हो तो जातक निर्दयी, समस्याएँ उत्पन्न करने वाला, दुश्मनों का नाश करने वाला होगा।  
  • बुध की दृष्टि शनि पर हो तो जातक समाज की सेवा करने से अच्छा नेता या सेवक होगा। 
  • गुरु की दृष्टि शनि पर हो तो जातक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत या अच्छे स्तर का छात्र होगा। 
  • शुक्र की दृष्टि शनि पर हो तो जातक सर्व सुख भोगने वाला होगा।

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में शनि | When Saturn is in Uttara Bhadrapada Nakshatra – Prediction

शनि का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का फल

इस चरण में जातक लापरवाह, ईश्वर में विश्वास न रखने वाला, यौन सुख भोगने के लिए स्त्रियों का साथ पाने की इच्छा रखने वाला, आत्मविश्वासी, अकेले रहना पसंद करने वाला, नियमानुसार कार्य करने वाला, सामान्य लंबाई वाला होता है।

शनि का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल 

इस चरण में जातक पूजा पाठ में विश्वास न करने वाला, अच्छा भाषण देने वाला, लोगों के मन में संका उत्पन्न करने वाला, अच्छा भाषण देने वाला, सुंदर होने से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला, खुशहाल जीवन यापन करने वाला, जीवन के मध्य समय में पूर्ण होता है।

शनि का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक बुद्धिमान, कामुक लेकिन अपनी पत्नी को स्नेह करने वाला, पारिवारिक सुख भोगने वाला, अपने अच्छे गुणों से लोगों का दिल जीतने वाला, शत्रुओं को अपनी उंगली पर नचाने वाला, कार्य कुशल,  अच्छे कर्म करने वाला होता है।

शनि का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल 

इस चरण में जातक शुद्ध चित्त वाला, धार्मिक कार्यों में व्यस्त, विज्ञान के क्षेत्र में अच्छी उन्नति करने वाला, शास्त्रों में रुचि रखने वाला, दुश्मनों को शांत करने वाला होता है।


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में राहु | When Rahu is in Uttara Bhadrapada Nakshatra – Prediction

राहु का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक धार्मिक होने से लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करने वाला, गंदे चरित्र वाला, दाम्पत्य जीवन में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं या तलाक की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जातक मांसाहारी, हड्डियों से संबन्धित रोगों से ग्रसित, दुश्मनों से परेशान होता है।

राहु का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक वाट रोग से ग्रसित, समाज में अपमानित, पारिवारिक मतभेद से दुखी रहने वाला, पानी से डरने वाला, अधिक बोलने वाला होता है। 

राहु का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक अधिक कार्य करने वाला, स्त्रियों के साथ संबंध बनाने वाला या छेड़-छाड़ करने वाला, समाज में अपमानित होने वाला, स्नेह में असफल, वैवाहिक जीवन में कष्ट सहने वाला होता है। 

राहु का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक अशुद्ध, पैसों को बरवाद करने वाला, कामुक और विलासी, जल से डरने वाला होता है।


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में केतु | When Ketu is in Uttara Bhadrapada Nakshatra – Prediction

केतु का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का फल 

इस चरण में जातक धन का नाश करने वाला, शारीरिक कष्ट सहने वाला, दुखी, मानसिक तनाव से परेशान रहने वाला, पानी हानिकारक होता है। जातक समाज में कुछ गलत कार्यों की वजह से अपमानित होता है। 

केतु का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का फल

इस चरण में जातक अधिक बोलने वाला, संतान के लिए परेशान रहने वाला, विरोधियों का सामना करने वाला होता है। 

केतु का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का फल

इस चरण में जातक अधिक स्त्रियों के साथ संबंध रखने के कारण समाज में बदनामी सहने वाला, मधुमेह अथवा त्वचा रोग से पीड़ित होता है। 

केतु का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का फल

इस चरण में जातक अधिक मेहनत करने के बाद भी कम धन कमाने वाला, लेकिन समय के अनुसार अधिक धनवान हो जाता है। जातक अच्छा धन कमाने के लिए विदेश में रहना पसंद करने वाला होता है।   


उत्तराभाद्रपद नक्षत्र
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